रजनीगन्धा के फूल Saroj Verma द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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रजनीगन्धा के फूल

उसने फूलों की एक शाँप से रजनीगन्धा का बुके लिए और फिर से अपनी कैव में जा बैठा....
तब कैवड्राइवर ने पूछा...
साहब! ये फूल किसके लिए हैं ?
हैं किसी ख़ास के लिए,उसने जवाब दिया।।
ख़ास तो महबूबा ही होती है,कैवड्राइवर बोला।।
बस,ऐसा ही कुछ समझ लों,उसने जवाब दिया।।
और फिर वो कुछ नहीं बोला,बस चुपचाप ही बैठा रहा,कैवड्राइवर कुछ पूछता तो वो हाँ या ना में जवाब दे देता,कुछ ही देर में वो स्टेशन पहुँच गया और कैव का किराया देकर ,अपना सामान और फूल लेकर प्लेटफार्म पर आकर अपनी ट्रेन का वेट करने लगा कुछ ही देर में ट्रेन आ गई और वो ट्रेन में चढ़ गया फिर अपनी बर्थ पर आकर बैठ गया उसका रिजर्वेशन थर्ड ए.सी.में था,कुछ ही देर में एक महिला भी उसके कम्पार्टमेंट आई जो कि उसके सामने वाली सीट पर आकर बैठ गई,पहले तो उसने उसे स्माइल पास की और फिर उसने उसे अपना परिचय कुछ इस प्रकार दिया....
हाय!आय एम सुरभि अग्रवाल।।
वो बोला,
हैलो! आय एम कपिल गुप्ता।।
जी !कहाँ तक जा रहे हैं आप,सुरभि ने पूछा।।
जी,दिल्ली तक जा रहा है,कपिल बोला।।
जी,वहाँ रहते हैं या कोई ख़ास काम है,सुरभि ने पूछा।।
जी!ख़ास काम से ही जा रहा हूँ,मैं यही आगरा में रहता हूँ,ट्रेवल एजेंसी में काम करता हूँ,कपिल बोला।।
ओह...बहुत बढ़िया,मैं तो दिल्ली में रहती हूँ,ब्यूटीपार्लर चलाती हूँ,यहाँ आगरा बहन से मिलने आई थी,सुरभि बोली।।
जी बहुत ही बढ़िया,कपिल बोला।।
कुछ ही देर में ट्रेन चल पड़ी और फिर सुरभि को छींक सी आई,उसने फिर कपिल की सीट पर देखा कि रजनीगन्धा के फूल रखें हैं तो वो बोली....
सोरी! अगर आपको बुरा ना लगें तो ये फूल आप ऊपर वाली सीट पर रख दें अभी तो वो खाली है,मुझे रजनीगन्धा के फूलों से एलर्जी हैं।।
ओह....जी! मैं रख देता हूँ अब आपको तकलीफ़ नहीं होगी,कपिल बोला।।
फिर कपिल ने वो फूल ऊपर की सीट पर रख दिए और फिर सुरभि ने कपिल से पूछा...
चाय पिऐगें आप!
चाय कहाँ मिलेगी इस वक्त,ट्रेन तो चल रही है,कपिल बोला।।
जी! मैं संग लाई हूँ,सुरभि बोली।।
जी! शुक्रिया ! स्टेशन पर लिखा था कि किसी अन्जान का दिया हुआ कुछ ना खाएं ,कुछ ना पिएं,कपिल बोला।।
ये सुनकर सुरभि हँस पड़ी और बोली....
कोई बात नहीं,मैं पी लेती हूँ।।
आप चाय का आनन्द उठाइए,मुझे कोई भी आपत्ति नहीं,कपिल बोला।।
क्या मैं जान सकती हूँ कि ये फूल आप किसके लिए ले जा रहें हैं,सुरभि ने पूछा।।
जी! है कोई जो हाँस्पिटल में अन्तिम साँसें ले रहा है,उसे रजनीगन्धा के फूल बहुत पसंद हैं उसी के लिए ले जा रहा हूँ,ब्लड कैंसर से लड़ रही है बेचारी,कपिल बोला।।
ओह....सो साँरी! तो क्या वो आपकी रिश्तेदार है, सुरभि ने पूछा।।
जी!नहीं! क्लास मेट थी मेरी स्कूल में,फिर काँलेज में भी साथ रहा,फिर मेरी नौकरी लग गई और मैं विदेश चला गया,वहाँ मैने शादी कर ली,फिर सालों के बाद अब उससे मिलूँगा,कपिल बोला।।
तो उनकी भी फैमिली होगी,बच्चे होगें,सुरभि ने पूछा।।
जी! उसने शादी ही नहीं की,कपिल बोला।।
लेकिन क्यों? सुरभि ने पूछा।।
वो किसी को चाहती थी और वो उसका ना हो सका,कपिल बोला।।
क्या वो भी उसे चाहता था? सुरभि ने पूछा।।
उसे तो पता ही नहीं था कि वो उसे चाहती है,कपिल बोला।।
वो शख्स था कौन? जिसे वो चाहती थीं,सुरभि ने पूछा।
जी! वो मैं ही था,वो मुझे चाहती थी,कपिल बोला।।
ओह....,अब क्या बोलूँ? क्या मैं उनका नाम जान सकती हूँ? सुरभि बोली।।
जी!अब कहने के लिए कुछ बचा ही नहीं है वो मेरा कब से इन्तज़ार कर रही है?उसका नाम रजनीगन्धा है,कपिल बोला।।
जी! भगवान उन्हें हिम्मत दे उनकी बिमारी से लड़ने के लिए,सुरभि बोली।।
जी! बहुत रात हो चुकी है,अब मैं थोड़ा आराम कर लेता हूँ,ट्रेन सुबह पाँच बजे तक पहुँच जाएगी,कपिल बोला।।
जी! जरूर ,मैं भी सो जाती हूँ,सुरभि बोली।।
और दोनों कुछ ही देर में अपना अपना बिस्तर लगाकर लेट गए,सुरभि तो सो गई लेकिन कपिल ना सो सका,सुबह वो पहले ही जाग चुका था,दिल्ली आने के पहले सुरभि के मोबाइल का अलार्म बज उठा और वो भी जाग उठी।।
कुछ ही देर में दिल्ली आ गया और वें दोनों एक दूसरे को अलविदा कहके अपने अपने गन्तव्य की ओर चले गए।।
कपिल हाँस्पिटल पहुँचा और वो उदास सा रजनीगन्धा के कमरें में पहुँचा उसे देखते ही रजनीगन्धा के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई,कपिल ने उसे फूल थमाते हुए कहा कि....
रजनीगन्धा के ये फूल तुम्हारे लिए..
कपिल को अपनी आँखों के सामने देखते ही रजनीगन्धा ने दम तोड़ दिया,शायद उसे कपिल का ही इन्तज़ार था,उसकी एक झलक पाते ही वो इस दुनिया से अलविदा कह गई।।

समाप्त...
सरोज वर्मा.....