खामोश प्यार - भाग 8 prashant sharma ashk द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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खामोश प्यार - भाग 8

मानव को टाइप करता देख कायरा की आंखों में कुछ चमक आ गई थी। उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान भी आई। वो मानव के मैसेज का बेसब्री से इंतजार करने लगी। एक मिनट, दो मिनट, पांच मिनट हो गए पर मानव का मैसेज नहीं आया। दूसरी ओर मानव ने मोबाइल पर मैसेज लिखा- हाय कायरा। कई दिनों से मैं तुमसे कुछ बात करना चाहता था पर मैं हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहा था। श्लोक ने कहा था कि मैं तुम्हारे सामने अगर वो बात नहीं कह पा रहा हूं तो मैसेज से ही तुमसे बात कर लूं। पर अब सोच रहा हूं मैसेज पर नहीं तुमसे सामने ही बात करूंगा। तो अगर तुम बुरा ना मानो तो कल हम कैंटीन में मिल सकते हैं क्या ?

मैसेज लिखने के बाद सेंड के बटन को क्लीक करने से पहले मानव ने कुछ सोचा और फिर मैसेज को डिलीट कर दिया। उधर कायरा अब भी मानव के मैसेज का इंतजार कर रही थी। जब मैसेज नहीं आया तो कायरा कुछ निराश हो गई। मानव और कायरा दोनों ने अपने मोबाइल एक साथ रख दिए और फिर सो गए। हालांकि दोनों की आंखों से नींद गायब हो चुकी थी। मानव कायरा के बारे में ही सोच रहा था, उसके मन और दिमाग में कायरा वो फोटो चल रही थी, तब कायरा झरने के किनारे बाहें फैलाकर खड़ी थी और झरने से गिरते पानी की बूंदों को महसूस कर रही थी।

दूसरी कायरा के दिमाग में मानव की वो बातें चल रही थी जो उसने प्रतियोगिता के दौरान प्रेम विषय पर अपना तर्क रखते हुए कही थी। मानव का एक-एक शब्द कायरा के दिमाग में गूंज रहा था- मानव ने कहा था- माता-पिता की रजामंदी से यदि जीवन साथी चुना जाता है तो भी अपेक्षा वहीं रहती है और यदि आप अपनी पसंद से अपना जीवन साथी चुनते हैं तो अपेक्षाएं बदल नहीं जाती है। वो मां की तरह प्यार नहीं करेगा परंतु मां के बाद प्यार करेगा। वो पिता की तरह सब कुछ न्यौछावर भले ही ना कर दें, परंतु पिता के बाद वहीं होगा जो आपके लिए कुछ भी करेगा। वो आपके भाई या बहन की तरह हमेशा आपके साथ ना खड़ा हो सके, परंतु इतना जरूर है कि जब आपको किसी के साथ की जरूरत होगी तो वो आपके साथ जरूर खड़ा रहेगा। प्रेम से ऐसे प्यार, ऐसी केयरिग और ऐसे के हाथ को पाया जा सकता है, जिसे आप चुनकर उस पर विश्वास कर सकते हैं।

हो सकता है कि वो पिता की तरह भूखे रहकर आपका पेट ना भरे, पर इतना हो सकता है कि अपने हिस्से में से आपको हिस्सा दे दें। छोटी सी बात पर भी वो आपको केयर करता दिखे, आप दुखी हो तो आपके साथ खड़ा रह सकें। आपके दुख का कुछ भागीदार बन सके। आपको रोने ना दे, आपको हिम्मत ना हारने दे, आपको खुश रख सके। वो आपके लिए कुछ भी कर सके। उस इंसान से प्रेम कर उसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लेना क्यों गलत होगा। प्रेम से इंसान बदलते देखे हैं तो प्रेम एक ऐसा नया रिश्ता क्यों नहीं दे सकता, जिस पर आप अपने जन्म के रिश्तों की तरह ही यकीन कर सकें। मानव की इन्हीं बातों को सोचते हुए कायरा को नींद आ गई थी, दूसरी ओर मानव की कायरा की उस छवि को अपने मन में बसाकर गहरी नींद के आगोश में चला गया था।

अगले दिन कॉलेज में कायरा स्नेहा के साथ क्लास से निकलकर बाहर जा रही थी, तभी मानव ने क्लास में प्रवेश किया। दोनों एक-दूसरे के सामने आ गए। दोनों के कदम एक पल के लिए ठिठक कर रह गए थे। दोनों की नजरें मिली, होठों पर मुस्कान आई। मानव ने कुछ कदम पीछे हटकर कायरा और स्नेहा को जाने का रास्ता दिया और उनके जाने के बाद वो क्लास में चला गया। उसने दो कदम ही आगे बढ़ाए थे कि वो फिर दो कदम पीछे हटा। उसने मुढकर कायरा को देखा। कायरा स्नेहा के साथ आगे जा रही थी। मानव फिर क्लास में चला गया। मानव जैसे ही क्लास में गया उसी वक्त कायरा ने पीछे मुढ़कर देखा। उसे मानव नजर नहीं आया वो फिर आगे बढ़ गई।

मानव फिर अपनी सीट पर आकर बैठ गया था। थोड़ी देर बार कायरा और स्नेहा फिर क्लास में आ गई। क्लास के गेट से लेकर अपनी सीट पर बैठने तक कायरा की नजर मानव पर ही थी। वो सीट पर बैठी और मानव ने कायरा को देखा तो कायरा ने अपनी नजर नीचे कर ली। क्लास खत्म होने के बाद स्नेहा और कायरा कैंटीन में आ गए थे। थोड़ी देर बार श्लोक और मानव भी आ गए। फिर श्लोक ने मानव से कहा तो क्या बात हुई ?

मानव ने कहा- कहां बात हुई यार। मैं मैसेज भेजने की हिम्मत भी नहीं कर पाया।

श्लोक ने कहा- अरे याद इतना डरेगा तो फिर बात कैसे करेगा। सामने तू बात नहीं कर सकता, मैसेज में बात नहीं कर सकता तो क्या अब उसे ऐसे ही देखता रहेगा।

मानव- पता नहीं श्लोक। मुझे डर है कि अगर उसके दिल में मेरे लिए कुछ नहीं हुआ और उसे बुरा लग गया तो वो मेरे बारे में क्या सोचेगी ?

श्लोक ने कहा- कुछ नहीं सोचेगी। वो भी आज के जमाने की लड़की है। उसे भी पता है कि आजकल यह सब होता है।

मानव ने कहा- नहीं यार मैं ऐसे ही बात नहीं कर सकता, जब तक मुझे ये पता ना हो कि वो मेरे बारे में क्या सोचती है।

श्लोक ने कहा- तुझे ये तब पता चलेगा मेरे दोस्त जब तू उससे बात करेगा। तू कॉलेज में भी तो उससे कोई बात नहीं करता है। मुझे उसकी आंखों से साफ नजर आ रहा है कि वो भी तुझे पसंद करती है। इसलिए तू उससे बात कर, उसे भी तुझसे बात करेगी।

मानव ने कहा- और अगर तेरा अंदाजा गलत हुआ तो ?

श्लोक ने फिर कहा- मैंने तुझे पहले भी कहा था कि ये प्यार तेरे लिए नया है, मेरे लिए नहीं। मैं लड़की के हाव-भाव देखकर समझ जाता हूं कि वो क्या सोच रही है। मैं कह रहा हूं कि वो तुझे पसंद करती है पर पहल तुझे ही करना होगी।

मानव ने कहा- ठीक है एक बार और कोशिश करता हूं।

श्लोक ने फिर से कहा- हां ये हुई ना बात। आज मैसेज करके अपने दिल की हर बात लिखकर उसे भेज देना। देखना उसका रिप्लाई ऐसा होगा कि तू भी खुश हो जाएगा।

दूसरी ओर स्नेहा ने कायरा से पूछा- तो कहां तक बात बनी ?

कायरा ने कहा- कौन सी बात ?

स्नेहा ने फिर कहा- अरे तुने उसे मैसेज किया या नहीं ?

कायरा ने कहा- नहीं किया।

स्नेहा ने कहा- अरे तुझे कल कहा तो था कि मैसेज कर देना।

कायरा ने कहा- वो कुछ टाइप तो कर रहा था...

स्नेहा ने उत्साह के साथ कायरा से पूछा- तो क्या लिखकर भेजा उसने, मुझे भी बता।

कायरा ने कुछ उदास होते हुए कहा- टाइप तो कर रहा था पर फिर कुछ भेजा ही नहीं।

स्नेहा ने सिर पर हाथ मारते हुए कहा- अरे यार तुम दोनों ही भोंदू हो।