असली वारिस DINESH KUMAR KEER द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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असली वारिस

 
एक इलाके में एक भले आदमी का देहांत हो गया लोग अर्थी ले जाने को तैयार हुये और जब उठाकर श्मशान ले जाने लगे तो एक आदमी आगे आया और अर्थी का एक पाऊं पकड़ लिया। और बोला के मरने वाले से मेरे 15 लाख लेने है, पहले मुझे पैसे दो फिर उसको जाने दूंगा।
 
अब तमाम लोग खड़े तमाशा देख रहे हैं। बेटों ने कहा कि मरने वाले ने हमें तो कोई ऐसी बात नही की कि वह कर्जदार है, इसलिए हम नही दे सकते। मृतक के भाइयों ने कहा कि जब बेटे जिम्मेदार नहीं तो हम क्यों दें ?
 
अब सारे खड़े हैं और उसने अर्थी पकड़ी हुई है। जब काफी देर गुजर गई तो बात घर की औरतों तक भी पहुंच गई। मरने वाले की एकलौती बेटी ने जब बात सुनी तो फौरन अपना सारा जेवर उतारा और अपनी सारी नकद रकम जमा करके उस आदमी के लिए भिजवा दी और कहा कि भगवान के लिए ये रकम और जेवर बेंच के उसकी रकम रखो और मेरे पिताजी की अंतिम यात्रा को ना रोको।
 
मैं मरने से पहले सारा कर्ज अदा कर दूंगी। और बाकी रकम का जल्दी बंदोबस्त कर दूंगी। अब वह अर्थी पकड़ने वाला शख्स खड़ा हुआ और सारे लोगों से मुखातिब हो कर बोला- असल बात ये है कि मरने वाले से 15 लाख लेना नहीं बल्कि उनके देना है और उनके किसी वारिस को में जानता नहीं था तो मैने ये खेल खेला। अब मुझे पता चल चुका है कि उसकी वारिस एक बेटी है और उसका कोई बेटा या भाई नहीं है।।