नकाब - 25 Neerja Pandey द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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नकाब - 25

भाग 25

पिछले भाग में आपने पढ़ा की रश्मि और सुहास शादी के बाद एक दूसरे को अपनाने की पूरी कोशिश करते है। बस मन में आशंका है तो एक ही बात की कि क्या होगा जब अतीत सामने आ जाएगा..? अब आगे पढ़े

धीरे धीरे ही सही रश्मि का मन सुहास के घर में लगने लगा। वो पूरी कोशिश कर रही थी इस घर परिवार को अपनाने की। आखिर जो कुछ हुआ उसके साथ उसमे सुहास के परिवार की तो कोई गलती नही थी। फिर उन्हे सजा क्यों दी जाए..? मन में डर था तो बस एक बात का कि जब प्रभास के सामने ये सच्चाई आयेगी तो वो उसका सामना कैसे करेगा..? वो खुद अतीत और वर्तमान के साथ कैसे रहेगी..?

रश्मि लीला के साथ रसोई में कुछ न कुछ सीखने की इच्छा जाहिर करती। पर लीला ये कहते हुए मना कर देती, "तू तो अभी नई नई बहू है। अभी तेरा ये सब करनें सीखने का समय नहीं है। अभी तो बेटा तुम खूब सजो सवरों, घूमो फिरो, खाओ पियो। अभी से जिम्मेदारी उठाने की कोई जरूरत नही है। मैं हूं ना ये सब संभालने को। तुम बस खुश रहो। मेरे कोई बेटी नही दी थी भगवान ने। मुझे हमेशा उनसे ये शिकायत रहती थी। पर अब नही है। उन्होंने सूद समेत वो कमी पूरी कर दी। इतनी प्यारी बेटी दे कर भगवान ने मेरी सारी शिकायत दूर कर दी।"

जहा सास बहू को परेशान करती है, सताती है। वही लीला का इतना प्यार देख रश्मि अपने को खुश नसीब समझती। जो सास नही बल्कि एक मां बन कर उसे अपनाया था। एक बेटी जैसा प्यार दिया था। लीला देवी का प्यार देख कर रश्मि के जेहन में प्रभास की बात घूम जाती जाती। वो कहता था कि तुम्हारी मां नही है रश्मि कोई बात नही। मेरी मां से मिलोगी तो तुम्हें कभी मां की कमी नही महसूस होगी। आज प्रभास की बात सौ प्रतिशत सही साबित हो रही थी। मां के प्यार के लिए तरसी रश्मि को सास के रूप में ममतामई मां मिल गई थी। जिसकी ठंडी छांव में वो निश्चिंत हो कर रह सकती थी।

रश्मि की शादी को एक महीने से ज्यादा हो गया था। वो और सुहास अब एक दूसरे को काफी कुछ जानने समझने लगे थे। सुहास सुबह जल्दी उठ जाता था। वो बैठ कर न्यूज पेपर पढ़ रहा था। रोज की अपेक्षा रश्मि आज देर तक सो रही थी। पर उसे कोई नही टोकता था, जब चाहे जागे, जब चाहे सोए। इस लिए सुहास भी इस और ध्यान नहीं दे रहा था।

रश्मि की लगा की वो आज देर तक सो रही है। उसने उठने की कोशिश की। पर रात भर सोने के बावजूद उसे थकान सी लग रही थी। रश्मि ने अपने कपड़े ठीक किए और बिस्तर से खड़ी होने लगी। पर उसे इतनी तेज चक्कर आया की वो अपना सर थामे फिर से बिस्तर पर बैठ गई। सुहास जो वही कुर्सी पर बैठा सब कुछ देख रहा था। वो उठा और रश्मि के पास आ कर बिस्तर पर बैठ गया। रश्मि के माथे पर हाथ रख कर प्यार से पूछा, "क्या हुआ रश्मि ..? तबियत ठीक नहीं लग रही क्या..?"

रश्मि थके हुए स्वर में बोली, "पता नहीं क्यों सुहास..? मुझे थकान सी महसूस हो रही है। और अभी उठी तो तेजी से चक्कर आ गया।"

सुहास ने रश्मि का माथा छू कर बुखार पता करने की कोशिश की। फिर बोला, "माथा तो गरम नही है। बुखार नही लग रहा।"

फिर थोड़ा रुक कर बोला, "रश्मि तुम ऐसा करो जाओ ब्रश कर के आओ। कुछ खा पी लो तो दवा दे देता हूं। शाम तक आराम हो जायेगा। मैं मंजू को बुला देता हूं। वो तुम्हे बाथ रूम जाने में मदद करेगी।"

इतना कह कर सुहास मंजू को आवाज लगाने लगा, और सहारा देकर रश्मि को उठने में मदद की।

सुहास की आवाज सुन मंजू भागी भागी आई। फिर सुहास के कहे अनुसार रश्मि को ब्रश करने के लिए बाथ रूम की ओर चली गई।

रश्मि के जाते ही सुहास मां के पास रसोई में गया। रसोई में सुहास को देख लीला ने हंसते हुए पूछा, "क्या चाहिए बेटा..? कुछ खास खाना है..? या फिर चाय चाहिए।"

"नही मां ..! मुझे कुछ नही चाहिए। वो रश्मि की तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही। उसे खाली पेट दवा कैसे दूं..? इस लिए उसे कुछ खाने को दे दो। यही बोलने आया हूं।" सुहास मां से बोला।

सुहास के मुंह से रश्मि की तबियत की बात सुन कर लीला चिंतित हो गई। वो बोली, ", अरे…! क्या हो गया रश्मि को..? अच्छा तू चल उसके पास बैठ। मैं कुछ खाने पीने को ले कर आती हूं।"

"ठीक है मां।" कह कर सुहास अपने कमरे में चला गया।

जब तक रश्मि ब्रश कर के मंजू के साथ आई, लीला देवी भी रश्मि के लिए पाव और चाय ले कर आ गई।

रश्मि से तबियत के बारे में पूछा, क्या हो गया मेरी बहू रानी को..? जरूर किसी की नजर लग गई होगी। अभी तू नाश्ता कर के दवा खा ले। फिर शाम को तेरी नज़र उतार दूंगी मैं।"

रश्मि ने चाय और पाव खाया और सुहास की दवा खा कर सास लीला देवी के कहने पर लेट गई। रश्मि आंखे बंद किए लेटी हुई थी। रसोई संभालने के लिए लीला ने मंजू को भेज दिया और खुद रश्मि के बगल बैठी रही। उसके दुग्ध धवल हाथो को संतावना के तौर पर सहलाने लगी। वो रश्मि के हाथो को सहलाते हुए सोच रही थी, कितने मुलायम..? कितने सुंदर हाथ है इसके। कितनी कोमल है..? हो भी क्यों ना बड़े घराने की बेटी है,राजकुमारी सी पली है। जरा से में ही निढाल हो गई।

फिर मन में ख्याल आता है लीला देवी के कि इतनी नाजुक है की जरा सा चक्कर नही सह जा रहा इससे। जब ये मां बनेगी तब ये कैसे बर्दाश्त कर पाएगी.? ये सोच कर लीला को थोड़ी सी घबराहट हुई।

अभी नाश्ता और दवा खाए रश्मि को कुछ ही मिनट हुए थे की वो फुर्ती से उठी और अपना मुंह हाथो से दबाए बाथ रूम की ओर भागी। रश्मि के पीछे पीछे लीला भी भागी।

बाथ रूम में जा कर रश्मि ने को कुछ भी खाया था सब उल्टी कर दिया। लीला रश्मि की पीठ सहलाती रही। फिर हाथ मुंह धुलवा कर कमरे में ले आई। बाथ रूम से वापस आते हुए लीला के दिमाग में कुछ और चलने लगा। उसे अब रश्मि की उल्टी का कारण कुछ कुछ समझ में आ रहा था। पर पूरा यकीन होने के लिए डॉक्टर को दिखाना जरूरी था। लीला को सपने में भी आशा नहीं थी की इतनी जल्दी उसके अरमान पूरे होंगे।

लीला सुहास से कहती है, "बेटा..! मुझे लगता है रश्मि बहू को गाजीपुर के सिटी हॉस्पिटल में दिखाना चाहिए। तू आज क्लिनिक मत जा। चल बहू को डॉक्टर को दिखा कर लाते हैं।"

सुहास कहता है, "पर मां एक उल्टी ही तो हुई और थोड़ा चक्कर आ रहा है। इसमें बाहर दिखाने की क्या जरूरत है..? पूरे आस पास के गांव का इलाज मैं करता हूं और आप अपनी बहु को जरा सी बीमारी में शहर दिखाने ले जाओगी। क्या कहेंगे लोग..? आप तो मेरी प्रैक्टिस ही बंद करा दोगी।" सुहास मां से हंसी करता है।

लीला सुहास को डांटते हुए कहती है, "मैं कुछ नहीं जानती। बस चलना है तो चलना है।" फिर रश्मि की ओर देख कर उससे कहती है, "मैं तैयार होने जा रही हूं। रश्मि बेटा तू भी तैयार हो जा। और सुहास तू भी जल्दी कर।

क्या सुहास रश्मि और लीला को लेकर डॉक्टर को दिखाने शहर गया..? आखिर क्या हुआ था रश्मि को..? क्या कहा डॉक्टर ने..? ये सब जानने के लिए पढ़े सच उस रात का अगला भाग।

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