उजाले की ओर --16 Pranava Bharti द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

उजाले की ओर --16

 

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  आ,स्नेही व प्रिय मित्रो

     ताने-बानों से घिरी ज़िन्दगी में चंद क्षण सुकून के मिल जाएं तो बहुत बड़ी बात होती है |वरना आजकल की ज़िंदगी न जाने कितने-कितने झंझावातों से घिरी रहती है |एक परेशानी का समाधान तो पूरी तरह प्राप्त हुआ नहीं कि दूसरी मुह बाए खड़ी हो जाती है |कुछ तो प्राकृतिक आपदाएं ही मनुष्य के जीवन में उसे जीने नहीं देतीं और कुछ वह स्वयं ही आपदाओं को गले लगाता रहता है |आज मनुष्य ने पेड़ काट-काटकर अपने लिए एक बड़ी समस्या खड़ी कर ली है |इसीलिए शनै:शनै: पूरे संसार का भूगोल ही बदलता जा रहा है |

तृष्णा एक प्रकार की नहीं होती |कभी वह क्षुधा के रूप में समक्ष आती है तो कभी कामवासना के रूप में तो कभी धन के लालच के रूप में और कभी किसी और रूप में |

कभी-कभी हम किसी प्रकार की प्रतिक्रिया करने में ही अपने जीवन को अभिशप्त कर देते हैं| हमें किसी ने कुछ कहा नहीं कि हम उसे अपने ऊपर ले लेते हैं और उसके निराकरण के लिए न जाने कितनी-कितनी प्रतिक्रियाएं प्रस्तुत करते रहते हैं |इन प्रतिक्रियाओं से किसी का कुछ भला हो अथवा न हो ,हाँ ! गलत तो अवश्य होता है |हमारी बात सामने वाला समझे या न समझे हम अपनी बात स्वीकार करवाने के लिए न जाने कितने उपाय करते रहते हैं और जब कोई हमारी बात समझ नहीं पाता तब हम बारंबार उसे समझाने की चेष्टा करके स्वयं को ही पीड़ित करते रहते हैं |

     यह बात सही है कि मनुष्य को अपनी समस्याओं का समाधान जितनी शीघ्रता से करना हो कर लेना चाहिए परन्तु उसके लिए अपने अज्ञान को दूर करके अंध-प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए |इससे मनुष्य और अधिक गफ़लत में पड़ जाता है |अपने अच्छे कर्मों का फल मनुष्य को अवश्य ही प्राप्त होता है |हमें चाहिए कि हम उस क्षण का ध्यान रखें जिस क्षण में हम जी रहे हैं |किसी भी कार्य को करने से पूर्व कुछ क्षण चिंतन करना बहुत आवश्यक है क्योंकि यदि हम पूरी चेतना से कोई कार्य करते हैं तो हम कम त्रुटियाँ करते हैं |इससे हमें सामने वाले को बार-बार सफ़ाई देने की आवश्यकता नहीं होती |

अत: जीवन में यह बहुत आवश्यक है कि हम सचेत रहकर अपने कार्य करते रहें|हमारे जीवन का उद्देश्य दुखों से मुक्ति प्राप्त करना है न कि दुःख के सागर में डुबकी लगाना |जब हम पूरी बात समझकर कोई काम करते हैं तब हम विशुद्ध आनन्द का अनुभव प्राप्त करते हैं| वास्तव में स्वर्ग व नर्क का अस्तित्व इस जीवन में और अभी है |किसी ने न तो स्वर्ग को देखा है और न नर्क को |जो कुछ है यही जीवन है ,जो कुछ है यहीं स्वर्ग है और जो कुछ है यहीं नर्क है |

 

किसने देखा कल यहाँ जो कुछ है ,है आज |

पल-पल में हो आस्था ,बनें सभी के काज ||

 

                                          डॉ.प्रणव भारती

                                       pranavabharti@gmail.com

 

 

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