वो बिल्ली - 2 Vaidehi Vaishnav द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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वो बिल्ली - 2

(भाग 2)

शोभना को अब यह लगने लगा था कि उसे कोई दिमाग़ी बीमारी हो गईं हैं । उसने इस बारे में रघु से भी बात की जिसे रघु ने मजाक में उड़ाकर टाल दिया ।

एक शाम की बात हैं । शोभना आँगन में बने तुलसी क्यारे के यहाँ दीपक लगा रहीं थीं । आँख बंद करके वह प्रार्थना कर रहीं थीं। जैसे ही उसने अपनी आँखें खोली वह भौचक्की रह गईं । वहीं महिला जो अक़्सर शोभना को दिखाई देती थीं अब शोभना के ठीक सामने बैठी हुई थीं। उसका चेहरा रूखा हुआ था, बाल ऐसे उलझें हुए थे मानो बरसों हो गए हो कंघी किये हुए। उसकी आँखें पथरीली थीं जैसे रों- रों कर आँसू सूख गए हो । डर के कारण शोभना ने अपनी आँखें मिच ली। वह जस की तस बैठी रहीं। तभी गोलू वहाँ आया औऱ बोला - मम्मी भूख लगीं हैं, कुछ खाने का दे दो ना । शोभना को लगा जैसे वहीं औरत गोलू की आवाज़ में बात कर रहीं हैं। शोभना चीखते हुए कानों पर हाथ रखतें हुए घर के अंदर चली गईं।

शोभना के पीछे दोनों बच्चें भी दौड़ें। शोभना की हालत देखकर बच्चें घबरा गए । उन्होंने रघुनाथ को फ़ोन कर दिया।

रघुनाथ ऑफ़िस से भागें - भागें आए। शोभना अब भी बहुत डरी - सहमी थीं । शोभना ने रघुनाथ को सारा क़िस्सा सुनाया। रघुनाथ ने उसे शोभना का वहम ही समझा। ज़ाहिर सी बात हैं कि भूत-प्रेत की बातों पर यक़ीन करना लगभग नामुमकिन ही होता हैं।

रघुनाथ शोभना को समझाते हुए बोले - तुमनें वहम को इतना अधिक पाल लिया हैं कि अब वह तुम्हें हर कहीं दिखाई देने लगा हैं । तुम इस ख़्याल को दिमाग से निकाल दो औऱ अपनी पसन्द के कामों को किया करों । शोभना को भी रघुनाथ की कहीं बात सही लगीं।

रघुनाथ आज जल्दी घर आ गए थे इसलिए सभी ने बाहर घूमने का प्लान बनाया। आज सभी ने ओरछा किला पहली बार देखा। किला घूमने के बाद बाहर ही डिनर करके सभी करीब 11 बजे घर पहुँचे। सभी लोग बहुत थक गए थे तो बिस्तर पर जाते ही सो गए। रात करीब 3 बजे खटपट की आवाज से शोभना की नींद टूटी। उसने अपनी दाहिनी औऱ सो रहे रघु को देखा। रघुनाथ गहरी नींद में सो रहे थे। बेड के दाहिनी औऱ ही एक कोने में शोभना की ड्रेसिंग टेबल रखी हुई थीं। उस औऱ नजर पड़ते ही शोभना हक्की-बक्की रह गईं।

ड्रेसिंग टेबल के सामने एक महिला कंघी कर रहीं थीं जिसके बाल बिखरे औऱ उलझे हुए थे। शोभना चीख पड़ी। हड़बड़ी में रघुनाथ उठे तो देखा चेहरे को हाथ से ढके हुए शोभना बैठी हुई थीं।रघुनाथ ने पूछा - क्या हुआ शोभा ? शोभना ने आँखों को बंद ही रखा औऱ उँगली से ड्रेसिंग टेबल की औऱ इशारा किया। रघुनाथ ने लाइट ऑन की औऱ ड्रेसिंग की औऱ देखा। ड्रेसिंग टेबल की खूँटी पर शोभना का सफेद दुपट्टा लहरा रहा था। दुपट्टे को गुस्से से खींचकर रघुनाथ ने कहा - इतनी रात को ये दुप्पट्टा दिखाने के लिए मेरी नींद खराब की ? शोभना ने आश्चर्य से दुप्पटे को देखा फिर कातर भाव से रघुनाथ की औऱ देखा - मानो वह यकीन दिलाना चाह रहीं हो कि उसने यहाँ अभी फिर उसी महिला को देखा था।

रघुनाथ ने प्रेम से शोभना को देखा औऱ उसके सर पर हाथ रखते हुए कहा - तुम आराम करो शोभा।

सुबह शोभना की नींद देर से खुली। रघुनाथ हाथ मे ट्रे लिए हुए मुस्कुराकर कमरे में आए। शोभा ने झिझकते हुए कहा - अरे आपने तकलीफ़ क्यों की ?

रघुनाथ - कभी हमे भी अपनी सेवा का मौका दिया करें मोहतरमा जी।

 

शेष अगले भाग में......