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लखनऊ मर्डर केस - 3


लखनऊ मर्डर केस। भाग-3













उसी दिन
फैज़ाबाद रोड पुलिस थाना

"चहल एक काम करो..तुम जाकर गाड़ी निकालो। हम पहले नित्या के ऑफिस चलते हैं उसके बाद नीतेश के ऑफिस चलेंगे।
तब तक नित्या के फोन की कॉल डिटेल्स भी आ जायेगी।" इंस्पेक्टर खत्री ने कहा।
"ठीक है सर..!!" इतना कहकर चहल वहाँ से चला गया।

कुछ देर बाद दोनों जानकीपुरम में स्थित नित्या की वेडिंग एक्सपर्ट एंड इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की बिल्डिंग के सामने खड़े थे।
दोनों अंदर पहुँचे तो उन्हें देखकर रिसेप्शन पर मौजूद एक दुबली पतली और लंबी सी लड़की घबरा गई और उसके चेहरे पर पसीने की कुछ बूंदे उभर आई।
इंस्पेक्टर खत्री और कॉन्स्टेबल चहल उसके नज़दीक गए और फिर खत्री ने अपने सवाल पूछना शुरू किया
"नित्या मित्तल की परसों रात किस क्लाइंट के साथ मीटिंग थी..?"
"सॉरी सर मुझे इस सब के बारे में कुछ भी नहीं पता होता है..इन्फेक्ट मुझे तो ये भी नहीं पता है कि मेम परसों रात को किसी मीटिंग में भी गयी थी..? लेकिन हाँ..उनके बिज़नेस पार्टनर को जरूर पता होगा।" रिस्पेसनिस्ट वाली लड़की ने डरते डरते कहा।
"अच्छा..!!! नित्या का बिजनेस पार्टनर भी है..?" खत्री ने चोंक कर कहा।
"जी सर..!!"
"क्या नाम है पार्टनर का...?"
"अहसान मिर्ज़ा..!!"
"अच्छा..तो बुलाओ मिर्ज़ा साहब को..उनसे ही बात करते हैं..!!"
"सर तो आज ऑफिस नहीं आये..!!"
"क्यों नहीं आये..? छुट्टी पर हैं क्या..?"
"मुझे नहीं पता सर..!!"
"अच्छा..चलो अहसान का फोन नंबर दो..!!"
"सॉरी सर..बट एक्चुअली..हमें सर औऱ मेम के पर्सनल नंबर रखना अलाउड नहीं है।"
"फिर तुम सबके बीच कॉन्टेक्ट कैसे होता है..?"
"वो.. ईमेल एड्रेस से।"
"अच्छा..फोटो तो होगी तुम्हारे पास अहसान की..अब ये मत कहना की वो भी नहीं है..!!"
"मेरे फोन में तो नहीं हैं..लेकिन हां हमारी कंपनी की वेबसाइट पर जरूर है।"
"वेबसाइट पर तो फिर अहसान और नित्या का मोबाइल नंबर भी होगा..?"
"नहीं सर उन्होंने वहाँ सिर्फ कंपनी के लेड लाइन का नंबर दिया है और ईमेल एड्रेस।"
"अच्छा...क्या हम अहसान का केबिन देख सकते हैं..?"
"सॉरी सर बट उनका कैबिन लॉक है और चाबी उन्हीं के पास है।"
"अच्छा...!! ये बताओ रहता कहाँ है अहसान...???"
"सर जैसा कि मैंने आपको बताया...मुझे सर और मैडम की कोई भी पर्सनल इंफेरमेशन नहीं मालूम है...इसलिए मुझे न तो सर का एड्रेस पता है और न ही मैडम का..!!"
"ठीक है..लेकिन जैसे ही अहसान यहाँ लौटे तो तुम सबसे पहले हमें इन्फॉर्म करना।"
"लेकिन हुआ क्या है सर...?"
"मर्डर...!!! मर्डर हुआ है। नित्या मित्तल का..!!"
"क्या..? मैडम का मर्डर हो गया..!! कब हुआ सर..? और किसने किया..?"
"परसों रात को..! और किसने किया है..उसका हम जल्द ही पता लगा लेंगे..!! तुम बस अहसान के आने पर हमें इन्फॉर्म कर देना..!!" खत्री ने उसे घूर कर कहा।
"जी सर..!!"
"तुम्हारा नाम क्या है..?"
"सायरा..सायरा मंत्री..!!"
"ओके..ठीक है।" इतना कहकर खत्री कॉन्स्टेबल चहल के साथ बिल्डिंग से बाहर आ गया।
"जरूर ये सायरा कुछ न कुछ छुपा रही है..!! देखा कैसे हमको देखते ही उसे पसीना आ गया था। और नज़रें मिलाकर बात करने की बजाय पूरा टाइम इधर उधर देखती रही। एक काम करो..अपने कुछ खबरियों को इस पर नज़र रखने को कहो..!! देखो क्या निकलता है..!!"
"जी सर...!!"
"चलो अब नीतेश के ऑफिस चलते हैं..देखते हैं वहाँ क्या हाथ लगता है..?" अनिरुद्ध ने गाड़ी में बैठते हुए कहा।
चहल ने गाड़ी अब विजय खण्ड की सड़कों पर दौड़ा दी।
कुछ देर बाद चहल ने गाड़ी एक दो मंजिला इमारत के सामने रोक दी।
गाड़ी से उतर कर दोनों अंदर पहुँचे और रिस्पेशन पर मौजूद एक आदमी की तरफ बड़े।
रिसेप्शन पर मौजूद लड़के ने दो आदमी को पुलिस की यूनिफॉर्म में अपनी ओर आता देखा तो वो अपनी कुर्सी से झट से उठ कर खड़ा हो गया और मुस्कुरा कर बोला गुड "इवनिंग सर..!! कहिये क्या मदद कर सकता हूँ मैं आपकी..?"
"यहाँ के डाइरेक्टर कौन है..?" अनिरुद्ध ने पूरे रौब में पूछा।
"डी.के. आहूजा..!!" उस लड़के ने कहा।
"बुलाओ उन्हें..उनसे बात करनी है मुझे..!!"
"जी सर..मैं उन्हें अभी कॉल करता हूँ..!!" इतना कहकर उस लड़के ने लेड लाइन पर एक बटन दबाया औऱ रिसीवर कान में लगाते ही बोला "सर..इंस्पेक्टर अनिरुद्ध खत्री आपसे कुछ बात करना चाहते हैं..!!"
जब उस लड़के ने अनिरुद्ध का नाम लिया तो अनिरुद्ध चौंका "इसे मेरा नाम कैसे पता..?"
लेकिन अगले ही पल जब देखा कि वो लड़का अनिरुद्ध की यूनिफॉर्म पर लगे नेम प्लेट को देख रहा है तो वो समझ गया कि उसने वहाँ से नाम पढ़ लिया..!!
"हम्म...स्मार्ट..!!" अनिरुद्ध ने अपने मन मे कहा।
कुछ ही सेकेंड्स बाद उस लड़के ने रिसीवर रख दिया और अनिरुद्ध की ओर मुखातिब होते हुए बोला "सर उन्होंने आपको उनके कैबिन में ही बुलाया है..!! आप यहाँ से सीधे जाइये..उसके बाद लेफ्ट साइड पर सर का कैबिन है।"

इतना सुनते ही अनिरुद्ध तेज़ कदमो से आहूजा के कैबिन की तरफ बढ़ चला और उसके पीछे पीछे ही चहल भी।

"आइये सर..आइये आइये..बैठिए..!!" आहूजा ने अनिरुद्ध और चहल को देखते ही कहा।
"बताइए सर क्या लेंगे आप..चाय, कॉफी या फिर कुछ ठंडा..?" आहूजा ने उन दोनों के बैठते ही कहा।।
"नहीं कुछ नहीं.. बस आपसे कुछ सवाल करने आये हैं हम तो..!!"
"जी सर पूछिये..क्या पूछना चाहते हैं आप..?"
"आपकी कंपनी के एक एम्प्लॉय मिस्टर नीतेश मित्तल के बारे में आप कितना जानते है..?"
"देखिए..सर! मेरी कंपनी में तो बहुत सारे एम्प्लॉयर हैं..लिहाजा में सबको पर्सनली नहीं जानता..!! मैं मेरे किसी भी एम्प्लॉयर की पर्सनल इन्फॉर्मेशन नहीं रखता हूँ..!! जैसे बाकी के एम्प्लॉयर हैं..नीतेश भी उन सब की तरह ही है। इसलिए मुझे उसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता..!!"
"पर आपको ये तो पता है न..कि नीतेश की वाइफ नित्या मित्तल का मर्डर हो गया है..!!"
"क्या....? नित्या का मर्डर हो गया..? पर कैसे हुआ ये सब..?"
"परसों रात को नित्या एक मीटिंग के लिए घर से निकली थी..उसके बाद ही उसका मर्डर हो गया।"
"ओह.माय गॉड..!! मुझे इसके बाते में बिल्कुल भी नहीं पता था। लेकिन आप यहाँ क्यों आये हैं..? आपको यहाँ से क्या मिलेगा..?"
"यहाँ से क्या मिलेगा..क्या नहीं..!! वो आप हम पर छोड़ दीजिए.और बस हमारे सवालों के जवाब दीजिये..!!"
"जी पूछिये..!!"
"क्या नीतेश का यहाँ किसी के साथ कोई अफेयर है...?"
"देखिये..सर जैसा कि मैंने आपको बताया..मैं मेरे किसी भी एम्प्लॉयर के बारे में कुछ भी पर्सनल इंफॉर्मेशन नहीं रखता हूँ..तो भला मुझे ये कैसे पता होगा कि उसका किसी से अफेयर था या है..या नहीं..!! अगर आप यहाँ नीतेश की पर्सनल लाइफ के बारे में सवाल करने आये हैं..तो आई थिंक आपको मुझसे नहीं उसके दोस्तों से पूछताछ करनी चाहिए..!! वो ज्यादा अच्छे से और डिटेल में आपको सब कुछ बता पाएँगे।"
"कौनसे दोस्त..? क्या आप किसी को जानते हैं..?"
"हाँ..अभी वन वीक पहले ही नीतेश और उसके पाँच दोस्तों ने एक प्रोजेक्ट कंप्लीट किया था इसलिए मुझे याद है..!!"
"क्या नाम है उनका..?"
"आयुष..दर्शित..गुंजन..मेघा और निमित.!! हाँ ये पांचों और छटा नीतेश! आप उनसे पूछिये।"
"क्या आप मुझे इन सब का फोन नंबर दे सकते हैं..?"
"यस.! श्योर..!! मैं बोलता हूं किसी से वो सबके नंबर रिकॉर्ड्स में से निकाल कर आपको सेंड कर देगा।"
"ठीक है..थैंक यू सो मच मिस्टर आहूजा..!! अपना कीमती समय मुझे देने के लिये.!!"
"अरे..मेंशन नॉट..इट्स माय प्लेज़र..सर!!" इतना कहकर खत्री और आहूजा ने एक दूसरे से हाथ मिलाया और फिर खत्री और चहल उसके कैबिन से बाहर आ गये।

बिल्डिंग से बाहर निकल कर अनिरुद्ध गाड़ी में बैठा ही था कि उसका फोन बजा।
"हाँ..श्याम बोलो।" अनिरुद्ध ने कॉल उठाते ही कहा।
"सर..आपने जो नित्या मित्तल की कॉल डिटेल्स मँगवाई थी वो आ गयी हैं..!!" श्याम ने कहा।
"अच्छा..ठीक है..मेरे केबिन में रख दो मैं आकर देखता हूँ।"
"ठीक है सर..!!" श्याम ने कहा और कॉल डिसकनेक्ट हो गयी।

कुछ देर बाद ही खत्री और चहल थाने वापस पहुँच गए। थाने वापस लौटकर अनिरुद्ध सीधा अपने केबिन में गया और उसके पीछे ही चहल भी गया।
अनिरुद्ध नित्या के कॉल डिटेल्स देखता उसके पहले ही उसके मोबाइल पर मैसेज आया। उसने अपना फोन चेक किया तो किसी नंबर से नीतेश के दोस्तों के नंबर सेंड किये गए थे। खत्री ने तुरंन्त बेल बजायी तो कॉन्स्टेबल पाटिल झट से अनिरुद्ध के केबिन में दाखिल हुई।
"पाटिल मैडम..आप इन सब लड़के लड़कियो को कॉल करके कल ऑफिस जाने से पहले थाने आने का बोलिये। मैं अभी आपके फोन पर ये सभी नंबर आपको सेंड कर रहा हूँ..!!" अनिरुद्ध ने पाटिल मैडम को देखते ही कहा।
"जी..ठीक है सर.!!" पाटिल ने कहा और फिर कैबिन से बाहर चली गयी।
पाटिल के जाते ही अनिरुद्ध ने कॉल डिटेल्स को ध्यान से देखना शुरू किया। कुछ देर बाद अनिरुद्ध चहल से बोला
"चहल....क्राइम सीन पर हमें नित्या का फोन नहीं मिला था न..?"
"जी सर नहीं मिला..!! क्यों क्या हुआ..?"
"नित्या के फोन की लास्ट लोकेशन तो क्राइम सीन की ही दिखाई दे रही है..और वहीं पर ही उसका फोन बंद हुआ।"
"हो सकता है सर..क़ातिल अपने साथ नित्या का फोन ले गया होगा..!!"
"पर फोन ले जाकर वो खुद के पैर पर कुल्हाड़ी क्यों मारेगा..? जबकि उसे अच्छे से पता होगा कि हम फोन ट्रैक करके उस तक पहुंच सकते हैं..?"
"क्या पता सर..शायद उसे नहीं पता हो..? सर चांस लेते हैं..मैं नित्या का फोन ट्रैक करवाने का बोलता हूँ..अगर उसके फोन की लोकेशन पता चल जाएगी तो शायद..नित्या का क़ातिल भी मिल जाये..!!"
"ठीक है..लेकिन रुको..अभी! एक बार कॉल डिटेल्स अच्छे से चेक करने दो..अगर कोई ससपीसियस नंबर मिलता है तो उसकी कॉल डिटेल्स भी निकलवा लेना।"
"ठीक है सर..आप चेक कीजिये..!!"
कुछ देर बाद खत्री बोला
"नित्या के कॉल रिकॉर्डस में लास्ट कॉल ये इस नंबर से आया था लगभग 11 बजे के आसपास..!! इसके बाद न तो कोई कॉल किया गया और न ही कोई कॉल आया।"
"सर कहीं..नीतेश का नंबर तो नहीं है..??" चहल ने कहा।
"मेरे पास उसका नंबर सेव है..रुको मैं चेक करता हूँ..!!" कहकर खत्री ने अपने फोन में नीतेश का नम्बरा निकाला और चेक किया।
"नहीं..चहल..ये नितेश का नंबर नहीं है..!!"
"सर मैं फोन लगाता हूँ इस नंबर पर..!!"
"हाँ..देख लो लगा कर पर जहाँ तक मुझे लगता है..या तो कोई फ़्रॉड नंबर होगा या फिर फोन स्विच ऑफ आयेगा।"
चहल ने फोन लगाया और फिर कुछ सेकंड्स बाद बोला "सर जैसा आपने कहा था..फोन स्विच ऑफ ही है..!!"
"हम्म..पता ही था मुझे..!! तुम एक काम करो इस नंबर की डिटेल्स निकलवाओ..!! और नित्या के नंबर को ट्रैक करवाओ।"
"जी सर..!!" चहल ने कहा और कैबिन से बाहर जाने को हुआ कि खत्री ने उसे रोकते हुए कहा
"चहल..सुनो..! लगे हाथ नीतेश और लक्ष्मीकांत खरे की कॉल डिटेल्स भी निकलवा लो। देखते हैं ये दोनों वारदात के वक़्त सच में क्राइम सीन पर नहीं थे या फिर हमें बेवकूफ बना रहे हैं..!!"
"ठीक है सर मैं..अभी मोबाइल कंपनी को ईमेल भेजता हूँ..!!" इतना कहकर चहल वहाँ से चला गया।

चहल के जाते ही अनिरुद्ध ने अपनी डायरी निकाली और उसमे कुछ बातें नोट की और फिर घर चला गया।

अगले दिन
फैजाबाद रोड़ पुलिस थाना

इंस्पेक्टर अनिरुद्ध खत्री अपने कैबिन में बैठा चाय पीते पीते कुछ सोच रहा था तभी चहल उसके केबिन में दाखिल हुआ और बोला
"सर..नीतेश के दोस्त लोग आ गए हैं..!!"
"ठीक है..लेकर आओ उन्हें अंदर..!!" खत्री ने कहा और गिलास में बचा चाय का आखिरी घूँट तेज़ी से गले से उतार लिया।
"क्या हुआ सर...आपने हम सबको अचानक यहाँ क्यों बुलाया..?" नीतेश के एक दोस्त दर्शित ने कहा।
"क्या हुआ है..? तुम्हें नहीं पता क्या हुआ है..? नित्या मित्तल..तुम्हारे दोस्त नीतेश की वाइफ का मर्डर हुआ है..!!" इंस्पेक्टर अनिरुद्ध खत्री ने झल्लाते हुए कहा।
"हाँ..सर हमें पता है कि नित्या का मर्डर हो गया है..पर आपने हमे क्यों बुलाया..? इसमें हम क्या कर सकते हैं..?" मेघा ने आगे आकर कहा।
"तुम लोगो को पता है फिर भी पूछ रहे हो कि यहाँ क्यों बुलाया है..? जाहिर सी बात है..केस के सिलसिले में तुम सब से पूछताछ करनी है।"
"पर सर..!!" मेघा ने फिर से बोलने की कोशिश की लेकिन अनिरुद्ध ने उसे बीच मे ही रोक दिया और पूरे रौब मे बोला "बस....!! अब कोई कुछ नहीं पूछेगा..!! अब सिर्फ मैं सवाल करूँगा..और तुम लोग जवाब दोगे..!! डू यू गेट इट..?"
"यस सर..!! आप पूछिये..!!" इस बार गुंजन बोली।
"नीतेश को तूम लोग कबसे जानते हो..?"
"ऑफिस जॉइन करने के कुछ दिन बाद ही वो हम सबका दोस्त बन गया था..!! मतलब हम पांचों पहले से ग्रुप थे और वो बाद में आया और जब वो आया तो वो भी हमारे ग्रुप में शामिल हो गया।" आयुष ने कहा।
"अच्छा..!! अब ये बताओ कि नीतेश कैसा आदमी है..?"
"कैसा आदमी मतलब क्या सर..? जैसे बाकी के इंसान है वेसे ही है वो भी एक दम नॉर्मल..!!" निमित ने तेज़ आवाज़ में कहा।
"अच्छा..नॉर्मल..! और भी एक दम नॉर्मल..!! तुम बड़े अच्छे से जानते हो नीतेश को..?"
"हाँ सर मैं उसे बाकी सबसे ज्यादा अच्छे से जनता हूँ.. क्योंकि हम ज्यादातर वक़्त साथ मे बिताते हैं..!! और वो मेरा अच्छा दोस्त बन चुका है..तीन साल से हम सब साथ मे हैं..लेकिन मेरी और नीतेश की बातें बाकी सबकी तुलना में ज्यादा होती है..!! बस इसलिए कह सकता हूँ कि वो बहुत अच्छा इंसान है..!!"
"और बाकी तुम लोग को कैसा आदमी लगता है नीतेश ..?" खत्री ने बाकियों के तरफ डंडे से इशारा करते हुए पूछा। लेकिन कोई कुछ नहीं बोला तो खत्री ने दर्शित की तरफ अपना डंडा पॉइंट किया और बोला "तुम..! हाँ तुम बताओ..? कैसा आदमी है नीतेश..?"
"सर..! अच्छा है..मतलब हमारे सामने तो अच्छा ही रहता है और कभी भी कोई गलत बात नहीं सुनी उसके बारे में।" दर्शित अटकते हुए बोला।
"अच्छा तुम ये बताओ.. काम में कैसा है नीतेश..? मतलब टाइम पर काम ऑयर कर लेता है या डेडलाइन आ जाने तक भी काम पूरा नहीं कर पाता है..?" खत्री ने आयुष की तरफ देखते हुए कहा।
"उम्म....सर! काम में तो एवरेज ही है नीतेश..!! कभी डेडलाइन आ जाती तब तक भी काम पूरा नहीं कर पाता है और कभी कभी डेडलाइन के जस्ट पहले ही काम पूरा करता है..बट उसकी स्पीकिंग स्किल की वजह से वो अभी तक इस जॉब में हैं वरना..काम तो कुछ खास नहीं करता। बस प्रेजेंटेशन में क्लाइंट को इम्प्रेस की उसकी स्किल काबिल..ए..तारीफ है।" आयुष ने कहा।
"अच्छा..!! मतलब बातों के जाल में किसी को भी आसानी से फंसा लेता है..!!" खत्री ने कुछ सोचते सोचते कहा।
"हाँ..ऐसा कह सकते हैं..सर..!!" आयुष ने कहा।
"ये बताओ..ऑफिस में उसका किसी लड़की के साथ कोई अफेयर वगैरह..?" खत्री ने निमित की तरफ देखते हुए कहा।
"क्या पूछ रहे हैं सर आप..? आप अच्छे से जानते ही होंगे नीतेश ने नित्या से लव मैरिज की थी..!! और वो उससे बहुत प्यार करता था उसने खुद मुझे कई बार कहा है। तो आई डोंट थीं कि की नीतेश का कोई एक्स्ट्रा मेरिटेल अफेयर होगा।" निमित झल्लाते हुए बोला।
"अच्छा..!! ये बताओ कभी उसने कुछ बताया नित्या के साथ कोई लड़ाई.. झगड़ा.. वगैरह वगैरह..!!"
"हाँ..हम सबको पता था कि नीतेश ने उसके ससुर से बिज़नेस के लिये पैसे लिये थे और वो बिज़नेस चल नहीं पाया और उसके ससुर के सारे पैसे डूब गए थे। जो कि वो वापस नीतेश से माँग रहे थे..लेकिन नीतेश जमा ही नहीं कर पा रहा इस वजह से नित्या का और उसका अक्सर झगड़ा हो जाता था लेकिन फिर भी भी दोनों एक दूसरे से प्यार तो करते थे..!!"
"ठीक है..आख़िर सवाल...!! क्या नीतेश अपनी वाइफ का कत्ल कर सकता है या किसी और से करवा सकता है..?"
"क्या बोल रहे हैं सर आप..? आप के मन में जो आ रहा है आप वही बोले जा रहे हैं..!! इतनी देर से मैं और हम सब आपको बता रहे हैं कि नीतेश उसकी वाइफ से बहुत प्यार करता है..!! एयर आप फिर भी ये बेतुका सवाल पूछ रहे है..? नीतेश ने हमें बताया था कि उसका और नित्या का प्यार कॉलेज टाइम से था और इसलिए दोनों ने नित्या के पापा से लड़ कर और समाज से लड़कर शादी की थी। तो भला नीतेश क्यों मारेगा..या मरवाएगा नित्या को..?"
"शायद वो तंग आ गया हो..नित्या से.!! या फिर नित्या के पापा से..!! वो उनके पैसे नहीं लौटा पा रहा था..इसलिए शायद उसने ऐसा किया हो..? जुआ ये वजह काफी नहीं है..?"
"मुझे नहीं पता सर कौन सी वजह काफी होती है किसी का मर्डर करने के लिए..और कौन सी नहीं। लेकिन यदि पैसों की वजह से नीतेश ने नित्या को मार दिया हो तो मुझे नहीं लगता कि ऐसी कुछ बात थी। क्योंकि पैसे लिए तो पाँच साल से ऊपर हो गए थे और जब इतने सालों से नीतेश सब कुछ झेलता ही आ रहा था तो अब भला क्यों वो नित्या का मर्डर करेगा जबकि अब तक तो उसने उसके ससुर से लिये पैसों का आधे से ज्यादा हिस्सा जमा कर लिया था।"
"क्या...? सच में..? तुम्हें कैसे पता कि नीतेश ने पैसे जमा कर लिए थे..?"
"हाँ..सर नीतेश ने सच में आधे से ज्यादा पैसे जमा कर लिए थे..!! उसने खुद मुझे ये बात बताई थी। उसके शब्दों में कहूँ तो उसने कहा था बस कुछ महीने और..उसके बाद ज़िंदगी बहुत ही खुशहाल हो जाएगी..कोई टेंशन कोई चिंता..कुछ नहीं रहेगी। आधे से ज्यादा पैसे तो जमा हो ही गये हैं..बस कुछ ही महीनों में बाकी के पैसे भी आ जायेंगे और फिर मैं नित्या के पापा को पूरे पैसे लौटा दूँगा..!!"
"अच्छा..!! ठीक है अब तुम लोग जा सकते हो..!!" खत्री ने कहा तो तुरंत ही सभी लोग उसके कैबिन से निकलने लगे।
उन सब के जाते ही चहल अनिरुद्ध के केबिन में आया और बोला "सर आपने जिस अननोन नंबर की कॉल डिटेल्स निकलवाने का बोला था वो आ गयी है और साथ ही नीतेश और लक्ष्मीकांत खरे की कॉल रिपोर्ट्स भी आ गयी है। नित्या के फोन को ट्रेस करने का मैंने बोल दिया था लेकिन क्योंकि सस्पेक्ट ने फोन में से सिम निकाल दी है इसलिए उसे ट्रेस नहीं किया जा सका। लेकिन मैंने मोबाइल कंपनी वाले को बोल दिया है कि एमआई नंबर से ट्रेस करे। जैसे ही सस्पेक्ट कोई नया सिम नित्या के फोन में डालेगा तो मोबाइल कंपनी वाले को पता लग जाएगा और फिर उसे ट्रेस करना आसान हो जाएगा।"
"ठीक है चहल...बहुत बढ़िया काम कर रहे हो तुम.!! वेरी गुड..!! अरे हाँ..चहल तुमने अपने खबरी से पूछा..!! कुछ निकल कर आया क्या सायरा के बारे में..?" खत्री ने कहा।
"नहीं..सर अभी तो नहीं पूछा..!! बस अभी पूछने ही वाला था।"
"ठीक है तुम उससे पुछो..तब तक मे ये कॉल डिटेल्स देखता हूँ..!!"
"ठीक है सर..!!" चहल ने कहा और सलाम ठोंक कर वहाँ से बाहर आ गया। चहल के जाते ही खत्री ने पहले अननोन नंबर की कॉल डिटेल्स देखी और उसमें कुछ नंबरों को मार्क करने लगा।
कुछ ही देर बाद चहल वापस आया और बोला "सर..खबरी को बहुत कुछ पता चला है उस सायरा के बारे में।"
"अच्छा..!! क्या पता चला है..? अपने कुछ काम का है..?"
"जी सर..बिल्कुल है..!! ये सायरा दो साल पहले ही अपने गाँव से भागकर यहाँ आ गयी थी..क्योंकि इसका परिवार बहुत ही गरीब है..!! लेकिन सायरा के सपने बहुत बड़े बड़े थे..उसे गरीबी में रहना मंजूर नहीं था..इसलिए उसने यहाँ आकर कुछ काम करके पैसे कमाने का सोचा। सर क्योंकि ये बहुत ही गरीबी में रही है इसलिए बस जल्द से जल्द किसी भी तरह पैसे कमाना चाहती थी। इसलिए से एक साल पहले ये सायरा एक बार डांसर थी। फिर अहसान की नज़र इस पर पड़ी और उसने ही फिर सायरा को अपनी कंपनी में रिस्पेसनिस्ट कई जॉब दिलवाई थी।
लेकिन नित्या शुरू में सायरा को रिस्पेसनिस्ट रखने के लिए तैयार नहीं थी क्योंकि उसकी कंपनी में पहले से एक लडक़ी बतौर रिस्पेसनिस्ट थी और अच्छा खासा काम कर रही थी..लेकिन अहसान ने जोर दिया और कहा कि वो भी कंपनी में पार्टनर है तो कुछ फैसले वो भी कर सकता है तब जाकर नित्या सायरा को रखने के लिये मानी थी। और सबसे बड़ी बात सर..सायरा और अहसान मिर्ज़ा का लफड़ा..मेरा मतलब है कि अफेयर भी चल रहा है.!! जिसकी खबर नित्या को भी लग चुकी थी और इसलिए नित्या अहसान से काफ़ी ज्यादा गुस्सा भी थी। सर ये भी पता चला है कि जिस रात नित्या का क़त्ल हुआ उससे कुछ घण्टे पहले ही अहसान और नित्या का काफी बड़ा झगड़ा भी हुआ था।"
"अच्छा..!! तब तो नित्या को मारने का मोटिव इस अहसान के पास भी था। चहल अब हमारी सस्पेक्ट लिस्ट में सबसे ऊपर है अहसान...!! क्योंकि अहसान को ये डर रहा होगा कि कहीं नित्या उसे पार्टनरशिप से बेदखल न कर दे..!! और चहल..नित्या के कॉल डिटेल्स में जिस अननोन नंबर ने लास्ट टाइम कॉल किया था वो इस अहसान का ही है..!! नीतेश और लक्ष्मीकांत के कॉल रिकॉर्ड्स से तो कुछ खास हाथ नहीं लगा..उस रात की दोनों की लोकेशन वही दिख रही है जो उन्होंने बतायी थी..!! एक काम करते हैं..अहसान से मिलते हैं..कॉल रिकॉर्ड्स में उसका एड्रेस दिया है..!! चलो उससे मिलते हैं और देखते हैं वो क्या कहता है..!!"


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