यादों का सफ़र - 6 - अंतिम भाग VANDANA VANI SINGH द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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यादों का सफ़र - 6 - अंतिम भाग

कई बार जानू ने दर्द में मुझ से बात करना दूर मुझे फोन ब्लॉक कर दिया। रात रात भर रोते हुए निकल गई।
उन रातों को मै ये सोच कर गुजार दू की आखिर किन कर्मो की सजा मिली।
एसा कई बार हुआ ये दर्द मुझे मजबूती दे रहा था।
कोई एसा दर्द नहीं था जो इस प्यार ने मुझे ना दिया हो मुझे वो सब मंजूर था बस मेरे पास मेरा जानू रहे , इन लम्हों में हम प्यार के लम्हे याद करके रोए और बन्द कमरे में खूब चिल्लाए किसी को अपनी ये पीड़ा बता ना पाए सब पूछे कि आंखो को क्या हुआ सोई नहीं उनसे बहाना बना कर बात को ख़तम कर दे।
क्यो की जानू के बारे में मैंने किसी को कुछ नहीं बताया कभी भी किसी को मेरे अंदर एक राज है जो कभी किसी को पता नहीं चल पाया ।मुझे ये लगने लगा कि हो सकता है कि जानू का मन भर गया हो लेकिन इस बात पर भी तयार थी लेकिन वो मुझे साफ़ साफ़ कह दे कि उसको मेरी जरूरत नहीं रही मै सम्भाल जाऊंगी लेकिन जानू ने कभी पूरी तरह से कहा नहीं उसको मेरी जरूरत नहीं रही लेकिन अपने बर्ताव से मुझे पूरी तरह से जाहिर करा दिया अब थोड़ी हिम्मत बढ़ने लगी ती मुझ में भी और अब सिर्फ दिल नहीं सुनता नहीं तो मै खामोश हो जाती हमेशा के लिए। देखो कब इस से ज्यादा कब हिम्मत मिलती हैं।
कभी कभी एसा सोचती हूं अगर इतनी समझ तब होती तो शायद मेरे साथ ऐसा नहीं होता।
उस दिन सारी हदे पार कर दी तुम जी सकती हो मेरे बिना मेरा पीछा छोड़ दो , इतना कह कर फोन ऑफ कर लिया गया हम सदा के लिए दूर गए सावन में जो बिछड़े उस को ख़ुदा भी नहीं मिला सकता ,मै ने उस जानू की ही कसम खा ली कि मै अब कभी तुम से प्यार का इजहार नहीं करूंगी।
लेकिन कितनी कसमें कहा चल पाती है हम दूर तो हुए लेकिन जिंदगी बेजार हो गई हम बीमार हॉस्पिटल में भर्ती भी लेकिन जानू ने मेरी ख़बर नहीं ली। इन सब बातो ने मुझे उसके बगैर रहना सीखा दिया।
अब बात ये है कि क्या कभी फिर से उस से मिलूंगी या भूल जाऊंगी हमारे बीच की दूरियां अब कायम रहेंगी,
मैं अपनी जिंदगी में बहुत ज्यादा घुल गई मुझे अब आवश्कता नहीं रही की वो वापस आए या ना आए ।
लेकिन कसमो वादों का दिल पर असर कब होता है,
जब भी मै जानू को सोचती हू दिल से आवाज अती है जानू मेरे सामने हो और मै जानू कह कर उसके सीने से लग जाऊ और वो जान कह कर मुझे किस करे और मुझे आगोश में भर ले इन एहसासों के साथ जिंदगी कट रही थी।
एक दिन जब नवाज़ का मेसेज आता है तो मुझे मेरे सारे एहसास जैसे दफन हो जाते हैं।
मुझे एसा लगता है कि जानू नहीं है वो उसका शरीर जरूर है लेकिन वैसी आत्मा नहीं है।
मुझ से माफी भी मगता है, उसकी जो उसको एहसास नहीं की मेरे साथ किया क्या है, फिर कैसे मै माफ़ कर दू, एसे दर्द को वो जनता भी नहीं जो मै ने महसूस किया है।
वो मेरा जानू नहीं हो सकता हम मिले वेसी मुलाकात ना हुई।
मैं तो जाने कब उस से दूर हो गई थी जितनी देर बात हो उस वक़्त भले ही एहसास हो जाए लेकिन जो सच था वो हामेसा सच रहेगा हम कभी पास नहीं हो पाएंगे।
समाप्त..