तेरी चाहत मैं - 12 Devika Singh द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तेरी चाहत मैं - 12

कुछ दिन बाद अजय हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुआ। सब दोस्तों के साथ रूबी ने उसे अपने घर बुलाया। वो उसकी सलामती के लिए खुश था। इसी लिए एक छोटी सी दावत की थी उन सबने। सब दोस्त रूबी के घर पर थे। कफी अच्छा माहोल था। मिस्टर शर्मा और मुकेश रॉय को भी बुलाया गया था। रिया भी ना चाहते हुए आई थी। सब खुश थाय। अजय भी काफी खुश था।

"और लो अजय, कुछ खाओगे नहीं तो कमज़ोरी कैसे दूर होगी तुम्हारी।" रूबी ने अजय की प्लेट मैं बिरयानी डालते हुए कहा। "अरे आप क्या आज ही सब खिला देंगी। कितना तो खा चूका हूं। आपा मैं तो आता ही रहता हूं। फ़िर खा लुंगा। ले देके आप के अलावा मैं जाता ही कहां हूं।"
राज बोला "हां हम सब तो गैर है ना बेटा, जब तेरे को बोलो आने को कोई काम निकला आता है तेरा।"
"नहीं यार ऐसा नहीं है। अब जब कहेगा तब चलूंगा।" अjy बोला।

"हां सब के घर आना है तेरे को। जब देखो तक्लुफ करता है।" हीना बोली.
रोहित बोला "रूबी आपा, आज आप हम से रेफ्यूजियों की तरह पेश आ रही है। मुझ मासूम को एक बार भी नहीं पुछा अपने।”
रूबी ने हंसते हुए बोला "हां भाई आप क्या लेंगे।"
रोहित बोला “आप मेहनत ना करिए बस मुझे वो बिरयानी की डिश दे दिजिये। बाकी मैं देख लूंगा।"
सब हंसने लगे।
तब मुकेश रॉय बोले "अजय कभी मेरे घर भी आओ, बेटा। हम भी तो आपके अपने हैं।"

फिर मुकेश रॉय रिया से बोले "अरे भाई, अपने क्लास फ्रेंड्स को कभी बुलाओगी की नहीं। ये शहर मैं अकेला रहता है। अगर कभी आयेगा तो इस्का भी दिल बहल जाएगा।”
रिया ने अजय को घूरते हुए कहा "जी कभी आइए ना हमारे घर। थोड़ी खिदमत का मौका दिजिये।”
अजय ने जवाब दिया "जी और कितनी खिदमत करेंगे आप। वैस आऊंगा जल्दी। आप लोगों की मोहब्बत को टाल नहीं सकता।”
थोड़ी देर बाद सब खाना खा के फरिग हुए तो सब बहार लॉन मैं आ गए। अजय एक तराफ खड़ा था। तभी रिया उसके पास आ कर खडी हुई। उसे एक जहरीली मुस्कान के साथ अजय से कहा "खाना खाया सही से की नहीं।"


अजय ने कहा "जी भगवान का शुक्र है।"
रिया ने कहा "खा लो जी भर के, तुमको अभी बहुत कुछ झेलना है। ताकत की जरूरत पड़ेगी।” ये कह कर वो जाने लगी। अजय ने उसकी कलाई पकडकर उसे झटके से रोका।
अजय बोला "ये जो तुम शान से सर उठा के चल रही हो वो सर मैं एक लम्हे मैं गिरा सकता हूं। सिर्फ मुकेश साहब को तुम्हारी करतूत बतानी पड़ेगी। उसके बाद का अंजाम तुम खुद सोच सकती हो। पर मैं उनकी इज्जत करता हूं। साथ ही में तुम्हारी ज़िलत भी होगी। पर मैं नहीं चाहता तुम्हारी ज़िलत हो।”

रिया ने हाथ छुडाते हुए कहा "हमारी इतनी इज्जत की इतनी फिकर किसलिए?"

अजय ने मुसकुरा के जवाब दिया "आप की इज्जत के लिए हम ऐसे का जख्म अपने पर झेले हैं,अरसलान ने कहा "जे अल्लाह का शुक्र है।"
कशिश ने कहा "खा लो जी भर के, तुमको अभी बहुत कुछ झेलना है। तकत की जरूरत पड़ेगी।” ये कह कर वो जाने लगी। अरसलान ने उसकी कलाई पका कर उसे झटके से रोका।

अजय ने मुसकुरा के जवाब दिया "आप की इज्जत के लिए हम ऐसे का जख्म अपने पर झेल सकते हैं, ज़ख़्मों की परवाह किसको है। पर आप नहीं समझेगी ये सब।” ये कह कर अजय आगे बढ़ गया। कशिश उसे जाते हुए देखती रही।


To be continued
in 13th part