हमेशा अकेली Pinku Juni द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • Agent Tara - 5

    फाइनल टेस्ट पास करने के बाद तारा की भूमिका सहयोग फाउंडेशन मे...

  • लिव-इन

    लिव-इन                           कमल चोपड़ा                ...

  • सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 4

    गार्ड्स चिल्लाए। अनन्या कमरे से बाहर निकली, दिल धक्-धक्। आर्...

  • Back for Revenge - 6

    उसे इस तरह तड़पते हुए देख सभी घबरा से गये थें। पार्टी-वार्टी...

  • मैं हो रहा हूॅं

    कहते है जीवित बचे रहना बहुत बड़ी बात है पर कोई ये नहीं जानता...

श्रेणी
शेयर करे

हमेशा अकेली

बात कुछ यू शुरू हुई, कॉलेज के दिन थे बड़े मजे वाले एक साल पूरा हुआ भी नहीं की फ़ोन की खुशी, नया था तो, धीरे धीरे सोशल मीडिया पर समय बीतता, एक दिन किसी स्कूल मित्र ने मेरे नंबर उसके मित्र को दे दिए हसीं मजाक मे मुझे मैसेज आया हलो मैंने कहा आप कौन में आप को नहीं जानती. उधर से भी कुछ यही मैसेज आया मैंने कहा नंबर कहा से मिले. उधर से जवाब आया आप को क्या करना है मैंने कहा नंबर मेरे है तो मतलब है
ऐसे करते दिन बीत गए ब्लॉक कर दिया मैंने फिर एक दिन अनब्लॉक कर दिया उसके बाद बाते हुई कुछ. धीरे धीरे समय बीतता गया बहुत अच्छा लगता बाते करना उन्होंने कहा में बात नहीं करू तुम से, पर क्यू नहीं कर सकते उन्होंने कहा में किसी और को पसंद करता हु मेँ क्या बोलती कुछ समय तक चुप रही पर मन नहीं माना उनके बिना इस तरह में बात करने को जिद करने लगी उन्होंने मुझे ब्लॉक कर दिया बहुत समय बीता मैंने उनको फिर मैसेज किया ओर बातों का सिलसिला शुरू हो गया फिर यही चलता रहा ब्लॉक, अनब्लॉक चार साल बाद फिर भी यही होता रहा समझ नहीं आ रहा था प्यार है या मजाक कहता बहुत कुछ थे की तुम्हारी बहुत याद आती है पर कभी खुल कर कुछ बतया बहुत बार बाहर गए घूमने बहुत अच्छे से साथ थे पर उनको में कभी अच्छे से समझ ही नहीं पाई गलती में करती हु उनको यही लगता था हमेशा उनके किसी भी काम को मैंने हमेशा सराहनीय बनाया है बहुत सपने दिखे थे उनके साथ पर एक चाय कप ने सब चकना चुर कर दिए मैंने उनको उनकी फोटो का चाय कप दिया ओर वो नहीं लिए ओर 9जनवरी 2021की शाम ने सब खत्म कर दिया आज भी मैसेज करती हु की वो गलती से ही हम से बात कर ले पर उनका ह्रदय बहुत मजबूत सगमरमर से बना है मन करता था नहीं करनी कोई बात पर मन तो उनके मोह मे मोहित था तो क्या गलत क्या सही बस उनका ही ख्याल आता मेरा मन तो बहुत बिचलित रहता पढ़ाई में भी मन नहीं लगता परीक्षा नजदीक आ रही थी भारतीय लोक सेवा आयोग की सब को बहुत उम्मीद थी मेरे से पर में बहुत परेशान रहती क्या करू यही सोचती की कोई हो जो मेरी तकलीफ को समझे पर कोई नहीं था शायद ऐसा अब तो आत्महत्या का विचार भी मन में आता पर ये नहीं कर सकती थी माँ पापा की मासूम आँखे मुझे बहुत समझदार मानती थी
उनके
बारे मै सोच कर बुरे ख्याल मृतमोक्ष हो जाते पर प्रेमी की याद मेँ जीवन अकेला रेगिस्तान सा नजर आ रहा था वो ही चल रहा था ब्लॉक, अनब्लॉक चार साल बाद भी आज उनकी यादे ही जीने का सहारा है बहुत बुरा लगता है ज़ब सभी सहेलियों अपने प्रेमी के bare मेँ बाते करती थी मेँ क्या बताऊ की मेँ क्या हु उनकी आज भी अकेला लगता है
हमेशा अकेला बस अकेला...........