Dream Love - Part 4 Hanika द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Dream Love - Part 4

हनिका सेफ्ली अपने घर पहुंच जाती है। वो पूरी राता नही पाती है। मानस को उसका एड्रेस कैसे पता चला वो इसी बारे में सोच रही थी। उसे पूरी रात नींद भी नही आती है। वो खुद से ही बाते कर रही होती है। कि तभी साक्षी का कॉल आता है।

हनिका -"मानस को मेरा एड्रेस कैसे पता चला। क्या वो मुझे जानते है? क्या वो मुझे फॉलो तो नही कर रहे है? नही वो मुझे फॉलो क्यों करेंगे? वो इतने बड़े सुपरस्टार है और मैं एक सिंपल सी लड़की।"
साक्षी का कॉल......

हनिका -"हा साक्षी बोल।"

साक्षी -"क्या हुआ तुझे? तेरी आवाज से लगा रहा है कि कुछ हुआ है। बोल क्या हुआ।"

हनिका -"आज मैं मानस से मिली।"

साक्षी -"क्या? कब? कैसे? कहा पर? और तुझे तो खुश होना चाहिए ना, इतनी सेड क्यों है?"

हनिका -"आज में मार्केट गई थी और रास्ता भटक गई। कुछ लड़के मेरे साथ बत्तमीजी करने लगे। वो तो अच्छा हुआ की मानस वहा पर शुटिंग के लिए आए थे और उन्होंने मेरी जान बचाई। वो नही होते तो पता नही आज क्या होता।"

साक्षी -"क्या? तूने शिव को बताया?"

हनिका -"नही! शिव को नही बताना है। तू जानती है ना शिव का गुस्सा। वरना वो मुझे यह से ले जायेगा। और मैं कभी नही जान पाऊंगी की उनको मेरा एड्रेस कैसे पता चला?"

साक्षी -"एड्रेस? किसको पता चला?"

हनिका -"मानस को। उन्होंने अपने ड्राइवर को मेरा एड्रेस बताया और मुझे सेफ्ली घर छोड़ने को कहा।"

साक्षी -"मानस को तेरा एड्रेस पता है। कही वो तुझे फॉलो तो नही कर रहे है।"

हनिका -"नही! यार ऐसा नहीं हो सकता। वो इतने बड़े सुपरस्टार है। वो मुझे क्यों फॉलो करेंगे?"

साक्षी -"सुपरस्टार है तो क्या हुआ। तू किसी से कम थोड़ी है। सुंदर है हो सकता है उनका दिल तेरे पर आ गया हो।"

हनिका -"हो गया तेरा।"

साक्षी -"गुस्सा मत कर यार। तू सो जा आराम से ठीक है। और ज्यादा मत सोचना इस बारे में ठीक है।"

हनिका -"ठीक है गुड नाईट।"

साक्षी -"गुड नाईट।"

हनिका साक्षी की बात मान कर सो जाती है।

अगले दिन......
आज संडे का दिन है। और हनिका पास के ही गार्डन में घूम रही होती है। तभी वहा एयरपोर्ट वाला लड़का भी आता है। उस लड़के का रूमाल नीचे गिर जाता है। हनिका उसे उठा कर देती है।

हनिका -"सुनो! तुम्हारा रूमाल नीचे गिर गया था।"

मानस -"ओह! थैंक यू। वैसे मेरा नाम मनु है।"

हनिका -"हाय! मेरा नाम हनिका और मैं एक टीचर हू।"

मानस -"ओह! मुझे टीचर से बचपन से ही डर लगता है।"

हनिका -"ऐसा क्यों?"

मानस -"टीचर बहुत ज्यादा स्ट्रिक्ट होती है। मैं अंदर से काफी सॉफ्ट हु। अ..... मेरा मत"
लब है नरम दिल का।"

हनिका -"ओह! अच्छा ऐसा लगता तो नही है। वैसे एक बात बताओ तुम मुझे एयरपोर्ट पर भी मिले थे तब भी तुमने अपना फेस छुपा रखा था और अब भी। इस चेहरे की कोई खास बात।"

मानस -"ऐसा कुछ नही है। मैं अपना फेस किसी को दिखाना नही चाहता हु।"

हनिका -"ऐसा क्यों?"

मानस -"है कुछ ऐसा जो अभी नहीं बता सकता। वैसे आप को देख कर ऐसा लग रहा है कि किसी के ख्यालों में खोई हुई? "

हनिका -"नही ऐसा कुछ नही है बस कुछ सवाल है जिनके जवाब ढूंढ रही हू। "

मानस -"आई हो? आप जो ढूंढ रही हो आप को मिल जाए बस। अच्छा! तो में अब चलता हु बाय।"

हनिका -"ओके बाय।"