लारा - 9 - (एक प्रेम कहानी ) रामानुज दरिया द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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लारा - 9 - (एक प्रेम कहानी )

( भाग 8 में आपको बताया गया कि किस तरह से जय ने सोमा (नैंसी) को धोखा दिया था, अब नैन्सी क्या करेगी, आगे की कहानी इस भाग 9 में)
मैंने जय को अनफ्रेंड तो कर दिया लेकिन उसकी चैट को डिलीट नहीं किया। क्योंकि मैं उसके प्रति अपने नफरत को हमेशा जिंदा रखना चाहती थी, मैं उसके दिए हुए जख्म को बार-बार महसूस करना चाहती थी, ताकि उसके लिए मेरी नफरत कभी मेरे दिल से कम ना हो। उस चैट को जितनी बार मैं पढूं उतनी ही ज्यादा मुझे उससे नफरत हो। आज मैं जय का नाम भी नहीं सुनना चाहती, इतनी नफरत हो गई मुझे उससे।
आपको मालूम है राम जी जब लड़कपन में हमें किसी से थोड़ा सा भी लगाओ हो जाता है, किसी का साथ जब अच्छा लगने लगता है ना, तो उसे हम पहला और सच्चा प्यार समझने की भूल कर बैठते हैं। और वही मेरे साथ भी हुआ था। मुझे गलतफहमी हो गई थी कि मुझे प्यार हो गया है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं था। अगर किसी को किसी भी इंसान से सच्चा प्यार हो जाता है, तो उस इंसान के साथ चाहे कितना भी कुछ क्यों ना हो जाए, लेकिन वह चाहकर भी अपने प्यार से नफरत नहीं कर पाता है।
वह उससे बात किए बिना, उसका नाम लिए बिना, उसे याद किए बिना नहीं रह सकता लेकिन मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं था ।
उल्टा मुझे तो उसके नाम से भी नफरत हो गई थी। मैं कभी भूले से भी उसको याद नहीं करती थी, हां जब मैं उसकी चैट ओपन करके पढ़ती थी, तब मुझे उसकी याद आती थी, उसकी बोली हुई हर एक बात याद आती थी, जो बातें उसने मुझसे कही थी वह सारी बातें मुझे याद आती थी। लेकिन वह सब मेरी एक बहुत बड़ी गलतफहमी थी और कुछ नहीं था। वह कोई प्यार नहीं था वह तो बस एक लड़कपन में कि हुई नादानी थी, जैसे नादानी बच्चे कर जाते हैं वही मेरे साथ भी हो रहा था। लेकिन मेरी गलती थी मैं उसे प्यार समझ बैठी । लेकिन रामजी मैंने भी ठान लिया अपने मन में,कि चाहे जो कुछ भी हो जाए मैं उससे उसी की भाषा में बदला लूंगी।
फिर चाहे उसके लिए मुझे उससे एक बार फिर प्यार ही क्यूँ न करना पड़े । माना कि मेरी नादानी थी मैं नादान थी। लेकिन वह तो नादान नहीं था उसने तो जो कुछ भी किया जानबूझकर किया ना। उसने मेरे साथ गलत किया है, और मैं उसे सज़ा जरूर दूँगी ।
उस ने मुझे मेरा सच्चा प्यार बनकर तकलीफ दी है ना। तो मैंने खुद से वादा कर लिया की सच्चा प्यार क्या होता है, मैं उसे दिखाऊंगी मुझे अपनी किस्मत पर यकीन है।
कि मुझे भी कभी ना कभी किसी ना किसी से सच्चा प्यार जरूर होगा, मेरी लाइफ में कोई ऐसा आएगा जो मुझे खुद से भी ज्यादा प्यार करेगा। और जिस दिन मुझे मेरा सच्चा प्यार मिल गया ना, उस दिन मैं जय को दिखाऊंगी कि सच्चा प्यार किसे कहते हैं,क्या होता है सच्चा प्यार? जो तुम मेरे साथ खेल खेल कर चले गए ना वह प्यार नहीं था, वह तो आपकी की हुई साज़िस थी ।
राम जी आपको मालूम है 6 महीने बीत गए लेकिन मैं उसे भूल नहीं पाई थी, उसकी चैट मैंने इसीलिए डिलीट नहीं किया था कि मैं कभी उसे भूल ना पाऊं। मैं उसकी नफरत को हमेशा अपने दिल में जिंदा रखना चाहती थी। इसीलिए मैंने उसे डिलीट नहीं किया था। और जब 6 महीने बाद जय ने फिर से मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा, तो मैंने बिना कुछ सोचे समझे उसे तुरंत एक्सेप्ट कर लिया।
क्योंकि मुझे उससे बदला लेना था उसे दिखाना था, कि मेरी जिंदगी में तुम्हारी कोई अहमियत नहीं है। तुम्हारे ऐसा कुछ करने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि दुनिया में सिर्फ तुम ही नहीं हो और भी लोग हैं, दुनिया से अभी अच्छाई खत्म नहीं हुई है। उसे इस चीज का एहसास दिलाना बहुत जरूरी था। इसीलिए वो जैसा चाहता गया मैंने वैसा ही किया। फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने के बाद उसने मेरे से दोस्ती का हाथ बढ़ाया, मैंने उसकी दोस्ती तुरंत एक्सेप्ट कर ली। मैं तो उसे बिल्कुल पसंद नहीं करती थी उसका नाम भी नहीं सुनना चाहती थी।
लेकिन वो जैसा चाहता गया मैं वैसा करती गई। वह मुझसे बात करना चाहता था, मैंने उससे बात की। वो जब भी चैटिंग करना चाहे, तब मै चैट करती। फोन पर बात करने के लिए बोलता तो मैं उससे फोन पर भी बात करती।
मेरा मतलब राम जी मैं ऐसा चाहती थी, कि जय जब तक मेरी तरह टूट न जाए, जब तक मेरा बदला पूरा ना हो जाए । तब तक वह मुझसे दूर ना हो। मैं उसे खुद से दूर नहीं जाने देना चाहती थी। मैं यही सोचती थी, कैसे भी करके जय मेरी ही टच में रहे। तभी मेरा बदला पूरा होगा, नहीं तो मैं तो कुछ जानती भी नहीं हूं, कि वह रहता कहां है। क्योंकि हो सकता है कि जो इंसान आज तक इतना कुछ मुझसे झूठ बोल गया। उसने अपना नाम पता भी मुझसे झूठा बताया हो। फिर तो मैं उसे बिल्कुल भी नहीं जानती हूं। इसीलिए मैंने उसे खुद से दूर होने नहीं दिया।
और जैसा मैं चाहती थी वैसा ही हुआ। और आज जय मेरे प्यार में सच में पागल हो चुका था। आज उसे मुझसे सच्चा प्यार हो गया था। कभी एक टाइम था जब उसी प्यार का नाम लेकर उसने मुझे चोट पहुंचाई थी। और आज का एक टाईम है कि वह खुद ही उसी प्यार की दुहाई देने लगा। उसने मुझे प्रपोज कर दिया। बोला नैन्सी मुझे तुमसे प्यार हो गया है यार। अब मै सिर्फ दोस्ती में नहीं रह सकता, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता यार, मुझे तुमसे बात करना अच्छा लगता है। तुम्हारा साथ अच्छा लगता है। तुम्हारे बिना मैं अधूरा लगने लगा हूं। नहीं जिया जा रहा यार तेरे बिना।
राम जी आप ही कहते हैं ना, कि अगर किसी को किसी से सच्चा प्यार हो और वह खुद सामने से आकर बोल दे कि मुझे तुझसे प्यार है मैं तेरे बिना नहीं रह सकता। फिर तो उस इंसान की बिन मांगी मुराद पूरी हो जाती है उसकी खुशियों का ठिकाना नहीं रहता। लेकिन जय के ऐसा बोलने पर मुझे हंसी आ रही थी, मैंने उसे तुरंत ठुकरा दिया। वही सारी बातें मैंने उसे याद दिलाई।
कि भूल गए तुम मेरे साथ क्या किया था तुमने, एक नहीं दो दो बार तुमने इसी प्यार के नाम पर मुझे धोखा दिया था।
तुम्हारे मुंह से इस प्यार नाम का शब्द ना बिलकुल अच्छा नहीं लगता है। और मुझे तुमसे प्यार, तुम मुझसे अभी भी मेरे प्यार की उम्मीद रखते हो। मुझे तुमसे नफरत है नफरत ( I hate you )
और राम जी कहते हैं ना की
विधाता की अदालत में वकालत बड़ी न्यारी है
खामोश रहिए कर्म कीजिए
सब का मुकदमा जारी है।
और आज मेरे साथ भगवान ने न्याय किया था। मुझे तो उससे प्यार नहीं था, गलतफहमी थी लेकिन जय को मेरे से सच्चा प्यार हो गया था ।
लेकिन मैंने उससे धिक्कार कर ठुकरा दिया कि तुम किसी के प्यार के लायक ही नहीं हो।
और तुम्हें लाइफ में कभी सच्चा प्यार नहीं मिलेगा। जिस लड़की के प्यार के लिए तुमने मेरे साथ ऐसा किया था।
वह लड़की तुम्हें कभी पलटकर नहीं देखेगी, और वही हुआ भी वह किसी और से प्यार करने लगी थी। जय ने मुझे बताया था कि मैं उससे बहुत प्यार करता था, लेकिन उसने मुझे धोखा दे दिया। यह बात सुनकर मुझे बहुत सुकून मिला कि कम से कम तुम्हें दर्द का एहसास तो हुआ, कि हमें कितनी तकलीफ होती है जब कोई हमसे झूठ बोलता है। उसे उसकी गलतियों का एहसास दिला कर, उसे तड़पता हुआ छोड़कर मैंने, उसे हमेशा के लिए छोड़ दिया।
राम जी मैंने उसे अपनी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए निकाल दिया। आज वह कहीं भी नहीं है ना ही मेरे दिल में न ही मेरे दिमाग में है। हां अगर वह मुझे याद है तो मेरी पहली और आखरी गलती, कि मैंने गलती की थी प्यार समझने की वह प्यार नहीं था, एक खेल था जिसे मैं अपना पहला प्यार समझ बैठी थी। राम जी मैंने उससे उसी दिन उसी पल हमेशा हमेशा के लिए अपने सारे रिश्ते खत्म कर दिये......
इस बार उसे ब्लॉक करके उसकी चैट भी डिलीट कर दी। और जिस फेक नंबर से मैं उससे बात किया करती थी, वो नंबर ही मैंने बंद कर दिया।
जो व्हाट्सएप मैंने सिर्फ उसके लिए पर्सनल बनाया था, मैंने उसे भी डिलीट कर दिया।
कुछ भी नहीं बचाया, कुछ भी नहीं रखा। और ऐसा करके मुझे बहुत सुकून मिला ऐसा लगा कि मेरे सिर से बोझ उतर गया।
और आज मैं अपना बदला लेकर बहुत खुश हूं।और राम जी आप ही तो कहते हैं कि प्यार में बदला नहीं बदलाव होता है।
मैंने बदला लिया इसका मतलब मुझे प्यार नहीं था
आज मैं बहुत खुश हूं उसे अपनी ज़िंदगी से बाहर फेंक कर।
(#Lara)