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लखनऊ मर्डर केस - 5 - अंतिम भाग


लखनऊ मर्डर केस- अंत




लेपटॉप में सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद खत्री ने चहल से गाड़ी निकालने के लिये बोला और फिर दोनों केबिन से बाहर निकलने लगे। अचानक खत्री को कुछ याद आया तो वो पीछे पलटा और अपने थाने की एक लेडी कॉन्स्टेबल प्रीति पाटिल से बोला "अरे..पाटिल मैडम आप भी चलिये हमारे साथ..!! जहाँ तक मुझे लगता है..आप की जरूरत भी पड़ सकती है वहाँ।"
"ठीक है सर..मैं भी चलती हूँ।" पाटिल ने कहा और खत्री के साथ गाड़ी में बैठ गयी।
कुछ देर बाद वे तीनों अपनी मंज़िल पर पहुँच गए थे।
"सर..आप श्योर हैं..? क़ातिल यहीं मिलेगा..?" चहल ने खत्री से घर मे जाने से पहले पूछा।
"मेरा तुज़ुर्बा तो यही कहता है कि आज क़ातिल मिलेगा और यहीं मिलेगा। तुम बस चलो।" खत्री ने कहा और फिर तीनों लिफ्ट में सवार हो गए।
तीसरे फ्लोर पर आकर लिफ्ट रुकी और तीनों उसमें से दनदनाते हुए बाहर निकले। एक फ्लैट के सामने रुक कर खत्री ने बेल बजाई तो एक लड़की ने आकर दरवाजा खोला।
"मुझे लगा ही था कि तुम यहाँ जरूर होगी..तभी तो पाटिल मैडम को साथ लाया हूँ मैं। क्यों पाटिल मैडम क्या कहा था मैंने..?" खत्री ने कुटिल मुस्कान के साथ कहा।
"यही की पाटिल मैडम आप भी साथ चलिए..आपकी जरूरत भी पड़ सकती है।" प्रीति पाटिल ने कहा।
"क्या बकवास कर रहे हो आप लोग..? और हैं कौन आप लोग..?" उस लड़की के गुस्से में कहा।
"अपना ये गुस्सा अपने पास ही रखिये मिस आरित्रा..!! जब हम अपना परिचय देंगे तो आपके होंश उड़ जायेंगे।"
"आप मेरा नाम कैसे जानते हैं..? और यहाँ क्यों आये हैं आप लोग..? क्या काम है..?"
"चलिये..पहले आप अपने मिस्टर हैंडसम को बुलाइये..!!"
"क्यों..क्यों बुलाऊँ मैं उन्हें..?" आरित्रा ने उसी गुस्से में कहा। तभी अंदर से आवाज़ आयी "कौन आया है आरु..?"
"मैं नहीं जानती..तुम ही आकर देख लो..ये तुमसे ही मिलना चाहते हैं..!!" आरित्रा ने कहा तो एक आदमी अंदर से बाहर आया।
"अरे..इंस्पेक्टर अनिरुद्ध आप..? कैसे आना हुआ..मेरा मतलब है कि नित्या के मर्डरर का कुछ पता चला क्या आपको..?" उस आदमी ने बाथ गाउन को बांधते हुए कहा। ये सब सुनकर आरित्रा का गला सुख गया और उसके हाथ पैर कांपने लगे।
"मिस्टर नीतेश..आपको नित्या का क़ातिल कौन है यह बात जानने में इंट्रेस्ट नहीं है क्या..? नहीं वो क्या है न कि पहले दिन के बाद से आप आज तक पुलिस स्टेशन नहीं आये न इसलिए..!!" खत्री ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा।
"नहीं..ऐसा कुछ नहीं है..!!" नीतेश ने कहने की कोशिश की लेकिन खत्री बीच मे ही बोल पड़ा "कैसा है..कैसा नहीं है...? ये सब आप पुलिस स्टेशन में चलकर ही बताइएगा।"
"पुलिस स्टेशन....!!!!! पर क्यों..?" नीतेश ने गहन आश्चर्यता से पूछा।
"वो सब तुम्हें वहाँ चलकर ही पता लग जाएगा। फिलहाल अपने कपड़े बदलना चाहते हो तो जल्दी से बदल कर आ जाओ वरना इसी बाथ गाउन में पुलिस स्टेशन ले चलेंगे तुम्हें..!!" खत्री ने रौबदार आवाज़ में कहा।
नीतेश कपड़े बदलने गया और उसके साथ चहल भी उसके कमरे में गया।
जब नीतेश कपड़े बदलकर आ गया तो खत्री चहल से बोला "चहल..नीतेश को गाड़ी में बैठाओ..और पाटिल मैडम आप आरित्रा जी को बैठाइए।"
"मैं..!!। पर मुझे क्यों ले जा रहे हो..मैंने क्या किया है..?" आरित्रा ने पूछने की कोशिश की लेकिन खत्री बीच मे ही गुस्से में बोल पड़ा "पाटिल मैडम..आप आरित्रा को लेकर चलिये..!! जल्दी..!!"
उन चारों के बिल्डिंग से नीचे जाने के बाद खत्री घर के अंदर गया और नीतेश और नित्या के बेटे को उसके कमरे से उठा कर अपने साथ नीचे ले आया। तब तक चहल और पाटिल मैडम ने उन दोनों को गाड़ी में बैठा दिया था।
खत्री ने नीतेश के बेटे को पाटिल मैडम को दे दिया...ताकि वो उसे सम्हाल ले और फिर वो भी गाड़ी में बैठ गया। तब चहल ने गाड़ी पुलिस स्टेशन की तरफ मोड़ दी।
पुलिस स्टेशन आने में बाद पाटिल ने नीतेश के बेटे को दूसरी लेडी कॉन्स्टेबल को सम्हालने के लिए दे दिया।
फिर चहल और पाटिल मैडम नीतेश औऱ आरित्रा दोनों को सीधा लॉकअप में लेकर पहुँचे। दोनो को कुर्सी पर बैठा कर चहल और पाटिल मैडम वहाँ से बाहर आ गए।
कुछ देर बाद खत्री, चहल और पाटिल के साथ लॉकअप में पहुंचा तो देखा कि दोनों पसीने से तरबतर हुए जा रहे थे।
"हाँ..तो मिस्टर नीतेश....!!! क्यों मारा आपने आपने अपनी ही बीवी को..?" खत्री ने टेबल पर कोई सा कागज पटकते हुए जोर से कहा।
"देखिये..सर..!!" नीतेश ने कहने की कोशिश की लेकिन खत्री बीच मे बोल पड़ा।
"मुझे कुछ नहीं देखना है...सिर्फ सुनना है...!! और वो भी सच! सौ टका सच..!! तो चलो अब रट्टू तोते की तरह अपनी चोंच चलाना शुरू करो नहीं तो ये देख रहे हो न..चहल के हाथ का डंडा..ये चलेगा..!! और सिर्फ तुम पर नहीं..तुम्हारी ये..आरित्रा मैडम पर भी चलेगा। क्यों पाटिल मैडम..क्या कहा था मैंने..?" खत्री ने कहा तो पाटिल बोल पड़ी "यही कहा था सर.. की अगर आरित्रा अपना मुँह सीधी तरह न खोले तो मैं अपने तरीके से मुँह खुलवाऊं..!!"
"सुन लिया..? चलो अब जल्दी करो फिर मुझे और भी बहुत काम है...!! बताओ क्यों मारा नित्या को..?" खत्री ने गुस्से में कहा।
"सर जब मैं कॉलेज में नित्या के साथ पढ़ता था..तब नित्या को लेकर पूरी क्लास के लड़कों में बहुत क्रेज़ था। उसका सबसे बड़ा कारण था उसके बाप के पैसे और दूसरा कारण उसकी खूबसूरती। नित्या गाड़ी में कॉलेज आती और गाड़ी से घर जाती..!! हर कोई उससे दोस्ती करना चाहता था। लेकिन मैं..मैं ऐसा बिल्कुल नहीं था..मेरा पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई और अपने करियर पर था..!! लेकिन एक दिन जब मैं अपने रूम से बाइक पर कॉलेज के निकल रहा था..तब रास्ते में मुझे नित्या दिखी। उस दिन उसकी गाड़ी खराब हो गयी थी। मैंने उसे देखा लेकिन बिना कुछ बोले ही आगे जाने लगा क्योंकि मुझे लगा कि जब ये कॉलेज के इतने रईस और हैण्डसम लड़को को भाव नहीं देती..तो भला मुझसे क्यों बात करेगी। लेकिन उसने खुदने मुझे आवाज़ दी और रुकने का कहा। मैं रुक गया। वो मेरे पास आयी बोली मेरी गाड़ी खराब हो गयी है..क्या तुम मुझे लिफ्ट दे दोगे..? प्लीज्..!!! मैंने उससे कहा कि मेरी बाइक पर तुम कैसे जाओगी..? लेकिन उसने कहा..!!!" नीतेश आगे कुछ बोलता उससे पहले ही खत्री बीच में बोल पड़ा "ऐ.......!!!! तेरी प्रेम कहानी सुनने नहीं बैठे हम इधर...पॉइंट पर आ और ये बता की तूने नित्या का मर्डर क्यों और कैसे किया....?"
"सर..वही तो बताने की कोशिश कर रहा हूँ..!! मैं सिर्फ इतना बता रहा था कि मैं नित्या में इंटरेस्टेड नहीं था..वो तो नित्या खुद मुझसे बात करने लगी तो मेरे दोस्त उसका नाम लेकर मुझे चिढ़ाने लगे थे और यह भी कहते थे कि अब तो तेरी चांदी ही चांदी है..तुझे कुछ करना ही नहीं पड़ेगा क्योंकि नित्या के बाप के पास इतने पैसे हैं कि वो उनकी आने वाली तीन चार पुश्तों को तो आराम से बैठा कर खिला सकता है..और जब नित्या के अलावा उसकी कोई दूसरी संतान ही नहीं है तो फिर उसके सारे पैसे पर तो नित्या और तेरा ही अधिकार रहेगा।
अब सर मैं मध्यम से भी मध्यम परिवार में पला बड़ा एक साधारण सा लड़का। कभी इतने पैसों के बारे में न तो सुना और न ही सोचा। हम तो बस इतना कमाते थे कि आने वाले कुछ दिन आसानी से निकल जाये। जब नित्या खुद मुझे पसन्द करती थी और उसने खुदने ही मुझसे प्यार का इज़हार किया तो मैंने उसे हाँ कहने में ही समझदारी समझी। जबकि मैं उससे प्यार करता ही नहीं था। मुझे सिर्फ उसके पैसों से मतलब था। मुझे लगा था कि जब उसके बाप को पता लगेगा कि उसकी बेटी किसी ऐसे लड़के से प्यार करती है जिसके पास न तो नौकरी है और न ही पुश्तेनी जमीन जायदाद तो वो अपनी एकलौती बेटी की खुशी के लिए मुझे उनके साथ उनके घर पर ही रख लेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उल्टा वो बुढ्ढा पहले तो नित्या की शादी मुझसे करने के खिलाफ था..और जब माना भी तो इस शर्त पर की नित्या या तो मुझसे शादी कर सकती है या फिर अपने वेडिंग मैनेजमेंट की कंपनी खोल सकती है। एक तो बुड्ढे ने मुझे एक भी पैसा नहीं दिया और ऊपर से नित्या को भी काम करने से मना कर दिया। मुझे बहुत गुस्सा आया था। एक तो नित्या से झूठे प्यार का नाटक करना पड़ रहा था और ऊपर से उसके बदले में एक पैसा भी हासिल नहीं हो रहा था। हाँ ये बात अलग थी कि इन सबके बीच नित्या से शारीरक सुख लगातार मिलता रहा औऱ इस सबके कारण नित्या प्रेग्नेंट हो गयी थी। तब कहीं जाकर उसका बाप समाज के डर से हमारी शादी के लिए माना था... पर उसकी शर्त थी कि नित्या काम नहीं करेगी। उसके बदले उसने मुझे उधार पैसे बिज़नेस शुरू करने के लिए दिए। पर क्योंकि मैं इस रिश्ते में खुश नहीं था और मुझे लक्ष्मीकांत के सिर्फ चंद पैसे नहीं बल्कि अपना पूरा हिस्सा चाहिए था..जो वो नित्या को देता। इसलिए मैं खिन्न सा रहता और मेरा मन काम मे नहीं लगता था। देखते ही देखते बिज़नेस डूब गया और साथ ही लक्ष्मीकांत के पैसे भी। बस तब से ही उसके धमकी भरे फोन लगभग रोज़ ही आने लगे। नित्या के बाप के ताने क्या कम थे..की नित्या ने भी ताने मारने शुरू कर दिए थे। वो मुझे निकम्मा..आवारा..पत्नी के पैसों पर ऐश करने वाला..और भी न जाने क्या क्या कहने लगी थी। मैं रोज कोई न कोई नौकरी ढूँढने की कोशिश करता..लेकिन एक्सपीरियंस नहीं होने की वजह से मुझे कहीं भी नौकरी नहीं मिल रही थी। फिर एक दिन नित्या ने ही मुझे ग्लोबल सॉफ्टवेयर के बारे में बताया। उसने वहाँ मेरे लिए बात कर ली थी। ये नौकरी उसकी वजह से मिलने वाली थी ये सोचकर मैं पहले तो मना करने वाला था लेकिन फिर ख्याल आया कि कहीं अगर मुझे दूसरी जगह नौकरी मिली ही नहीं तो..? फिर तो नित्या और भी ताने मारती और कहती कि जब मैंने एक जगह काम के लिये बात कर ली थी तब तो मना कर दिया और अब हाथ पर हाथ धरे बैठे हो..खुद से तो कोई काम ढूंढा भी नहीं जाता। मुझे मन मारकर उस काम के लिये हाँ कहना पड़ा। लेकिन तभी लक्ष्मीकांत ने फरमान सुना दिया था कि जल्द ही उसके पैसे जमा करके उसे वापस लौटा दूँ। इसलिए मैंने सोच लिया था कि अब चाहे जो हो जाये..इस बार इस काम को हाथ से नहीं जाने दूँगा और अच्छे से काम करूँगा। लेकिन जितना मैंने सोचा था उतना नहीं बच पा रहा था। मुझे लगने लगा था कि अगर ऐसे ही चलता रहा था तो मैं सारी उम्र भी अगर नौकरी करूँ तब भी लक्ष्मीकांत के पैसे कभी वापस नहीं कर पाऊँगा। पर फिर भी मैं काम करने की और ज्यादा से ज्यादा टाइम अपने काम को देने की कोशिश करता। तब हालात ऐसे हो चुके थे कि नित्या और मेरे बीच बातचीत भी बहुत कम हो गयी थी। वो उसके काम में मगन थी और मैं मेरे। मैं तो शाम तक घर आ भी जाता था पर वो..वो कभी 1 बजे तो कभी 2 बजे और कभी कभी तो पूरी रात ही घर नहीं आती थी। मैं उससे कुछ नहीं पूछता था..या यूं कहूँ टाइम ही नहीं होता था पूछना का। वो घर आती तब तक मैं सो चुका रहता था..और सुबह जब मैं ऑफिस जाता तब तक वो या तो सोती रहती या अपने काम मे लगी रहती थी। फिर एक दिन आरित्रा हमारे घर आयी। नित्या ने मुझसे कहा कि आरित्रा कुछ दिन हमारे साथ रहेगी क्योंकि आरित्रा जहाँ रहती है वहाँ अच्छे कॉलेजेस नहीं है। नित्या के बड़े पापा की बेटी नीलू दीदी की शादी एक छोटे से शहर में हुई है..इसलिए उन्होंने उनकी बेटी आरित्रा को यहाँ पढ़ने के लिए भेज दिया था। यहाँ नित्या का घर भी था और अच्छा कॉलेज भी। आरित्रा शुरू के कुछ दिन हमारे घर रुकी..और फिर वापस अपने घर चली गयी। कुछ दिनों तक इसने अपने घर से ही आना जाना किया लेकिन जब रोज़ रोज़ इस सबमें दिक्कत आने लगी तो हमने इसे हमारे घर ही रहने को कह दिया था।
नित्या और मेरे बीच क्योंकि अब पहले जैसा कुछ नहीं बचा था...फिजिकली एक होना तो दूर.. अब तो हम ढंग से बात तक भी नहीं करते थे। ऐसे ही एक शाम में ऑफिस से लौटा औऱ फ्रेश होने के लिये अपने कमरे के अटैच बाथरूम में गया। नहाने के बाद मैंने तौलिया लपेटा और बाथरूम से बाहर आ गया। तब तक आरित्रा घर नहीं आयी थी। मैंने कपड़े पहने ही थे कि आरित्रा कॉलेज से मिली कुछ उपाधि दिखाने के लिए भागती हुई मेरे कमरे की तरफ आयी..!! ये इतनी तेज़ी से मेरी ओर आयी कि मैं लड़खड़ा कर जमीन पर गिर पड़ा और ये मेरे ऊपर..!!! उसके बाद से ही हमारा अफेयर शुरू हो गया था। अब तो हम घर जल्द से जल्द पहुँचने के बहाने ढूंढते।
ऐसे ही एक दिन हम दोनों एक दूसरे में डूबे हुए थे...हमें नित्या के आने का कोई अंदेशा तक भी नहीं था...!! और उन दिनों क्योंकि नित्या अपने किसी बेहद इम्पोर्टेन्ट प्रोजेक्ट में बिजी थी तो वो अक्सर देर रात ही लौटती थी। लेकिन उस दिन पता नहीं वो कैसे शाम को ही लौट आयी थी और उसने हमें एक दूसरे में लिप्त देख लिया था।
मैंने और आरित्रा ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की और कई बार माँफी भी माँगी लेकिन वो मानने को तैयार ही नहीं थी। उसने कहा कि वो सबको मेरे और आरित्रा के अफेयर के बारे में बता देगी। यहाँ तक कि अपने पापा को भी बताने की धमकी दी उसने। ये सब नित्या के कत्ल के दो दिन पहले ही हुआ था।
मैं और आरित्रा दोनों बहुत डर गए थे ये सोच कर कि जब नित्या के पापा को मेरे और आरित्रा के अफेयर के बारे में पता चलेगा तो वो पता नहीं क्या करेगा..? अगले दिन नित्या के जाने के बाद मैंने और आरित्रा ने बात की कि इस सब को कैसे हैंडल किया जाये...? और हम दोनों को एक ही रास्ता दिखाई दिया कि....कि नित्या को ही रास्ते से हटा दिया जाये।" नीतेश के इतना कहते ही खत्री ने एक जोरदार थप्पड़ नीतेश के गालों पर ये कहते हुए रसीद कर दिया कि "अच्छा..उसे ही रास्ते से हटाने का उपाय सुझा तुम्हें..? कोई और रास्ता नहीं था..? अगर पूरे समाज और लक्ष्मीकांत जी को तुम्हारे इस वाहियात रिश्ते के बारे में पता चल भी जाता तो ज्यादा से ज्यादा क्या होता..? वो तुम दोनों से रिश्ता तोड़ देते..तुमसे बातचीत बंद कर देते..नित्या तुम्हें छोड़कर चली जाती..!! वो तो तुम वैसे भी चाहते ही थे..!! इससे ज्यादा तो कुछ नहीं होता..? तुम दोनों को मार तो देते नहीं..!! और अगर तुम्हें ये डर था कि तुम दोनों को मार देंगे तो तुम पुलिस स्टेशन आकर रिपोर्ट दर्ज भी करवा सकते थे। आखरी दोनों बालिग हो..!! कितनी उम्र है तुम्हारी आरित्रा..?"
"19 साल।"
"अच्छा..आगे क्या हुआ..?" खत्री ने पूछताछ पर वापस आते हुए कहा।
"मैंने आरित्रा को उसी दिन अपने घर जाने को कह दिया..!! मैंने कहा कि कुछ भी बहाना बनाकर अपने घर वापस चली जाओ।ये अपने घर चली गयी। मुझे पता था कि नित्या को कोई इम्पोर्टेन्ट प्रोजेक्ट मिलने वाला है..और उसी के सिलसिले में वो 19 जुलाई की रात को डिनर मीटिंग पर क्लाइंट्स के साथ जाने वाली है। बस मेरे पास ये ही अच्छा मौका था नित्या को रास्ते से हटाने का। मैंने पता लगा लिया था कि नित्या की मीटिंग कहाँ होने वाली है..!! उस शाम पहले वो अपने ऑफिस से घर आई और फ्रेश होने के बाद..तैयार हुई और जाने से कुछ मिनिट पहले मुझसे बोली मेरी आज एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है..क्लाइंट्स के साथ और डिनर भी उन्हीं के साथ है। मुझे आने में देर हो जाएगी..लेकिन कल सुबह हम हमारे इस रिश्ते के बारे में बात करेंगे..और डिवोर्स फ़ाइल करेंगे। उसने डिवोर्स फ़ाइल करने का बोला तो मेरा माथा और ठनक गया..क्योंकि फिर तो मुझे कुछ भी नहीं मिलता और क्या पता वो उल्टा मुझसे ही माँग लेती। बस मैंने सोच लिया था कि नित्या को मारना बहुत जरूरी हो गया है।
उसके जाने के बाद मैंने अपना फोन घर पर ही रखा और चुपचाप घर से बाहर निकल कर रिक्शा से नित्या जहाँ थी वहाँ पहुँच गया। नित्या अपनी कार की दूसरी चाबी घर पर ही रखती थी इसलिए मेरे पास वो चाबी थी..!! मैंने उससे कार को अनलॉक किया और पीछे की सीट पर छुप कर नित्या का इंतजार करने लगा। मेरा प्लान था कि नित्या के हाथों गाड़ी गलत डायरेक्शन में चलवाकर उसका एक्सीडेंट करवा दूँगा..और मैं किसी तरह वहाँ से निकल कर भाग जाऊँगा। लेकिन नित्या ने पता नहीं कैसे खुदको और कार को सम्हाल लिया...मैंने उसका ध्यान भटकाने की और कुछ भी गड़बड़ी करके एक्सीडेंट करने की इतनी कोशिश की लेकिन कुछ भी काम नहीं आया। और फिर अचानक नित्या ने कार को धीमा किया और चलती कार से कूद गई। कुछ दूर जाकर ही कार एक पेड़ से जा टकराई और उसमें ही धँस गई। मैं पहले ही सम्हल गया था इसलिए मुझे कोई भी चोट नहीं आ पाई। मैं फटाफट कार से उतरा और वापस पीछे की तरफ भागा जहाँ नित्या कूदी थी। जब मैं वहाँ पहुँचा तो देखा नित्या धीरे धीरे रेंगते हुए वहाँ से भागने की कोशिश कर रही थी। कार से कूदने के कारण उसके सिर, पैर और हाथों पर चोंट आयी हुई थी जिस वजह से वो उठकर चल भी नहीं पा रही थी। मैंने नित्या का हाथ पकड़ा और उसे वहाँ ले आया जहाँ कार पेड़ में धँसी हुई थी..!! वो बारबार मुझसे मिन्नते कर रही थी कि मैं उसे छोड़ दूं..!! उसने यहाँ तक भी कहा कि वो मेरे और आरित्रा क बीच नहीं आयेगी और किसी को भी हमारे बारे में नहीं बतायेगी..!! और ये भी कहा कि वो उसके पापा से कह देगी की वो मुझसे उनके पैसे नहीं मांगे..!! लेकिन अब इतना कुछ हो चुका था..मैं नित्या को ज़िंदा नहीं छोड़ सकता था...उसे छोड़ना खतरे से खाली नहीं था..!! मैंने पास ही पड़े कार के कांच के टुकड़े को उठाया और उसे नित्या के पेट में घोंप दिया। उस दौरान मुझे उसकी वो सारी बातें... वो सारे ताने...जिल्लत.. याद आने लगी जो वो मुझे आये दिन देती थी...!! इस सब के चलते मेरा गुस्सा और बड़ गया और मैंने उस काँच के टुकड़े को न जाने कितनी बार उसके पेट से निकाला और न जाने कितनी ही बार फिर घोंपा। जब मुझे लगा कि वो मर गयी है..तब मैं वहाँ से जाने के लिए उठा। तभी मुझे उसके शरीर पर उसकी जूलरी दिखाई दी...और मैंने उसे खींचने के तरीके से नित्या के गले और कानों से उतार लिया ताकि देखने वाले को लगे कि नित्या के शरीर से जूलरी जबरदस्ती खींची गई हो और फिर ये नित्या को लूटने का केस लगे। उन सब जूलरी को अपनी जेब के हवाले किया और वहाँ से उठ कर जाने लगा तभी एक बड़ा सा पत्थर मुझे वहाँ दिखाई दिया..!! मैंने उसे उठाया और उसके चेहरे पर दे मारा। उन दिनों मुझे उसके चेहरे से भी इतनी नफरत हो गयी थी कि मैं उसे दोबारा देखना भी नहीं चाहता था...!! मैंने उस पत्थर को वहीं झाड़ियों में दूर फेंक दिया। मुझे ध्यान आया कि नित्या का पर्स वगैरह कार में ही रह गया है इसलिए मैंने जल्दी से बाकी सामान को वहाँ से उठाया और कुछ दूर ले जाकर उन सब सामान में आग लगा दी। मैं वापस अपने घर की तरफ लौट आया। जब मैं हमारी कॉलोनी के पास पहुँच गया..तब अचानक मुझे याद आया कि कार में नित्या के साथ छीना झपटी करने में मैंने उसका फोन अपनी जेब में रख लिया था। क्योंकि वो किसी को कॉल करने की कोशिश कर रही थी। अब वापस कहीं दूर जाने का मेरे पास टाइम नहीं था इसलिए मैंने उधर ही कहीं उसका फोन ठिकाने लगाने का सोचा। झाड़ियाँ देख कर मैंने वहीं एक जगह नित्या का फोन फेंक दिया और जल्दी जल्दी वहाँ से भाग गया। मैं इतनी टेंशन में था कि मैंने ध्यान ही नहीं दिया कि उस एरिया में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। और उसी की वजह से मैं पकड़ा गया।" नीतेश ने बड़ी ही बेशर्मी से सब कुछ कुबूल कर लिया।

"नहीं..सिर्फ उस सीसीटीवी की वजह से नहीं पकड़ाये हो तुम..!! तुम तुम्हारी इस लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की जो घड़ी है..मतलब की स्मार्ट वॉच.. उस की, और तुम्हारी कॉल डिटेल्स से भी पकड़ में आये हो..!! पहले तो मैंने तुम्हारे फोन में आरित्रा के नंबर को इग्नोर कर दिया था..लेकिन जब मैंने गहराई में जाकर इन्वेस्टिगेशन की तब मुझे पता चला कि ये नंबर आरित्रा का है औऱ ये नित्या के बड़े पापा की लड़की की लड़की है..!! पहले तो मैंने सोचा कि रिश्तेदार है नित्या की इसलिए ज्यादा बातचीत होती होगी..! लेकिन जब नित्या के कॉल डिटेल्स में आरित्रा का एक भी बार नंबर शो नहीं हुआ था तब मुझे शक हुआ कि आरित्रा रिश्तेदार तो नित्या की है..लेकिन बात नीतेश से करती है.!! ये क्या चक्कर है..? तब मैंने तुम दोनों के मैसेजेस की डिटेल्स मँगवाई..!! तब जाकर पता चला कि तुम दोनों का तो अफेयर चल रहा है। तब मुझे माजरा समझते ज्यादा देर नहीं लगी। और तुम्हारी स्मार्ट वॉच में वाटर के रिमांइडर ने तुम्हारी पहचान करवा दी। बस एक और बात ये बताओ...क्या तुम 20 जुलाई की सुबह जहाँ नित्या का कत्ल किया वहाँ गए थे..?"
"नहीं...!! मैं वहाँ नहीं गया था..!!"
ठीक है...!! पर तुम्हारी सी वाहियात हरकत के लिए मैं कोर्ट से तुम्हें फाँसी की सज़ा देने की माँग जरूर करूँगा...नहीं तो कम से कम उम्र कैद तो तुम्हें होनी ही चाहिए। आरित्रा तुम्हारे ऊपर भी नीतेश का क्राइम में साथ देने जे लिये केस जरूर चलेगा। नीतेश तुमने सिर्फ खुदके बारे में सोचा...तुमने अपने इस मासूम से बेटे के बारे में नहीं सोचा..? नित्या को मारकर तुमने उससे उसकी माँ तो पहले ही छीन ली..और अब उसके सिर पर पिता का साया भी नहीं रहेगा..!! सोचो जब ये बड़ा होगा..तब तुम्हारे बारे में क्या सोचेगा..? और इसके आसपास के लोग इसे हमेशा एक क़ातिल का बेटा कहेंगे..!! और शायद दोस्ती करने से भी कतरायेंगे। तुमने एक साथ तीन तीन ज़िंदगियाँ बर्बाद कर दी।
एक अपने बेटे की..दूसरी नित्या के पापा की..जिनकी एकलौती बेटी थी नित्या..और तीसरी..आरित्रा और उसके मम्मी पापा की। सोचो...आरित्रा का और उसके परिवार वालों का क्या होगा..? वो समाज को क्या मुँह दिखायेंगे..!! इतना बड़ा कदम उठाने से पहले काश तुमने सोचा होता। और तुम आरित्रा...!! तुम्हें कुछ भी गलत नहीं लगा इस सब में..? नित्या तुम्हारी मासी थी..यानी कि मां जैसी और नीतेश मौसाजी..!! जो एक पिता समान होता है..!! छि: घिन आती है मुझे ऐसे लोगों और उनके नाजायज रिश्तों पर..!! खेर.....!! नित्या को न्याय जरूर मिलेगा और मैं उसे न्याय दिलवा कर ही रहूँगा।" खत्री ने कहा और लॉकअप से बाहर आ गया। उसके पीछे पीछे चहल और पाटिल मैडम भी बाहर आ गयी।
पाटिल ने नित्या के पापा को फोन कर दिया था। वो पुलिस स्टेशन आ गए...नीतेश और आरित्रा को कुछ देर घुरते रहे ल कहा कुछ भी नहीं.. और फिर अपने नाती को अपने साथ ले कर वहाँ से निकल गए।

#समाप्त


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