मोहब्बत तो मोहब्बत है - Part-5 Vandana thakur द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

मोहब्बत तो मोहब्बत है - Part-5

सभी के जाने के बाद आकाश ने हिती की तरफ नजरे उठाकर देखा, और उसके पास आकर वहां पडी चेयर पर बैठ गया ।

" क्या किया तुमने यह सब,? क्या मिला तुम्हें यह सब करके, मेरे प्यार का तुमने यह सिला क्यो दिया आकाश? तुम गौरी के पास कैसे जा सकते है,,? तुम तो मुझसे प्यार.........!!!!

हिती इससे आगे कुछ कहती आकाश ने उसे टोकते हुए सख्त लहजे से कहा-: सुनो हिती मेैं तुम्हें पहले भी कह चुका हू, अभी दोबारा कह रहा हूं,,, मै तुमसे प्यार नही करता हू,, तुम सिर्फ मेरी अच्छी दोस्त रही हो हमेशा से,,,!!

आकाश के मुंह से यह बाते सुनकर हिती को एक झटका लगा, वो ऐसा कैसे बोल सकता है ।

" तुम यह क्या कह रहे हो,,,? मै प्रेग्नेंट हू आकाश, मै तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हू,,,और दोस्तो के बीच यह सब नही होता है,,,!!!

" देखो हिती मै गौरी से प्यार करता हूं, और अब उसके साथ ही खुश हूं तुम अबोर्सन करवा लो, और किसी अच्छे लडके को देखकर उसके साथ अपनी लाइफ एन्जॉय करो...."

" यह तुम क्या कह रहे हो आकाश,,,तुम ऐसा कैसे कह सकते हो,,,?

" मुझे जो कहना था मै कह चुका हू और अब मै जा रहा हूं..! तुम अपने परिवार वालो और अविनाश को समझा देना तुम मेरे साथ नही रहना चाहती और बच्चे ता अबोर्सन करवा रही हो अगर तुमने ऐसा नही किया तो मुझे नही पता मै कर दूंगा, भले ही मै तुम्हें लूंगा पर तुम मेरी रखेल बनकर रहोगी, मै सिर्फ गौरी का हूं.....!!!

" तुम मेरी रखेल बनकर रहोगी,,,," यह लाइन हिती के दिल को चीर कर निकल गई थी, आकाश इतना कैसे बदल सकता है? वो ऐसा कैसे कर सकता है? इतना पत्थर दिल कब से हो गया वो? हिती की आंखो से आंसू झर-झर बह निकले ।

" तुम,,,,तुम,,,,यह क्या कह रहे हो,,,, हमारा प्यार,,,, हमारा रिश्ता तुम ऐसे कैसे खत्म कर सकते हो,,,,,? होश,,,, मै तो हो ना तुम,,,!! हिती ने रूंधी हुई आवाज मे कहा ।

" मै होश मे ही हूं,,,,और तुम अब अपना यह ड्रामा बन्द करो,,,,!! मुझ पर इसका कोई असर नही होगा,,, जब देखो तब आंसू बहाने लगती हो,,,,!!

" आकाश,,, उस रात हमारे बीच....!!

आकाश हिती की बात बीच मे काटते हुए-: क्या हमारे बीच,,, अब उस बात को इतना मत बढाओ,, हो जाता है कभी- कभी नशे में...!! अब बार- बार उस बात की जिक्र करके अगर तुम सोचती हो कि तुम मुझे अपना बना पाओगी, खुद के प्यार के जाल मे फंसा पाओगी तो यह नही होगा मैं यह बात क्लियर कर देता हूं,,, हिती मलखानी,,,,!! तुम्हारे पिता ने मुझे जितना सुनाना था सुना लिया है और मैने तुम्हारे कारण सभी सो थप्पड भी खा लिये है तुम्हारे यह आंसू बाकि सभी पर असर कर सकते है पर मुझ पर,,, मुझ पर इनका कोई असर नही होगा....."

आकाश की इतनी बेरूखी भरी बातें हिती के दिल के हजारो टुकडे करने के लिये काफी थी, हिती आकाश की जहर से भरी सुनकर टूट गई थी । आकाश ने एक पल मे ही उसके प्यार, उसकी विश्वास, उनके रिश्ते का इतनी बेदर्दी से गला घोंट दिया था आकाश ऐसा कुछ भी कर सकता है यह बात वो सपने मे भी नही सोच सकती थी ।

आकाश ने उसके चेहरे को गुस्से और गंभीरता से घूरकर देखते हुए चेयर से उठ खडा हुआ उसनें अपने जेब से कुछ पैसे निकालकर हिती मुंह पर मार देता है ।

" यह लो,,,यह पैसे पकडो, तुम जैसी लडकियां वैसे भी इसी चीज की भूखी होती है,,,,!! अमीरो लडको को प्यार के जाल मे फंसाकर उसके पैसो पर ऐश करना चाहती है बट लक्कीली मे बच गया, तुम्हारा यह नाटक मेरे ऊपर काम नही कर पाया क्योकि गौरी उसनें मेरी आंखो से तुम्हारे इस झूठे प्यार के नाटक की सच्चाई बताई तुम जैसी मिडल क्लास लडकियां कैसी होती है,,, यह पैसे पकडो और चाहिये हो तो बोल देना पर मेरे सीमने यह प्यार की नाटक अब कभी मत करना...क्योकि मै जा रहा हू तुम्हारी जिंदगी से,,,,," गुड बाय"....!!!

आकाश ने एक नजर हिती के चेहरे की तरफ देखा फिर वहां से बाहर निकल गया, हिती ने आकाश को जाते देखा तो वो दौडते हुए आकाश के पीछे हॉस्पिटल से बाहर आ गई ।

हिती आकाश को आवाज देते हुए उसको पुकार रही थी पर आकाश उसे नजरअंदाज करते हुए चला ही जा रहा था ।

हिती को इस तरह रोते हुए बाहर जाता देखकर अविनाश भी हिती के पीछे दौड पडा, आकाश सडक के दूसरी तरफ खडी जाकर टैक्सी रूकवाता है और उसमें बैठकर वहां से निकल जाता है, हिती उसे रोकते हुए टैक्सी को पीछे भागती है, उसनें हॉस्पिटल के कपडे ही पहने हुए थे, उसकी आंखो से लगीतार आंसू बह रहे थे वो नंगे पांव सडक के बीच मे आ खडी हुई और आकाश को पुकारनें लगी पर आकाश की टैक्सी सडक पर दौड चले जा रही थी ।

हिती आंसूओ से भरी आंखों से टैक्सी को जाते हुए देखती रह गई अविनाश हिती की तरफ देखता है जो सड़क के बीचो बीच खड़ी थी उसके आसपास से लगातार गाड़ी-मोटरे गुजर रही थी । तभी अविनाश की नजर सामने से आता एक कार पर पडी जो लगभग दुगनी तेजी से हिती की तरफ बढ रही थी, अविनाश ने एक तेज आवाज के साथ हिती का नाम पुकारा और उसकी तरफ दौड़ पड़ा, हिती ने पलट कर पीछे की तरफ देखा तो उसकी आंखें हैरानी से फैल गई वह कुछ करती पर तब तक वो कार हिती को टक्कर मारकर वहां से निकल जाती है ।

हिती बेजाम सी खून से लथपथ जमीन पर गिर पडी,,, उसके चारों तरफ खून ही खून फैल चुका था,,, अविनाश तेजी से दौड़ता हुआ हिती के पास आया और उसके सिर पर को अपनी गोद मे रखते हुए रोते हुए उसकी तरफ दोखने लगा ।

" यह,,,,, यह क्या हो गया हिती.......!!! अविनाश चीख पडा, वही हिती की आंखे भी बन्द हो गई थी ।

अविनाश ने हिती को अपनी गोद मे उठाया और तेज कदमो से हॉस्पिटल को अन्दर ले गया । सड़क के उस पार खड़े सूरज, गीता और मान्या यह नजारा देखकर कांप गए ।

गीता, मान्या और सूरज तीनों अविनाश के पीछे हॉस्पिटल मे आ गये ।

" डॉक्टर, डॉंक्टर,,,, हिती,,,, मेरी हिती को बचा लिजिये,,,,, इसका एक्सिडेन्ट हो गया है....!! देखिये बहुत खून भी निकल चुका है.....!! वहां से गुजर रहे डॉक्टर को रोकते हुए अविनाश, ने रोते हुए कहा ।

डॉक्टर ने हिती की तरफ देखा और तुरंत नर्स को स्ट्रेचर लाने को कहा ।

" जल्दी इसे यहां लेटाइये,,,!!

अविनाश ने हिती को वही स्ट्रेचर पर लेटाया। नर्स और डॉ. तेजी हिती को लेकर आईसीयू वार्ड में चले गए ।

" आप सभी यही रूकिये,,, इनका काफी खून चुका है हमे इनका ऑपरेशन करना होगा...!!! कहते हुए नर्स ने दरवाजा बंद कर दिया ।

गीता, सूरज के सीने से लिपट कर रो पड़ी।

" सूरज जी किसकी नजर लग गई हमें हमारे परिवार को,,,,,? क्या हो गया यह सब,,,? पहरे हिती का प्रेग्नेन्ट होना और अब उसका एक्सीडेन्ट,,,!!

सूरज भी अब कुछ नहीं कह पा रहे थे, उनका भी गला रूंध गया था, वह जितना हो सकता था कठोर बनने की कोशिश कर रहे थे पर थे तो वह भी एक पिता ही,,, अपनी बेटी को इतनी परेशानी और इस हालत में देखकर उनकी आंखों में भी तैर आयी थी ।

मान्या ने अपने आप को सम्भाला हुआ था, पर उसकी आंखो के किनारो से भी अब आंसू बह चले थे,,, हिती की यह हालत देखकर अविनाश, मान्या और हिती के माता-पिता पूरी तरह से टूट गए थे ।

अविनाश दरवाजे के शीशे से लगातार एकटक हिती को देख रहा था । उसकी आंखो से आंसू सुख चुके थे । पर वो अन्दर ही अन्दर टूट गया था ।

आई.सी.यू. में अभी भी हिती का ऑपरेशन चल रहा था करीब पांत घण्टो से ऑपरेशन जारी था,

कुछ घण्टो बाद डॉ. आई सी यू से बाहर आते है तो सूरज, गीता और अविनाश उनकी तरफ दौड पडते है ।

" डॉ. मेरी बेटी कैसी है वो ठीक तो है ना...?

" डॉ. हिती को होश आ गया है ना....??

" डॉ.,,हमे उससे मिलना,,,डॉ. मै हिती को देखना चाहता हू...."

गीता, सूरज और अविनाश ने एक के बाद एक सवालो की झडी लगा दी ।

" सॉरी टू से पर हम केवल पेशेंट को बचा पाए, उनका बच्चा,, हम उसे नही बचा पाये,,, पेसेन्ट का काफी खून भी बह गया तो, बच्चे को बचा पाना बहुत मुश्किल था..." डॉक्टर ने निराशा भरे स्वर में कहा ।

सूरज, गीता, मान्या और अविनाश सभी के चेहरे का रंग उड चुका था, गीता और मान्या को तो रोना ही आ गया था, वही अविनाश की आंखो से भी आंसू छलक पडे, सूरज ने गीता को सम्भाला हुआ था पर अंदर ही अंदर वह भी बहुत दुखी थे ।

" हिती को होश आ गया क्या....?? सूरज ने गीता को संभाले हुए डॉ. से पूछा ।

" नहीं अभी वो बेहोश है रात तक उन्हें होश आ जाएगा वरना कल सुबह,,, अभी उन पर दवाइयों का असर है आप सब उन्हें आराम करने दीजिए,,"

डॉक्टर ने क्या कहा और वहां से चले गए । अविनाश दीवार के सहारे जाकर खड़ा हो गया सूरज और गीता दरवाजे के पीछे से अंदर बैड पर बेहोश हिती को देख रहे थे ।

मान्या, अविनाश के पास आयी ।

" अविनाश यह सब क्या हो रहा है किसी का एक्सीडेंट कैसे हो गया अपना बच्चा खो दिया है जिसके बारे में उसे आज ही पता चला था , जब वह होश में आएगी तो क्या जवाब देंगे हम उसे,,,,,!! मान्या ने आंखो में नमी लिए हुए अविनाश से कहा ।

" मैं नहीं जानता यार हम क्या जवाब देंगे और ना जाने आकाश ने क्या कहा है? उससे उसके पीछे ही दौड़ती हुई गई थी और फिर सामने से आती सामने ने उसे,,,,!!! अविनाश ने इतना ही कहा कि उसका गला रूंध आया । वह आगे कुछ नहीं बोल पा रहा था उसने अपनी आंखें बंद की आंसुओं की दो बूंदे उसके गालों पर लुढ़क आई ।

मान्या अविनाश मैं अविनाश की हालत देखी तो उसके कंधे पर हाथ रखते हुए उससे कहा-: तुम मत रोओ,,, एक मैं और तुम ही तो है उसे संभालने के लिए,,,, हमें खुद को मजबूत रखना होगा इस समय,,,, आंटी भी पूरी तरह से टूट चुकी है अंकल भी अन्दर - अन्दर टूट गये है पर वो दिखा नही रहे है....."

" हम्म,,,,!! अविनाश ने इतना कहा और अपने आंसू साफ किये ।

माऩ्या भी कुछ देर बाद गीता और सूरज के पास जाकर, बैंच पर बैठ गयी । अविनाश चुपचाप एक कोने मे हाथ बांधे खडा था ।

रातभर, हिती को होश नही आया, सभी उसके होश मे आने का इंतजार कर रहे थे, डॉ. ने उन्हे घर जाने को भी कहा, पर इस वक्त कोई भी हिती को अकेला छोडकर वहां से नही जाना चाहता था इस कारण सभी ने अपनी रात हॉस्पिटल मे ही काटी, सूरज अक पुलिस अधिकारी थे इस कारण डॉ. ने भी सभी को हॉस्पिटल मे अनुमति दे दी थी ।


To be continue.........