यादों का सफ़र - 1 VANDANA VANI SINGH द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

यादों का सफ़र - 1

मै वंदना सिंह पहले भी बहुत सी कहानी पढ़ी है, जैसा कि आप जानते है, की मै हर किरदार को जीती एसा ही इस कहानी मे भी होगा इस कहानी में भी मै एक एक किरदार को अच्छे से वेक्त करना चाहूंगी और उस समय को आज में बदलने की कोशिश होगी ।
कहते हैं प्यार में बहुत ताकत होती है दुनिया भरोसे पर टिकी है! मै देविका इस प्यार की गहराई को इस तरह महसूस कर चुकी हो जिसके आगे पूरी जिंदगी खाली महसूस होती है
एसा लगता है उस के बाद जितनी जिंदगी प्रेम वियोग में कटी है, मेरा प्रियतम जिसे मै प्यार से जानू कहती थी आज उसे महसूस क्यो नहीं कर पाती जबकि उसका शरीर मेरे पास, मेरे नजरो के सामने होने प पर भी एसा लगता है कि वो मेरा जानू नहीं है।
कहा खो गया जानू कोन था कहा मिला और कैसे बिछड़ गया।
सुबह कितनी जल्दी में थी मैं मुझे घर जाने की बहुत जल्दी थी और गोरखपुर से आते वाक्त ये सोचा था ,कि जल्दी वापस भी आना है, जहां तक बस का रास्ता था वहा तक आसानी थी आने में लेकिन हमारा गाव बहुत दूर होने के कारण और कोई सीधा वाहन ना होने के कारण मुझे किसी की सहायता की जरूरत है, कुछ समझ ना आ रहा है क्या करू कैसे जाऊं अभी तो आटो वाले भी नहीं जा रहे है। सोचा किसी को रोक कर चली जाती हूं निर्वाह (मेरे घर से जहा तक साधन मिलते सहर आने के लिए) तक उसके आगे भाई को बुला लूंगी, जैसा सोचा वैसा ही हुआ, एक अजनबी मुसाफिर दिखा जिस को रोक कर मै ने पूछा कि मुझे आगे तक जाना हमे आप लिए चले मै आज जल्दी में हूं उसने हा कह दिया मुझे वो दिन अच्छे से आज भी याद है मै ने गुलाबी रंग की कुर्ती और काली जीन्स की पैंट पहनी और काले और लाल रंग के जूते पहन रखे थे।
हम उसके साथ उसकी मोटर साइकिल से एक चौराहे से दूसरे चौराहे तक आए, उस वेक्ती ने कहा कि मुझे अपने दफ्तर से कुछ कागज लेने अगर आप को बुरा ना लगे मै लेकर आपको छोड़ दूंगा, बात मुझे भाली लगी मैं ने हा कर दी जो जगह मुझे बताई थी वो मेरी जानी पहचानी थी, इस वजह से हम उसके साथ जाने को तयार हो गए , लेकिन इक डर सा है एसा लग रहा किसी अज़ान वेक्ति पे भरोसा करना क्या अच्छी बात है, लेकिन मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था अगर मै उस से मना करू तो क्या सोचेगा मेरे बारे में ये सोचते सोचते मै दफ्तर पहुंच गई। उस ने अचानक से अपने दफ्तर के सामने अपनी गाड़ी रोकी मुझे अजीब लगा क्यों की सुबह का वक्त था। दफ्तर में कोई नहीं था , और मै अकेले लेकिन मुझे किसी बात का भी डर नहीं था, मै बाहर अकर धूप में खड़ी हो गई क्यों की फेबुरी का महीना था और शरद सी थी मुझे अंदर आने के लिए कहा कि आप "आओ अंदर आकर बैठ जाओ "लेकिन मै ने कहा कि नहीं "मै बाहर ठीक हूं,। "उसके बाद ओ कागज लेकर मुझे साथ छोड़ने के लिए वहा से निकले थोड़ी दूर रास्ता चलने के बाद मेरे घर से फोन आया जिसमें मैंने कहा कि मुझे अभी गोरखपुर जाना है, जिस वजह से नाम पता चला आपका नाम देविका है। हा बड़ी आसानी से बता दिया
ये भी बताया कि मै गोरखपुर शहर में अपनी में रहती हूं कुछ काम से घर जा रही हूं।
बात करते करते गांव के पास आ गए।
आप घर चलिए ! मेरी सहायता की आप घर वालो से भी मिल लोगे,
नहीं! बड़ी जल्दी जवाब दिया
अभी तक नाम नहीं पूछा था, मुझे उस वक़्त नाम पूछने का जैसे याद नहीं रहा।
मैं ने फोन हाथ में पकड़ा था
आप अपना मोबाइल नंबर दे दीजिए हम कभी आए तो आपको कॉल कर लेंगे आपको,
नांबर दे दिया और हम चले आए जो काम था किया उसके बाद घर से वापस चले गए। रास्ते में फोन पर कॉल आया
-हेल्लो
-कहा हो इस वकत आप!
-मै गोरखपुर जा रही हूं, मुझे फोन ना करना मै बिज़ी रहती हूं,
-ठीक है नहीं करूंगा!
-कॉल कट हो गया, हम अपने हॉस्टल चले गए और नंबर भी भी फोन से हटा दिया।
-
मुझे अब ये लगने लगा है कि अब कभी बात नहीं होगी, क्या ये बर्ताव अच्छा है की नहीं मै ने कुछ ग़लत किया किसी अनजान से इस तरह बात करना अच्छी बात तो नहीं है। धीरे ये सारी बाते मेरे दिमाग से हट गई और अपनी दैनिक जीवन फिर बेस्त हो गई हूं.। म, लेकिन घर वालो से शादी रुकवा रखा है मेरा कहीं जॉब लग जाए उसके बाद कर दे शादी मुझे कोई परेशानी नहीं है।
मै ने अभी तक किसी को प्यार नहीं किया था सायद जिदंगी ने कभी मौका ही नहीं दिया था इन सब चीजों का और मै अपनी दुनिया अलग बनाए हुए अब तो सगाई भी हो गई है अब सोचना भी पाप होगा जो जिंदगी देगी उसी में खुश रहना होगा,।
इस सोच में कब एक महीना निकल गया कुछ समझ नहीं आया कभी जरूर नहीं लगी कि मुझे उस से बात करनी चाहिए ना उधर से कभी कोई फोन आया सब कुछ अच्छा था। लेकिन कभी उसके दफ्तर की कोई बात होती तो ये याद आता कि कोई था और कितना अच्छा था मै ने उसका नम्बर ना हटाया होता तो फोन तो कर लेती ।
आज होली कि शाम मै सबके साथ बाहर थी अंदर मेरा फोन बजा मै ने जब मै ने फोन उठाया
हेल्लो..
होली की मुबारक बाद!
मै- थैंक्स यूं!
मै _अपना नाम तो बता दीजिए ?
नवाज़!
मै_बस इतना सा नाम है?
नवाज़_जी हां
कॉल कट हो गई इस बार मैंने नम्बर अपने फोन में रख लिया।
फिर मुझे आज 15 दिन के बाद मै ने कॉल किया।
हेल्लो कैसे हो आप?
नवाज़- मै ठीक हूं आप बताओ!
मैं भी ठीक हूं।
थोड़ी देर बात होकर कॉल कट हो गई।
आगे बात होगी ये नहीं अगले भाग में जानेंगे