फ्रैंड जोन - प्यार की खट्टी-मीठी कहानी - पार्ट 2 Saurabh kumar Thakur द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
शेयर करे

फ्रैंड जोन - प्यार की खट्टी-मीठी कहानी - पार्ट 2

आई वांट टू कम्प्लीट माई डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन.... सो व्हेयर इज़ वेरिफिकेशन काउन्टर..... डू यू नो ??

जी सामने चली जाइए, वहाँ से राइट ले लीजियेगा, सामने से लेफ्ट मुड़ जाइएगा वहीं सामने डॉक्युमेंट्स वेरिफिकेशन काउन्टर है । सत्यम ने जवाब दिया ।

इफ पॉसिबल; कैन यू कम विद मी ? बिकॉज आई डोंट अंडरस्टैंड व्हाट यू आर टॉकिंग ? उस लड़की ने कहा....... ओके फाइन..... आई एम कमिंग विद यू.. सत्यम ने बोला और दोनों सामने की ओर चलने लगे ।

थोड़े दूर आगे जाने पर सत्यम ने उस लड़की ने पूछा; बाई दी वे, मैं आपका नाम जान सकता हूँ?
"रिया" आई एम रिया.... ओह "सत्यम" आई एम सत्यम... रिया डू यू नो हिन्दी ? सत्यम ने हकलाकर पूछा, हाँ बट व्हाइ ? रिया ने जवाब दिया..... तो क्या हम हिन्दी में बात नहीं कर सकते? सत्यम ने फिर पूछा ।
हाँ हाँ ! क्यों नहीं वैसे हिन्दी मुझे अच्छा लगता है रिया ने सत्यम की तरफ देखते हुए बोला । यार हिन्दी की तो बात ही अलग है, कितनी भी नई भाषाएं बोल लो, कितने भी स्मार्ट और कूल बन लो पर हिन्दी की मिठास का कोई जवाब नहीं । हिन्दी की ओर प्रेम दिखाते हुए सत्यम ने जवाब दिया । हाँ हिन्दी मुझे अच्छी तो लगती है पर पूरी तरह से आती नहीं ।। रिया ने सकुचाते हुए बोला ।
हिन्दी सीखा दोगे मुझे ???

यार इतने बढ़िया तरह से तो बोल रहीं हो हिन्दी..... इसमें क्या सिखाना अब ? सत्यम ने जबाब दिया ।। हाँ वो तो है पर बचपन से ही इंग्लिश सीखा और बोला है तो हिन्दी में मुझे थोड़ी दिक्कत होती है सीखाओगे तो बताओ....... रिया ने बोला ।
हाँ हाँ, क्या दिक्कत है हो जाएगा अब तो दोस्त बन चुके हैं ना हम ? सत्यम ने पूछा। हाँ हाँ क्यों नहीं.. लेटस हैंडशेक..... रिया ने बोला और फिर दोनों ने हाथ मिलाकर अपने दोस्ती की शुरुआत करी।

बातें करते करते दोनों वेरिफिकेशन काउन्टर तक पहुँच चुके थे... सत्यम ने सामने की ओर इशारा करते हुए बताया । ये रहा वेरिफिकेशन काउन्टर... लाइन में लग जाओ और वेरिफिकेशन करा लो तब तक मैं सामने बैठा हुआ हूँ। ठीक है तुम वेट करो तब तक मैं वेरिफिकेशन करा लेती हूँ। रिया ने कहा.... ठीक है मैं वेट कर रहा हूँ सामने में। बोलकर सत्यम सामने लगी हुई बेंच पर बैठकर अपने स्मार्टफोन को निहारने लगा ।

यही कोई आधे घंटे लगे होंगे रिया को डॉक्युमेंट्स वेरिफिकेशन कराने में । वेरिफिकेशन कम्प्लीट होने के बाद वह आई और उसने सत्यम से बोला हाँ जी चलो ये तो कम्प्लीट हो गया चलो अब कॉलेज एक्सप्लोर किया जाए । और अपने कॉलेज को अच्छे से देखा जाए । क्योंकि अब हमें चार साल यहीं काटनी है । हाँ चलो मैंने तो देख लिया, एक्सप्लोर कर लिया अब तुम भी देख ही लो मैं भी चल लेता हूँ दूबारा देख लूँगा । मुस्काते हुए सत्यम ने कहा ।

दोनों कॉलेज की कॉरीडोर से होते हुए एक तरफ से दूसरे ओर चलने लगे । रास्ते में तरह-तरह की बातें करते हुए चलने लगे । अरे ये देखो "शाहरुख खान" हमारे कॉलेज के एल्युमिनाय । रिया ने बोर्ड की ओर इशारा करते हुए बोला । अरे तुम्हें नहीं पता हमारे कॉलेज के एल्युमिनाय के बारे में । यार हम हंसराज कॉलेज में हैं भारत का एक बहुत ही प्रतिष्ठित कॉलेज । टॉप 5 में आता है । तो यहाँ के एल्युमिनाय भी टॉपर होंगे ना । सत्यम ने कहा हाँ वो तो है मानना पड़ेगा कि हम इस कॉलेज में आ गए;;;; खुशनसीबी है हमारी ।

चलो अब कैंटीन चलते हैं भूख लगी हुई है जोरों की रिया ने कहा, हाँ चलो चलते हैं फिर वहीं बातें करतें हैं । कहकर दोनों कैंटीन की तरफ चल पड़े ।


- सौरभ कुमार ठाकुर

क्रमश:

कैंटीन की बातें, और उनके दोस्ती और प्यार की खट्टी- मीठी कहानी अगले पार्ट में आपके समक्ष होगी । कहानी को प्यार दीजिए और मुझे आशीर्वाद दीजिए । मेरे कॉलेज में कल एग्जाम भी भी है मेरा।