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पिया मिलन..

सुबह...सुबह का वक्त था,जमुना अपना द्वार बुहार रही थी तभी उसकी सहेली और पड़ोसन अनुसुइया आकर बोली....
जमुना ....ओ...जमुना! कुछ सुना तूने! तेरा देवर रामादीन आज तड़के मर गया...
कैसैं?जमुना ने पूछा।।
रात मेले में गया था और उसने वहाँ सारी रात सारंगी बजाई और विरह के गीत गा गाकर बहुत रोया,मेले में ठंड बहुत थी और वो बिना गरम कपड़ो के था,उसे लोगों ने शाँल भी ओढ़ाई तो उसने शाँल ना ओढ़ी और लोगों से बोला...
भइया!मेरा दिल जलता है,इसलिए इस ठंड का मुझे कोई एहसास नहीं हो रहा....
सुबह जब वो घर लौटा तो लेटते ही उसे बहुत तेज का ताप चढ़ा और कुछ देर बाद उसने प्राण त्याग दिए...
ये सुनकर जमुना की आँखें झपने लगी और फिर उसने खुद को सम्भालने की कोशिश की फिर वो अपने घर के भीतर गई और एक लोटा लेकर वापस लौटी और अनुसुइया से बोली...
मेरे साथ पोखर पर चलेगी...
लेकिन क्यों?अनुसुइया ने पूछा...
मुझे स्नान करना है,ना जाने क्यों घबराहट सी हो रही है?
अच्छा!चल !मैं तुझे पोखर पर ले चलती हूँ और फिर इतना कहकर अनुसुइया जमुना को पोखर पर स्नान के लिए ले गई,स्नान करने के बाद जमुना घर आई और उसको बहुत तेज ताप चढ़ गया फिर वो बिस्तर पर लेट गई,अनुसुइया कुछ देर में फिर से जमुना से ये कहने आई कि....
चल!तेरे बेटों ने तुझे बुलाया है,तेरे देवर की अर्थी उठने वाली है,
मैं उस घर ना जाऊँगी अनुसुइया!मेरे दोनों बेटों और बहुओं ने मुझे घर से निकाल दिया,मेरा सब छीन लिया, मैं उस घर में अब पग भी नहीं रख सकती,जमुना बोली।।
तो अपने देवर रामादीन की खातिर ही चली जा,उससे तो तेरा कोई बैर नहीं है,अनुसुइया बोली....
सबसे बड़ा बैर तो मुझे उसी से है,मैं तो उसकी शकल ही नहीं देखना चाहती,धोखेबाज कहीं का,जमुना बोली।।
मरे हुए आदमी के लिए ऐसे बोल ना बोल जमुना! पाप लगेगा....पाप....,अनुसुइया बोली।।
तुझे कुछ नहीं पता,तू उसकी ज्यादा तरफदारी मत कर,जमुना बोली।
क्यों ऐसा क्या हो गया जो तू अपने देवर से इतना चिढ़ती है?अनुसुइया ने पूछा....
तो सुन मैं तुझे आज सब बताती हूँ और इतना कहकर जमुना ने अनुसुइया को अपनी कहानी बतानी शुरू की....
बहुत समय पहले मेरे देवर रामादीन का परिवार और मेरा परिवार नाच गाकर अपना पेट पालते थे,मैं अच्छा नाचती थी और रामादीन अच्छी सारंगी बजाता था और गाता भी था,मेरे अच्छा नाचने और रामादीन के अच्छा गाने से दोनों परिवारों ने एक पार्टी बना ली,इससे हमें मुनाफा अधिक होने लगा और इसी बीच मुझे सोलह साल की उम्र में रामादीन से प्रेम हो गया,वो भी मेरे ऊपर जान छिड़कता था,हम दिल से नाचते गाते थे,हमारे साथ नाचने गाने की खुशी हमारे चेहरे पर दिखाई देती थी,यूँ ही नाचते गाते दिन बीत रहे थे,हमारी पार्टी बैलगाड़ियों से एक गाँव से दूसरे गाँव जाती,लेकिन हमारे इस प्रेम के बारें में हमारे घरवालों को पता ना था,हम दोनों सोच ही रहे थे कि अब हम अपने घरवालों को अपने प्रेम के बारें में बता दें और तभी रामादीन के पिता ने रामादीन के बड़े भाई से मेरा सम्बन्ध करने की बात मेरे बापू से कही तो मेरे बापू झट से मान गए और उन्होंने मुझे सहमति लेने की आवश्यकता भी नहीं समझी.....
मैं उस दिन खूब रोई और रात को मैनें रामादीन को मिलने के लिए एक खेत में बुलाया और उससे कहा...
रामा!मैं ये ब्याह हरगिज़ ना करूँगीं,मैं तो तुझसे प्रेम करती हूँ,
मैं भी तुझसे प्रेम करता हूँ जमुना!रामादीन बोला।।
तो फिर अपने बापू से बात क्यों नहीं करता?मैनें रामा से कहा....
तब रामा बोला.....
मैं अपने बापू का सगा बेटा नहीं हूँ,अनाथ था और उन्होंने मुझे पाल पोसकर बड़ा किया है,मैं उनसे धोखा नहीं कर सकता ,मेरी प्यारी जमुनी!
तो क्या मुझसे धोखा करेगा?मैनें गुस्से से पूछा।।
ना!जमुनी!ये धोखा नहीं है,मैं तो बस अपने बापू का करज उतारना चाहता हूँ,मुझे समझने की कोशिश कर पगली!मेरी प्रीत तेरे लिए कभी खत्म ना होगी,मैं मरते दम तक ब्याह ना करूँगा,बस तू ही मेरे दिल में रहेगी और इतना कहकर वो फूट फूटकर रो पड़ा....
तब मैं बोली.....
रामा!मत छोड़ मुझे!मैं तेरा बिना ना जी पाऊँगी,मैं तुझे बहुत चाहती हूँ,चल हम यहाँ से भाग चलते हैं,फिर अपनी एक दुनिया बसाऐगें,
ना पगली!भागने की बात मत कर,जिस बाप ने तुझे पालपोसकर इतना बड़ा किया है,तू उसकी इज्जत पर बट्टा लगाऐगी,मैं ऐसा नीच़ काम हरगिज़ नहीं कर सकता,रामा बोला।।
तू मुझसे प्रेम भी करता है और भगाकर भी नहीं ले जाना चाहता,ये कैसा प्रेम है तेरा!मैं कोई खेलने की चींज हूँ कि जब मुझसे तेरा मन भर गया तो किसी और थमा दे,मैं गुस्से से बोली....
इतना सुनकर रामा ने मेरे गाल पर थप्पड़ मार दिया और बोला.....
मेरा मन नहीं भरा है तुझसे,तू मेरे दिल में सदा रहेगी,मैं कसम खाता हूँ कि जब मैं मरूँगा तो मेरे होठों पर बस तेरा ही नाम होगा,मैं मजबूर हूँ मुझे मेरा धरम निभाने से मत रोक जमुनी!मैं तेरे पैर पड़ता हूँ और वो फिर फूट फूटकर रो पड़ा और उस रात मैं भी उससे लिपटकर खूब रोई,फिर मेरा ब्याह उसके बड़े भाई से हो गया और रामा ने तब हमसे दूर रहना शुरू कर दिया,उसने खेतों में झोपड़ी बना ली,वो अपनी छाया भी मुझ पर ना पडने देता,उसने ब्याह भी ना किया,बस रातों को सारंगी बजाकर विरह के गीत गा गाकर रोया करता,ये सब खेतों में रह रहे लोंग बतातें थे....
मैनें अपने दो बेटों को जन्म दिया,जब बड़ा बेटा चार साल का था और छोटा दो साल का दो मेरा पति बहुत बीमार पड़ा,वो गाँजा बहुत पीता था,बहुत इलाज करवाया लेकिन वो ठीक ना हुआ और कुछ ही महीनों में वो भगवान के पास चला गया,पति के जाने के बाद मेरे सास ससुर ने रामादीन से कहा कि वो मुझसे ब्याह कर लें लेकिन वो नहीं माना,तब मैनें एक रात उससे कहा.....
रामा!अब तो हमारा ब्याह हो सकता है ना!
तो वो बोला....
मैं देवर भाभी के रिश्ते को कलंकित नहीं कर सकता,मेरी प्रीत अमर है और मैं तुझे पाऊँ या ना पाऊँ उससे मुझे कोई फरक नहीं पड़ता,तू मेरी आत्मा में बसती है मैं तेरा बदन लेकर क्या करूँगा?
उसकी बात सुनकर मैं रो पड़ी और बोली....
अब मैं तुझसे जिन्दगी भर बात नहीं करूँगीं और मैनें आज तक उससे बात नहीं की,वो तब भी खेतों में ही रहता,वो वापस घर तब आया जब मेरी बहुओं ने मुझे घर से निकाल दिया और बेटों ने सब छीन लिया,मैं उस घर से यहाँ रहने आ गई तो वो उस घर में पहुँच गया,
और कल रात भर उसने मेरी याद में विरह गाया ,आज वो फिर से एक बार मुझे अकेला छोड़कर चला गया,ये कहते कहते जमुना हाँफने लगी और उसे खाँसी होने लगी..
अनुसुइया ने उसे जल्दी से पानी पिलाया और बोली.....
का हुआ तबियत ठीक नाही है का?
तब जमुना बोली...
तबियत तो मेरी तभी खराब हो गई थी जब मैनें रामा के मरने की खबर सुनी थी,इसलिए तो स्नान करने गई थी,उसके बाद ताप चढ़ गया,सच तो ये है कि मुझे अब जीने की इच्छा ही नहीं है,रामादीन इस दुनिया में है,मैं यही सोच सोचकर जी रही थी और आज वो निर्मोही मुझे छोड़कर चला गया तो फिर मैं भी यहाँ रहकर क्या करूँगी ,मुझे भी पिया मिलन को जाना है और इतना कहकर जमुनी ने प्राण त्याग दिए.......
तब अनुसुइया आँखों में आँसू लिए बोली....
मैनें ऐसी प्रीत कहीं ना देखी,दोनों एकदूसरे को इतना चाहते थे वो भी दूर दूर रहकर,जमुना....जा....तू अपने पिया से मिलने,अब तुझे तेरे पिया मिलन से ये जमाना रोक नहीं पाएगा....

क्रमशः....
सरोज वर्मा......



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