प्रेम दीवानी आत्मा - भाग 9 Rakesh Rakesh द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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प्रेम दीवानी आत्मा - भाग 9

अंकिता के घर का एक कमरा पूरी तरह जल कर राख होने के बाद मोहल्ले में सिद्धार्थ की आयु के युवक की बिजली का करंट लगने से मृत्यु के बाद सारे मोहल्ले के लोग आपस में बातें करते हैं कि नंदू की मौत के बाद मोहल्ले में बुरी बुरी घटनाएं हो रही है, इसलिए हम सब मोहल्ले वालों को मिल जुल कर मोहल्ले की सुख शांति के लिए एक बड़ी पूजा करनी चाहिए।

अंकिता कि मां मोहल्ले वालों की बात सुनकर रो रो कर चिल्ला चिल्ला कर कहती है "मोहल्ले में जो भी दुखद घटनाएं हो रही हैं, उन सब का जिम्मेदार नंदू का भूत है, इसलिए नंदू के भूत को मोहल्ले से भगाने के लिए मैंने अपने मुंह बोले तांत्रिक भाई को बुलाया था।

अंकिता की मां की यह बात सुनकर सारे मोहल्ले के लोग कहते हैं "इस काम में हम सब आपकी मदद करेंगे, और आपके घर का जो कमरा जल कर पूरी तरह राख हो गया है, उसकी मरम्मत का पूरा खर्चा भी सिद्धार्थ के पिता से वसूल करके आपको दिया जाएगा, क्योंकि आप उस कमरे में मोहल्लेेेे की शांति के लिए अपने तांत्रिक भाई के साथ पूजा कर रही थी।"

नंदू की आत्मा अंकिता की मां और मोहल्ले वालोंं की बातें सुनकर और ज्यादा क्रोधित होकर जब ही करंट से मरे युवक के शरीर में घुस कर पूरे मोहल्ले वालों को धमकी देते हुए कहती है "अगर किसी ने भी मेरे परिवार को दुखी किया या मुझे कैद करने की सोची तो मैं पूरे मोहल्ले को श्मशान घाट बना दूंगा।"

यह बात पूरे मोहल्ले में जंगल की आग की तरह फैल जाती है, कुछ लोग नंदू के भूत के डर की वजह से मोहल्ला छोड़कर जाने की बात कहने लगते हैं और कुछ लोग उसी समय नंदू की आत्मा को कैद करने की पूजा की तैयारी शुरू करने की कहते हैं।

और अंकिता की मां की वजह से पूरा मोहल्ला सिद्धार्थ के परिवार का दुश्मन बन जाता है।

और मोहल्ले के कुछ लोग यह भी बताते हैं कि "हमने अंकिता सिद्धार्थ को तीसरी मंजिल से नीचे गिरते हुए देखा था, वह नंदू की आत्मा की शक्ति की वजह से ऐसे गिर रहे थे, जैसे कोई पैराशूट से धीरे-धीरे जमीन पर उतर रहा हो इस वजह से ही उनके शरीर से ना खून बहा और ना ही शरीर की एक भी हड्डी टूटी सिर्फ ऊंचाई से जमीन पर गिरने की वजह से दोनों बेहोश हो गए थे।"और कुछ लोग बताते हैं कि "मोहल्ले के कुछ लोग जो उनके साथ अस्पताल गए थे, बता रहे हैं कि वह बिल्कुल ठीक है और कल दोनों कि अस्पताल से छुट्टी हो जाएगी।"

मोहल्ले वालों के सामने नंदू की आत्मा का राज खुलने के बाद नंदू की आत्मा और बेचैन क्रोधित हो जाती है, क्योंकि मोहल्ले के लोगों मिलकर उसे सीमा अंकिता से दूर करने की सोच रहे थे।

इसलिए वह अंकिता की जान लेकर उसे अपने साथ ले जाने की और भरसक कोशिश करने लगती है।

उधर अंकिता के पिता को घर केेे एक कमरे में आग लगने की बात सुनकर सीमा को अंकिता के पास अस्पताल में छोड़कर अपने घर आना पड़ता है।

सीमा अंकिता को अकेला देखकर नंदू की आत्मा अंकिता की जान लेने अस्पताल के कमरे में पहुंच जाती है और अंकिता को जब ऐसा लगता है कि कोई उसकी गर्दन दबा रहा है, तो वह सीमा को आवाज देकर बुलाती है।

सीमा को जब शक होता है कि शायद नंदू की आत्मा अंकिता को अपने साथ ले जाने के लिए आई है तो वह अंकिता से कहती है "तेज तेज हनुमान चालीसा बोलो।"

सीमा के रोने पीटने की आवाज सुनकर वहां नर्स मारथा आकर अपने गले से प्रभु यीशु मसीह का क्रॉस का लॉकेट उतार कर अंकिता के गले में डाल देती है।

प्रभु यीशु मसीह का लॉकेट अंकिता के पहनते ही नंदू की बेचैन भटकती आत्मा वहां से गायब हो जाती है।

सीमा नर्स मारथा का हाथ पकड़ कर उसे थैंक यू कहने के बाद कहती है प्रभु यीशु मसीह का लॉकेट रात भर अंकिता को पहने रहने दें, सुबह आपको देने के बाद ही हम अपने घर जाएंगे।"

"प्रभु यीशु मसीह के क्रॉस का लॉकेट वापस करने की कोई जरूरत नहीं है, मेरे बड़े भैया पादरी हैं, मैं उनसे नया लॉकेट ले लूंगी, लेकिन मेरी एक बात याद रखना, यह कोई बहुत खतरनाक आत्मा है, यह इतनी आसानी से आपकी बहन और आपका का पीछा नहीं छोड़ेगी और यह भटकती आत्मा आपकी बहन अंकिता को परेशान क्यों कर रही है।" नर्स मारथा ने पूछा?

सीमा नंदू की आत्मा से लेकर अंकिता की नकली शादी गुरु जी दिवाली की अमावस्या की रात आत्मा शांति की पूजा और छत से अंकिता के नीचे गिरने की सारी बात नर्स मारथा को बताती है।

नर्स माराथा सारी बात ध्यान से सुनकर सीमा से कहती है "आपकी इस समस्या को मेरे पादरी भैया आसानी से हल कर देंगे, आप कल दोपहर को अपनी बहन के साथ मेरे घर आ जाना मैं अपना फोन नंबर घर का पता आपको अभी देती हूं ,मेरे घर से थोड़ा दूर ही मेरे पादरी भैया का घर है।"

"अगर आप इस समस्या से हमें निकाल दोगी तो मैं आपका जीवन भर एहसान मानूंगी।" सीमा कहती है

"ठीक है मैं कल दोपहर को आपका इंतजार घर पर करूंगा।"नर्स मारथा कहती है।

दूसरे दिन अंकिता को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, लेकिन सिद्धार्थ की सेहत में पूरी तरह सुधार ना होने की वजह से उसे अस्पताल से छुट्टी नहीं मिलती है।

अंकिता अपने को भाग्यशाली समझ रही थी कि सिद्धार्थ जैसा लड़का जो उसे बेइंतहा प्यार करता है और जिसकी नजरों में मेरी इतनी कदर है, कि वह मेरे पीछे अपनी जान भी दे सकता है, लेकिन मां ने सिद्धार्थ के खिलाफ पुलिस कंप्लेंट करके ठीक नहीं किया था और नंदू की आत्मा के बारे में पूरी कॉलोनी को बात कर तो बहुत ही बुरा काम कर दिया है, क्योंकि अब पुरी कॉलोनी सिद्धार्थ के परिवार की दुश्मन बन गई है। मां की इस हरकत से सिद्धार्थ को कितना दुख पहुंचा होगा मैं अब बिल्कुल तंदुरुस्त हूं, सीमा के साथ नर्स मारथा के पादरी भाई से मिलकर रात को अस्पताल में सिद्धार्थ के पास रुकूंगी और जब तक सिद्धार्थ अस्पताल में रहेगा, उस की सेवा करुगी और आज रात ही सिद्धार्थ को अपने दिल की बात बताऊंगी, लेकिन नर्स मारथा के पादरी भाई के बेटे डॉक्टर टोनी से मिलकर अंकिता का दिल पहली बार किसी खूबसूरत लड़के को देखकर धड़कता है, उसे पहली बार एहसास होता है कि जब किसी से प्रेम होता है, तो दुनिया कितनी खूबसूरत लगती है।