जिन्दगी धूप तुम घना साया DINESH KUMAR KEER द्वारा कुछ भी में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

जिन्दगी धूप तुम घना साया

1.
किस बात का रोना है किस बात पर रोते है
कस्ती के मुशाफिर ही कस्ती डुबो देते है

2.
रत जगे को आंखों की सुर्खियां बताती हैं
किस क़दर मोहब्बत है दूरियां बताती हैं।

3.
उफ्फ ये सर्द हवा...
ये " ओस " के कतरे...
लगता है अब दर्द हुआ...
जनवरी " को साहिबा,
दिसंबर के जाने का...!

4.
कर दे नजरें करम मुझ पर,
कि मैं तुझपे ऐतबार कर लूं,
दीवानी हूं तेरी ऐसी कि,
दीवानगी की हद को पार कर दूं।

5.
किसी भी भाषा में
प्रेम को समझा पाना
कहाँ संभव था... साहिबा,
इसलिए ईश्वर ने बना दिये...
मौन,
आंखे और
मुस्कराहट...!

6.
दौलत के पीछे भागने वाले सारे लोग मालदार नही बन जाते हैं...
मगर दीन के पीछे भागने वाले तमाम लोग दीनदार ज़रूर बन जाते हैं...!

7.
आज वही कल है,
जिस कल की फ़िक्र
आपको कल थी...

8.
भरोसा सिर्फ ईश्वर पर होना चाहिए,
क्योंकि एक वही है जो तुम्हारी मुश्किलें आसान कर सकता है...

9.
सब से खुबसूरत हिस्सा दिल है
अगर वहीं साफ़ न हो तो...!
चमकता चेहरा किश काम का...!

10.
ज़िन्दगी ज़ख्मो से भरी हुई है और
ज़ख्मो का इलाज सिर्फ भक्ति है

11.
आस्मां हमसे नाराज है,
चाँद का गुस्सा बेहिसाब है,
वो सब जलते हैं हम से क्यूं कि,
उस चाँद से बेहतर चाँद मेरे पास है,

12.
तू नया है तो दिखा सुबह नई शाम नई...
वरना मेरी आंखों ने देखे हैं नये साल कई...!

13.
चुरा ना ले कोई तुमको हमेशा दिल में रखती हूं
ये तुमसे कहे दिया किसने कि तुमको भूल सकती हूं।

14.
फ़रेब खा कर भी दिल को,
ख़्वाहिश ए तसल्ली रही...
हमने ग़ैरो की सोचा साहिबा मगर,
ये अपनो की साज़िश रही...

15.
कहाँ कहाँ से रूख़सत करोगें तुम मुझें
छिपी हुई हूँ मैं तुम्हारी ही दास्तान में

16.
ये खुले - खुले से गेसू इन्हें लाख तू सँवारे
मिरे हाथ से सँवरते तो कुछ और बात होती

17.
जरुरी नहीं है,
कुछ तोड़ने के लिए,
पत्थर ही मारा जाए,
अंदाज बदल कर,
बोलने से भी साहिबा,
बहुत कुछ टूट जाता है,
सदा मुस्कुराते रहिये ...

18.
ये दिल ही तो जानता है,
मेरी साफ मोहब्बत का आलम,
साहिबा मुझें जीने के लिए,
सांसों की नही तेरी ज़रुरत है,

19.
तमन्नाओं की महफ़िल,
तो हर कोई सजाता है,
पर साहिबा पूरी उसकी होती है,
जो तक़दीर लेकर आता है,

20.
छुपा सा रहता है मुझमें,
तेरी ख़ामोशी भी,
साहिबा तेरा शोर भी,

21.
कभी तो देख लो तुम भी,
मुझें कशिश से साहिबा,
हर बार मैं ही पुकारूँ,
ये शर्त तो तय नहीं थी,

22.
नींद से क्या शिकवा
जो आती नहीं रात भर,
क्या करें उस चेहरे का
जो देेता नहीं सोने हमें रात भर,

23.
ज़हर दे देना लेकिन कभी किसको,
झूठी उम्मीद कभी मत देना…

24.
वजह बन जाना किसी के जीने की,
धोखा तो खैर सब देते हैं |

25.
खिलाफ़ कितने हैं,
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता,
बस साथ निभाने वाला,
दमदार होना चाहिए...

26.
मोहब्बत का नशा भी अजीब है,
जब तुम हमसे दूर हो गयें,
उस गम को बंया करते करते,
हम शायर मशहूर हो गए,

27.
तुम्हारी मिसाल ही यही,
की बे - मिसाल हो तुम !

28.
आज फिर जीवन की,
किताब खोली तो देखा,
हर सफा तेरी ही,
रहमतों से भरा हुआ है,

29.
बन जायें मुक्क़मल,
इक सुबह हमारी भी,
उल्फतें ए आशियाँ के,
गर मेहमाँ तुम बन जाओ,

30.
वक़्त चाहे कैसा भी हो तुम अपना ख्याल रखना,
तुमसे बढ़कर इस दुनिया में कोई नहीं है मेरे लिए...