सर्वश्रेष्ठ उपन्यास प्रकरण कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

जी-मेल एक्सप्रेस - 12
द्वारा Alka Sinha

जी-मेल एक्सप्रेस अलका सिन्हा 12. ‘‘एडवेंचर कुड़िये... एडवेंचर...’’ क्वीना की परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। परीक्षाओं के बीच ही निकिता का जन्मदिन भी है। निकिता ने साफ शब्दों में ...

भदूकड़ा - 19
द्वारा vandana A dubey Verified icon
  • 190

सुमित्रा की नौकरी ने ये तय कर दिया था, कि उसे अब स्थाई रूप से गांव नहीं जाना है. जायेगी, लेकिन मेहमानों की तरह. त्यौहारों पर, या गरमी की ...

रिसते घाव (भाग -७)
द्वारा Ashish Dalal
  • 116

रात के बारह बजने के बावजूद आज एम के बिजनेस सोल्युशन लिमिटेड के कैंटीन में काफी चहलपहल थी । पाँच सौ लोग एक साथ बैठकर जहाँ इस कैंटीन में ...

नई चेतना - 7
द्वारा राज कुमार कांदु
  • 42

अमर पसीने से लथपथ हो चुका था । उसके कदम अब डगमगा रहे थे । हिम्मत जवाब दे रही थी । हरिया के जाने के बाद वह तुरंत ही ...

कर्म पथ पर - 4
द्वारा Ashish Kumar Trivedi Verified icon
  • 112

                        कर्म पथ पर                       Chapter 4घायल हाथ लिए ...

निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 26
द्वारा Anandvardhan Ojha
  • 84

'पांच-पच्चीस का विचित्र चक्र...' अभी-अभी परलोक चर्चाओं की पच्चीसवीं कड़ी समाप्त हुई है। जब कॉलेज में था, एक विदेशी लेखक के उपन्यास का हिन्दी तर्जुमाँ 'पच्चीसवाँ घण्टा' पढ़ा था। उसकी ...

आओ चलें परिवर्तन कि ओर... - 3
द्वारा Anil Sainger
  • 48

“अम्मा, देखो इसने दूध गिरा दिया है |” “घर में घुसते ही इन लोगों के क्लेश सुन-सुनकर तो मैं दुःखी हो गयी हूँ |   सोफ़िया तुम कहाँ हो |” ...

जी-मेल एक्सप्रेस - 11
द्वारा Alka Sinha
  • 64

जी-मेल एक्सप्रेस अलका सिन्हा 11. हॉरमोनल इंबैलेंस क्वीना आगे की पढ़ाई करने घर से कहीं दूर गई है। उसके ग्रुप में सात सदस्य हैं। क्वीना ने लिखा है, वे ...

चिंटु - 31
द्वारा V Dhruva Verified icon
  • 234

मोहन को दो दिन बाद मौका मिला इवान के पापा से बात करने का। सुबह सुबह बारिश कुछ कम हुई तो वे छाता लेकर मॉर्निंग वॉक पर निकल पड़े। ...

हारा हुआ आदमी - 2
द्वारा किशनलाल शर्मा
  • 296

"मेरी प्यारी निशा।तुमने आज का अखबार पढा?"नर्मदा अखबार पढ रही थी।अखबार से नजरें हटाकर सामने बैठी निशा को देखते हुए बोली।"मै अखबार सुबह ही पढ लेती हूूं।"निशा बोली," कया ...

कर्म पथ पर - 3
द्वारा Ashish Kumar Trivedi Verified icon
  • 162

                                    कर्म पथ पर                     ...

निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 25
द्वारा Anandvardhan Ojha
  • 144

'ज़मीं पर कभी उतरो तो कोई बात बने ...!'अगली वार्ता में मेरी इस जिज्ञासा पर कि तुम्हें कैसे ज्ञात हुआ कि वह मज़दूर अपने गाँव चला गया था और ...

इच्छा - 2
द्वारा Ruchi Dixit
  • 324

कई दिनो तक चलता रहा इच्छा का सुबह स्नान के बाद सबसे पहला कार्य  ईश्वर का ध्यान था यह संस्कार उसे बचपन मे ही विरासत मे मिला था दिन ...

मैं तेरी चाँदनी - 3
द्वारा Kavita Verma
  • 110

                                  भाग-3 सुबह के 9 बजे है । चाँदनी- गुड मॉर्निंग ,मामाजी। सिन्हा- ...

भदूकड़ा - 18
द्वारा vandana A dubey Verified icon
  • (13)
  • 284

कुन्ती झपाटे से अपनी अटारी में पहुंची. पीछे-पीछे बड़के दादाजी पहुंचे. ’क्या बात है? इस तरह भरी समाज से उठा के लाने का मतलब?’ दादाजी को कुन्ती की हरकत ...

जी-मेल एक्सप्रेस - 10
द्वारा Alka Sinha
  • 62

जी-मेल एक्सप्रेस अलका सिन्हा 10. विदाई गीत डायरी का यह पन्ना उदासियों से घिरा है। स्कूल छोड़ने की उदासी... वक्त बीत जाने की उदासी... बहुत कुछ छूट जाने की ...

कर्म पथ पर - 2
द्वारा Ashish Kumar Trivedi Verified icon
  • 218

                         Chapter 2मुंशी दीनदयाल खाने के बाद लेटे हुए आराम कर रहे थे। किंतु मन बेचैन था। अब ...

सुलोचना - 1
द्वारा Dev Sharma
  • 148

वैसे तो राकेश लगभग हर साल गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर मिर्जापुर जाता था पर इस बार दो साल बाद आया था तो मन कुछ ज्यादा ही ...

निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 24
द्वारा Anandvardhan Ojha
  • 154

जब कृतज्ञता अश्रु बन छलकी थी...24पितामही और माता के बाद जीवन के चौबीसवें वसंत को लांघते ही पहली बार किसी ने मुझसे कहा था--'मैं भी तो तुम्हें प्रेम करती ...

जी-मेल एक्सप्रेस - 9
द्वारा Alka Sinha
  • 82

जी-मेल एक्सप्रेस अलका सिन्हा 9. तस्वीर का दूसरा रुख क्वीना ने लिखा है कि कुणाल से मिली जानकारी के मुताबिक उसे प्रैक्टिकल में पूरे नंबर मिले हैं। हो सकता ...

नई चेतना - 6
द्वारा राज कुमार कांदु
  • 174

अमर घर से निकल तो पड़ा था लेकिन उसे खुद ही पता नहीं था उसे जाना कहाँ है करना क्या है ? बस वह चला जा रहा था । ...

कर्म पथ पर - 1
द्वारा Ashish Kumar Trivedi Verified icon
  • 426

            ‌             Chapter 1सन 1942 का दौर था। सारे देश में ही अंग्रेज़ों को देश से बाहर कर स्वराज लाने ...

भदूकड़ा - 17
द्वारा vandana A dubey Verified icon
  • (13)
  • 410

’कौशल्या, जाओ रानी तुम देख के आओ तो बड़की दुलहिन काय नईं आईं अबै लौ.’ छोटी काकी अब चिन्तित दिखाई दीं. हांलांकि नहीं आने का कारण सब समझ रहे ...

सत्या - 34 (अंतिम भाग)
द्वारा KAMAL KANT LAL
  • 218

सत्या 34 घड़ी में पाँच बजकर बीस मिनट हो रहे थे. बड़ा बाबू की मेज़ पर संजय बैठा अपने सामान समेट रहा था. आधे से ज़्यादा लोग जा चुके ...

निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 23
द्वारा Anandvardhan Ojha
  • 166

"चालीस दुकानवाली आत्मा का 'विशुद्ध' प्रेम"...जिन दिनों चालीस दुकानवाली आत्मा के साथ मेरी प्रगाढ़ प्रिय-वार्ता चल रही थी, उन्हीं दिनों की बात है। स्वदेशी में अनियमित वेतन-भुगतान के कारण ...

जी-मेल एक्सप्रेस - 8
द्वारा Alka Sinha
  • 54

जी-मेल एक्सप्रेस अलका सिन्हा 8. अधिकार और बंदिश के बीच पूर्णिमा के आने के बाद से सेक्शन में जीवंतता आ गई है। ट्रेनीज भी अधिक आने लगे हैं या ...

आओ चलें परिवर्तन कि ओर... - 2
द्वारा Anil Sainger
  • 62

लगभग तीन महीने बाद जब मेरी परीक्षा का परिणाम आया तो पिता जी ने बोला कि बेटा दिल्ली चले जाओ और आगे की पढ़ाई करो | मैंने उन्हें यह ...

हारा हुआ आदमी
द्वारा किशनलाल शर्मा
  • 478

जनवरीआज का दिन बेहद ठंंडा था।पिछले दो दिनो से शीत लहर चल रही थी।आसमान बादलो से ढका हुआ था।आज भी सूर्य देवता के दर्शन नही हुए थे।कल रात बरसात ...

निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... - 22
द्वारा Anandvardhan Ojha
  • 208

'मैं भयावह काली बिल्ली-सी नहीं,भासमान उज्ज्वल छाया-सी हूँ--हवा में तरंगित'...पिछले डेढ़-दो महीने की वार्ता में चालीस दुकानवाली आत्मा ने कई टुकड़ों में मुझे अपनी पूरी जीवन-कथा सुनायी थी। उसकी ...

वक़्त महल
द्वारा Prabodh Kumar Govil Verified icon
  • 512

भयंकर गर्मी के कारण बाहर धूप में किसी परिंदे के भी पर मारने की आवाज़ नहीं आ रही थी। महल की ऊपरी मंज़िल पर कुछ लड़के दीवारों की घिसाई ...