अंत... एक नई शुरुआत - 12 निशा शर्मा द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

अंत... एक नई शुरुआत - 12

गर्मियों की छुट्टियाँ खत्म हुईं और आज मैं अपने बेटे और मेरे स्कूल के नये स्टूडेंट,सनी के साथ स्कूल जा रही हूँ । इतनी लम्बी छुट्टियों के बाद स्कूल का पहला दिन सचमुच बहुत ही अच्छा लगता है । सबकुछ नया-नया सा और खिला-खिला सा ! हर एक को एक-दूसरे से इतने दिनों बाद मिलने की उत्सुकता और खुशी होती है । आज स्कूल में सनी को मेरे बाकी सारे स्टाफ़ ने यानि कि मेरे सभी सहयोगी-अध्यापक तथा अध्यापिकाओं नें हाथों-हाथ लिया । सनी इस सबसे बहुत खुश था । वो सभी के मुँह से बस यही सुन रहा था कि वो सुमन मैम का बेटा है जिस कारण सभी टीचर्स तथा अन्य हेल्पिंग-स्टाफ़ उसका कुछ खास ख्याल रख रहे थे मगर मुझे ये बात नागवार गुज़री और मैंने एक फैसला किया जिसके तहत मैंने अपने सारे टीचिंग-स्टाफ को निवेदन करके स्टाफ-रूम में इकट्ठा किया और उन सबको अपने मन की बात बताई कि मैं अपने बच्चे के लिए इस स्कूल में कोई भी या किसी भी तरह का स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं चाहती हूँ क्योंकि इस बात का जितना गलत असर क्लास के अन्य बच्चों पर पड़ेगा उतना ही दुष्प्रभाव सनी पर भी होगा । कहीं वो आप सबके प्रेम और अपनेपन का फायदा न उठाने लगे जिसकी आड़ में वो एक विद्यार्थी के अनुशासन को भी भंग कर सकता है जो कि किसी भी लिहाज से हमारी इस संस्था के लिए,हम सबके लिए और स्वयं उसके लिए भी ठीक नहीं होगा। मेरी इन सभी बातों को ध्यान और धैर्य से सुनने के बाद न कि उन सबनें मेरे इस प्रस्ताव को माना ही बल्कि इसके लिए उन सबनें मेरी प्रशंसा भी बहुत की ! सच आज सुबह स्कूल पहुंचने के कुछ देर बाद से ही मैं जिस ऊहापोह की स्थिति में खुद को फंसा हुआ महसूस कर रही थी अब इस मीटिंग के बाद मैं खुद को बेहद सुलझा हुआ तथा तनावमुक्त पा रही थी। अब मुझे सनी के लिए इस स्कूल को लेकर कोई भी शंका शेष नहीं बची थी ।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और अब सनी ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि तथा अपनी मासूम फितरत के कारण सभी टीचर्स के बीच खुद ही अपनी एक पहचान बना ली थी और सबसे अच्छी बात कि इस कड़ी में उसे मेरे परिचय का कहीं भी मोहताज नहीं होना पड़ा । एनुअल एग्जाम की रिपोर्ट आने के बाद तो प्रिंसिपल मैम नें भी सनी की प्रशंसा करते हुए उसे बहुत ही प्रोत्साहित किया । अब मैं सनी को लेकर काफी हद तक चिंतामुक्त थी ।

आज ऑस्ट्रेलिया से पूजा का फोन आया और उसनें मुझे एक बहुत बड़ी खुशखबरी दी जिसे सुनकर मैं खुशी से उछल पड़ी।पूजा पूरे आठ सालों के बाद माँ बनने वाली थी। वो बहुत ज्यादा खुश थी और मैं भी अपनी सहेली के लिए बहुत-बहुत खुश थी।मैंने आलोक से भी बात की,वो भी बहुत खुश था।और भला खुश कैसे न होंं इतने लम्बे इंतज़ार और हर तरह की दवाओं और दुआओं के बाद उन्हें ये खुशनुमा पल जो नसीब हुआ था।पूजा ने मुझे बताया कि उसकी डिलीवरी-डेट डॉक्टर नें अगले तीन महीने के बाद यानि कि नवंबर की दी है और उसनें मुझसे ये वादा लिया कि जब उसका बेबी होगा तब मैं उसके पास ऑस्ट्रेलिया जाऊँगी । उसनें मेरे लिए पासपोर्ट-वीजा वगैरह का इंतजाम करने की जिम्मेदारी भी ले ली और उसनें इसके लिए आलोक से मेरे सामने ही बात भी कर ली। इसके अलावा उसनें मुझसे ये भी कहा कि जब उसके सास-ससुर यहाँ से उसके पास आयेंगे तब ही मैं और सनी भी उनके ही साथ आ जायें।उसके इस विचार के बाद मैं उससे ये बहाना भी नहीं कर सकती थी कि मैं अकेले नहीं आ पाऊँगी और शायद इसीलिए उसनें ये प्रस्ताव मेरे सामने रखा था। ऐसा नहीं कि मैं उससे मिलना नहीं चाहती थी या मैं उसकी खुशियों में शामिल नहीं होना चाहती थी मगर मैं उसके इस पहले शुभ काम में नहीं जाना चाहती थी क्योंकि इससे पहले भी इस तरह के कई अनुभव मुझे मेरी रिश्तेदारी में मिल चुके थे।हालांकि उसके सास-ससुर इस तरह की नकारात्मक और दकियानूसी सोच से काफी दूर रहते थे और मैं ये भी बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ कि वो मेरे साथ ऐसा कुछ भी गलत बर्ताव नहीं करेंगे मगर फिर भी आखिर हैं तो वो भी इंसान ही न और रहते भी इसी समाज मे हैं । और फिर एक बार को मैं खुद भी डर जाती हूँ कि कहीं मेरी बहन जैसी सहेली की ज़िंदगी में इतने लम्बे इंतज़ार के बाद आयी हुई खुशियों को मेरी ही नज़र न लग जाये। मगर एक बार को मैं ये सब भूलकर पूजा के पास जाने को राज़ी हो भी जाऊँ तो भी एक और बड़ा कारण है जो कि मुझे इस घर से कुछ दिनों के लिए बाहर जाने की बिल्कुल भी इजाज़त नहीं देता और वो हैं ऊषा देवी और दिन पर दिन गिरता हुआ उनका स्वास्थ्य !

वो अब मेरी ही ज़िम्मेदारी हैं और इस बात से मुझे कोई तकलीफ़ भी नहीं है । अब वो काफी वृद्ध हो चुकी हैं और इस अवस्था में मैं उन्हें एक रात के लिए भी अकेला नहीं छोड़ सकती । अभी पिछले महीने ही मैंने उनका रूटीन-चैकअप करवाया था जिसमें उनका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ आया था और उनको उच्चरक्तचाप की समस्या तो समीर के सामने से ही थी तो उसके चलते भी अब उनकी दवाइयाँ नियमित रुप से वो रोज़ ही लेती हैं । अब अगले सोमवार का ही मैंने उनका डॉक्टर का अपॉइंटमेंट भी बुक कर रखा है । पर मेरी इन बातों को समझना पूजा के लिए शायद बहुत मुश्किल होगा और इस वक्त मैं उसकी हालत देखकर उसे किसी भी तरह का कोई तनाव नहीं देना चाहती बस यही सोचकर मैंने उससे कुछ भी नहीं कहा वरना वो ऊषा देवी को लेकर वो मुझसे बहस ज़रूर करने लग जाती । बस इसलिए मैंने अभी चुपचाप उसकी बात पर हामी भर दी । मैं बस यही सब सोच रही थी कि तभी ऊषा देवी मेरे कमरे के अंदर आ गईं जिसपर मैं अपने बिस्तर पर लेटी हुई तुरंत उठकर खड़ी हो गई और फिर मैंने उन्हें बैठने के लिए कहा । शायद वो मेरी और पूजा के बीच की सारी बातें सुन चुकी थीं और मेरी उधेड़बुन को भी समझ चुकी थीं ।

वो आज बड़ी ही सौम्यता के भाव लिये हुए मेरे पास आयी थीं । उन्होंने मुझसे पूछा...पूजा बिटिया का फोन था न ! जिसके उत्तर मे मैंने बस हाँ में अपना सिर हिला दिया । अब वो चुपचाप बैठी हुई थीं तो मैंने ही कहा कि पूजा माँ बनने वाली है और फिर इस बात को सुनकर वो बोलीं कि ये तो बहुत अच्छी बात है,मुझे लगता है कि तुम्हें उसके पास ज़रूर जाना चाहिए । मैं अब बड़े ही अचम्भे से उन्हें देख रही थी । जिसपर वो मेरी ओर देखकर बोलीं कि बेटा सुमन मैं समझ सकती हूँ कि तू वहाँ जाने से क्यों कतरा रही है पर बेटा पूजा के ससुराल वाले तो पढ़ें-लिखे और समझदार लोग हैं न कि मेरी तरह अनपढ़-गंवार ! उनकी इस बात को सुनकर एक बार तो मुझे समझ में ही नहीं आया कि वो सच में इस वक्त मेरे सामने बैठी हैं या फिर मैं कोई सपना देख रही हूँ और फिर उन्होंने आज जो मुझे बेटा शब्द से संबोधित किया था वो भी मेरे लिए और मेरे कानों के लिए उनके द्वारा बोले जाने वाला बेहद नया शब्द था । मैं उनकी इस बात पर कुछ प्रतिक्रिया दे पाती इससे पहले ही उन्होंने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों में ले लिया और बोलीं कि सुमन मैंने आज तक जाने-अनजाने में तेरे साथ और सनी के साथ जो भी ज्यादतियाँ की हैं मुझे उनके लिए माफ कर दे मेरी बेटी । मुझे लगा कि वो इसके आगे भी बहुत कुछ बोलना चाहती थीं मगर शायद उनकी जुबान नें उनका साथ नहीं दिया और वो रूँधे हुए गले से बस इतना ही कहकर मेरे कमरे से बाहर चली गयीं ।

क्रमशः...

लेखिका...
💐निशा शर्मा💐


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