मजबूर (भाग 6) Shrikar Dixit द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

मजबूर (भाग 6)

सुबह की पहली किरण के साथ राहुल जागता है... स्वाती को देखते हुए (जोकि सो रही होती है)सो लेने दूँ वैसे भी बेचारी दिन में काम करते करते थक जाती है.... राहुल पानी की बोतल को खोल कर पानी पीता है.... चुप चाप खाट से उठकर Document files में document चेक करता है डॉक्यूमेंट की फाइल को वो एक पिट्ठू बैग मे डाल के रख देता है... इसी दौरान स्वाती भी नींद से जाग जाती है..
स्वाती :- अरे  आप उठ गए,आपने जगाया  नहीं..,जगा देते..

राहुल :- अरे मैंने  कि दिन भर काम की थकान की वजह से परेशान हो जाती हो इसलिए मैंने सोने दिया..
स्वाती :- अरे कैसी थकान...,ये तो मेरा काम है,अब आपके लिए भी कुछ काम ना कर सकूँ इतनी भी आलसी नहीं हूँ..
राहुल मुस्कराते हुए... हम्म ये तो है खैर..,स्वाती भी हल्की मुस्कान के साथ bathroom में चली जाती है.. 
इतने में रौशन (राहुल का बेटा) उठ जाता है और रोने लगता है,राहुल बेटे को उठाते हुए क्यूँ रो रहा है बेटा क्या हुआ मेरे शेर को... हम्म,चलो अच्छा तुझे चीज दिलाकर लाता हूँ.. राहुल रौशन को गोद में उठाकर नीचे ही एक पास की दुकान पर जाता है.. राहुल (दुकानदार से) :- भई साहब,दूध का एक आधा लीटर का पैकेट देना.. दुकानदार :- दुध का पैकेट देते हुए.. जी और बताइए...,एक बच्चे के लिए चिप्स का पैकेट देदो.. और एक क्रीम बिस्किट,दुकानदार:- ओके,ये लीजिए आपका बिस्किट और ये चिप्स का पैकेट,दूकानदार :- 50 रुपये हुए जनाब,राहुल :- ये लीजिए,दुध का रेट क्या चल रहा है,दूकानदार :- अरे साहब बड़ी दिक्कत है अभी तो 60 है,दो चार दिन में और बढ़ने वाला है,राहुल :- अच्छा..,राहुल रौशन को चिप्स का पैकेट देते हुए और कुछ लेना है मेरे बेबी को उसके गाल पर किस करते हुए,रौशन :- नहीं,हल्का सा मुस्कराता है,राहुल रौशन के साथ वापस रूम पर आता है,स्वाती :- आलू  के पराठे बना रही होती है,राहुल:- क्या बात है आज तो मेरे मनपसंद आलू के पराठे बनाए जा रहे हैं,स्वाती :- अब आप ज्यादा टाइम ना लगाओ फटाफट तैयार होकर आइए,7 बजने बाला है,राहुल :- हम्म मैं यूँ गया और यूँ आया...
राहुल बाथरूम मे जाते हुए,:- मेरी तौलिया कहाँ है,स्वाती :- वहीँ पडी है बाथरूम मे,राहुल:- अच्छा,राहुल नहाने चला जाता है...,स्वाती अरे ये भी ना पता नहीं कहाँ खोए रहते हैं टिफिन कल का दिया था अभी तक बैग से निकाला नहीं,मुझे खाना पैक करना है,रौशन बिस्तर पर बैठा हुआ चिप्स खा रहा होता है... स्वाती बैग से टिफिन निकालते हुए :- हे भगवान,कल इन्होंने खाना ही नहीं खाया...,स्वाती टिफिन साफ़ करके टिफिन तैयार कर देती है... राहुल नहाकर आ जाता है... राहुल स्वाती से :वो मेरी ब्लैक pant और सफ़ शर्ट निकाल दो,स्वाती :- वो ऊपर ही है बड़े बैग में आप निकाल लीजिए,राहुल :- ओके,राहुल कपड़े पहनकर तैयार हो जाता है :- (स्वाती से) :- कैसा लग रहा हूँ.. स्वाती :- अच्छा है,पास मे एक मंदिर है वहाँ जल चढ़ाकर आइए,आज,आपका पहला दिन है सब सही होना चाहिए..
राहुल :हम्म,मैं आता हूँ,..स्वाती :- हम्म,... राहुल मंदिर से होकर आता है... स्वाती से :- ये प्रसाद ले लेना,मंदिर में चढ़ाया है,स्वाती :- आप जल्दी से नाश्ता कीजिए और जाइए नहीं तो late हो जाएँगे...
राहुल :- हम्म,
राहुल ब्रेक फास्ट करने के बाद फटाफट बैग लेकर निकलता है...,राहुल :- (स्वाती से) रौशन का ध्यान रखना..
स्वाती :- अच्छा अब जाइए भी...
राहुल :- बाय...
राहुल कंपनी पहुंचता है मेहरोत्रा को कॉल करता है... 
सर,मैं कंपनी में आ गया हूँ... 
मेहरोत्रा :- ओके,एक काम करो,गेट पर एंट्री कर के आ जाओ..
राहुल :- ओके सर...
राहुल कंपनी के अंदर पहुंचता है... मेहरोत्रा अपने केविन मे बैठा हुआ किसीसे कॉल पर बात कर रहा था... 
राहुल :- गेट पर ही सर क्या मैं अंदर आ सकता हूं)..
मेहरोत्रा इशारा करता है... 
मेहरोत्रा :-(कॉल पर) जी सर,मैं आपसे बाद में बात करता हूं.. मेहरोत्रा कॉल को कट कर देता है..
मेहरोत्रा (राहुल से) :- decision ले लिया आपने राहुल जी,..
राहुल :- जी सर..
मेहरोत्रा :- देखिए आजकल बैसे भी बेरोजगारी कितनी ज्यादा है आप खुद जानते हैं,ऐसे मे कोई कंपनी आपको काम ही दे रही है ये भी बहुत है...
राहुल :- जी सर...,ये डॉक्युमेंट्स हैं (बैग से एक फाइल निकालते हुए).. 
मेहरोत्रा :- ओके,इनकी photocopy हैं? 
राहुल :- जी सर,फाइल में ही हैं.. 
मेहरोत्रा :- ओके,फाइल अभी यहीं छोड़ दो,आओ तुमको कंपनी मे आपका काम दिखा देते हैं... 
राहुल मेहरोत्रा के साथ साथ कंपनी के वर्किंग प्लेस पर पहुंचता है..... 
मेहरोत्रा :- ये यहां पर ग्लासेस का काम है,बोतल बनतीं हैं यहीं आपको जो भी बोतल बनके तैयार होती है बस उसे चेक करके आगे फॉरवर्ड करना हैं... कुल मिलाकर आपको कुछ स्टैंडर्ड को बताया जाएगा उनके अनुसार ही तुम्हें बोतल रिमूव करनी होगी.... 
राहुल :- ओके सर... 
मेहरोत्रा :- अब तुम यहीं रुको और देखो...,सीखो,मैं आपसे लंच के बाद मिलता हूँ... 
राहुल :- जी सर.... 
राहुल conveyors पर पडी हुई bottles को देखता है तो कभी उनको रिमूव कर रहे लोगों की तरफ... मन में सोचता है मेहनत तो बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन ये मामला क्या है...,समझ से परे है... 
 
 
 
 
 
 
 
जल्द ही लौटेंगे अगले भाग के साथ.... आपका review जरूर दीजियेगा...धन्यवाद 
 

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Shrikar Dixit

Shrikar Dixit 7 महीना पहले