लम्हें जिन्दगी के DINESH KUMAR KEER द्वारा कुछ भी में हिंदी पीडीएफ

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लम्हें जिन्दगी के

1.
हम शायर नहीं हैं जनाब,
हम तो कैद हैं उन की मौहब्बत में,
बस जब याद आती है उनकी,
तो अल्फाजों में ढाल देते हैं।

2.
तुम लफ्ज़ बन कर समाये हो मुझमें,
अब कागजों पे उतरे हो स्याही बन कर...!

3.
उसकी निगाहों में देखा तो जाना,
यहीं है ठहरना यहीं है ठिकाना...

4.
सीने में दिल धक धक धूम धूम क्युकी आँखों में तुम हो आँखों में तुम...

5.
तुम मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिए...

6.
गिले शिकवों को दरकिनार रखना,
अपनी चाहत यूं ही बरकरार रखना
ज़माना लाख तुम्हे बरगलाए,
बहकाए अपनी बातों से,
सुनो,
तुम बस मेरी आंखो को पढ़ना,
और मेरी मौहब्बत पर एतबार रखना...

7.
मैं कितने भी रंगों में
क्यो ना रंग जाऊं
एक तेरा रंग ना लगे
जिन्दगी बेरंग सी लगती है...

8.
तलब हो रही है उन सबको तुझे देखने की...
जिन्होंने तुझे सिर्फ...
मेरे लफ्जो में पढ़ा है...

9.
तुम्हारे ख्यालों का तकिया जब हम सिराहने लगाते हैं...
तब कहीं जाकर मेरी बेचैनियों को, नींद आती है ।

10.
सुनो...
तुम ही कहो क्या कह दूँ मैं तुम से
कि बन इश्क़ मुझ पर
बरस जाओ तुम...

11.
नहीं चढ़ता है मुझ पर अब किसी की मोहब्बत का ख़ुमार,
मैं अक्सर तन्हाई को अपने साथ रखती हूँ...!

12.
जिससे भी मिलिए मोहब्बत से मिलिए...
लोग बताते नहीं है, मगर तन्हा बहुत है...

13.
ज़िक्र मेरा ही फ़क़त उसकी ज़ुबाँ पर आए,
इतनी शि़द्दत से कोई चाहे तो मज़ा आए...!

14.
वो बात और है तुम्हें परहेज है अब हमसे,
हमसे कोई पूछे तो इश्क़ तुमको ही कहेंगे...

15.
आज थोड़ा सा प्यार उसके सिवाय हो जाये...
ठंड बहोत है यार कहो तो एक कप चाय हो जाये...

16.
हो गये हैं आप मेरे अब सँवर कर देखिए,
मेरे साये में जरा कुछ पल ठहर कर देखिए,
आपकी राहों में रख दूँ फूल सारे रंग के,
शर्त ये है आप बस मुझ में बिखर कर देखिए...

17.
सुनो... यूं ही नहीं किताबों में रख लेना
शाम ढले हमारे गुलाब हिफाज़त से रख लेना,

इज़हार किया है तुमसे इक़रार की इल्तिज़ा है,
बड़ा नाजुक है दिल मेरा नज़ाकत से रख लेना ।।

18.
कुछ जानती नहीं हूँ कि क्या हो गया है मुझे,
तुझसे इश्क़ या फिर तेरा नशा हो गया है मुझे,

फ़ुरसत तुझे मिले तो बस ये बताना मुझ को,
क्या सच में ग़लत है इस तरह चाहना तुझ को,

तेरे जवाब का शिद्दत से इंतेज़ार करती रहूंगी,
इंकार भी कर दिया तो तुझे प्यार करती रहूंगी...

19.
आगाज चंद दिनों की मोहब्बतों का होने लगा है,
ढल गयी जनवरी, फरवरी का सफऱ शुरू हुआ है...

20.
उनके इंतज़ार में बाल सफ़ेद हो गए मगर,
उनके अलावा किसी गैर का ख्याल नहीं आता ।।

हम पुराने ख्यालात के लोग हैं,
हर किसी से मोहब्बत करना हमे नहीं आता ॥

21.
मुकम्मल मक़ाम इस मोहब्बत
को भी हासिल होंगे,
जब लोग लिबास छोड़,
किरदार से दिल लगा लेंगे।

22.
कितना ख़ूबसूरत लगता है सफ़र शायरियों का,
जैसे लफ़्ज़ों का पुल हो मेरे तुम्हारे दरमियाँ..!!

23.
कोहरे के मानिंद छाए हुए हो तुम दिलों दिमाग में,
तुम्हारे सिवा कुछ नहीं दिखाई पड़ता है इन आंखों में...

24.
और कितना इंतज़ार करवाओगे...
बोलो ना कब आओगे
सारी नाराजगी तैयार बैठी है...
तुम्हारे सामने मुँह फूलाने के लिए...
मेरी दो बेचैन आँखे...
तैयार है तुम्हारे इंतज़ार में गुजरे
एक एक पल की कहानी सुनाने के लिए...
दिल की सारी बातें और सारी मुहब्बत तैयार है...
तुम पे फ़िदा हो जाने के लिए...
बोलो ना और कितना इंतज़ार करवाओगे...
जान कब आओगे...