आओ बहनों चुगली करें Asha Rautela द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

आओ बहनों चुगली करें

आओ बहनों चुगली करें

पहला दृश्य
एक मध्यमवर्गीय परिवार का दृश्य
(बहू, सास आपस में बातें कर रहें तभी गौरव आता है। गौरव सरला का पति है।)
सास- सरला तूझे पता है कल सामने वाले वर्मा जी हैं ना उनकी बेटी मधु घर से भाग गई।
बहू- हैं मम्मी जी मुझे तो पता ही नहीं।
सास- मुझे भी आज ही पता लगा सुबह जब सब औरतें चाौपाल में बातें कर रही थीं।
बहू- मम्मी मुझे तो उस लड़की पर पहले से ही शक था कपड़े देखे थे उसके
सास- अरे! वो घंटों-घंटों फोन पर लगी रहती थी।
बहू- हाँ, फोन पर बातें करते हुए तो उसे मैंने भी देखा है।
सास- तभी तो मैं कहती हूँं फोन ने आज की युवा पीढ़ी को बिगाड़ दिया है।
बहू- नहीं, मम्मी जी ऐसा नहीं है हर लड़की मधु नहीं होती।
सास- एक जमाना था लड़कियाँ घर से बाहर तक नहीं निकलती थी।
(तभी गौरव आता है)
गौरव- सास-बहू का आओ बहनों चुगली करें अभियान चल रहा है।
सास- तू चुप कर।
बहू- मम्मी जी ठीक कह रही हैं।
गौरव- तुम लोगों की बातें सुनकर मुझे अपने नाटक का शीर्षक और प्लाट मिल गया है।
सरला(पत्नी)-कौन-सा नाटक जी।
गौरव- हमें एक नाटक करना है, मैं बहुत दिनों से एक नाटक का प्लाट और शीर्षक ढँूंढ़ रहा था आज मुझे मिल गया। ‘आओ बहनों चुगली करें।’
माँ- अरे बेटा क्या कह रहे हो ये कोई शीर्षक है। मैं तुुझे बताती हूँ। सीता और गीता, मैं तुलसी तेरे आॅँगन की।
गौरव- माँ मुझे फिल्मी कुछ भी नहीं चाहिए।
सरला- मैं बताऊँ तुम्हें शीर्षक- ‘सरला एक सर्वगुणसम्पन्न बहू और पत्नी’।
गौरव- ये भी कोई शीर्षक हुआ। अच्छा छोड़ो तुम और माँं मेरे नाटक में काम करो तुम दोनो चुगलियाँ अच्छी कर लेती हो।
माँ- तू चुप कर हम चुगली करते हैं। अरे! यह बात सच है।
गौरव- ठीक है माँ हम यही नाटक कर लेते हैं तुम दोनों इसमें अच्छा अभिनय कर लोगी। 15 दिन बाद विदेश जाना है। वहाँ पर एक नाटक करना है।
सरला- ठीक है मैं और मम्मी तैयार हैं बदले में क्या मिलेगा?
गौरव- कुछ नहीं । तुम दोनों लालची हो।
माँ- बेटा विदेश जाने के लिए मेरे पास कपड़े नहीं हैं तू मेरे लिए 1 जोड़ी पैंट-शर्ट और 1-2 जोड़ी स्कर्ट ले आना तभी मैं तेरे साथ आऊँगी।
गौरव- तुम भी माँ हद करती हो चलो ठीक है।

(सभी लोग प्रैक्टिस करते हैंै। )
15 दिन बाद............
(दूसरा दृश्य)
गौरव- अरे माँ जल्दी करो मिनी स्कर्ट मत पहनों, साड़ी पहनकर चलो, तुम कितनी अजीब लग रही हो मिनी स्कर्ट।
माँ- तू चुप कर मैं अपने जमानें में मिस यूनीवर्स रह चुकी हूँ।
सरला- मैं भी तो मिस वल्र्ड रह चुकी हूँ।
गौरव- तुम दोनों फिर शुरू हो गईं। क्या फैमिली है मेरी पूरी काॅमिडी व फिल्मी।
अब चलो भी।
(तीसरा दृश्य)
(गौरव लंदन के एक मंच में अपने नाटक ‘आओ बहनों चुगली करें’ के प्रसारण की प्रतीक्षा कर रहा है।
मंच में एक मध्यम वर्गीय परिवार का दृश्य बाहर चैपाल में सभी औरतें बातें कर रही हैं।)
पहली महिला- बहनजी मधु को तुम जानती हो न वो कल रात भाग गई।
दूसरी महिला- किसके साथ भागी कुछ पता है।
तीसरी महिला- किसके साथ भागेगी लड़के साथ।
चौथी महिला- मैंने तो सुना है घर के सारे जेवर ले गई।
पाँचवीं महिला- तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे कि तुम्हें बता कर गई हो।
(सब हँसने लगते हैं)
चैथी महिला- कहते हैं न पूत के पाँव पालने में। मेरी बहू ने देखा था उसके हाथ में एक बैग भी था। क्यों सरला?
सरला- हाँ मेरी मम्मी जी बिल्कुल ठीक कह रही हंै।
पहली महिला- जब सुबह मैं चीनी माँगने घर गई थी तो मैंने उसे घर पर नहीं देखा।
दूसरी महिला- तुम चीनी माँगने रोज किसी-न किसी के घर जाती हो।
तीसरी महिला- तो क्या हुआ चीनी मँहगी हो रही है।
दूसरी महिला- चीनी क्या मैं तो तेल भी माँग कर लाती हूँ। शनिवार के दिन जब भी कहती हूँ तेल खत्म हो गया तो लोग थोड़ा-थोड़ा दे देते हैं।
चौथी महिला- बूँद-बूँद से घड़ा भरता है। तुमने तो बचत का फंडा सीखा दिया।
पाँचवी महिला- मेरा बेटा कब से कह रहा है हलुवा खाना है पर घर में घी नहीं है, मैंने कहा सरसों के तेल में बना देती हूँ। पर मना करता है।
दूसरी महिला- अरे घी खरीद लो।
पाँचवी महिला- मैं तो सोच रही हूँ मैं भी मधु के घर से एक कटोरी घी माँग लाऊँ। और कुछ खबर भी ले आऊँ।
(तभी उस घर का दरवाजा खुलता है जिस चैपाल में बैठकर सारी औरतें बातें कर रही थीं और एक लड़का गेट से बाहर निकलता है। )
चैथी महिला- अरे बेटा गौरव तुम तो जल्दी उठ गए। मैं और बहू तो इसलिए बाहर बैठ गए कि तुम्हें कोई परेशानी न हो।
गौरव- वाह मम्मी तुम दोनों भी हद करती हो तुम सब यहाँ बैठ कर चुगलियाँ कर रही हो। मैं क्यों सो जाऊँ? मैं भी जानाना चाहता हूँ कौन, किसके साथ भाग गया। फिर सबकी ओर देखकर कहने लगा-आओ बहनों चुगली करेें।
पहली महिला- मैं बताती हूँ गौरव बेटा क्या हुआ। वो जो बाजू वाले वर्मा अंकल हैं ना उनकी बेटी किसी के साथ भाग गई।
गौरव- (हैरान होकर) अच्छा आंटी जी,फिर क्या हुआ, कहाँ गई। मुझे शाम को शादी में जाना है सोचता हूँ उनके बेटे का कोट माँग लाऊँ।
सरला- सुनते हो जी जा रहे हो तो मेरे लिए उनकी बहू का लहँगा माँग लाना।
चैथी महिला- बेटा अब तुम जा ही रहे हो तो मेरे लिए वर्मा आंटी की एक साड़ी माँग लाना।
(पर्दा गिरता है)
आशा रौतेला मेहरा
मकान न-4 नाँगलोई,
दिल्ली-110041