मे और महाराज - ( खोज_१) 23 Veena द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

मे और महाराज - ( खोज_१) 23

दूसरे दिन सुबह जो उठी वो राजकुमारी शायरा थी। उन्हे बदन मे दर्द हो रहा था। तभी राज वैद्य उन्हे देखने आए।

" ये आपकी दवाइयां है, राजकुमारी। कुछ देर दर्द होगा पर फिर आपको अच्छा लगेगा। आपको और राजकुमार को शारीरिक संबंध के बीच कुछ दिनों का वक्त रखना है। मैने ये बाते राजकुमार को भी बता दी है। आप बस अच्छा अच्छा खाना खाएं और आराम कीजिए जल्द हमे खुशखबरी मिलेगी।" इतना कह वैद्य वहा से चले गए।

" शारीरिक संबध ???? मतलब ?????? आ........." चिखते हुए राजकुमारी ने पास रखी सारी चीजें फेंक दी।

राजकुमारी के लिए नाश्ता तैयार कर रही मौली के पास एक दासी दौड़ते हुए आई।

" राजकुमारी ने अपने आप को कमरे मे बंद कर दिया है। वो चीख रही है।" मौली जल्दी जल्दी सारा सामान लेकर उनके पास पोहची।

कमरेकी हालत देख वो चौक गई।

" नहीं। आप ये क्या कर रही है।???? राजकुमारी।" मौली के हाथ से थाल छुट गया। उसने जाकर शायरा के पैर पकड़ लिए। " अभी नीचे उतरये राजकुमारी।" मौली ने रोते हुए कहा।

" छोड़ दो हमे मौली हमारा मरना जरूरी है। अब हम ये नही सह सकते........" शायरा ने कपड़े का वो फंदा अपने गले मे डाला।

" नही। ऐसा मत कीजिए मुझसे बात कीजिए। नीचे उतरीए राजकुमारी। मेरे लिए।" मौली को रोता देख शायरा अपने आप को नही रोक पाई। गुस्से ने अब आसुवोका रूप ले लिया था। वो वही बैठ गई और रोने लगी।

" क्यों???? हम ही क्यों मौली। क्या गलती है हमारी.....। तुम्हे पता है, उसने क्या किया हमारे साथ।" शायरा ने रोते हुए कहा।

मौली बस उसे पकड़ कर बैठी थी।

" वो लड़की होती कौन है हमारे जिंदगी का फैसला लेने वाली। हम कौन है ??? हर एक के लिए सिर्फ मौहरा।" शायरा के आसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। " पहले राजकुमार अमन ने हमारे प्यार का फैसला किया। फिर हमारे पिता ने हमारी जिदंगी का फैसला किया। उस के बाद हमारे पति हमारे लिए फैसले लेंगे। इतना काफी नही था, जो इस अजनबी लड़की ने हमसे हमारे शरीर का फैसला लेने का हक भी छीन लिया। उसने हमारे शरीर के साथ राजकुमार के पास रात बिताई। बात समझती हो तुम मौली। इसका मतलब हमने उस इंसान के साथ रात बिताई जिसे हम प्यार तो दूर पसंद भी नहीं करते।" शायरा बस रोए जा रही थी। " हमे मत रोको मौली। हम जीने लायक नही बचे अब। हमे मर जाना होगा।"

" नही राजकुमारी। आप इस तरह हार नहीं मान सकती। में आपके साथ हू। मुझे आप पर भरोसा है।" मौली ने शायरा को मनाते हुए उसे सुला दिया।

" आराम कीजिए राजकुमारी। तुमने अच्छा नही किया समायरा तुम्हारी सारी शरारतें एक तरफ लेकिन ये बेवकूफी। बोहोत बुरा है।" मौली ने सोचा के अब वो आखरी बार समायरा को समझाएंगी अगर उसके बाद भी वो नही मानी तो अब उसे कुछ करना होगा।


" क्या ???" सिराज

" जी राजकुमार। दासियों ने कहा, राजकुमारी ने आत्महत्या की कोशिश की फिर से।" रिहान ने सर झुकाते हुए कहा।

" लेकिन क्यो??? वो ऐसा क्यों कर रही है ?" सिराज को फिक्र थी।

" आप उन्हे मिलना चाहेंगे।" रिहान ने पूछा।

" नही। पता नही रिहान कभी हमे उनसे बिल्कुल बात करने का जी नही करता। लेकिन कभी कभी हम उनकी तरफ खिंचे चले जाते है।" सिराज

" क्या राजकुमारी आप पर किसी तरह का जादू तो नही कर रही?" रिहान।

" मुझे नहीं लगता। उनकी अजीब हरकते हमे सच्ची लगती है। खैर इस बारे मे बाद मे सोचा जायेगा। अभी हमारे काम पे ध्यान देते है। मुझे उस बात की जड़ तक जाना है। उस रात उन लोगो को मेरे कमरे तक किसने पोहचाया।" सिराज ने गंभीर स्वर मे कहा।

दूसरी तरफ

" तुम सही कह रही हो मौली। हमे हार नहीं माननी चाहिएं। ये हमारा शरीर है, हम उसे दिखा देंगे की उसका इस पर कोई हक नही है।" शायरा ने अपने आसू पोछते हुए कहा।

" लेकिन आप ये करेंगी कैसे राजकुमारी?" मौली ने उत्सुकता से पूछा।

" हम" कुछ देर सोचने के बाद शायरा ने कहा, " हम उसे यहां आने ही नही देंगे।"

" लेकिन वो आप कैसे करेंगी ??? मेरा मतलब आपको तो पता भी नही के आप दोनो कैसे एक शरीर मे आ जा सकती है।" मौली।

" नही हमे पता है। जब हमे चोट लगती है तब या फिर जब हम सो जाते है तब वो हमारे शरीर मे आ जाती है। हम अपना पूरा ध्यान रखेंगे और हर चोट से बचेंगे। इतना ही नहीं हम बिल्कुल नही सोएंगे। आंख भी नही झपकाएं।" शायरा।

" बिना सोए आप जीएंगि कैसे? मेरा मतलब सोना तो शरीर के लिए जरूरी होता है।" मौली।

" इस शरीर के लिए ना सोना ज्यादा जरूरी है।" शायरा।


दो दिनों बाद,

" ये क्या हाल बनाया है आपने अपना राजकुमारी।" मौली ने उदासी से शायरा की तरफ देखते हुए कहा।

" क्या ? ये चद्दर हमे चोट से बचाएगी और ना सो कर हम खुद को बचाएंगे।" शायरा ने कहा।

" आपने दो दिनों से स्नान नही किया??? आप से अब बदबू आ रही है। ये पागल पन बंद कीजिए और मेंरे साथ स्नान करने चलिए। उसके बाद कुछ देर के लिए नींद पूरी कर लीजिएगा।" मौली ने वो चद्दर दूर करने की कोशिश की।

" बिल्कुल नही। स्नान के दौरान हमे चोट लग गई तो। और हमे कोई नींद नहीं आ रही । तुम जाओ यहां से हमे तुमसे बात नही करनी।" शायरा ने मौली को कमरे से बाहर भेज दिया।

मौली ने बस कमरे के बाहर कदम ही रखा होगा तभी शायरा के कमरे से उसे एक चीख सुनाई दी।

" मौली.........। पानी तैयार करो। मुझसे बदबू आ रही है।"

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Suresh

Suresh 1 साल पहले