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घरोंदा और अन्य कहानिया - बुढ़िया
by Prashant Vyawhare
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! बुढ़िया ! सड़क के किनारे कचरे के ढेर में एक बूढ़ी औरत कचरा चुनने का प्रयास कर रही थी ! मैले कपडे, चिपके और कचरे से सने सफ़ेद ...

चिंटू - 10
by V Dhruva
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सुमति जब सौम्या बनकर खुश थी वहां चिंटू की परेशानियां बढ़ रही थी। सुमति के जाने के बाद उसे पता चला उसने क्या खोया है। सुमति ने अपना नंबर ...

चिंटू - 9
by V Dhruva
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सुमति कुछ देर बाद किसी से बात करके वापस आती है। वह अब नॉर्मल दिख रही थी। काफी समय हो गया तो राजदीप और सुमति घर जाने के लिए ...

चिंटू - 8
by V Dhruva
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डीएसपी वर्मा सर का घर बांद्रा में था। वह एक बारह मंजिला टॉवर में दसवीं मंजिल पे रहते थे। वैसे पार्टी टॉवर के सेक्रेटरी की परमीशन लेकर टैरेस पर ...

घरोंदा और अन्य कहानिया - स्टंट मैंन
by Prashant Vyawhare
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! स्टंट मैंन !   भररर…. आवाज के साथ आज तौफीक ने उसके मोटर साइकिल दौड़ाई, रास्ते पर चल रहे उस्मान चाचा को उसका धक्का लगते लगते बचा ! ...

अच्छाईयां - ३७ - अंतिम भाग
by Dr Vishnu Prajapati
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भाग – ३७ अंतिम भाग   ‘फिर क्या हुआ गुड्डी का...?’ सूरजने पूछा | ‘वो बारबार भागने की कोशिश कर रही थी, उसके बाप तेजधार को डराना चाहते थे ...

चिंटू - 7
by V Dhruva
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राजदीप सुमति को एक रेस्टोरेंट के पास ले आता है। सुमति यह देख उसे कहती है- ये तो बहुत महंगा रेस्टोरेंट है। हम यहां नहीं खाएंगे। राजदीप- महंगा नहीं ...

घरोंदा और अन्य कहानिया - भाड़ा
by Prashant Vyawhare
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! भाड़ा ! मुंबई शहर सबसे बड़ी समस्या घर की है ! इतना बड़ा शहर है और इस वजह कुछ लोग उसमे भी रास्ते निकल लेते है ! आज ...

चिंटू - 6
by V Dhruva
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चिंटू रिया के रंग में रंग गया था। सुमति अपने क्लास में आती जाती रहती है। चिंटू को भूलने के लिए वह ज्यादा टाइम वहा रुकती है। तभी एंट्री ...

अच्छाईयां – ३६
by Dr Vishnu Prajapati
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भाग – ३६ कोलेजमें पुलिस आते देखकर सरगमने जल्दी से दादाजी और झिलमिल को कुछ कहा और वो चिठ्ठी लेकर पीछे के दरवाजे से निकल गई | वो पहले ...

अब लौट चले - 2
by Deepak Bundela Moulik
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मेरी तो किस्मत ही ऐसी है पिछली शादी की साल गिरह भी ऐसी ही निकल गई... जानू तुम अपना दिल छोटा मत करो... अभिषेक को मै सम्हाल लूंगा आज तुम ...

चिंटू - 5
by V Dhruva
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जब चिंटू घर आता है तो दरवाजा थोड़ा खुला हुआ देखता है। चिंटू सोचता है इसने दरवाजा खुला छोड़ा है तो आज तो इसे डराता हुं। वह जैसे ही ...

चिंटू - 4
by V Dhruva
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रात को गर्मी की वजह से सब टेरेस पर सोने जाते है। पहले तो निंद अा गई सबको पर आधी रात बीतने पर सुमति की निंद खुल गई। उसको ...

घरोंदा और अन्य कहानिया
by Prashant Vyawhare
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! घरोंदा ! सुनीता आज बहुत खुश थी ! २ दिन पहले ही उसकी शादी हुइ थी और आज वो उसके पति के साथ मुंबई जाने वाली थी, उसका ...

चिंटू - 3
by V Dhruva
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दिन बहुत अच्छे चल रहे थे। एक दिन सुमति की मां और पिता रविवार के दिन अपने मालिक के घर गए थे। मालिक ने उन्हे घर का ध्यान रखने ...

अच्छाईयां –३५
by Dr Vishnu Prajapati
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भाग – ३५ सूरज के हाथमें श्रीधर की चिठ्ठी थी और वो उसे पढ़ रहा था, ‘वैसे तो मैं माफी के लायक भी नहीं फिर भी आप मुझे माफ़ ...

चिंटू - 2
by V Dhruva
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सुमति ने चिंटू से पूछा- क्या हुआ चिंटू? तुम्हारा मुड़ कुछ ठीक नहीं लग रहा। चिंटू ने फिर जो आज स्कूल में हुआ वह सब बताया। सुमति- देख चिंटू, ...

चिंटू - 1
by V Dhruva
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            मां मुझे भूख लगी है, हमे खाना कब मिलेगा? उसकी मां उसे अपनी गोद में बिठाकर कहती है जल्दी ही। पर ये तो ...

अच्छाईयाँ - ३४
by Dr Vishnu Prajapati
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भाग – ३४ दुसरे दिन सूरज और निहाल कोलेज के लिए निकले रास्ते में निहाल कई सारे सवाल करने लगा, ‘सूरज तु रात को कहाँ था ? वो इन्स्पेक्टर ...

क्या यही प्यार है - 3
by Deepak Bundela Moulik
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भाग 3 "क्या यही प्यार हैं "रात के बारह बज चुके थे.... मेरी दास्तां सुनकर  हबलदार की हालत सुमेर की हालत पतली दिखाई एक बाबरी का मसला कम था जो ...

बिन तेरे...! भाग 4 - लास्ट पार्ट
by Dipti Methe
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Continue.........."राजीव..! कहाँ थे तुम..? तुम्हें पता भी हैं कितनी परेशान थी मैं तुम्हारे लिए | कमसे कम एक कॉल तो कर देते | और तुम फोन क्यूँ नहीं उठा ...

मनचाहा (अंतिम भाग)
by V Dhruva
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रात को रवि भाई मुझे निशु के घर से ले जाने आए थे। मै जब नीचे अाई तब आंटी जी वहा नहीं थे। यह देखकर मुझे थोड़ा अच्छा लगा। ...

मनचाहा - 37
by V Dhruva
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सुबह उठकर ही मैंने अवि को कॉल किया के मुझे अभी मिलना है। अवि- अभी तो सोया हुआ हुं जान। क्या बात है? मै- आप रेडी हो जाइए, हम ...

क्या यही प्यार है - 2
by Deepak Bundela Moulik
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क्या यहीं प्यार हैं भाग-2 में ज़री है... दो दिन बाद शाबा के खत में कहे लफ्ज़ो के मुताबिक मै स्टेशन पहुंच गया था, उसदिन कई गाड़िया स्टेशन पर आई रुकी ...

मनचाहा - 36
by V Dhruva
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रात को हम दिल्ली पहुंचे। अवि और निशु को लेने ड्राईवर आया था कार लेकर। रवि भाई अपनी कार हॉस्पिटल में ही छोड़ गए थे तो रवि भाई और ...

बिन तेरे...! भाग 3
by Dipti Methe
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Continue....... "मॉम..! ये सब क्या हैं ?""डीव्होर्स पेपर्स हैं | साईन करदो इस पर और राजीव को भेज दो|""आपने ऐसा सोच भी कैसे लिया ? के मैं इन पेपर्स ...

मनचाहा - 35
by V Dhruva
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अवि की मल्टी स्पेशियली हॉस्पिटल ने कुछ ही वक्त में अपना नाम कमा लिया है। साथ में कुछ और डॉक्टर्स ने भी हॉस्पिटल ज्वॉइन किया है। पर ऑथोरिटी अवि ...

ग़रीबी के आचरण - ६
by Manjeet Singh Gauhar
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श्रीकान्त अंकल जी बस इसी बात को बार-बार सोच कर परेशान हुआ करते थे, कि ' मेरे होते हुए मेरे बीवी बच्चों को कमाना पड रहा है। और मैं ...

मनचाहा - 34
by V Dhruva
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आइस क्रीम खाने के बाद मैने रवि भाई से कहा कि मेरे दवाई लेने का टाइम हो गया है तो हमें अब चलना चाहिए। रवि भाई- वो तो तु ...

अच्छाईयां –३३
by Dr Vishnu Prajapati
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भाग – ३३ काली घनी रातमें इन्स्पेक्टर तेजधार सूरज को सालो पहले की कुछ सच्चाइयाँ सूना रहा था | जैसे जैसे बात आगे चल रही थी वैसे वैसे तेजधार ...