Revenge: A Romance Singham Series - Series 1 Chapter 24 Poonam Sharma द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • कुकड़ुकू - भाग 10

    फुटबॉल खेलने के बाद जब रघु घर पहुंचा, तो उसकी मम्मी ने उसको...

  • वंश - भाग 8

    आठ उस दिन की गोष्ठी के बाद आयोजकों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियो...

  • तू भी सताया जायेगा ! - भाग - 3

    जय श्री कृष्णा ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने,प्रणतः क्ल...

  • Love Contract - 15

    रिवान और विराज दोनों रसीली बाई को घर लेकर पहुंचे । मेन गेट क...

  • हमसफर - 11

    हर रोज की तरह आस्था की दिन की शुरुवात सुबह 5 बजे ही हुयी ......

श्रेणी
शेयर करे

Revenge: A Romance Singham Series - Series 1 Chapter 24

अनिका चुपचाप अभय के साथ गाड़ी में बैठी अपने घर की ओर जा रही थी। वोह बहुत ही ज्यादा थकी हुई थी, एक साथ उसके मन में कई सारी भावनाएँ उमड़ रही थी। वोह इस वक्त सोचने समझने की स्तिथि में नही थी—उसने अपने आप को सुन्न ही रहने दिया और चुपचाप ही बैठी रही।

अनिका ने अभय की शर्ट को अपनी तरफ खींच रखा था ताकी उसकी खुशबू का एहसास ले सके। जैसे ही वोह दोनो अपने घर पहुंचे, अनिका ने रवि की वाइफ के बार में पूछा।

"वोह शहर में हॉस्पिटल में उसके साथ है," अभय ने गंभीरता से जवाब दिया।

अनिका का दिल उम्मीद से उछल पड़ा। "वोह जिंदा है?" अनिका ने पूछा और अभय ने हां में सिर हिला दिया।

"हां। डॉक्टर्स उस का इलाज कर रहे हैं, और उन्होंने हमसे कहा है की चांस है की वोह जल्द ही ठीक हो जायेगा।"

अनिका ने दिल से प्राथना की थी और भगवान ने उसकी सुन ली थी। उसे अपने अंदर अपराध की ग्लानि महसूस होने लगी।

"चलो अंदर फिर बात करते हैं," अभय ने कहा और उसे अपने कमरे में ले जाने लगा। अभय ने अनिका की कमर पर हाथ रख उसे करीब कर बाहों में भर लिया ताकी उसे उत्सुक और उसके लिए परेशान नज़रों से बचा सके। अनिका को खुद में गिल्टी फील होने लगा उन सभी के परेशान चेहरे देख कर जो उसके लिए परेशान हो रहे थे।

जैसे ही वोह दोनो अपने कमरे में पहुंचे अभय उसे बाथरूम में ले गया।
"तुम्हे नहाना है ये एक जल्दी शावर लेना है?" अभय ने पूछा। अभय की आवाज़ में गंभीरता थी पर उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे, वोह लगभग जानता था की अनिका की हालत इस वक्त सोचने समझने या कुछ करने की नही है इसलिए उसे ही पहल भी करनी होगी और चार्ज भी लेना होगा।

"शावर।" अनिका बस अपने ऊपर से गन पाउडर के और खून के धब्बे हटाना चाहती थी। तुरंत ही, अभय अनिका के कपड़े उतारने लगा, पर उसकी छुअन में आज वोह प्यार और अपनापन नही था, बस ऐसा लग रहा था मानो कोई डॉक्टर अपने पेशेंट का इलाज करने के लिए छूटा है।

जब अनिका के शरीर से हर एक कपड़ा उतार गया, तब अभय ने शावर ऑन कर दिया। "मैं दूसरे कमरे में इंतजार कर रहा हूं, अगर कोई जरूरत लगे तोह मुझे बुला लेना।" अभय ने प्यार से कहा और बाथरूम से बाहर जाने लगा।

वोह लगभग दरवाज़े तक पहुंच ही गया था, जब अनिका ने फुसफुसाते हुए उसका नाम पुकारा। "अभय..." वोह रुक गया पर पलटा नही। उसके कंधे कठोर हो गए, और उसका पूरा शरीर तनाव में आ गया।

"प्लीज़, मत जाइए। मुझे आपकी जरूरत है," अनिका ने कहा। जब अभय अपने चेहरे पर बिना कोई भाव लिए पलटा तो अनिका ने अपने बाहें फैला दी।
"मैं चाहती हूं की तुम मेरी मदद करो उस जानवर को भुलाने में जो मुझे उठा कर ले गया था। मैं बाहर से और अंदर से गंदी महसूस कर रही हूं।"

आखिरकार अब अभय के चेहरे पर भाव दिखने लगे। गुस्से के। वोह लंबे कदमों से आगे बढ़ा और अनिका को बाहों में भर लिया।
"वोह जानवर मर चुका है। तुमने उसे मार दिया है, याद है ना? कुछ भी तुम्हे गंदा नही कर सकता। तुम हमेशा से पवित्र रहोगी अंदर से भी और बाहर से भी, अगर सौ जानवर भी आ कर तुम्हे छूने की कोशिश करें, किसी भी तरीके से।

अनिका के आंखों से कृतज्ञता के आंसू बहने लगे जब उसने अभय के मुंह से यह सब सुना। "मेरा रेप नही हुआ है, अभय। वोह तुम्हे ताने मार रहा था ताकी तुम ऐसा सोचो।"

अभय ने उसे कस कर बाहों में भर लिया और अनिका को राहत महसूस होंने लगी। अनिका ने अपने आप को अभय से दूर किया और तुरंत ही अपने कांपते हाथों से अभय के कपड़े भी उतरने लगी। जब उसने सब कर लिया तोह अभय ने उसे अपने आप को शावर के नीचे ले जाने दिया।

अपने दुख और गुस्से के बावजूद भी अभय अनिका के शरीर पर प्यार से साबुन लगाने लगा। और फिर उसे शावर के नीचे खड़ा कर के उसके शरीर पर खून के धब्बे धोने लगा।

अनिका ने ऐसा ही अभय के साथ भी किया, जब तक की फर्श पर से खून के निशान हट नही गए। शावर बंद करने के बाद, अभय ने टॉवल ली और उसे और अपने आप को दोनो को पोंछने लगा। उन एक टॉवल अनिका के चारों ओर लपेट दी और बाथरूम से बाहर ले आया। वोह उसे कमरे में उस ओर ले जाने लगा जहां उनके लिए खाना रखा हुआ था।

"तुम्हे भूख लगी होगी. पहले खा लो फिर आराम कर लेना," अभय ने कहा। अनिका रुक गई और अभय की आंखों में देखने लगी।

"मुझे खाना नही चाहिए। मुझे तुम चाहिए," अनिका ने प्यार से कहा। जब अभय ने कुछ नही कहा तोह अनिका ने अपनी ऊपर बंधी टॉवल को खोल दिया, और अभय की तरफ बढ़ गई। उसके चेहरे को अच्छी तरह से अपने हाथों से पकड़ कर वोह उसके करीब होने लगी। अगले ही पल उसने उसके होठों को अपने होठों के गिरफ्त में ले लिया। वोह उसे जब तक तीव्र इच्छा से किस किए जा रही थी, जब तक की उसने अभय के अंदर तक कराहने की आवाज़ ना सुन ली।

अभय ने उसे गोद में उठाया और उसे बेड की तरफ ले जाने लगा। उसने उसे बेड पर लेटाया और उसके ऊपर आने लगा। इस से पहले की वोह उसके ऊपर आता, अनिका उठ बैठी और अभय के सीने पर अपना हाथ रख दिया। अनिका ने अभय को हल्का धक्का दिया। अभय रुक गया, उसके चेहरे को देखने लगा। धीरे से वोह उसके बगल में बैड पर लेट गया, और अनिका को अपने ऊपर ले लिया। अनिका ने बिलकुल भी कोई प्रारंभिक तैयारियों का इंतजार नही किया। वोह जानती थी की वोह पूरी तरह से तैयार है। असल में, उसे इसकी जरूरत थी जैसे की यह उसके सांस लेने के लिए बहुत जरूरी हो।

अनिका ने बिना किसी दिक्कत के उसे एक बार में ही अपने अंदर ले लिया जिससे पहले वोह खुद भी शॉक हो गई। अनिका एग्रेशन से मूव करने लगी जो की उसके पूरे शरीर को भर रहा था, उसे अपने में लीन कर रहा था, और अनिका को यह एहसास करा रहा था की वोह अभी भी जिंदा है। अनिका खुद यह अभय की आंखों में देख सकती थी की वोह भी उस की तरह उतना ही प्रभावित हुआ है, पर अभय ने उसे लीड करने दिया था। जब उन दोनो का एक साथ रिलीज हुआ, तोह अभय ने चार्ज ले लिया। उसे इतना समय भी नही दिया की वोह अपनी उखड़ते सांसे को नियंत्रित कर सके, अभय ने उसे पलटा और उसके ऊपर आ गया। वोह तुरंत ही उसे किस करने लगा।

उसने रुक कर पहले उसके सारे ज़ख्मों को चूमा ताकी उस भयानक दिन की एक भी याद ना बच सके।

अनिका ने अपने आप को पूरी तरह से अभय के हवाले कर रखा था और ना जाने कितनी बार उसने अपना रिलीज किया था क्योंकि रात भर अभय उसे बार बार तृप्त किए जा रहा था।

पूरी रात उन्होंने जाग कर एक दूसरे में समाए हुए काटी।

«»«»«»«»

अगली सुबह जब अनिका सो कर उठी, अभय उसके पास नही था। अनिका की आंखें पूरे कमरे को स्कैन करने लगी और उसे अभय दिख गया। वोह पहले से ही तैयार हो रखा था। और वोह कुर्सी पर बैठा बैड की तरफ ही देख रहा था, अपनी खड़ी उंगलियों पर अपनी थोड़ी को टिकाए उसे ही देख रहा था।

"अभय..." अनिका ने उसे पुकारा, इसी उम्मीद से की वोह भी उसी तरह उसे ग्रीट करेगा जैसे की पिछले कुछ हफ्तों से कर रहा था।

बीती रात की घटना को अनिका बिलकुल भी याद नहीं करना चाहती थी। वोह चाहती थी की यह याद उसके दिमाग से हमेशा हुमेशा के लिए मिट जाए।

"अभय," अनिका ने एक बार फिर मुस्कुराते हुए उसे पुकारा। पर अभय ने कोई जवाब नही दिया।

"तुमने मुझे अपने परिवार के बारे में पहले ही सब कुछ क्यों नही बताया था? अभय ने जवाब देने के बजाय सवाल पूछ दिया। अनिका के चेहरे से मुस्कुराहट गायब हो गई। उसे पछतावा होने लगा इस बात के लिए। पर इससे पहले की वोह अपनी सफाई में कुछ कहती, अभय ने उस से एक और सवाल पूछ दिया, जिस सवाल से अनिका बहुत ज्यादा खौंफ खाई हुई थी।
"क्या तुम्हे सच में इच्छा थी अपने पेरेंट्स और सिस्टर से पूछने की वोह यहां आ कर तुमसे मिले?" अनिका ने सच्चाई से जवाब देने से पहले एक गहरी सांस ली।

"नही.... मैं नही चाहती थी की वोह लोग इस दुनिया से जुड़े।"

अभय की हल्की सी मुट्ठी जकड़ गई।
"समझा।"

जाहिर सी बात थी पर अनिका को अभय के चेहरे पर दुख नज़र आ रहा था और वोह उसके करीब आ गई। "अभय यह बहुत पहले की बात थी। मैं उनकी सुरक्षा के लिए चिंतित थी और कोई भी चांस महीना चाहती थी।"

अभय उसे ऐसे ही चुपचाप देखता रहा।

"तुम्हे अपने परिवार की बिलकुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैने आज सुबह तुम्हारी बुआ से कॉन्टैक्ट किया था और उन्हे अच्छी तरह से समझा भी दिया है और साफ साफ शब्दों में चेतावनी भी दे दी है। मैने उनसे कह दिया है की अगर तुम्हारी फैमिली या दोस्तों के आसपास कहीं भी प्रजापति दिखाई दिए तो यह उन सब के लिए अच्छा नही होगा।"

इससे पहले की अनिका अभय को आभार प्रकट करती और राहत महसूस करती, अभय अपनी उसी रौब दार आवाज़ में आगे बोला जिससे अनिका घबरा गई। "मैंने कुछ लोगों से सैन फ्रांसिस्को में भी कॉन्टैक्ट किया है। वोह तुम्हे और तुम्हारी फैमिली को प्रोटेक्शन देंगे, जब तक की तुम सब पूरी तरह से सुरक्षित नहीं महसूस करती।" इतना सुनते ही अनिका के दिल ने धड़कना बंद कर दिया।

"आपका कहने का क्या मतलब की सैन फ्रांसिस्को में मुझे प्रोटेक्शन मिलेगी?" अभय ने इसका तुरंत जवाब नही दिया।

"मुझे लगता है की तुम्हे अपनी पुरानी जिंदगी में वापिस चले जाना चाहिए। तुम यहां के लिए नहीं बनी हो। इस मार काट, और यह लड़ाई झगड़े, यह सालों तक ऐसे ही चलते रहेंगे और अगले कुछ पीढ़ी तक भी।"

अनिका ने ना में सिर हिलाया। "नही! तुमने मुझे कल रात एक चांस दिया था। और मैं पहले ही तै कर चुकी हूं। मैं यहीं रहना चाहती हूं तुम्हारे साथ।" अनिका साफ देख सकती थी की अभय के चेहरे पर पछतावे के भाव आने लगे थे।

"मैं जानता हूं। मुझे तुम्हे किसी की जान लेने के लिए जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए थी।"

अनिका जैसे जैसे अभयंके करीब आने लगी थी वोह और भी ज्यादा घबराने लगी थी। "मुझे कोई फर्क नही पड़ता की मैने एक आदमी को मार डाला था। वोह इसी के लायक था। मैं चाहती हूं की तुम मुझे अपने दूर मत करो।"

"जिस आदमी से तुम कल मिलने वाली थी वोह नीचे तुम्हारा इंतजार कर रहा है। वोह तुम्हे सुरक्षित ले जायेगा जहां तुम्हारी फैमिली तुम्हारा इंतजार कर रही है।"

"अभय, प्लीज़ बस।

"अनिका, जो भी हमारे बीच था वोह सब बहुत अच्छा था, पर अब सब खतम हो चुका है। मैं तुम्हारी जान और जोखिम में नही डाल सकता। और ना ही मैं तुम्हे और बांध कर रख सकता हूं सुरक्षित रखने के लिए। तुम्हे भी तो ऐसा ही लगा था, कल। तोह प्लीज़..... जाओ। अपने परिवार के पास वापिस चली जाओ।"

"आई लव यू!" अनिका ने ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा।

अनिका ने देखा अभय को मुंह फेरते हुए।

"मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं, अभय। मुझे मत निकालो!"

अभय उसे शांत नज़रों से ही देखने लगा। "मेरी जिंदगी मेरे लोगों के लिए है। तुम पहले से ही जानती हो की मैं अपनी जमीन पर शांति लाने के लिए कुछ भी कर सकता हूं। प्लीज़ इसे मेरे लिए और अपने लिए और मुश्किल मत बनाओ।"

अनिका के होंठ कांप उठे अभय के रिजेक्शन से।

"प्लीज़..." अनिका गिरगिड़ाई और अभय के सामने घुटने के बल गिर पड़ी।

एक गहरी सांस लेते हुए अभय ने अनिका का चेहरा अपने हाथों में थाम लिया, और फिर छोड़ दिया, और कमरे से बाहर निकल गया और साथ ही उसकी जिंदगी से भी।
















***
कहानी अभी जारी है
💕💕💕