इश्क़ ए बिस्मिल - 27 Tasneem Kauser द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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इश्क़ ए बिस्मिल - 27

अरीज किसी गहरी सोच की खाई में डूबी हुई बेड पर लेती हुई थी। हाँ एक सोच ज़ेहन में ज़रूर थी...मगर बेवजूद सी, बेनाम सी। बदन दर्द से अलग टूट रहा था, भूक ने पेट में अलग ऐठन लगाई हुई थी, तो ज़हन भी सुना पड़ा हुआ महसूस हो रहा था। उसकी आँखें सीलिंग पर टिकी जाने क्या निहार रही थी जभी उमैर कमरे में दाखिल हुआ। वह हड़बड़ा कर उठ बैठी थी, जैसे उसने उमैर के बेड पर लेट कर कोई बड़ा गुनाह कर दिया था।

अरीज की इस हड़बड़ाहट को देख कर उमैर शर्मिंदा हो गया जैसे उसने कोई गलती कर दी थी या फिर कोई गुस्ताखी। ये कमरा भले ही उसका था मगर फिल्हाल उसमे अरीज रह रही थी, उसे किसी की privacy ko इस तरह से disturb नही करना चाहिए था।

“वो.. वो मैं अज़ीन की medical prescription भूल गया था।“ वो सच में prescription भूल गया था, लेकिन ये भूल फिल्हाल उसके बोहत काम आई थी। अरीज अलग शर्म से पानी पानी हो रही थी, वह अपना दुपट्टा सही कर रही थी।

“मुझे वो अज़ीन की prescription चाहिए...प्लिज़ जल्दी करो।“ उमैर ने उजलत में कहा था। साथ ही अज़ीन को अपनी गोद से भी उतारा था। अज़ीन ने उमैर का मूंह देखा। वह यहाँ यह तो कहने नहीं आया था। उमैर ने भी अज़ीन को देख कर नज़रे चुरा ली थी।

“जी, मैं दे रही हूँ।“ उसने जितनी जल्दी से कहा था उतनी ही फ़ुर्ति से साइड टेबल की drawer से prescription भी निकाल कर दी थी।

उमैर को जिस चीज़ की ज़रूरत थी वह उसके हाथ में आ गयी थी लेकिन अब उसे समझ नही आ रहा था कि अब वो आगे उसे उन लोगों के साथ चलने को कैसे बोले। कहीं उसकी इस पेशकश से अरीज हवाओं में उड़ने ना लग जाए... ख़्वामख्वा वह किसी खुशफहमी का शिकार ना हो जाए.... और सब से बड़ा जो मसला था वो उमैर की एगो का था। वह अपनी ego को कैसे पीछे छोड़ कर आगे बढ़ सकता था। वह थोड़ी देर तक सोच में पड़ गया था और अपनी नज़रें prescription पर ही टिकाए हुए था।अरीज उसे हैरानी से देख रही थी क्योंकि उमैर के चेहरे को देख कर लग रहा था की वह कुछ और भी कहना चाहता हो।

“Actually तुम्हे भी हमारे साथ चलना होगा, अज़ीन की ड्रेसिंग करवानी है।“ चलो उसने उसे साथ चलने की औफर तो की....मगर कुछ अलग ढंग से, लेकिन उमैर का ये तरीका अज़ीन को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया था जब ही वह रूहांसी हो गयी।

“मुझे नही जाना है डॉक्टर के पास।“ वह उमैर के पास से भाग कर अरीज से जा कर लिपट गई थी।

“यही वजह है कि तुम्हारा हमारे साथ जाना ज़रूरी है अज़ीन मेरी बात नही मानेंगी। तुम होगी तो इसे हैंडल कर सकोगी।“ शुक्र है अज़ीन ने उसका काम आसान कर दिया था। अरीज अज़ीन को बेहला रही थी और उमैर ने एक गहरी सांस खारिज की थी।

अज़ीन को बहला फुसला कर अरीज उन दोनों के साथ चल पड़ी थी। उमैर ने कार की ड्राइविंग सीट संभाल ली थी। अरीज कार का पिछला दरवाज़ा खोल कर बैठने ही वाली थी के उमैर बोल पड़ा।

“भले से तुम अब इस घर की मालकिन हो, लेकिन मै तुम्हारा ड्राइवर हरगिज़ नहीं हूँ, जो तुम आराम से पीछे बैठ रही हो।“ कितनी ज़्यादा नफ़रत थी उमैर के अल्फ़ाज़ में। अरीज का दिल एक बार फिर से डूबता हुआ महसूस हुआ। उसकी बात सुनकर अरीज ने सिर्फ़ अज़ीन को पीछे बैठाया था और खुद सामने का दरवाज़ा खोल कर उसके साथ बैठ गयी थी। हर बात पर उसे एक ही ताना मिल रहा था। ये घर उसके गले की हड्डी हो गयी थी जो ना निगलते बन रही थी ना उगलते। अगर वह खुद से पहले आगे बैठ जाती तो शायद उसे ये ताना भी मिल सकता था की वह उसकी बीवी बन रही है। उसे हर हाल में बातें ही सुनने को मिलती।

गाड़ी ने रफ़्तार पकड़ ली थी। अक्सर उमैर का मूड काफी ऑफ हो जाता था अरीज की मौजूदगी से। खुद का दिमाग़ divert करने के लिए उसने कार की music system से रेडियो ऑन कर दिया था और थोड़ी ही देर में वो लोग एक शानदार रेस्तुरंट के बाहर थे। अरीज ने ना समझी से उमैर को देखा।

“अज़ीन ने कहा था उसे भूक लगी है इसलिए मैंने सोचा पहले कुछ खा लेते है।“ वह सफाई पेश कर रहा था जैसे की अरीज समझ ही गयी थी कि उमैर उसे डेट पर लेकर आया है वो भी अपनी छोटी सी साली के साथ।

कुर्सी पर बैठते ही वैटर ने टेबल पर menu रखा था। उमैर ने menu उठा कर अरीज के आगे रख दिया था।

अरीज ने menu पलट कर देखा था फ़िर menu उमैर के आगे सरका दिया था। “आप जो बेहतर समझें ऑर्डर कर दें, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है।“

उमैर ने नागवारी से menu कार्ड देखा और बेदिली से वेटर को इटालियन फूड ऑर्डर कर दिया।

“रिसोत्तो, गनोच्चि, पास्ता, फियरन्तिना, आइस क्रीम।“ उसने फ़िर अज़ीन की तरफ़ देखा और कुछ सोच कर फिर वेटर से पूछा “ Is there any special food available for this little girl? (क्या इस छोटी लड़की के लिए आपके यहाँ कुछ स्पेशल खाना मौजूद है?)”

वेटर ने हाँ कहा था और ऑर्डर लेकर चला गया था।
अज़ीन ने पहले ही आइस क्रीम की फरमाइश कर दी थी।

१५ minutes के इंतज़ार के बाद ऑर्डर से पूरा टेबल इटालियन फूड से भर गया था। वेटर ने सबको बारी बारी खाना सर्व कर दिया था।

अज़ीन को उसका खाना पसंद आया था और जब भूक लगी हो तब तो खाने का मज़ा ही कुछ और होता है, सो अज़ीन खाना एंजॉय कर रही थी। उमैर तो यहाँ अक्सर आता रहता था उसे यहाँ का खाना वैसे भी पसंद ही आता था, लेकिन अरीज पर तो ये खाना आज़माइश् बन कर उस पर टूट पड़ी थी।

फियरन्तिना का पहला निवाला लेते ही उसे जैसे उल्टी आई थी, उसे गोश्त से अजीब सी बू आ रही थी जैसे वो या तो ठीक तरह से पका नही था या फ़िर उसमे मसाले ही नही डाले गए थे जिसकी वजह से उसमे कोई स्वाद ही नही था। उसने खुद पर बोहत कंट्रोल किया और पानी की चंद घूँट की मदद से उस निवाले को अपने हलक से पर किया जिसकी वजह से उसका पुरा चेहरा लाल हो चुका था और आँखे भी पानियों से भर चुकी थी। अरीज ने स्पून प्लेट में वापस रख दिया था उसमे बिल्कुल भी हिम्मत नहीं थी की वह अगला निवाला अपने मूंह मे डालती... जब की उसे बोहत ज़ोरों की भूख लगी हुई थी।

अरीज ने अपने सामने बैठे उमैर को देखा जो बोहत इत्मीनान और सुकून से खाना के ज़ायके से लुत्फ़ उठा रहा था।

“अगर आपके पास कोई चॉइस हो तो उसे इस्तिमाल कर लेना चाहिए इसी में समझदारी है, दूसरों पर नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि हमें नहीं पता जो दूसरों के लिए ठीक है वो हमारे लिए ठीक है भी या नहीं।“ वह प्लेट पर अपना सर झुका कर खाने में मशगुल था, और इसी तरह सर नीचे किये, बिना अरीज को देखे उसने उसे ज्ञान बाटी थी। अरीज बस उसे चुप चाप देखती रह गयी थी।

उमैर खाना पर बात रख कर उसे एक बार फिर से ताने मार गया था। वह चॉइस की बात कर रहा था मगर शायद उसे पता नहीं था की अरीज के पास कभी कोई चॉइस ही नहीं थी। उसे नही पता था की ज़िंदगी हर किसी पर इतनी मेहरबान नहीं होती जैसे की उमैर पर थी।

अरीज को अगर उमैर मिला था या फिर वो घर मिला था तो वो सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी किस्मत थी कोई चॉइस नहीं था। अरीज ने सिर्फ़ निकाह के लिए हाँ कही थी उसे नहीं पता था की उसके लिए आगे क्या रखा है?

क्या होने वाला है आगे?...

क्या उमैर अरीज को समझ पाएगा या फिर अरीज उसे अपनी मजबूरियाँ समझा पाएगी?

जानने के लिए पढ़ते रहें