गप्प... लपेटो लपेटो... Saroj Verma द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

गप्प... लपेटो लपेटो...

चींटी ने भारत के राष्ट्रपति को फोन किया.....
राष्ट्रपति जी के टेबल पर रखें टेलीफोन की घंटी बजी और राष्ट्रपति जी ने फोन उठाकर पूछा....
हैलों! माई सेल्फ प्रेसीडेंट आँफ इण्डिया.....
उधर से आवाज़ आई,मैं चीटियों की रानी गजगामिनी बोल रही हूँ...
ओह....कहिए क्या काम है? वैसें आप एक चींटी है और आपका नाम गजगामिनी ,कुछ हजम नहीं हो रहा,प्रेसीडेंट साहब हँसकर बोले।।
ए...! ज्यादा स्यानपट्टी झाड़ने का नई,नहीं तो देर नहीं लगेगी तेरे को टपकाने में समझा! तू अभी अपुन को जानता नहीं हैं,वो चम्बल की रानी फूलनदेवी थी वो मेरी नानी के अण्डर काम करती थी,गजगामिनी गुस्से से बोली।।
अरे,गजगामिनी साहिबा! आप तो नाराज हो गईं, मैं तो मज़ाक कर रहा था,प्रेसीडेंट साहब बोले।।
ये मज़ाक था तो ठीक है,गजगामिनी बोली।।
जी! तो आप क्या कह रही थी? प्रेसीडेंट साहब ने पूछा।।
जी,मैं ताजमहल खरीदना चाहती हूँ,उसकी इजाज़त चाहिए थी आपसे,गजगामिनी बोली।।
ताजमहल लेकिन क्यों मोहतरमा? वो तो हमारे देश की शान है,प्रेसीडेंट साहब बोले।।
चूँकि मुझे ब्लडकैंसर हो गया और कुछ ही दिनों में मैं टपकने वाली हूँ तो सोचा अपनी कब्र के लिए जगह बुक करवा लूँ,वैसे मैं इजिप्ट भी गई थी लेकिन वो मुझे कुछ जमा नहीं,रेगिस्तान और ऊपर से वहाँ गर्मी भी बहुत है,गजगामिनी बोली।।
लेकिन ताजमहल तो आपको बहुत महँगा पड़ेगा मोहतरमा! प्रेसीडेंट साहब बोलें।।
तो आप क्या समझते कि मेरे पास पैसे की कोई कमी है?आपको पता होना चाहिए डोनल्ड ट्रम्प ने मेरे ही अण्डर में रहकर बिजनेस करना सीखा है,पता है पहले वो हमारे घर में नौकर था ,एक दिन उसके काम से खुश होकर टिप के रूप में मैने उसे सौ करोड़ दे दिए,उसने उन पैसों से अपना बिजनेस शुरू किया और आज देखों वो कहाँ से कहाँ पहुँच गया,कभी कभी आ जाता है मेरे घर आशीर्वाद लेने और मेरे पैर छूकर शुक्रिया अदा करता है और वो एम डी एच मसाले वाला,बहुत दुख हुआ ये जानकर कि वो अब इस दुनिया में नहीं है,उसको मसालों का काम मैने ही सिखाया था, पहले वो हमारे घर महाराज थे ,खाना बनाया करते थे,ये अदानी ,ये अम्बानी सब मेरे चेले रह चुके हैं और वो एप्पल वाला उसे तो अपनी कम्पनी का नाम ही नहीं सूझ रहा था,उसने इस सलाह मशविरे के लिए एक दिन मुझे अपने आँफिस बुलाया और पूछा कि.....
गजगामिनी मैडम! क्या नाम रखूँ ? अपनी कम्पनी का।।
फिर क्या था? उसकी टेबल पर एक एप्पल रखा था ,मैने उस एप्पल को ऊपर की ओर से आधा खा लिया और उससे कहा कि तुम अपनी कम्पनी का नाम एप्पल रखों और इस आधे खाए हुए एप्पल को अपना लोगो बना लो और उसने ऐसा ही किया,आज उसकी कम्पनी कितना नाम कमा रही है।।।
और वो एलिजाबेथ है ना वो तो मेरी दादी के यहाँ पानी भरने का काम किया करती थी,मेरी दादी एक स्वतंत्रतासेनानी थी,एलिजाबेथ मेरी दादी को धोखा देकर अंग्रेजों से जाकर मिल गई और दादी के सब राज अंग्रेजों को बता दिए और मेरी दादी शहीद हो गई,मेरी दादी का स्टेचू अब भी चींटीपुर में बना हुआ है,एलिजाबेथ एक अंग्रेज के संग जहाज में बैठकर इग्लैंड भाग गई और वहाँ के राजा को पटाकर वहाँ की रानी बन गई,देशद्रोही कहीं की।।
और आपको पता होना चाहिए प्रेसीडेंट साहब कि जो सऊदिया का प्रिंस हैं ना उसके पिताजी मेरे साथ काँलेज में पढ़ा करते थे ,मैं उन दिनों इतनी खूबसूरत हुआ करती थी कि वो मुझ पर लाइन मारा करते थे,लेकिन मुझे उनसे मौहब्बत का रिश्ता मंजूर नहीं था इसलिए मैने उन्हें मना कर दिया था लेकिन जब उनका प्रिंस बड़ा हो गया तो वो बोले कि.....
तुमने मेरी मौहब्बत तो कुबूल नहीं कि लेकिन अपनी बेटी स्वर्णलता से मेरे बेटे का निकाह पढ़वा लो,मैं इस रिश्ते के लिए राजी हो गई क्योंकि वो मेरे पैरों में गिर कर गिड़गिड़ाने लगे तो मुझे उन पर दया आ गई और मैने रिश्ता कुबूल कर लिया,उन्होंने दहेज में मुझे दस हजार तेल के कुँए दिए हैं,मैं बहुत अमीर हूँ और आप कहते है कि तुम ताजमहल कैसे खरीदोगी?गजगामिनी बोली।।
ठीक है तो आप कल मेरे आँफिस आ जाइए,कल ही सारे कागजात तैयार करवा लेते हैं,प्रेसीडेंट साहब बोले।।
बहुत बहुत मेहरबानी आपकी लेकिन मैं ताजमहल का नाम बदलकर चींटीमहल रखवाना चाहती हूँ तो क्या उसके लिए मुझे अलग से कागजात तैयार करवाने होगें,गजगामिनी बोली।।
लेकिन ये तो सम्भव नहीं है क्योंकि ताजमहल तो सेवेन वन्डर्स में गिना जाता है,नाम नहीं बदलवा सकते उसका,प्रेसीडेंट साहब बोलें।।
तो फिर रहने दीजिए,मैं इजिप्ट ही चली जाती हूँ,गजगामिनी बोली।।
तो जैसी आपकी इच्छा,प्रेसीडेंट साहब बोले।।
ठीक है तो नमस्ते! दाऊद भाई से बात करती हूँ,देखती हूँ अगर कुछ हो सकें तो,गजगामिनी बोली।।
नहीं ....नहीं....गजगामिनी जी,मैं राजी हूँ,आप नाम भी बदलवा सकतीं हैं,प्रेसीडेंट साहब बोले।।
थैक्यू ! प्रेसीडेंट साहब,नमस्ते और इतना कहकर गजगामिनी ने फोन रख दिया।।
और प्रेसीडेंट साहब ने अपना रूमाल निकाला,माथे का पसीना पोछा और डरते हुए टेलीफोन रख दिया।।
गप्प है दिल पर मत लीजिएगा।।😃😃😃😃🙏🙏

समाप्त......
सरोज वर्मा.....


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ArUu

ArUu मातृभारती सत्यापित 6 महीना पहले

Falguni Parekh

Falguni Parekh 6 महीना पहले

Deboshree Majumdar

Deboshree Majumdar 7 महीना पहले

Balkrishna patel

Balkrishna patel 7 महीना पहले

Saroj Verma

Saroj Verma मातृभारती सत्यापित 7 महीना पहले