उजाले की ओर –संस्मरण DrPranava Bharti द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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उजाले की ओर –संस्मरण

स्नेहिल नमस्कार मित्रो 
     आशा है नए वर्ष का स्वागत सबने कई नई सोच व नए विचारों से किया होगा। 
    गया वर्ष हममें से किसी के लिए कुछ अच्छा होगा तो किसी के लिए बुरा! किसी को पीड़ा भी देकर गया होगा तो किसी को ख़ुशी भी! 
   हममें से कुछ को अपनी उपलब्धि पर गर्व भी होगा तो कुछ को अपने किए हुए किसी काम पर अफ़सोस भी! 


मित्रों! दुनिया में कोई भी ऐसा शख्स नहीं होगा जिसने जीवन में कभी कामयाबी ना पाई हो और ऐसा भी नहीं होगा जिससे कोई गलती ना हुई हो। हर कोई अपने जीवन मे कभी ना कभी गलतियाँ करता है। गलतियांँ उन लोगों के लिए वरदान बन जाती हैं जो उन्हें सुधार लेते हैं और भविष्य में नहीं दोहराते । जिन लोगों ने अपनी गलतियों से सबक लिया है और उन्हें सुधारने का प्रयास किया है उन्होंने आगे चलकर अपने अपने क्षेत्रों में जबरदस्त उपलब्धि हासिल की है।
     एक स्वस्थ और सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार करने में कभी भी  झिझकता नहीं है। ऐसा करने से उसके मन से स्वयं को दोष देने का भाव दूर हो जाता है। क्षमा माँगना ओर किसी को क्षमा करना , दोनों में ही बड़प्पन है। ये ऐसे गुण हैं जिन्हें अपनाकर हम अपने मन के भार से मुक्त हो जाते हैं और हमें जो हो गया उसे छोड़कर संवाद स्थापित करने में भी सहजता होती है।
     इसीलिए हम यदि इस गुण को अपनाते हैं तो निश्चित ही हम बेहतर कल की ओर बढ़ते हैं। 
आप सबकी मित्र 
डॉ प्रणव भारती