Revenge: A Romance Singham Series - Series 1 Chapter 3 books and stories free download online pdf in Hindi

Revenge: A Romance Singham Series - Series 1 Chapter 3

Series 1
Chapter 3



अनिका का लगभग पूरा दिन बीत गया प्लेन में, और वो ज्यादा सोई भी नही। और हैरत की बात तोह यह थी की वोह थकी हुई भी महसूस नही कर रही थी। वोह तोह बहुत उत्सुक, और उत्साहित थी इंडिया जाने के लिए। वोह तोह बस उस जगह को और जानना चाहती थी जिस जगह उसके पिता पले और बड़े हुए थे और वोह उस घर को भी देखना चाहती थी जिसके बारे में उसके पिता हमेशा बातें करते थे। जब वोह छोटी थी, तोह उसके पूर्वजों के घर पर उसे अपने पिता से उनके बचपन के किस्से सुनना बहुत अच्छा लगता था।

अपने तीन बड़े बड़े सूटकेस को बैगेज काउंटर से क्लेम करके वोह एग्जिट गेट की तरफ चल पड़ी। वोह बाहर खड़ी भीड़ में उस इंसान को ढूंढने लगी की कौन उसे लेने आने वाला था। उसकी बुआ ने उसे कहा था की जो उसे लेने आएगा वो उसे पहचान लेगा।

वोह नही जानती थी की कौन उसे लेने आने वाला था क्योंकि वोह तोह इंडिया में नई थी। उसने फिर एक बार भीड़ पर अपनी नज़रे घुमाई और फिर अपने समान को खींच कर साइड रख दिया।

जैसे ही उसने अपना फोन निकाला अपनी बुआ को फोन करने के लिए, उसने अपनी आंखों के कोरो से देखा की कोई हलचल हो रही है उसके साइड में। उसने पलट कर देखा तो एक लड़की लगभग उसी की उम्र की उसके पास आ रही है। उस लड़की ने बड़े ही सिंपल से कपड़े पहने थे, कंफर्टेबल कॉटन का ट्राउजर पहना हुआ था। उसके लंबे घने बाल थे जिसे उसने तरीके से चोटी बना रखी थी लेकिन उसकी चाल बिलकुल मर्दाना की तरह थी जो उसके हेयरस्टाइल के बिलकुल अपोजिट थी।

अनिका उसको देख कर मुस्कुरा गई क्योंकि उसकी आंखें उसे कुछ जानी पहचानी लगी। पक्का वोह भी उसकी कोई रिश्तेदार है क्योंकि उसकी आंखे अनिका की आंखों की तरह ही भूरी थी।

"अनिका?" उस लड़की आवाज़ कड़क थी, बिलकुल नहीं लग रहा था की कोई रिश्तेदार अपने रिश्तेदार से मिलने आया है।

"हां," अनिका ने मुस्कुरा कर जवाब दिया। वोह बिलकुल कोशिश कर रही थी की नॉर्मल बिहेव करे।

पर वोह लड़की बदले में नही मुस्कुराई और कहा, "चलो।"

उस लड़की ने अपने पीछे खड़ी दो हट्टे कट्टे आदमियों को इशारा किया। वोह दोनो देखने में उसके बॉडीगार्ड लग रहे थे। उनमें से एक आदमी आगे आया और उसने चुपचाप अनिका का सारा सामान उठा लिया।

"ओह, इसकी कोई जरूरत नही....."
अनिका बोल रही थी लेकिन ऐसा लग रहा था की वोह आदमी बेहरा है और उसे कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा। उस आदमी ने चुचाप सारा सामान आसानी से उठा लिया और आगे बड़ने लगा। अनिका भी उस लड़की के पीछे चल पड़ी जो उसे लेने आई थी, जिसे अभी तक अपने बारे में नही बताया था की वोह कौन है।

अनिका को उन लोगो के साथ चलने के लिए लगभग भागना पड़ रहा था क्योंकि उनके कदम बहुत तेज थे। वोह सब जब एग्जिट गेट के बाहर आए तोह गेट के पास ही एक एसयूवी कार खड़ी थी। वहां क्लियर लिखा था की यह नो पार्किंग जोन है लेकिन किसी भी एयरपोर्ट सिक्योरिटी की हिम्मत नही थी की उनकी गाड़ी वहां से हटवाए या उन्हे कुछ कहे। दो और हट्टे कट्टे आदमी गाड़ी से बाहर आए और अनिका का सूटकेस दूसरी एसयूवी गाड़ी में रखने लगे जो उसके पीछे ही खड़ी थी। एक आदमी ने अनिका और उस लड़की के लिए एसयूवी का गेट खोला ताकी वोह दोनो अंदर बैठ जाए।

"थैंक यू...." इससे पहले की अनिका उससे आगे कहती, उस आदमी ने एसयूवी का दरवाज़ा बंद कर दिया और जा कर ड्राइवर की सीट पर बैठ गया। अनिका के बगल में बैठी लड़की बिना एक शब्द अपने मुंह से निकाले चुप चाप बैठी हुई थी, और गाड़ी एयरपोर्ट से बाहर mi ओर चल पड़ी थी।

अनिक यह सन्नाटा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। उसने कुछ बोलने से पहले अपना गला साफ किया। "आई एम सॉरी, मुझे अभी तक चांस ही नही मिला अपने आप को ठीक से इंट्रोड्यूस कराने का। आई एम अनिका पटेल। एंड यू आर.....?"

वोह लड़की उसकी तरफ पलटी, उसके जबड़े भींचे हुए थे। अनिका को लगभग यकीन था की उसे जवाब नही मिलेगा पर वोह सरप्राइज़ हो गई उसकी आवाज सुनकर।

"सबिता।"

"नाइस टू मीट यू, सबिता। हमारा रिलेशन क्या है आपस में?"

सबिता उसकी तरफ हल्के आश्चर्य से देख रही थी जैसे उसे लग रहा हो की अनिका को तोह पता होना चाहिए था पहले से ही। "कजिन। ऑर फादर्स वर ब्रदर्स।"
सबिता की बोली हल्की फुल्की उसके पिता की बोली जैसी थी। लेकिन सबिता की आवाज़ में कोई इमोशंस नही था अपने पिता के बारे में बात करते वक्त।

सबिता ने वर कहा था इसका मतलब वोह भी अपने पिता को खो चुकी है उसकी तरह। कहीं उसके पिता भी इसके पिता की तरह उस एक्सीडेंट में तोह नही मारे गए थे।

अनिका थोड़ी उदास हो गई थी अपने पिता को याद कर के, उसे कुछ वक्त लगा अपने आप को नॉर्मल करने में। "मुझे खुशी है तुमसे मिल कर, सबिता। उम्मीद करती हूं हम फ्रेंड्स बन जायेंगे, जब तक मैं यहां हूं," अनिका ने प्यार से कहा। वोह अपने कहे हुए शब्दों का अर्थ समझती थी।

सबिता ने एक ठंडे इशारे में अपना सिर हिला दिया, जिससे अनिका सोचने लगी की कहीं अनजाने में उससे कोई गलती तोह नही हो गई है की उसने सबिता को गुस्सा दिला दिया हो। पर उसके दिमाग में एक ही सवाल बार बार उठ रहा था की सबिता उसको देख कर एक्साइटेड क्यों नही है जबकि उसकी बुआ नीलांबरी तो बहुत एक्साइटेड थी जैसे वोह पागलों को तरह चाहती थी की अनिका इंडिया वापिस आ जाए उनके पास।

"तुम कितने साल की थी जब......वोह एक्सीडेंट हुआ था?"

"पाँच।" सबिता ने रूखा सा जवाब दिया।

अनिका सोच रही थी की सबिता ज्यादा बात नहीं करती थी और सिर्फ एक शब्द में ही जवाब देती थी।

"मैं तब छह साल की थी जब मेरी मॉम ने मुझसे कहा था की मैं अब कभी भी अपने डैड को नही देख पाऊंगी।" अनिका की आंखें अनपेक्षित आंसू से भर जाती है। अपने आंसू छुपाने के लिए वोह खिड़की से बाहर देखने लगती है, अभी तोह सबिता उसके लिए लगभग अजनबी थी।
कुछ देर के लिए फिर शांति पसर गई। अनिका ने सोचा की यही अच्छा होगा की वोह चुप रहे जब तक की वोह घर नही पहुँच जाते। उनकी एसयूवी रफ्तार से और स्मूथली सड़क पर दौड़ रही थी। अनिका को अब नींद आने लगी थी क्योंकि काफी देर से वोह जागी हुई थी। लेकिन इस वक्त वोह सोना नही चाहती थी कम से कम अपने पिता के परिवार से मिले बिना तोह बिलकुल नही, उसके पिता का परिवार यानी उसका परिवार।

वोह अभी भी खिड़की से बाहर देख रही थी और फिर से धीरे धीरे उसके अंदर घबराहट और शक बढ़ने लगा इस अचानक उसकी ट्रिप को लेकर। एक बैचैनी सी उसके अंदर बढ़ने लगी। फिर उसने आपको याद दिलाया की यह जगह जहां वोह जा रही थी वोह उसकी जिंदगी का हिस्सा है....उसकी जड़े हैं यहां।

वोह अभी भी चुप थी और बाकी सब भी चुप थे। लगभग एक घंटे बाद उसने चुप्पी तोड़ते हुए उसने फिर बातचीत करना शुरू किया। "कितना टाइम लगेगा हमे घर पहुँचने में?"

"एक घंटा।"

"इतनी सुबह एयरपोर्ट पर आने के लिए थैंक्स। तुम्हे आने की जरूरत नहीं थी। मैं टैक्सी लेकर घर आ जाती।"

"नीला चाहती थी की मैं आऊं।" सबिता ने बड़ी अजीब सी टोन में कहा।

"हमारे दादाजी कैसे हैं?"

"ठीक हैं।"

"यह तोह अच्छी बात है। मैं बहुत उत्सुक हूं नीला बुआ और दादा जी से मिलने के लिए जल्द से जल्द।"

सबिता ने अनिका की तरफ पलट कर अजीब सी नज़रों से कुछ देर तक देखा। "तुम इतनी जल्दी उनसे नही मिल पाओगी। उनसे मिलने से पहले सो जाओ थोड़ी देर।"

"ओह मैं अभी इतनी भी नही थकी हुई हूं, अभी ही उनसे मिलते....."

"नीला ने कहा है की वोह तुमसे दुपहर बाद ही मिलेगी।" सबिता ने इस तरह कहा जैसे उसे नीला से ऑर्डर मिला हो।

"ओह ओके।" अब अनिका को थोड़ी थकान होने लगी। शायद यही अच्छा थी की वोह सब से मिले उससे पहले थोड़ा आराम करले और फ्रेश माइंड से सबसे मिले।

उस लेदर की सीट पर सिर टिका कर अपनी बॉडी को कंफर्टेबल पोजीशन में कर के उसने अपनी आंखे बंद कर ली और जल्दी ही नींद के आगोश में चली गई। अपनी आंखे बंद करने से पहले उसकी नज़र ड्राइवर के गर्दन पर चली गई जहां उसे एक टैटू दिखाई पड़ा। उसकी हैरानी से फैल गई क्योंकि वोह टैटू उसे कुछ जाना पहचाना लगा। इससे पहले की वोह कुछ और अंदाजा लगा पति उसके दिमाग ने बंद होना शुरू कर दिया। आखिर यहां आने के लिए छुटियां लेने की वजह से उसे डबल शिफ्ट करनी पड़ी थी और काम भी हैंडओवर करना था। उसी की थकान थी की वोह ज्यादा देर आंख खुली नही रख पाई।

****

चिड़ियों की चहकने की आवाज़ से अनिका की आंख खुली। वोह उठ बैठी और खिड़की से बाहर देखने लगी।

एसयूवी रुक चुकी थी और उसने देखा की एक आदमी उसका सामान गाड़ी से उतर रहा था। अभी भी बाहर अंधेरा था सूरज निकलने में कुछ वक्त था। अनिका को बस एक विशाल आलीशान हवेली दिखाई पड़ रही थी। इससे पहले की वोह आसपास और देखती सबिता की आवाज़ ने उसको उसकी तरफ मोड़ दिया।

"फॉलो मी।"

वोह दोनो दो सफेद मार्बल के स्तंभों से गुजरे जो की तीन मंजिल इमारत तक जाते थे। एक आदमी ने बड़ा सा लकड़ी का मेन दरवाज़ा, जिस पर बहुत खूबसूरत नक्काशी हो रखी थी, खोला और समान अंदर ले गया।

वोह ज्यादा अंदर एक्सप्लोर नही कर पाई क्योंकि सबिता उसे एक बड़े से ओपन लिविंग हॉल से ले जाते हुए सीढ़ियों की तरफ बढ़ गई। कुछ सीढियां ऊपर चढ़ने के बाद एक हॉल से होते हुए वोह एक कमरे के दरवाज़े के पास आ कर रुकी। जो आदमी उसे फॉलो करते हुए उसके पीछे आ रहे थे उन्होंने अनिका का सामान ठीक से us दरवाज़े के पास दीवार से टिका कर रख दिया।

"तुम यहां रहोगी जब तक......" सबिता बोलते बोलते हड़बड़ा कर रुक गई और फिर अपना गला साफ करते हुए बोली। "जब तक की तुम यहां रहना चाहो।"

अनिका ने बस सिर हिला दिया। वोह बस आसपास सब देख रही थी।

"और कुछ चाहिए तुम्हे, या मैं जाऊं?" सबिता ने पूछा।

"नही।"

"तोह फिर मैं चलती हूं। कोई तुम्हे इनफॉर्म कर देगा,और नीला और दादाजी से तुम्हे मिलवा देगा।"

अनिका ने सिर हिलाते हुए कहा, "थैंक यू।"

अनिका अंदर रूम में चली गई। सबिता ने दरवाज़ा बंद कर दिया और अपने आदमियों के साथ वहां से चली गई।

वैसे तोह अनिका अभी इसी वक्त पूरी हवेली घूमना चाहती थी लेकिन उसने एक नींद लेने की और फ्रेश अप होने की सोची, उससे पहले की वोह अपनी फैमिली से मिले।






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कहानी अभी जारी है..
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