दो पतियों की लाडली पत्नी

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Karan Thakur उम्र (26) – शांत, समझदार, काबिल AI इंजीनियर। Kabir Thakur उम्र (25) – चुलबुला, मासूम, तेज दिमाग वाला AI डेवलपर। Shreya Sharma उम्र (23) – सरल, भोली, सुंदर AI इंजीनियर। दोनों भाई एक ही कंपनी के अलग-अलग सेक्टर में काम करते थे। भाईचारा ऐसा कि लोग उन्हें राम-लक्ष्मण कहकर बुलाते थे। Company Lobby (Morning 10:00 AM) कंपनी के ग्लास डोर खुलते हैं। लोग इधर-उधर भाग रहे हैं। एक शरमीली, सिंपल लड़की श्रेया जो चश्मा ठीक करती हुई फाइलें पकड़कर अंदर आती है।

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 1

Karan Thakur उम्र (26) – शांत, समझदार, काबिल AI इंजीनियर।Kabir Thakur उम्र (25) – चुलबुला, मासूम, तेज दिमाग वाला डेवलपर।Shreya Sharma उम्र (23) – सरल, भोली, सुंदर AI इंजीनियर।दोनों भाई एक ही कंपनी के अलग-अलग सेक्टर में काम करते थे। भाईचारा ऐसा कि लोग उन्हें राम-लक्ष्मण कहकर बुलाते थे।Company Lobby (Morning 10:00 AM)कंपनी के ग्लास डोर खुलते हैं। लोग इधर-उधर भाग रहे हैं। एक शरमीली, सिंपल लड़की श्रेया जो चश्मा ठीक करती हुई फाइलें पकड़कर अंदर आती है।Receptionist बोली -Good morning ma’am.Shreya ( ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 2

Suhaagraat ka Kamraकमरे में हल्की गुलाब की खुश्बू है, पर माहौल बहुत भारी।एक बड़ा सा बेड… जिस पर तीनों हैं— करन, कबीर, और श्रेया।तीनों बिल्कुल चुप।करन बेड के एक कोने पर सहमे हुए बैठा है, कबीर दूसरे कोने पर टेढ़ा होकर।श्रेया बीच में, हाथ अपनी चुन्नी में कसकर फँसाए हुए।Kabir breaks the silenceअचानक कबीर अपनी जगह से चिढ़कर उठ जाता है।Kabir (गुस्से में) बोला -मेरा मन कर रहा है।मैं उस पंडित की बत्तीसी बाहर करके आऊं।उसने ही सब गड़बड़ किया है।वह पगड़ी उतार फेंकता है।Kabir बोला -एक लड़की की दो पतियों के साथ शादी?पागल बना दिया सबको।करन हल्के लेकिन ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 3

आधी रात का डररात के 12 बजे। कमरा शांत। हल्की–सी हवा परदे हिला रही है।तीनों गहरी नींद में हैं।अचानक बाहर से कुत्ते के जोर-जोर से भौंकने की आवाज़ — “भौं! भूँ!!”श्रेया की आँख फट से खुल जाती है। वो खिड़की के बिलकुल पास सो रही है। डर से सीधी उठकर बैठ जाती है।श्रेया (घबराई हुई, तेज सांसें लेते हुए) बोली -बाबा रे… कोई आया… कोई जरूर आया…।उसकी आवाज़ सुनकर करन और कबीर दोनों अचानक उठ जाते हैं।कबीर (नींद में बाल उड़ाते हुए) बोला -क्या? क्या हुआ? कोई चोर आया क्या? या बम फट गया?करन बोला -Shreya… तुम ठीक हो?श्रेया ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 4

Shreya का नया रूपBreakfast के बाद Shreya कमरे में जाती है।बाहर हल्की धूप, अंदर शांत माहौल।वो अलमारी खोलती है एक हल्की–सी सुंदर साड़ी निकालती है— गुलाबी सारी।धीरे–धीरे साड़ी पहनती है… पल्लू ठीक करती है। और बाल—खुले छोड़ देती है।Shreya (आईने में खुद से धीरे से) बोली -चोटी बनाना तो आता ही नहीं मुझे।नहीं बन पाती।घर पे तो mummy और बहन बना देतीं थीं। कभी कभी भाई या papa भी बना देते थे। यहां कौन बनाएगा?अच्छा है ... बल खुले ही ठीक हैं।उसके लंबे, चमकदार बाल घुटनों से थोड़े ऊपर तक गिरते हैं… बिल्कुल भोली, मासूम और नई-नवेली दुल्हन जैसी ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 5

सुबह की हल्की धूपShreya balcony में खड़ी हल्की हवा महसूस कर रही है।आँखों के नीचे हल्की थकान — रात की जागी हुई।कप में हल्की चाय।Karan धीरे-धीरे चुपचाप आता है, उसके पास खड़ा होता है।जैसे बिना आवाज़ किए उसकी हालत समझ गया हो।Karan (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -रात भर सोई नहीं ना ?Shreya चौंकती नहीं—उसे पता है Karan उसे observe करता है quietly.Shreya (धीमे से) बोली -डर लग रहा था…और आप दोनों सो रहे थे।Karan उसके हाथ से कप लेता है और चाय की चुस्की लेता है।Karan बोला -तुम्हारे डरने का reason मैं हूं.... तो तुम्हारा थोड़ा सा डर ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 6

पहली बार तीनों की धड़कनें एक साथकमरे में हल्की रोशनी है। Shreya बीच में खड़ी है। करन उसके पीछे उसकी कमर पर हाथ रखता है। कबीर सामने खड़ा होकर उसके चेहरे को हल्के से छूता है।Shreya की सांसें भारी हैं।दोनों ओर से महसूस होने वाला प्यार उसे कमजोर भी बना रहा है और पिघला भी रहा है।कबीर: (धीरे से) बोला -डरो मत… हम यहीं हैं।करन: (उसकी गर्दन पर हल्का स्पर्श करते हुए) बोला -बस दिल की सुनो… बाकी हम संभाल लेंगे।Shreya आँखें बंद कर लेती है। एक हाथ से करन की उंगलियाँ पकड़ती है… दूसरे से कबीर की शर्ट।तीनों ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 7

रात का कमरा, हल्की नीली लाइटShreya हीटिंग पैड लगाए लेटी है।चेहरा थका हुआ… आँखें आधी बंद… पर अब अकेली उसके सिरहाने बैठा है।कबीर पैरों के पास, उसके तलवों को हल्के-हल्के दबा रहा है।Shreya बहुत धीरे से sigh करती है—दर्द थोड़ा कम हुआ है।Karan धीरे से उसके बाल सहलाता है:करण बोला -अब कैसा feel हो रहा है?Shreya (बहुत धीमे, मासूम बनकर) बोली -थोड़ा better…आप दोनों हो ना… इसलिए…।कबीर ( तुरंत शरारत भरे अंदाज में) बोला -क्या बात है… हम दोनों की presence दर्द की medicine है क्या?Shreya हंसने की कोशिश करती है, पर दर्द से मुंह बिचक जाता है।Karan उसके ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 8

Car के अंदर, रात का समय, हल्की हल्की हवा चल रही है।Kabir ड्राइव कर रहा है। Karan अब भी पर है, और Shreya पीछे Kabir की बाँहों में सिर रखकर सो चुकी है।Shreya का चेहरा बहुत मासूम लग रहा है। Kabir उसकी पीठ को हल्के-हल्के सहला रहा है ताकि उसे आराम मिले।Kabir (धीरे से, Karan से) बोला -भैया… काफी देर हो गई आपको ड्राइव करते हुए। आप थोड़ा पीछे आ जाइए… मैं चला लेता हूँ।Karan, हल्का सा खिंचाव महसूस करते हुए—हां…सही कह रहा है तू। काफी देर हो गई।Kabir कार एक तरफ रोकता है। दोनों सीटें बदलने लगते हैं।अब ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 9

अगली सुबह, हल्की धूप परदे से अंदर आ रही है।कमरा बिल्कुल शांत है।Shreya धीरे-धीरे आँखें खोलती है… सिर भारी पर अब दर्द उतना नहीं।वो उठकर बैठती है और सामने का नज़ारा देखकर उसकी आँखें भर आती हैं—Karan और Kabir दोनों बैठे-बैठे ही सो गए थे।Kabir उसका हाथ दोनों हाथों से पकड़े बैठे-बैठे सोया था।Karan उसका सर सहलाते-सहलाते ही नींद में झुक गया था।दोनों के चेहरे पर थकान साफ दिख रही थी।Shreya को देखकर समझ आ जाता है कि दोनों भाई पूरी रात उसकी देखभाल करते रहे।उसके गले में एक सिसकी अटक जाती है।Shreya (धीरे से फुसफुसाते हुए) बोली -ये ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 10

Doctor cabin. Shreya chair पर बैठी है, आँखें बंद, हल्का दर्द अभी भी बना है। Kabir और Karan दोनों दोनों तरफ बैठे हैं — चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है।Doctor (शांत स्वर में) बोलीं -देखिए… reports बिल्कुल normal हैं। Shreya को migraine है । इसलिए हमेशा थकान, चक्कर, सिर दर्द, light से problem, कभी कभी उल्टी… ये सब होता रहता है।Kabir (चौंककर) बोला -Migraine? पर doctor ये इतना ज्यादा क्यों हो जाता है?Doctor बोलीं -Stress, हवा पानी बदलाव, hormonal imbalance, या कभी ज्यादा excitement से भी migraine trigger हो सकता है।Karan (हल्की बेचैनी में) बोला -पर जब ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 11

अगली सुबह। घर में हल्का उजाला। Karan और Kabir उठते हैं, लेकिन उनके बीच वाली जगह… खाली।Kabir चौंककर उठ है।Kabir बोला -Shreya…?Karan भी उठता है, उसके चेहरे पर भी बेचैनी।Karan बोला -Washroom में होगी शायद।दोनों दरवाजा खटखटाते हैं — कोई जवाब नहीं।Kabir बोला -Kitchen?Kitchen खाली। Balcony खाली। पूरा घर खंगाल लेते हैं — Shreya कहीं नहीं।Karan की सांस तेज होने लगती है।Karan (चिंता में) बोला -Kabir… Shreya कही गई ही नहीं… ये सब कुछ normal नहीं लग रहा।Kabir mobile उठाकर उसे call करता है—“The number you are trying to reach is switched off.Kabir (गुस्सा + डर से) बोला -Phone ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 12

कमरा हल्की धूप से भरा हुआकुर्सी पर रात से जलता टेबल लैंप अब भी टिमटिमा रहा था।श्रेया धीरे-धीरे करवट हुए जागी… और जैसे ही उसकी आँखें खुलीं—उसका दिल एक पल को रुक गया।वो पूरी तरह करण के सीने से लिपटी हुई थी…।और पीछे से कबीर की मज़बूत बाहें उसकी कमर को थामे थीं।तीनों की साँसे एक दूसरे से टकरा रही थीं…गरमाहट… सुरक्षा… और एक अजीब-सी शांति कमरे में तैर रही थी।श्रेया धीरे से आंखें मलती है, फिर नीचे देखती है और धीरे से फुसफुसाती है।श्रेया (चौंक कर, पर प्यारे अंदाज़ में) बोली -हे भगवान… मैं इस तरह सो गई ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 13

धीरे-धीरे दिनों ने एक खूबसूरत रफ़्तार पकड़ ली थी।ना अब कोई डर था, ना कोई गलतफहमी।तीनों एक-दूसरे को समझ थे, अपने चुके थे।शाम का समय था।हल्की बारिश की सुगंध कमरे में फैल रही थी।लाइट मंद थी।और तीनों अपने छोटे से घर में एक सुकून भरी शाम जी रहे थे।श्रेया बीच में सोफे पर बैठी थी।कबीर उसकी चाय बना रहा था,करण रसोई से फल काट रहा था।कबीर (चाय लाते हुए) बोला -गरम लो… migraine वापस ना आए।करण बोला -और ये फल… doctor में बोला था ना weakness कम होगी ।श्रेया मुस्कुराई।उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी—वो जो किसी ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 14

घर में हल्की हल्की सजावट… दीवारों पर दीये, फूल और मेहंदी की खूशबू फैली हुई है। शरद का मौसम, ठंड। श्वेत साड़ी पहने श्रीय़ा बहुत नाज़ुक और खूबसूरत लग रही है।कबीर(मुस्कुराते हुए, उसके पास आकर) बोला -आज किस चीज़ का टेंशन मत लेना… बस आराम करना है तुम्हें।करन(हल्के रोब वाले अंदाज़ में) बोला -और याद रखना… आज तुमने दो-दो पतियों का व्रत रखा है। हम दोनों तुम्हें एक मिनिट भी अकेला नहीं छोड़ेंगे।श्रेया शर्मा जाती है… मुस्कुराती है, थोड़ा सा शरम भी आती है।श्रेया पूजा की थाली तैयार कर रही है, लेकिन चक्कर सा आता है। तभी दोनों भागते ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 15

अगला दिन, ऑफिस का बड़ा कॉन्फ़्रेंस हॉलसुबह–सुबह जब पूरा स्टाफ अपनी–अपनी सीटों पर बैठा था,तभी एक साथ तीनों भारी की आवाज़ आई—करन… कबीर… और श्रेया।तीनों आज बिल्कुल अलग लग रहे थे।चेहरे पर गुस्सा नहीं, एक खामोश तूफ़ान।श्रेया बीच में…और दोनों भाई उसके दोनों तरफ ऐसे खड़ेजैसे आज कोई उसे छू भी नहीं सकता।सब कर्मचारी खड़े हो गए, क्योंकि तीनों ही सीनियर पोस्ट पर,और असल में—पूरे ऑफिस के हेड थे।करन ने टेबल पर फाइल पटकी।करन(ठंडी लेकिन डरावनी आवाज़ में) बोला -कल किसने मेरी बीबी को रुलाया?पूरे हॉल में खामोशी।किसी की हिम्मत नहीं कि आँख उठाकर देख ले।कबीर आगे बढ़ा।उसके चेहरे ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 16

शाम के 8 बजे।तीनों साथ में खाना खा रहे थे कि अचानक—“ठक!”पूरे घर की लाइट चली गई।कबीर ने तुरंत बजाईं—कबीर (एकदम excited होकर) बोला -बस! आज अंधेरे में hide & seek…मतलब लुक्का - छुपी खेलते हैं।बहुत मजा आएगा!श्रेया ने भौंहें चढ़ाईं बोली—क्या बच्चगिरी है ये? मैं नहीं खेल रही!करण हँसते हुए बोला—अरे चलो ना… last time हम जीते थे,इस बार तुम हमे पकड़कर दिखा दो।श्रेया ने नकली गुस्से में मान ही लिया।कबीर ने मोबाइल की टॉर्च बंद की।कबीर बोला -Shreya… तुम दो minute तक counting करो।हम दोनों छिप जाते हैं।श्रेया दीवार की ओर मुड़कर गिनती शुरू करती है—“1… 2… ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 17

तीनों हंसते-हंसते थक चुके हैं। Shreya के गाल लाल हो चुके हैं, Kabir और Karan दोनों पसीना पोंछते हुए देख रहे हैं।Kabir (थोड़ा बेबी-सा मुंह बनाते हुए) बोला -बस… मैं थक गया हूं… Shreya तुम्हारी वजह से running race हो गई।Karan बोला -Running race? ये तो पूरा Olympics था।Shreya (हंसते हुए सोफ़े पर गिरती हुई) बोली -आप दोनों तो baby हो… एक push करूं तो सीधे wall पे जाओगे!Kabir और Karan दोनों उसके पास बैठ जाते हैं।Shreya बोली -देखिए! आज से कोई ऐसे late-night games नहीं!कल फिर मुझे ही डांट खानी पड़ेगी।— ‘श्रेया थक गई होगी, खयाल क्यों नहीं ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 18

बाथरूम की लाइट हल्की-सी काँप रही थी।Shreya वॉशबेसिन के सहारे खड़ी थी, एक हाथ से अपना पेट दबाए हुए। साँसें तेज़ थीं।माथे पर पसीना और आँखों में डर। अचानक उसे तेज़ मिचली आती है। वो झुककर वॉशबेसिन की ओर उल्टी करती है। उसी पल उसकी नज़र अपनी उँगलियों पर जाती है— खून।Shreya घबरा जाती है।Shreya (काँपती आवाज़ में) बोली -न… नहीं… ये क्या…?वो जल्दी से नल खोलती है, पानी में हाथ धोती है,लेकिन खून रुकने का नाम नहीं लेता।उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता है। वो शीशे में खुद को देखती है, चेहरा सफ़ेद पड़ चुका है, आँखों में ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 19

Shreya की बॉडी में खून की कमी इतनी ज़्यादा हो गई थी कि एक दिन वह अचानक बेहोश हो और Kabir तुरंत उसके पास दौड़े,और उसे संभालते हुए ambulance में hospital ले गए।Kabir (घबराहट में) बोला -भैया… जल्दी जल्दी! उसे संभाल के ले चलो!Karan (panic में) बोला -हाथ पकड़… उसे खोने मत देना!Hospital पहुँचकर, डॉक्टर ने उन्हें ICU में भेजा और सचाई बताई—Shreya का health condition critical है।उसकी rare disease की वजह से बॉडी बहुत weak है…और अब यह incident हो गया।ICU में treatment के बिना situation और ख़राब हो सकती है।यह सुनकर दोनों भाई एकदम shock में आ ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 20

घर का hall...Laptop बंद पड़े हैं…तीनों एक-ही सोफे पर पसर कर बैठे हैं।Shreya (थकी हुई-सी, एक कुशन पकड़कर) बोली आज भी ऑफिस का कोई काम नहीं।रिपोर्ट भी सबमिट हो चुकी है। अब करें भी तो क्या करें?Kabir (हाथ जोड़कर, नाटकीय अंदाज़ में) बोला -मैं तो सच में बोर हो रहा हूँ।और ये juniors… एक बार काम समझा दो तो बस—फिर हमसे कुछ पूछना ही नहीं।Karan (हल्की मुस्कान के साथ) बोला -बोर तुम दोनों हो…पर तुम लोगों ने ये realize नहीं किया किहम पिछले एक साल से सिर्फ laptop के through ही काम कर रहे हैं।पूरे घर के घर ‘employees’ ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 21

क्लासें ख़त्म होते ही पूरा कॉलेज कैंपस गुलजार था।इधर-उधर स्टूडेंट्स टहल रहे थे, कोई कैंटीन में, कोई लॉन में।तीनों—Karan, और Shreya—शांत-से कोने में बैठकर अपनी छोटी-सी दुनिया में खोए हुए थे।किसी को जरा भी अंदाज़ा नहीं था कि ये तीनों पति–पत्नी हैं।लड़कियों का पूरा ध्यान आज बस दो चेहरों पर था—Karan: नीली coat में एकदम mature, serious, hero-type look।Kabir: थोड़ा चंचल, थोड़ा confident, and stylish।दो लड़कियाँ एक तरफ से धीरे-धीरे उनके पास आने का प्लान बना रही थीं।GIRL 1 (उत्साहित होकर) बोली -चल ना… एक ही break में बात कर लेते हैं… कितने handsome हैं!GIRL 2 (हिचकिचाते हुए) बोली ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 22

Principal मैम ने जैसे-तैसे खुद को संभाला ही था कि बाहर खड़े दो–तीन शरारती स्टूडेंट उनकी आवाज़ें सुन चुके 1 (आँखें फैलाकर) बोला -भाई… मैने सही सुना न?Shreya के… दो husband??स्टूडेंट 2 (मुँह खोलकर) बोला -दो??? एक भी मुश्किल से मिलता है… इसके दो हैं?!स्टूडेंट 3 (दंग होकर) बोली -और वो दोनों यहां इसी class में पढ़ते हैं!!ये तो Netflix से भी बड़ी story है!तीनों ऐसे भागे जैसे ब्रेकिंग न्यूज़ फैलानी हो।क्लास में बाकी बच्चे assignment लिख रहे होते हैं। तभी वो तीनों अंदर आते हैं हांफते हुए।लड़का 4 बोला -क्या हुआ रे? ऐसे क्यों दौड़ रहे हो?स्टूडेंट 1 ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 23

सुबह की हल्की धूप कमरे में घुस रही थी।श्रेया नींद से अभी-अभी उठी,करण और कबीर अब भी सो रहे उनकी साँसों की रिदम कमरे में सुकून की तरह थी।श्रेया धीरे से बिस्तर से उठती है।उसकी आँखों में हल्की मुस्कान, हाथों में चाय की प्याली पकड़कर वह देखती है दोनों की नींद की मासूमियत।श्रेया (मन ही मन) बोली -ये दोनों… मेरी ज़िंदगी के सबसे मज़बूत स्तंभ हैं।जितना प्यार मुझे इनसे मिलता है… शायद उतना प्यार किसी को नसीब नहीं होता।वह उनके सिर पर हल्का सा हाथ फेरती है।करण की बाँहें अभी भी हल्की सी शिथिल हैं,कबीर की बाँहें पीछे से ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 24

Shreya सोफे पर अकेली बैठी थी।उसके चेहरे पर आँसू सूखते-सूखते फिर बह जाते।कमरा पहले जैसा नहीं था…ना वही गर्माहट, वही हँसी।तभी—उसके फोन पर एक टन की आवाज़ आई।वह चौंककर उठी।फोन में उनके तीनों का private group chat खुला।Kabir (गुस्से में टाइप करता है—)श्रेया मेरे साथ रहेगी।मैं छोटा हूँ पर इसका मतलब यह नहीं कि मैं पीछे हट जाऊँ।Shreya फोन पकड़े काँप रही थी।तभी Karan का मैसेज आया—नहीं। श्रेया मेरे साथ रहेगी।मैं इसका पति हूँ। और मुझे उसकी ज़िम्मेदारी ज्यादा समझ आती है।Kabir तुरंत जवाब दे बैठा—ज़िम्मेदारी का मतलब ये नहीं कि तुम श्रेया को मुझसे दूर कर दो!वो मुझसे ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 25

सूरज की हल्की रोशनी पर्दों से छनकर कमरे में आ रही है।श्रेया जागी-बैठी है, आँखें सूजी हुईं… रात की अब भी चेहरे पर दिख रही है।करण नींद से उठता है।वो कुछ पलों तक उसे देखता रहता है—शांत… बिना गुस्से के।उसकी निगाहें नरम हैं, जैसे रात का गुस्सा कहीं गायब हो गया हो।करण (धीरे, पास आते हुए) बोला -श्रेया… रात को जो हुआ… मैं बस परेशान था।तुम जानती हो न, मैं जान-बूझकर तुम्हें दुख नहीं देता।वो उसके बिल्कुल करीब आ बैठता है।श्रेया हल्के से पीछे हटती है—ज्यादा नहीं—बस थोड़ा सा।पर करण ये नोटिस कर लेता है।करण (थोड़ा रुककर) बोला -डरती ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 26

घर में हल्की रोशनी है।हर कमरा अपने अंदर एक दर्द छुपाए हुए है।तीनों अलग-अलग जगह… पर तीनों के दिल ही जैसे टूटे हुए।KABIR’S ROOMकबीर खिड़की के पास बैठा है।बाहर रात का सन्नाटा…अंदर उसकी साँसों में घुटन।उसकी आँखों से आँसू टपकते हैं—पर वो हर बार हाथ से जल्दी पोंछ देता है।जैसे खुद को ही धोखा दे रहा हो।(वॉइसओवर – कबीर) —मैं मज़बूत दिखता हूँ…पर सच ये है कि मैं कभी था ही नहीं मज़बूत।भैया… श्रेया…मैं तुम दोनों को खोना कभी नहीं चाहता था।कबीर धीरे से तकिये में चेहरा छुपाकर रो पड़ता है।पर उसकी सिसकियां इतनी दबा दी गई हैंकि कोई ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 27

घर में हल्की रोशनी है।हर कमरा अपने अंदर एक दर्द छुपाए हुए है।तीनों अलग-अलग जगह… पर तीनों के दिल ही जैसे टूटे हुए।KABIR’S ROOMकबीर खिड़की के पास बैठा है।बाहर रात का सन्नाटा…अंदर उसकी साँसों में घुटन।उसकी आँखों से आँसू टपकते हैं—पर वो हर बार हाथ से जल्दी पोंछ देता है।जैसे खुद को ही धोखा दे रहा हो।(वॉइसओवर – कबीर) —मैं मज़बूत दिखता हूँ…पर सच ये है कि मैं कभी था ही नहीं मज़बूत।भैया… श्रेया…मैं तुम दोनों को खोना कभी नहीं चाहता था।कबीर धीरे से तकिये में चेहरा छुपाकर रो पड़ता है।पर उसकी सिसकियां इतनी दबा दी गई हैंकि कोई ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 28

रात के 2 बजे। बाहर तेज़ हवा चल रही है। घर में गहरा सन्नाटा है।श्रेया अचानक घबरा कर उठ है। चेहरे पर पसीना… साँस तेज़-तेज़ चल रही है।श्रेया (रोते हुए, काँपती आवाज़ में) बोली -कर… करन जी… मुझे कबीर जी के पास जाना है… मुझे डर लग रहा है…।करन उठता है। आँखों में नींद है पर चेहरा बेहद सख्त।करन (धीरे पर कड़े लहजे में) बोला -श्रेया… रात बहुत हो चुकी है।तुम्हारा सपना बस सपना था।कबीर को सोते हुए डिस्टर्ब मत करो।श्रेया (और जोर से रोने लगती है) —नहीं… मुझे उससे मिलना है…मुझे उसके पास जाना ही होगा…मुझे उससे गले ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 29

Shreya का कमरा। पर्दे हल्के-हल्के हिल रहे हैं। सुबह की हल्की धूप कमरे में गिरती है। Shreya अब भी नींद में है। चेहरा लाल, सांस हल्की-हल्की चल रही है। Karan बिस्तर के किनारे बैठा है। उसके हाथ कांप रहे हैं। आँखें भरी हुई हैं।KARAN (बहुत धीमी, टूटी आवाज़ में) बोला– Shreya… तुम बिल्कुल परी जैसी हो … पर मैं…मैं सिर्फ दर्द देता हूं ना?वह दवाई की एक बड़ी स्ट्रिप उठाता है। उसमें से 4–5 गोलियाँ निकालकर बिना पानी के निगल लेता है। उसके हाथ और ज़्यादा कांपने लगते हैं।किसी को पता नहीं था… Karan depression की दवाई कई गुना ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 30

आधी रात, कमराShreya Karan से लगी हुई है, पर उसका पूरा शरीर बर्फ जैसा था—इतना ठंडा… कि Karan का दहल गया।Karan ने धीरे से उसका चेहरा छुआ—उसकी त्वचा पर पसीने की पतली परत थी।KARAN (चौंककर, फुसफुसाते हुए) बोला -Shreya.... ये.... क्या हो रहा है तुम्हे?Shreya हल्की कराह के रह जाती है। उसकी साँसें छोटी-छोटी, तेज़… जैसे दर्द हर सांस में चुभ रहा हो।Karan उसके सीने पर हाथ रखता है—धड़कनें बहुत तेज़ थीं। बेतरतीब… घबराई हुई।एक ही पल में उसे समझ आ गया—ये stress वाला नहीं… असली, गहरा दर्द है।Shreya अब सहन नहीं कर पा रही थी।उसकी आँखों से आँसू ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 31

कमरे में हल्की रोशनी है। Shreya मुश्किल से चल रही है। Karan चुपचाप उसे देखता है, पर कुछ कहता के चेहरे पर थकान, डर और टूटन सब साफ दिख रहा है…।पर उसने ये बात Kabir को जानने तक नहीं दी कि Shreya रात भर दर्द में थी…।और कि उसे वो पुरानी depression वाली बीमारी फिर से पकड़ रही है।Kabir अपने कमरे में लेटा है। चेहरा पीला, आँखें भारी। उसे खुद को भी हल्का सा दर्द हो रहा है। वो सो रहा है।Karan अपने कंप्यूटर के सामने बैठा है।आँखें लाल, हाथ कांप रहे हैं। मगर वो तेज़ी से टाइप करता ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 32

Shreya अब भी Karan से थोड़ा-सा सिहर कर दूर बैठी थी।Karan ने उसे देखा…उसकी आँखों में वही डर था—जो कभी नहीं देखना चाहता था।ये डर उसे कहीं भीतर तक तोड़ देता है।KARAN (मन में, टूटता हुआ) बोला -बस… अब वो मेरे पास कभी नहीं आएगी…।रात हो गई।Shreya धीरे-धीरे नींद में खो जाती है।दवाइयाँ, कमजोरी, दर्द — सब मिलकर उसे गहरी नींद में ले जाते हैं।Karan उसके पास बैठा, बस वो आखिरी रात उसे देखता रहता है।घड़ी की टिक-टिक कमरे की खामोशी को चीर रही है।11:50 PM…11:57 PM…11:59 PM…Karan बार-बार घड़ी देखता है, सांसें मुश्किल से ले पा रहा है।और ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 33

करन का कमराकमरे में अँधेरा है, बस एक स्टडी लैम्प की हल्की-सी रोशनी। टेबल पर बिखरी हुई किताबें—B.Tech की ऑफिस की फाइलें, लैपटॉप खुला हुआ… पर फिर भी कमरे में बस एक ही चीज़ सबसे ज़्यादा साफ़ दिखती है—Shreya की एक फोटो, जिसे करन अपनी हथेलियों में घुमाकर देख रहा है।उसकी आँखें लाल हैं।नींद से नहीं… रो-रोकर थक जाने से।करन( बहुत धीमी टूटी हुई आवाज़ में) बोला -बस.... इसके बाद एक महीना और.... फिर तुम कबीर के साथ हमेशा रहेगी....और मैं.....उसकी आवाज़ वहीं टूट जाती है।वह फोटो को सीने से लगा लेता है, जैसे वही उसकी आखिरी साँस हो।करन ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 34

रात, 2:15 AM — कमरे में हल्का अँधेराखिड़की पर चाँद की हल्की रोशनी गिर रही है। Kabir अपनी तरफ लेकर सोने का नाटक कर रहा है। पर उसकी साँसें गवाह हैं कि वो जाग रहा है।Shreya उसकी बाँहों में है…पर उसकी साँसें तेज़ हैं, शरीर तना हुआ, चेहरे पर दर्द साफ़।Shreya अपनी आँखें बंद किए कोशिश कर रही है कि Kabir को जगाए बिना वह सो जाए।उसके भीतर तीन तरह के दर्द आपस में लड़ रहे हैं—Migraine का तेज़ दर्दPeriods की ऐंठनसीने में भारीपन।उसका पूरा जिस्म काँप रहा था…जैसे किसी ने उसे डंडों से पीटा हो।Shreya Kabir की छाती ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 35

रात, Shreya का कमराShreya बिस्तर पर पड़ी है, पूरी तरह कमजोर और थकी हुई। उसकी सांसें टूटने लगी हैं।उसकी बेतहाशा कबीर के हाथों को पकड़ लेती हैं—जोर से, दर्द में। उसका शरीर ठंडा पड़ गया बर्फ सा। कबीर का सीना भी बताशा दर्द कर रहा था पर उससे ज्यादा श्रेया का दर्द उसे मार रहा था।Shreya (धक-धक, हल्की आवाज़ में) बोली -न… ना… सांस… नहीं… आ रही…।Kabir अचानक कमरे में दौड़ता है। उसकी आँखों में डर और बेचैनी।वहीं करण के कमरे में अँधेरा है।करन अपने सीने को पकड़े दीवार से टिककर बैठा है, भारी साँसों के साथ।वही पुराना दर्द… ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 36

तीन अलग-अलग कमरे – एक ही रात1) करन का कमरा – अंधेरा, सन्नाटा, टूटा हुआ इंसानकमरे में सिर्फ एक लैंप जल रहा है।करन बिस्तर के कोने पर बैठा है—सीना पकड़े, आँखें लाल, चेहरा थका हुआ।उसके हाथ काँप रहे हैं।करन (अपने आप से, टूटी आवाज़ में) बोला -कबीर… तू संभाल पाएगा ना उसे…?मैं नहीं देख सकता उसे इस हालत में…।वह श्रेया की साड़ी अपने हाथों में भींच लेता है।उसकी आँखों से आँसू गिरते हैं—साड़ी पर छपते हुए।गुस्से में खुद से कहता है—क्यों इतना जुड़ गया मैं… क्यों?सीने का दर्द बढ़ता है।वह दीवार से टिककर बैठ जाता है… आँसू लगातार बह ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 37

घर का ड्रॉइंग रूम। परदे बंद। धूप का एक किरण भी अंदर नहीं। हवा भारी है। सन्नाटा गहरा।Kabir दरवाज़े पास खड़ा है। थका हुआ… पर नींद नहीं। डर, जिम्मेदारी और प्यार तीनों उसके कंधों पर बैठे हैं।BEDROOM – DAYShreya बिस्तर पर बैठी है। घुटनों को सीने से लगाकर। बाल बिखरे हुए। आँखें लाल।Shreya (धीमी पर टूटी आवाज़ में) बोली -Kabir जी… वो यहीं है… मुझे देख रही है…मुझे मार देगी…।Kabir (उसके पास बैठकर, धीरे से) बोला -कौन Shreya? कौन? Batao mujhe… main hoon na yahin."Shreya काँपते हुए बोली -वो… मेरे जैसी है… पर उसके कपड़े काले… उसकी आंखों में ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 38

देर रात। कमरे में हल्की पीली रोशनी। बाहर हवा की धीमी आवाज़। Kabir बिस्तर पर पीठ घुमाकर लेटा है। चेहरे पर खिंचाव और छुपा हुआ दर्द साफ़ दिखता है। Shreya उसकी तरफ पीठ करके लेटी है, पर नींद उसे छूकर निकल भी नहीं रही…।Kabir अचानक थोड़ा सा कराहता है। सीने पर हाथ रखता है। दर्द बढ़ता है…Kabir (धीमे मगर गुस्से में बड़बड़ाते हुए) बोला -धत्त तेरे की… ये दर्द भी ख़त्म क्यों नहीं होता…।आवाज़ धीमी थी पर गुस्सा तेज था। Shreya को सुनाई दे गया। वह सहमकर पलटती है।Shreya (धीमी, डरते हुए) बोली -क्या… क्या हुआ Kabir जी…?Kabir झटके ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 39

BEDROOM – NIGHTकमरा शांत, हल्की रोशनी।Shreya बिस्तर पर, Karan के बगल में लेटी है।आज उसकी साँसें भारी और शरीर रहा है।Karan (धीमे, धीरे से) बोला -Shreya… सब ठीक है… बस मेरे पास रहो…Shreya अपने आप को Karan के सीने से लगा लेती है, पर आज उसकी हलचल और काँपना साफ दिख रही है।Kabir (धीरे से, उसका हाथ उसके कमर पर रखते हुए) बोला -मैं हूं ना… कोई डर नहीं… बस शांति से सो जाओ...।Kabir धीरे-धीरे पीछे से उसे पकड़े हुए है, उसकी बाँहों की गर्माहट Shreya को महसूस होती है। Shreya की साँसें अब भी अनियमित हैं। पर Kabir ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 40

LIVING ROOM – DAY (गाना खत्म होने के बाद)Shreya ने आखिरी नोट गाया और हल्की हँसी के साथ अपनी खोलीं। Kabir और Karan अभी भी उसके पास बैठे हैं।Shreya मुस्कुराई और softly बोली—आप दोनों के साथ हर पल कितना सुकून भरा लगता है।Kabir ने उसकी हाथ थाम लिया।Kabir (धीमे, प्यार से) बोला -और यह सुकून हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा, मेरी जान।Karan मुस्कुराता है और धीरे से कहता है—और मैं भी हमेशा तुम्हारे पास ही रहूँगा… एक पल के लिए भी तुमसे दूर नहीं जाऊँगा।Shreya दोनों के बीच खड़ी, हल्की शर्म से मुस्कुराती है। Kabir softly उसके सिर को चूमता ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 41

INT. STUDY ROOM – DAYतीनों table पर बैठकर diagram practice कर रहे हैं। Pencils, erasers, sketch pens बिखरे हुए Board पर real diagrams और notes लगे हैं।Room में tension भी है, पर playful energy भी बनी हुई है। Shreya, Kabir और Karan focused हैं।Shreya first diagram complete करती है।पर lines crooked, labels उलझे हुए, और shapes weird।Shreya (अपनी writing देखकर, softly) बोली -ये diagram… जैसे alien ने बनाया हो…Kabir अपना diagram देखता है। वो भी crooked और funny लग रहा है। Shapes, arrows और labels randomly placed।Kabir (हंसी रोकते हुए, softly) बोला -यार… ये diagram तो space ship लग ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 42

COLLEGE EXAM HALL – DAYExam hall में चुप्पी थी। Students अपने-अपने seats पर बैठे थे। Front row में Karan seat पर बैठा था। Karan ke पीछे Kabir और Shreya बैठे थे। Shreya और Kabir के बीच एक junior बच्चा भी बैठा हुआ था। तीनों अपनी अपनी तैयारी में व्यस्त थे, लेकिन atmosphere tension और excitement से भरा हुआ था।Karan बार-बार papers देखता हुआ,अपने usual confident style में बोला -चलो, आज देखते हैं कौन कितना टॉप करता है...उसकी आँखें Kabir और Shreya पर जा रहीं थीं।Kabir बिल्कुल शांत, लेकिन अंदर से हमेशा की तरह alert। Shreya थोड़ी nervous, पर अपनी ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 43

दृश्य – कॉलेज नोटिस बोर्ड | सुबहकॉलेज के नोटिस बोर्ड के सामने भारी भीड़ जमा है। हर तरफ बस ही शब्द गूँज रहा है—Result… result…छात्र व्याकुल होकर सूची में अपना रोल नंबर खोज रहे हैं। कोई खुशी से झूम रहा है, कोई उदास है, तो कोई डर के मारे आँखें मूँदे खड़ा है। दूर से करण, कबीर और श्रेया एक साथ आते हैं। तीनों के कदम धीमे हैं, पर साँसें तेज। दिल जोर-जोर से धड़क रहा है— क्योंकि यह सिर्फ परीक्षा का परिणाम नहीं था, यह उनकी मेहनत, रातों की जागती आँखों और एक-दूसरे के अटूट साथ का हिसाब ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 44

उनकी हालत अब ऐसी हो चुकी थी कि वे तीन लोग नहीं रहे थे एक ही साँस में बँधे दिल बन गए थे।अब अगर चोट एक को लगती, तो कराह तीनों के भीतर उठती। अगर आँसू एक की आँख से गिरते,तो दिल दो और के भीग जाते।दोपहर का समय था। तीनों छत पर बैठे थे। हल्की धूप थी, मगर मन में अजीब-सी बेचैनी। कबीर पानी लेने उठा। सीढ़ियों से उतरते समय उसका पैर फिसला।आह!आवाज़ छोटी थी, मगर असर गहरा। कबीर ज़मीन पर बैठ गया, उसके पैर से खून रिसने लगा। उसी पल—श्रेया का दिल धक से रह गया। वह ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 45

दोनों भाइयों के बीच झगड़ा हो चुका था। ऐसा झगड़ाजिसमें शब्द नहीं, अहंकार जीत गया था। नियम के अनुसार श्रेया को करण के साथ रहना था। पर यह वही करण नहीं था जो कभी बिना कहे उसके दर्द को समझ जाता था।रात थी। कमरा शांत था, पर हवा भारी। श्रेया बिस्तर के एक कोने में चुपचाप बैठी थी। आँखें नीचे, कंधे सिमटे हुए। करण कमरे में टहल रहा था।करण (कठोर स्वर में) बोला -अब तुम मेरे साथ हो, तो ऐसे डर-डर कर क्यों बैठी हो?श्रेया चौंक गई।श्रेया (धीरे से) बोली -मैं डर नहीं रही…बस…थोड़ी असहज हूँ।करण रुक गया।करण (तेज़ ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 46

रात फिर वही थी। खामोश। भारी। श्रेया करवट बदलकर लेटी थी। उसकी आँखें बंद थीं, पर नींद बहुत दूर। उसके क़रीब आकर बैठ गया। वह जानता था श्रेया उसे रोकती नहीं है। कभी नहीं। श्रेया कभीकरण के क़रीब आने से उसे मना नहीं करती थी। न इसलिए कि उसे सब ठीक लगता था, बल्कि इसलिए क्योंकि उसके मन में एक डर बैठ गया था।श्रेया (मन ही मन) बोली -अगर मैंने उन्हें रोका…तो क्या उन्हें लगेगा कि मैं उनसे कम प्यार करती हूँ?क्या उन्हें लगेगा कि मेरा दिल सिर्फ़ कबीर जी के लिए धड़कता है?वह जानती थी करण बहुत टूटा ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 47

उस रात श्रेया बहुत ज़्यादा थकी हुई थी। इतनी थकी हुई कि शरीर से ज़्यादा उसका मन जवाब दे था।दिनभर की बेचैनी, पुरानी डर की परछाइयाँ, और अंदर ही अंदर टूटता हुआ भरोसा सब मिलकर उसे एक जगह लाकर खड़ा कर चुके थे जहाँ बस नींद चाहिए थी। गहरी, बेहोश कर देने वाली नींद।उसने अपनी दवा ली। जो डॉक्टर ने दी थी ताकि दर्द शांत हो, ताकि दिमाग़ थोड़ी देर के लिए सब भूल सके।दवा खाते ही नींद ऐसे आई जैसे किसी ने उसके पूरे शरीर पर भारी चादर डाल दी हो। उसकी देह सुन्न पड़ने लगी। हाथ-पैर मानो ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 48

श्रेया अब और दर्द नहीं सह पा रही थी। पेट की ऐंठनऐसी थी मानो कोई अंदर से तोड़ रहा वह काँपती आवाज़ में कराह उठी।श्रेया बोली -अब…अब मुझसे सहन नहीं हो रहा…।कमरे के बाहर करण यह सब सुन रहा था। हर सिसकीउसके दिल को और कस देती। वह जानता था डर के बावजूद अब उसे आना ही पड़ेगा। करण धीरे-धीरेकमरे में आया। कदम बहुत भारी थे। वह बिस्तर के पास रुक गया। एक पल के लिए हाथ बढ़ाया फिर रोक लिया।करण (बहुत धीमे) बोला -श्रेया…मैं…अगर तुम कहो तो चला जाऊँ…।श्रेया आँखें बंद किए पड़ी थी। कुछ पल खामोशी रही।फिर ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 49

तीन दिन आख़िरकार गुज़र ही गए। वे तीन दिन जो श्रेया के लिए सिर्फ़ समय नहीं बल्कि ख़ामोश ज़हर दिन जब उसे कबीर के पास भेजा गया श्रेया चुप थी। न रोई, न मुस्कुराई। बस एक पुतले की तरह खड़ी रही। करण उसे कबीर के room के दरवाज़े तक छोड़ने आया। उसकी आँखें नीची थीं। वह एक शब्दभी नहीं बोल पाया। श्रेया ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।क्योंकि अगर देख लेती तो शायद खुद को संभाल न पाती।कबीर का कमराकबीर दरवाज़े पर खड़ा था। श्रेया को देखते ही उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।कबीर (धीरे से) बोला -आ गई ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 50

कुछ दिन बीत गए घर में फिर से एक अजीब सी खामोशी थी। कबीर सुबह अपने कमरे में बैठा पलट रहा था। अचानक उसकी उँगली एक तारीख पर रुक गई । वह तारीख श्रेया की थी। कबीर का चेहरा एकदम गंभीर हो गया। वह उठकर सीधे श्रेया के पास गया। श्रेया खिड़की के पास बैठी बाहर देख रही थीकबीर ने धीरे से पूछा -आज तुम्हारी तारीख है न ?श्रेया ने चौंककर उसकी तरफ देखा। फिर नज़रें झुका लीं। उसने बहुत हल्के से ना में सिर हिला दिया। कबीर और उलझ गयाकबीर बोला -पर पिछली बार तो यही तारीख थी ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 51

इधर श्रेया की आँखों से नींद रूठ चुकी थी। करवट बदलते-बदलते उसका मन बार-बार करण की तरफ भाग जाता। अपनी बेचैनी का कारण खुद भी समझ आ रहा था—वह डर और नाराज़गी के बावजूद करण के टूटे हुए हालात की कल्पना से काँप उठती थी। उसके बिना करण कैसा होगा, यह सवाल उसे चैन नहीं लेने दे रहा था।श्रेया बोली -वो खुद को कितना दोष दे रहे होंगे… अकेले कैसे संभाल रहे होंगे सब?उसे याद आया कि कैसे करण हमेशा मजबूत बनने की कोशिश करता था। घर का बड़ा बेटा—जिसे रोने की इजाज़त नहीं थी। वही करण, जो सबको ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 52

एक महीना कब पलक झपकते बीत गया, किसी को पता ही नहीं चला। कैलेंडर की तारीख़ जैसे ही पलटी, दिन सामने आ खड़ा हुआ—जब श्रेया को फिर से करण के पास जाना था। सुबह की हवा में अजीब-सी उदासी घुली हुई थी। घर वैसा ही था, पर रिश्तों में पहले जैसी सरलता नहीं रही थी।श्रेया (मन ही मन) बोली -फिर वही मोड़… फिर वही डर।कबीर चुप था। बहुत ज़्यादा चुप। वह सवाल करना चाहता था, रोकना चाहता था, पर उसे पता था—यह नियम उसने नहीं बनाया था। उसने बस श्रेया का बैग उठाया और दरवाज़े तक छोड़ आया। उसके ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 53

तीन दिन हो चुके थे। तीनों एक ही घर में थे, एक ही छत के नीचे, पर दिलों के की दूरी किसी खाई से कम नहीं थी।कबीर और करण आमने-सामने आते तो औपचारिक-सी बातचीत करते,ज़रूरत भर के शब्द, बिना आँखों में देखे। दोनों जानते थे कि दर्द दोनों के पास है, पर कोई भी पहले हाथ बढ़ाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।घर में अजीब-सी खामोशी रहती।कभी-कभी ऐसा लगता, जैसे दीवारें भी साँस रोककर सुन रही हों। वहीं श्रेया यह सब देख रही थी। उसका दिल सबसे ज़्यादा टूट रहा था।उसे साफ़ दिखता था करण उसके सामने होते ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 53

तीन दिन हो चुके थे। तीनों एक ही घर में थे, एक ही छत के नीचे, पर दिलों के की दूरी किसी खाई से कम नहीं थी।कबीर और करण आमने-सामने आते तो औपचारिक-सी बातचीत करते,ज़रूरत भर के शब्द, बिना आँखों में देखे। दोनों जानते थे कि दर्द दोनों के पास है, पर कोई भी पहले हाथ बढ़ाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।घर में अजीब-सी खामोशी रहती।कभी-कभी ऐसा लगता, जैसे दीवारें भी साँस रोककर सुन रही हों। वहीं श्रेया यह सब देख रही थी। उसका दिल सबसे ज़्यादा टूट रहा था।उसे साफ़ दिखता था करण उसके सामने होते ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 54

कमरे में हल्की-सी रोशनी थी। श्रेया बिस्तर पर अकेली पड़ी थी। उसने नज़र उठाकर सामने देखा। सोफ़े पर करण रहा था। उसका शरीर सिकुड़ा हुआ था,जैसे नींद में भी वह खुद को समेटे रखना चाहता हो।श्रेया की आँखें भर आईं। वह बिस्तर की उस खाली साइड को देखने लगी जहाँ कभी करण सोया करता था।वही जगह…जहाँ उसकी साँसों की गर्माहट होती थी।जहाँ रात भर कोई जागकर उसे संभालता था। जहाँ दर्द के हर झटके पर किसी की हथेली उसका माथा सहलाती थी। किसी के होठ उसे चूमकर शांति देते थे।श्रेया (मन ही मन) बोली -यहीं तो सोते थे आप…यहीं ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 55

कबीर उस समय पूरी तरह टूट चुका था।उसका दिल बेचैन था, दिमाग़ उलझनों से भरा हुआ था। उसे महसूस कि उसे किसी की ज़रूरत है—किसी ऐसे इंसान की जो उसे संभाल सके।जिसकी मौजूदगी उसे भीतर से मजबूत बनाए।कबीर (धीमे स्वर में अपने आप से) बोला -मुझे… मुझे कोई चाहिए… कोई ऐसा जो मुझे रोक सके… जो मुझे फिर से खुद बनाये।उसे अपने भाई करन की याद आने लगी।उसने सोचा कि करन हमेशा उसके लिए वहां रहता था।बचपन में, जब भी कबीर किसी मुश्किल में फंसता, डरता या अकेला होता, करन उसे हर तरह की मुसीबत से बचा लेता था। ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 56

अगले दिन सुबह की हल्की धूप कमरे में फैल रही थी।श्रेया की नींद धीरे-धीरे खुली। उसने हल्का सा हिलना पर उसे महसूस हुआ कि वह दोनों तरफ से किसी की बाहों में घिरी हुई है।उसने आँखें खोलीं…और जो उसने देखा, उससे उसका दिल एक पल के लिए थम गया। वह करन के सीने से लगी हुई थी। करन की बाँहें उसे ढके हुए थीं, जैसे वह उसे हर डर से बचा लेना चाहता हो। उसकी साँसें शांत थीं, पर उसके चेहरे पर थकान साफ झलक रही थी।वहीं पीछे से…कबीर उसकी पीठ से चिपका हुआ था।उसकी एक बाँह श्रेया की ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 57

घर आज कुछ ज़्यादा ही शांत था…कबीर किसी काम से बाहर गया हुआ था। किचन की हलचल खत्म हो थी…कमरों में बस घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी।श्रेया हॉल में बैठी थी…उसकी नजरें बार-बार दरवाज़े की तरफ उठ जातीं…फिर धीरे से झुक जातीं।उधर…करन अपने कमरे के कोने में खड़ा था।हाथ मुट्ठियों में बंधे हुए…और आँखें नीचे झुकी हुई। वो बार-बार खुद से लड़ रहा था।करन (मन ही मन, टूटे हुए स्वर में) बोला थामैं उसके सामने कैसे जाऊँ…?जिसे सबसे ज़्यादा संभालना चाहिए था… उसी को तोड़ दिया…।उसने दीवार पर हल्का सा मुक्का मारा…पर आवाज़ भी दबाकर…जैसे दर्द भी ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 58

तीनों का प्यार अब एक सा हो गया था…अलग-अलग नहीं…बल्कि एक ही डोर में बंधा हुआ। काफी दिनों बाद…तीनों साथ बाहर जाने का प्लान बनाया।हल्की-सी शाम थी…सड़क पर भीड़ थी…चारों तरफ रोशनी और चहल-पहल।श्रेया बीच में चल रही थी…उसके एक तरफ करण…और दूसरी तरफ कबीर। तीनों साथ थे…और पहली बार ऐसा लग रहा था जैसे वो सच में एक परिवार हैं।श्रेया (हल्की मुस्कान के साथ) बोली -आज अच्छा लग रहा है… ऐसे साथ बाहर आकर…कबीर मुस्कुरा दिया…और करण ने बस उसे चुपचाप देखा। तभी…थोड़ी दूरी पर खड़ा एक लड़का बार-बार श्रेया की तरफ देख रहा था। उसकी नजरें साफ़ ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 59

तीनों घर पहुँचे…रात काफी हो चुकी थी…बाहर की चहल-पहल अब पीछे छूट चुकी थी। जैसे ही दरवाज़ा खुला…घर की ने तीनों को घेर लिया। श्रेया अंदर आते ही सीधे सोफे की तरफ बढ़ी…और बिना कुछ सोचे… उस पर फैल गई।श्रेया (थकी हुई आवाज़ में) बोली -मैं… बहुत थक गई…उसने आँखें बंद कर लीं…और हाथ फैलाकर लेट गई… जैसे अब एक कदम भी चलने की ताकत नहीं बची हो।कबीर हल्का सा मुस्कुराया—किसने कहा था इतना घूमने को…श्रेया (आँखें बंद किए हुए ही) बोली -आप दोनों ने…करण चुपचाप खड़ा उसे देख रहा था।उसके चेहरे पर थकान थी…पर साथ में एक सुकून ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 60

बारिश अब भी हो रही थी…तीनों खिड़की के पास बैठे पकौड़े खा रहे थे…और माहौल हल्का-फुल्का था। तभी…कबीर का वाइब्रेट हुआ।उसने casually फोन उठाया…पर जैसे ही उसने मेल पढ़ा उसके चेहरे के भाव बदल गए। पहले हैरानी…फिर धीरे-धीरे… मुस्कान। श्रेया ने नोटिस किया।श्रेया (जिज्ञासा से) बोली -क्या हुआ…?कबीर ने फोन नीचे किया।और उत्साहित होकर बोला—भैया… मुझे दो महीने के लिए मुंबई जाना होगा…करण और श्रेया दोनों चौंक गए।कबीर (खुश होते हुए) बोला -एक बड़ा प्रोजेक्ट है… अच्छे पैसे मिलेंगे…कुछ पल के लिए…कमरे में खामोशी छा गई। श्रेया के चेहरे की मुस्कान हल्की पड़ गई। करण ने उसकी तरफ देखा…फिर ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 61

कमरे में हल्की सी खामोशी थी…खिड़की से आती हवा परदे हिला रही थी…दोनों बेड पर बैठे थे…बहुत करीब…पर फिर एक अनकही दूरी थी। श्रेया धीरे-धीरे करण की तरफ मुड़ी…उसकी आँखों में देखा…उसकी नजरें बहुत गहरी थीं…जैसे वो करण के अंदर तक देख रही हो।श्रेया (धीमे, हल्की मुस्कान के साथ) बोली -पास नहीं आओगे… आप…?करण की सांस अटक गई। उसने तुरंत नजरें झुका लीं।करण (धीरे, टूटी आवाज़ में) बोला -डर लगता है…श्रेया कुछ पल उसे देखती रही…फिर वो थोड़ा और करीब सरक आई।अब उनके बीच की दूरी लगभग खत्म हो चुकी थी।श्रेया (बहुत नरमी से) बोली -मैं हूँ ना…उसकी आवाज़ ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 62

श्रेया अब भी करण की गोद में बैठी थी…पूरा माहौल शांत था…और कमरे में हल्की सी धूप फैल रही चुपचाप बैठा था…उसके हाथ धीरे-धीरे श्रेया को संभाले हुए थे।श्रेया ने उसकी तरफ देखा।और हल्की मुस्कान के साथ बोली—आपको पता है… मुझे आप दोनों के करीब आना कितना पसंद है…।करण एकदम चुप हो गया। उसने उसकी तरफ देखा…उसकी आँखों में हैरानी भी थी… और हल्की उलझन भी।करण (धीरे) बोला -दोनों…?श्रेया ने सिर हिलाया…बिल्कुल सहज होकर।श्रेया बोली -हाँ… आप और कबीर जी…ये सुनते ही करण की नजर थोड़ी देर के लिए नीचे चली गई। उसके चेहरे पर एक अजीब सा भाव ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 63

अगली सुबह घर में हल्की रौनक थी…श्रेया और करण सोफे पर बैठे हुए थे… और सामने स्पीकर पर कबीर वीडियो कॉल चल रहा था। कबीर का चेहरा स्क्रीन पर साफ दिख रहा था…वो मुस्कुराते हुए दोनों को देख रहा था।कबीर (मज़ाक में) बोला -श्रेया… भैया परेशान तो नहीं करते ना?श्रेया हँसने ही वाली थी कि करण ने तुरंत बीच में बात पकड़ ली।करण (सीधा सा) बोला -उल्टा ये ही मुझे परेशान कर देती है…श्रेया एकदम उसे देखने लगी।श्रेया (आँखें बड़ी करके) बोली -मैं?कबीर स्क्रीन पर जोर से हँस पड़ा।कबीर बोला -अच्छा! अब तो भैया शिकायत कर रहे हैं…करण हल्का ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 64

एक दिन करण की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई…तेज़ बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द था।डॉक्टर को बुलाया गया…जांच बाद डॉक्टर ने साफ कहा—इन्हें टाइफाइड है… इन्हें पूरी तरह आराम चाहिए और किसी भी तरह का ज़्यादा संपर्क या थकान नहीं होनी चाहिए।ये सुनकर श्रेया घबरा गई। डॉक्टर के जाने के बाद घर में खामोशी छा गई। करण बेड पर लेटा था…कमज़ोर सा, आँखें आधी बंद। श्रेया उसके पास बैठी थी…उसका हाथ पकड़े हुए। उसकी आँखों में डर साफ दिख रहा था।श्रेया (धीमे) बोली -आप ठीक हो जाओगे ना…?करण ने हल्के से सिर हिलाया।करण बोला -हाँ…लेकिन असल में वो ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 65

कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए थे…करण अब श्रेया का पहले से भी ज्यादा ध्यान रखने लगा था। सुबह हो, दवा हो, खाना हो…वो हर चीज़ में उसके साथ रहता था। श्रेया के चेहरे पर अब एक अलग सी चमक थी…और घर का माहौल भी धीरे-धीरे बदल रहा था।फिर एक दिन…दरवाज़े की घंटी बजी। कबीर वापस आ चुका था। जैसे ही श्रेया ने उसे देखा…वो बिना कुछ सोचे उसके पास दौड़कर गई और उसे गले लगा लिया।कबीर भी मुस्कुरा उठा…कबीर बोला -कैसी हो तुम?श्रेया हल्की मुस्कान के साथ बोली—ठीक हूँ…करण थोड़ी दूर खड़ा ये सब देख रहा था…फिर आगे ...और पढ़े

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समय जैसे पंख लगाकर उड़ गया…पूरा नौ महीने का सफर कब गुजर गया, किसी को पता ही नहीं चला।घर अब एक अलग ही माहौल था…खुशी भी थी और बेचैनी भी। उस दिन सुबह से ही श्रेया को तेज़ दर्द शुरू हो गया था…वो धीरे-धीरे सहम रही थी…और उसकी हालत देखकर करण तुरंत समझ गया।करण (घबराकर) बोला -श्रेया… ये दर्द…श्रेया ने किसी तरह सिर हिलाया…उसकी आँखों में दर्द साफ दिख रहा था। कबीर भी वहीं था…और दोनों भाई एकदम तनाव में आ गए। बिना देर किए…दोनों उसे लेकर अस्पताल भागे।हॉस्पिटल के रास्ते में…गाड़ी की स्पीड बढ़ी हुई थी…श्रेया पीछे बैठी ...और पढ़े

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 67

दिन बीतते जा रहे थे…घर में अब बच्चे की मौजूदगी ने सब कुछ बदल दिया था। वो छोटा सा सबके बीच एक अलग ही खुशी लेकर आया था। लेकिन एक बात सबने नोटिस की थी…बच्चा अक्सर करण के साथ ज्यादा शांत रहता था…जैसे उसे उसकी गोद में सबसे ज्यादा सुकून मिलता हो। करण जब उसे गोद में लेता…तो वो तुरंत शांत हो जाता…और धीरे-धीरे सो भी जाता। करण हल्के से मुस्कुरा देता…करण (धीमे) बोला -देखो… कितना समझदार है ये…श्रेया भी उसे देखकर मुस्कुराती। पर वही बच्चा…जब कबीर उसके पास आता…तो वो अचानक मुस्कुरा उठता…उसकी छोटी-छोटी हरकतों पर हँसने लगता…जैसे ...और पढ़े

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