लारा - 18 - (एक प्रेम कहानी ) रामानुज दरिया द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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लारा - 18 - (एक प्रेम कहानी )

(लारा भाग 18)

(भाग 17 मे आपको बताया गया था कि अब सोमा की दोस्ती फेसबुक पर ही एक राज नाम के लड़के से हो गयी थी) अब आगे भाग 18 में।

जरा सोचिये कि आज कल ऐसी औलाद मिलती कहाँ है जो मुंबई में समुद्र के किनारे सुहानी शाम बिताने अपनी माँ के साथ जाना पसंद करे। किसी हॉट खूबसूरत अपनी गर्ल फ्रेंड के साथ नहीं। सुबह और रात को घर का काम देखे और दिन भर ओबर टाइम जॉब करे फिर शाम को घूमने जाए बीच पर वो भी अपनी बूढ़ी माँ के साथ। उस माँ ने पिछले जन्म में जरूर कोई बहुत पुण्य के काम किये होंगे जिसकी कोख से ऐसी औलाद ने जन्म ले लिया। जिसने अपनी पूरी जिंदगी ही अपनी माँ की चरणों में समर्पण कर दिया। राज रहता तो मुंबई में ही था लेकिन उसके बिचार और उसके स्वभाव में गाँव के मिट्टी की खुशबू आती थी।
और वो रहने वाला भी किसी रामपुर गाँव का ही था।
मुंबई में घर लेकर रहना तो उसके पिता जी का शौक था कि हम गाँव में नही रहेंगे, मुझे अपने बच्चों की परवरिश किसी बड़े शहर में रहकर करनी है।
हालांकि वे ऐसा कर नहीं पाए क्योंकि इतनी महंगाई में कोई प्राइवेट जॉब में 15 से 20 हजार कमा कर 5 6 परिवार का पालन पोषण करना इतना आसान नहीं है, और वो भी मुंबई में। इसलिए राज की ज़िंदगी बनने से ज्यादा बिगड़ गयी, क्योंकि वो पढ़ नहीं पाया, छोटी उम्र में नौकरी कर के परिवार पालना पड़ गया। क्योंकि वो नहीं चाहता था कि जिस तरह उसकी जिंदगी बरबाद हो गयी, ओ नही पढ़ पाया, उसे घर की जिम्मेदारियों ने घेर लिया ऐसा कुछ उसके छोटे भाइयों के साथ ना हो। कम से कम वो तो पढ़ कर आगे निकल जाए कुछ कर सके किसी लायक बन सके।
राज दिल का बहुत साफ इंसान था उसने सोमा से कुछ भी बढ़ा-चढ़ा कर नहीं बताया सब कुछ सच-सच ही बताया जो कुछ सच्चाई थी।
नहीं तो आज कल के लड़कों की तो आदत होती है कि जब भी किसी भी लड़की से बात करेंगे तो उसे इंप्रेस करने के लिए हमेशा बढ़ा-चढ़ा कर ही बतायेंगे। लेकिन राज के अंदर ऐसा कुछ नहीं था, राज एक बहुत ही नर्म दिल और सरल स्वभाव का इंसान था। उसमें दिखावे जैसी कोई बात नहीं थी। राज की बाते सुनते- सुनते कब दोपहर से शाम हो गयी कुछ पता ही नहीं चला।
जब शाम के 5: 30 बज गए तो सोमा की माँ ने बुलाया की उठो बेटा शाम हो गयी पूजा नहीं करनी है, जब तक पूरी तैयारी करोगी तब तक तो बहुत देर हो जायेगी।
तो सोमा ने जैसे ही कहा कि ओक्के हम रात में बात करते हैं, मेरे पूजा का समय हो रहा है। तो राज ने कहा कि अरे हाँ अच्छा किया आपने मुझे याद दिला दिया मै तो भूल ही गया था आज मुझे माता रानी के दरबार जाना है, मन्नत मांगने। और जानती हो वहाँ बहुत बड़ी माता रानी के मूर्ति की अस्थापना होती है और अगर सच्चे मन से कुछ भी मांग लो तो जरूर वो मन्नत पूरी हो जाती है।
सोमा बोली अच्छा ऐसा है क्या? तो आप क्या मांगने जा रहे है तो राज बोला कि पागल मन्नत किसी को बताई नही जाती कि क्या मांगा है।
हाँ अगर तुम कुछ चाहती हो तो बताओ तुम्हारे लिए भी माँ से मन्नत मांग लूँगा, क्या चाहिए, घर, गाड़ी, बंगला, दौलत, सोहरत क्या चाहती हो? तो सोमा बोली कि नहीं राज मेरी नजरों में इन सब की कोई अहमियत नहीं है, ये सब तो इंसान जब चाहे मेहनत करके कमा सकता है। तो राज बोला की अरे तब क्या चाहिए तुम्हें आजकल लड़कियों की यही सब तो पहली पसंद होती है तो सोमा बोली की नहीं अगर मेरे लिए कुछ मांगना होगा तो माँ से यही प्रार्थना करना की, मेरी पूरी ज़िंदगी में कभी भी मेरी वजह से मेरी माँ और पापा का सिर ना झुके, उन्हें कभी मेरी वजह से कोई तकलीफ ना पहुंचे। मैं कभी चाह कर भी कोई ऐसा काम ना कर सकूँ जिससे उन्हें शर्मिंदा होना पड़े। बस मेरी इतनी ही ख्वाहिस है। क्युकी मेरी वजह से मेरे मां बाप को आज तक कोई सुख नहीं मिला, दुःख के सिवा, मुझे लेकर उन्होंने बहुत कुछ झेला है इसलिए अब और मैं उनके दुखो का कारण नहीं बनना चाहती हूं।
सोमा के इन शब्दों ने राज को झिकझोर कर रख दिया। राज को यकीन ही नहीं हो रहा था कि आज के इस जमाने ऐसी सोच रखने वाली लड़कियां भी हो सकती हैं। राज को सोमा का आचरण बहुत अच्छा लगने लगा। सोमा अपने इन शब्दों से कब राज के दिल में घर गयी राज को कुछ पता ही नहीं चला।
फोन रखने के बाद में दोनों अपने अपने कामों में ब्यस्त हो गए। लेकिन दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगा था। सोमा राम को भूली तो नहीं थी लेकिन कोशिश पूरी कर रही थी। राज को तो अब रात होने का इंतज़ार था क्योंकि सोमा बोली थी कि रात को बात करते हैं 10 बजे के आस पास। रात को जब फिर दोनों कि बात हुई थी तो राज ने पूछा की! सोमा एक बात पूछे सब कुछ सच सच ही बताना?
सोमा बोली आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं। पूछीये
तो राज बोला कि सच बताऊँ तो मुझे तुम्हारी बातें इतनी अच्छी लगती हैं की कभी कभी यकीन नहीं होता है कि सच में कोई लड़की इतनी अच्छी भी हो सकती है, इसलिए मै तुमसे ये पूछना चाहता हूं कि कही तुम कोई लड़का तो नहीं हो लड़की बन कर मेरे साथ मजाक कर रहे हो।

(आगे की कहानी जानने के लिए बने रहे हमारे साथ भाग 19 में)