विश्वास - कहानी दो दोस्तों की - 11 सीमा बी. द्वारा मानवीय विज्ञान में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

विश्वास - कहानी दो दोस्तों की - 11

विश्वास (भाग - 11)

"क्या सीक्रेट बातें हो रही हैं दादी पोती में"? उमेश ने दोनो से हँसते हुए पूछा। "हाँ भई हम को भी बताओ कुछ", अपने साथ लाया सामान टेबल पर रखते हुए मीनल ने कहा।"कुछ सीक्रेट नहीं बस इसको सिर में दर्द हो रहा है तो दबा रही थी"।

"अब कैसा है बेटा? कुछ आराम मिला"? टीना ने "हाँ" में सिर हिला कर जवाब दिया।
"मेरी गुडिया बहुत ब्रेव है", सब प्रॉब्लम्स को भगा देती है,"। पापा ने बेटी की तारीफ करते हुए कहा। "अच्छा माँ अब चलता हूँ, आज एक मीटिंग है तो देर हो रही है, मीनल तुम आज कैब से चली जाना"। "तुम जाओ उमेश यहाँ मैनेज हो जायेगा", मीनल और उमा जी ने एक साथ कहा तो उमेश ने हँस दिया।

"माँ मैं आपके लिए और उन माँजी का लंच और नाशता ले आयी हूँ, आप उनसे पूछ लीजिए"। "मीनल तुम सरला का नाश्ता प्लेट में लगा कर रूम में ही दे आओ। भाई साहब को अकेले छोड़ कर नहीं आ पाएगी"। उमा जी ने बोला तो मीनल एक प्लेट में पोहा ड़ाल कर सरला को दे आयी और हाल चाल भी पूछ आयी।

मीनल ने बताया कि माँजी कह रही हैं कि "रात का खाना सबके लिए भुवन जी के यहाँ से आएगा तो आप का खाना ना भेजूँ। माँ ये अच्छा तो नहीं लगता क्योंकि वो बाहर से आयी हैं हमें उनकी हेल्प करनी चाहिए"। बहु की बात सुन कर उमा जी बोली , "कोई बात नही बेटा हमें उनकी इच्छा का सम्मान करना चाहिए, आज खाना तो आना नही है तो किसी को मिलने आने से भी मना कर देना"।

"ठीक है, माँ आज वीरेश भैया आने को कह रहे थे वो कल आ जाँएगे"। डॉक्टर राउँड पर आए तो उन्होंने बताया,"मैंने सायक्लोजिस्ट को टीना से मिलने को बुलाया है, मुझे ऐसा लग रहा है कि टीना डिप्रेशन में है"। "डॉ मेरी बेटी को और कितनी तकलीफ सहनी पड़ेगी"?

" रिलैक्स मिसेज गोयल मैंने सिर्फ एक अंदाजा लगाया है, अगर ऐसी दिक्कत हो भी तो वो बिना दवा खाये भी ठीक हो सकती है। इसलिए मैंने सायकायट्रिस्ट को नही साइकोलॉजिस्ट को बुलाया है"। मीनल को थोडी तसल्ली हुई, "ठीक है डॉ आप टाइम बता दीजिए मैं या मेरे हसबैंड भी आ जाएँगे"।

"जी उसकी जरूरत नही है। माताजी हैॆं, वैसे भी वो अकेले मिलना चाहेंगे। आप अपने शैड्यूल के हिसाब से आइए, अगर जरूरत होगी तब आप दोनो मिल लेना"। मीनल डॉ से बात करके कमरे में वापिस आयी तो देखा दादी पोती कोई गेम खेल रही थी।

"मीनल देख तेरी बेटी बहुत होशियार हो गयी है, मुझसे पुरानी फिल्मों के गाने सुन सुन के अब मुझसे ही उनके नाम पूछ रही है पहेलियाँ बना कर"। मीनल ने देखा फिल्म का अधूरा नाम लिखा हुआ पूरा करना है।

हम सब ने भी ये खेल खूब खेला है, हम तो हिंदी मेॆ लिखा करते थे पर आजकल के बच्चे तो अँग्रेजी में लिखते हैं। शायद मीनल को भी अपना बचपन याद आ गया था इसलिए वो भी खेलने बैठ गयी। सास बहु एक तरफ और दूसरी तरफ अकेली टीना। सास बहु की जुगलबंदी ने टीना को हरा दिया पर वो माँ दादी को खुश देख कर मुस्करा दी।
क्रमश: (02-04-2020)