खामोश प्यार - भाग 10 prashant sharma ashk द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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खामोश प्यार - भाग 10

क्लास में पहुंचते ही स्नेहा कायरा के पास पहुंच गई और श्लोक ने मानव का हाथ पकड़ा और उसे क्लास से सीधे कैटिंन लेकर आ गया था।

मानव ने श्लोक से कहा- अरे भाई क्या कर रहा है? अभी क्लास शुरू होने वाली है और तू यहां कैटिंन ले आया।

श्लोक ने मानव की बात का जवाब देते हुए कहा- एक क्लास मिस कर देगा तो तू टॉप करने से चूक नहीं जाएगा। तू तो फिर भी टॉप ही करेगा।

श्लोक की बात सुनकर मानव ने कहा- अच्छा चल बता क्या बात है, यहां क्यों लेकर आया है ?

श्लोक ने कहा- क्लास से भी ज्यादा जरूरी बात करना थी, इसलिए यहां लाया हूं।

मानव ने कहा- हां तो बता क्या बात है ?

श्लोक ने कहा- तो सुन तू कह रहा था कि तुझे नहीं पता कि कायरा तेरे बारे में क्या सोचती है ?

मानव ने कहा- हां तो ?

श्लोक ने मानव के सवाल का जवाब देते हुए कहा- तो यह जनाब की वो भी तुझे पसंद करती है। कम से कम अब तो तू उससे बात कर ले।

मानव ने श्लोक की बात सुनकर कहा- तुझे कैसे पता कि वो मुझे पसंद करती है ?

श्लोक ने फिर कहा- कायरा की बेस्ट फ्रेंड है ना स्नेहा, उसी ने मुझे बताया है।

मानव ने फिर कहा- उसने कहा और तुने मान लिया? और यह बात बताने के लिए तू मुझे क्लास से यहां तक ले आया।

श्लोक ने इस बात कुछ अचरज के साथ कहा- अरे तुझे मेरी बात पर यकीन नहीं है। तो कुछ देर यहां रूक वो दोनों भी यही आने वाली है।

मानव ने कहा- क्या अब वो भी यहां आने वाली है, तो फिर मैं चलता हूं।

श्लोक ने कहा- चलता नहीं हूं। कायरा भी आ रही है तो तू उससे बात कर ले। अब मैंने तुझे बता दिया है कि वो भी तुझे पसंद करती है।

मानव ने श्लोक की बात अविश्वास जाहिर करते हुए कहा- भाई मुझे यकीन नही है।

श्लोक ने कहा- हां मैं जानता था इसलिए ही स्नेहा कायरा को लेकर यहां आ रही है।

इसी बीच कायरा भी स्नेहा के साथ कैटिंन में आ गई थी। स्नेहा ने श्लोक को देखा और देखकर सिर हिला दिया। स्नेहा ने भी सिर हिलाकर श्लोक को इशारा कर दिया। दोनों एक टेबल पर आकर बैठ गई थी।

कायरा ने स्नेहा से कहा- अब बताएगी तू यहां लेकर क्यों आई है।

स्नेहा ने कहा- हां बता रही हूं। तू जो सोच रही थी ना वो गलत सोच रही थी।

कायरा ने कहा- तो फिर ये भी बता दें कि मैं क्या गलत सोच रही थी ?

स्नेहा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा- यही कि मानव ऑनलाइन रहता तो वो किसी और से बात करता है।

कायरा ने फिर स्नेहा से सवाल किया- तुझे कैसे पता कि वो किसी और से बात नहीं करता है?

स्नेहा ने कहा- उसके सबसे अच्छे दोस्त श्लोक ने मुझे बताया है।

कायरा ने फिर कहा- अच्छा, उसने तुझे बताया और तुने मान लिया। अगर वो किसी और से बात नहीं करता है तो पूरी रात ऑनलाइन क्यों रहता है।

स्नेहा ने कायरा की बात का जवाब देते हुए कहा- क्योंकि वो भी तेरी ही तरह तेरे मैसेज करने का इंतजार करता है।

कायरा ने कहा- मतलब उसे पता है कि मैं मैसेज करूंगी?

स्नेहा ने कहा- नहीं उसे यह नहीं पता कि तू उसे मैसेज करेगी, बल्कि वो तुझे मैसेज नहीं कर पा रहा था। क्योंकि वो भी तेरी तरह यह सोच रहा था कि पता नहीं तू उसके बारे में क्या सोचती है। अगर उसने मैसेज किया और तुझे बुरा लगा तो क्या होगा।

स्नेहा की बात को सुनकर कायरा कोई जवाब नहीं दे सकी। फिर स्नेहा ने कायरा के हाथ पर हाथ रखते हुए कहा- देख वो वहां बैठा हुआ है, अब तू उसके पास जा और उससे बात कर।

कायरा ने कहा- नहीं मैं बात नहीं कर पाउंगी।

स्नेहा ने कहा- ओके, जाकर उसके पास तो बैठ जा।

कायरा ने कहा- पर वहां श्लोक भी तो हैं।

स्नेहा ने कहा- तू उसकी चिंता मत कर वो वहां से चला जाएगा।

कायरा एक बार फिर खामोश हो गई। वो मानव को देख रही थी। इसी बीच स्नेहा ने श्लोक को इशारा किया। स्नेहा के इशारे को समझते हुए श्लोक ने मानव से कहा- देख वो वहां बैठी हुई है, तू जा और उससे अपने दिल की बात कह दें।

मानव ने तिरछी नजर से कायरा को देखा, उसकी नजर स्नेहा पर भी गई। उसने श्लोक से कहा- स्नेहा।

श्लोक ने कहा- वो भी चली जाएगी पर तू जा और कायरा से बात कर।

मानव भी कायरा की तरह खामोश हो गया। श्लोक कैटिंन से बाहर निकल गया और स्नेहा ने भी कायरा के हाथ पर हाथ रखा और उसे आंखों से बात करने का इशारा कर वो भी बाहर निकल गई। कुछ देर तक दोनों अपनी सीट पर बैठे रहे। वो दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे, पर जैसे ही उनकी नजरें मिलती थी वे नजरें चुरा लेते थे।

फिर मानव अपनी सीट से उठा और कायरा को देखते हुए आगे बढ़ने लगा। उसकी नजर बाहर श्लोक पर गई, श्लोक ने वहीं से अंगूठे से बेस्ट ऑफ लक वाला थंब दिखाकर इशारा किया। मानव ने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बिखेर उसके इशारे का जवाब दिया और धीरे-धीरे उस टेबल की ओर बढ़ने लगा, जिस टेबल पर कायरा फिलहाल अकेले बैठी हुई थी। मानव की धड़कने बढ़ी हुई थी। दूसरी ओर मानव को अपनी ओर आते देख कायरा का दिल भी बेकाबू हुए जा रहा था। उसके चेहरे पर शर्म और डर दोनों के भाव एक साथ नजर आ रहे थे।

दोनों के बीच यूं तो चंद कदमों का फांसला था, परंतु ये चंद कदम मानव को बहुत भारी लग रहे थे। इन चंद कदमों को पार करने में मानव के अंदर एक तूफान उमड़ रहा था। कुछ ऐसा ही हाल कायरा का हो रहा था। उसके लिए उस जगह बैठ पाना मुश्किल हुआ जा रहा था। उसके मन में भी कई सवाल बार-बार बिजली तरह कौंध जा रहे थे। वो आ रहा है, वो आकर क्या कहेगा, वो कुछ कहेगा तो मैं क्या जवाब दूंगी? ऐसे कई सवाल उन चंद मिनटों में उसे परेशान कर रहे थे। मानव उसे टेबल के एकदम नजदीक पहुंच गया था, जिस टेबल पर कायरा बैठी हुई थी। उस समय अगर वो दोनों किसी कमरे में होते तो शायद दोनों के दिलों की धड़कनों को वे सुन सकते थे। कायरा के पास जाने से पहले एक बार फिर मानव ने बाहर खड़े श्लोक को देखा, इस बार उसके साथ स्नेहा भी खड़ी हुई थी, श्लोक ने इशारों में मानव से कहा- बैठ और बोल। कायरा गर्दन नीचे किए हुए बैठी हुई थी।