जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 37
और वही कुछ देर बाद अभिराज
अस्पताल से बाहर आते हुए
चलाकर अपने गाड़ी में पास जाता है
और अपने दाई हाथ उठाकर बढ़ाते हुए
कार के दरवाजा को हैंडल को पकड़ कर खींचकर खोलते हुए
अचानक कार के दरवाजा छोड़कर
झुकते हुए अपने कदम कार के अंदर बढ़ते हुए
झुकते हुए कार में बैठ जाता है
और फिर से हल्के मुड़कर देखते हुए
अपने हाथ बढ़कर
हाथों से कार के दरवाजा पकड़ कर
खींचते हुए दरवाजा बंद करते हुए
अचानक मुड़कर सही से बैठते हुए
अपने दोनों हाथ कार के स्टेरिंग पर रखते हुए
कार को स्टार्ट करता है
और कार को ड्राइव करते हुए आगे बढ़ जाता है
और कुछ देर बाद अस्पताल से निकलते हुए
वह एक बार में पहुंचता है
वहा बहुत सारे सोरावी हैं
और बहुत सारे शोर गोल भी
और कुछ जगह रंग बिरंगे लाइट अभी
चमक रही है
रोशनी से भरे जगह
बहुत सारे लोग हैं
और वही
अभिराज वार के पश्चिम साइड के दरवाजा से घुसते हुए
अचानक रुक जाता है
और दरवाजों के पास से खड़े रहकर
चारों तरफ नजर दोराते हुए
और लोगों को देखते हुए
सराब पीते लोग
लोगों की हंसी
और लोगों की व्यवहार को नोटिस करते हुए
अचानक वो बार होल्डर की तरह देखा है
और उसे देखते हुए
अचानक अपनी ठहरे हुए कदम को आगे बढ़ता है
और धीरे-धीरे सीरियल से नीचे उतरने लगता है
और वही चारों तरफ लोग हंस रहे हैं
मुस्कुरा रहे हैं
अपने अपने हाथों में शराव के गिलास लेते हुए
कुछ लोग खड़े होकर आपस में बात कर रहे हैं
और कुछ लोग अपने अपने जगह पर टेबल के सामने चेयर पर बैठे हुए हैं
और कुछ लोग बार होल्डर के पास खड़े हैं
और कुछ लोग बार होल्डर के पास ही चेयर पर बैठे हैं
अपने हाथों में शराब की गिलास लिए
और वही बार होल्डर मुस्कुराते हुए
कुछ लोगो को शराब सिर्फ कर रहे हैं
और
वहीं कुछ देर बाद अभिराज चलते हुए
सीडीओ से नीचे आकर फर्श पर चलते हुए
भीर से गुजरते हुए
कुछ देर में वार होल्डर के पहुंचता है
और नजरे उठा कर बार होल्डर की तरफ देखा है
और वही बार होल्डर अभिराज को देखते ही
अपने हथों में रखे हुए शराब को बोतल को रुमाल से साफ करते हुए ही
हल्के सर झुकाते हुए बिना बोले अभिराज को होलो कहता है
और वही अभिराज बार होल्डर को देखते हुए
और अचानक कुछ सेकंड ठहरते हुए
हल्का सर हिलता है
बार होल्डर को हाय कहने के लिए
और अचानक बार होल्डर पर से नजरे हटाते हुए
हल्की नजर झुका कर
वहां सामने चेयर को देखा है
और अपनी बाई हाथ बड़ा कर
हल्के चेयर को पीछे खींचते हुए थोड़े पिछे लाकर
उन्हें अपने हाथों से छोड़कर
अचानक दो कदम आगे बढ़कर
उस कुर्सी पर बैठ जाता है!
और वही उस
बार होल्डर की उम्र 30 साल की है
और वो यंग
साफ करते हुए शराब की बोतल से कपड़े हटाकर नीचे रखता है
अचानक अपना हाथ उठाकर दोनों हाथ लगाते हुए
शराब की बोतल के ढक्कन खोलता है
और हल्के झुकते हुए
अपने हाथों में रखी हुई शराब की बोतल को भी झुकते हुए
वहां टेबल पर रखी हुई
गिलास में शराब डालते हुए
वहां खड़े कुछ लोगों को लिऐ
वो शराब की पैक बना कर दे रहे हैं
और वही उस बार होल्डर की नजर
अभीराज पर टिकी हुई है
दूसरों को शराब सर्फ करते हुए
और वही अभिराज ठीक से बैठते हुए
उतरे हुए चेहरे के साथ
अपना हाथ दोनों उठाकर टेबल पर रखता है
और वही वह बार होल्डर अभिराज को देखते हुए
अचानक मुस्कुराते हुए
दूसरों की गिलास भर के
बोतल उठाते हुए
और सही से खड़े होते हुए
टेबल पर बोतल को अपना हाथों में लिए ही टिकाते हुए
अभिराज से मुस्कुराते हुए कहता है
सर आज किया चाहिए
और वही अभिराज
उतरे और गंभीर चेहरे के साथ
वार होल्डर के तरफ देखते हुए
हल्के भरी आवाज में कहता है
कुछ भी बनाओ
और वही वो बार होल्डर अभिराज को देखते हुए
अचानक से सामने पड़े दूसरा गिलास
भरने के लिए बोतल को उठाते हुए
और हल्के झुकते हुए
सामने रख गिलास में शराव डालने लगता है
और वैसे ही
तिरछी नजरों से
अभिराज के गंभीर चेहरा देखा है
और मुस्कुराने होते हुए सोचता है
शायद यहां
यह कुछ ढूंढने तो नहीं आया
इतनी रात को
और फिर सीधे होते हुए
दूसरी हाथ बढ़ाकर
सराव से भरे हुए गिलास को पकड़ते हुए
उठाकर दूसरे की तरफ बढ़ते हुए
दूसरे कस्टमर को देता है
और वही दूसरे आदमी अपने हाथ बड़ा कर
बार होल्डर के हाथों से वह शराब का ग्लास लेता है
और हल्की मुस्कुराता है
और वही बार होल्डर मुस्कुराते हुए
शराब के गिलास छोड़कर
अपने हाथ पीछे हटता है
और फिर हल्के पीछे हटते हुए
मुड़कर एक कदम आगे बढ़ते हुए
अपनी दोनो हाथ बड़ाते हुए
शराव कैबिनेट से दो बोतल शराब को अपने हाथों में
पकढ़ते हुए बाहर लता है
और फिर अचानक मूर हुए
एक कदम आगे आता है
और अचानक हल्के झुकते हुए
सराव की बोतल टेबल पर रखता है
और अभिराज के दूसरा पैक बनने की
तैयार मे जुट जाता है
और
वही अभिराज बस शांत बैठा हुआ है
गंभीर चेहरा लिए
साइट अगल-बगल लोगों की बातें सुनते हुए
और तभी अचानक वहां
बार होल्डर के पास
दो 40 45 साल की आदमी आते हुए
और एक दूसरे से बातें करते हुए
हंसते हुए ठहर जाता है
और हंसते हुए अपने दोस्त से कहता है
चलना यार
जितना पी सकता है
आज पी ले पार्टी मेरी तरफ से
काम से पहले ही एडवांस मिला है
और वही बार होल्डर
अपने सभी कस्टमर की बातें सुनते हुए
और झुकते हुए पैक बनाने के लिए
शराब को एक गिलास में डाल रहा है
और वही उसके साथ आई हुई
वह दूसरा आदमी मुर कर
उसे आदमी की तरफ देखते हुए
हंसते हुए दोनों हाथ खोलकर
आगे बड़ा कर हवा में लहराते हुए
दोनों हाथ को पालता कर
अपने बाजू के दोनों साइड करते हुए
और रिएक्ट करते हुए
कहता है
हा हा हा
क्या सच में
मैं जितना पी सकता हूं
उतना पी लु
और यह कहते हैं
वह आदमी
दूसरे आदमी की दोनों और हंसने लगता है
और तभी उसकी हंसी और उसके बातें सुनकर
अभिराज अचानक हल्के नजरे घूम कर
उन दोनों की तरह देखा है
और
वही बार होल्डर
अभिराज के लिए सराव की पेक बनाते हुए
मुस्कुरा कर अभिराज की तरफ देखते हुए
हल्की नजर तिरछी करते हुए
उन दोनों आदमी की तरफ देखता है
और वही वह सामने खड़ा पहला आदमी हंसते हुए कहता है
हां यार जितना पीसकता है
पी ले
और
तभी वह दूसरा आदमी
अचानक दोनों हाथ उठा कर आगे बढ़ते हुए
पहले आदमी को सामने आकर कर
झट से झुकते हुए
गले लग लगता है
और मुस्कुरा कर रिएक्ट करते हुए कहता है
तू तो मेरे भाई है
यार
और वही वह पहला आदमी हंसने लगता है
और साथ में दूसरा भी
और तभी टेबल के सामने वार होल्डर
सराब के पैक बनाकर
अचानक गिलास को पकढ़ते हुए
हल्के ग्लास किसका कर
अभीराज की तरफ बढ़ते हुए मुस्कुरा कर कहता है
सर आपकी पाक रेडी है
और तभी अचानक से अभिराज
उनसे नजर हटाकर
हामी भरते हुए
बार होल्डर की तरफ देखा है
और अपने हाथ उठाते हुए टेबल पर रखिए
गिलास की तरफ बढ़ता है
और
वहीं दूसरी तरफ वह आदमी पहले आदमी को
गले लगा छोड़ते हुए
अपने हाथ को पीछे लेते हुए
हल्की मुस्कुराते हुए भारी आवाज में कहता है
पर यार तुझे इतने पैसे मिले कहां से
और
तभी वह आदमी यह सुनकर हॉकी मुरते हुए
वार होल्डर की तरफ हल्के कदम बढ़ते हुए
मुस्कुरा कर कहता है
किसी को मारने है
और तभी वह दूसरा आदमी क्यासुनते ही
अचानक घबराते हुए ठहर जाता है
अरचनक पीछे मुड़कर हल्के रिएक्ट करते हुए
ठहरते हुए आवाज में कहता है
क्या यार किस मारना है
और
वहीं दूसरी तरफ अभिराज गिलास को हाथों में लेते हुए
हल्की से उठाकर होठों पर लगाते हुए
एक गुट लेता है
और हाथ होठों से हटाते हुए नीचे लेता है
आगे बार होल्डर की तरफ देखता है
और वही बार होल्डर सराब का दूसरा बोतल
अपने हाथों से खोलते हुए
दूसरे के लिए पैक बना रहा है
और वही सामने पहला आदमी
हल्के मोड कर पीछे खड़े दूसरे आदमी की तरह देखते हुए
और दोनों हाथों को फैला कर दोनों बाजू की साइट
हल्की हवा में लहराते हुए मुस्कुराते हुए कहता है
अरे यार तू घबराहट
काहे को रहा है
उसे ना मारना मुझे है
तु बस इंजॉय करना
और यह कहते हैं वह अपने हाथ नीचे करता है
और अचानक मुरते हुए
बार होल्डर की तरफ बढ़ते हुए कहता है
चला आ पीते हैं
और अचानक बार होल्डर के देखते हुए
और अपने हाथ उठाकर बार होल्डर की तरफ बढ़ते हुए
हल्के अपने हाथों को पंजों से गोला कार बनाते हुए
हिलाते हुए हल्के रिएक्ट करके
ऊंची आवाज लगाते हुए कहता है
ओ सन भाई दो पैक बना एकदम से कारक
और तभी उसके पीछे खड़ा वह पहला आदमी
उसे देखते हुए हल्के अपना कदम आगे बढ़ता है
और घबराते हुए हल्की आवाज में कहता है
भाई पर अगर पकड़ा गया तो क्या होगा
और तभी अचानक वह पहले आदमी मुड़कर दूसरे आदमी की तरफ देखते हुए
दोनों हाथों हल्के आगे बराकर हवा में लहराते हुए
रिएक्ट करते हुए कहता है
अरे यार तु इतना काहे को सोच रहा है
वह लड़की पहले से ही मार रही है
अपुन तो बस उसे जल्दी भेज रहा है
गॉड के पास
और तभी यह सुनते ही
बगल में बैठे अभिराज के कान अचानक खड़े हो जाते हैं
और पैक लगाते हुए
उसके हाथ अपने आप रुक जाता है
और वही वह आदमी अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए
और वैसे ही दोनों साइड हवा में अपने हाथ को लहराते हुए कहता है
वह माधुरी हॉस्पिटल में पड़ी हुई है
वह लड़की कभी भी टपक सकती है
हम मारे या खुद मरे क्या फर्क पड़ता है
और तभी आगे यह सुनते ही
अचानक अभिराज जोर से अपनी मुट्ठियों को बांधते हुए
दूसरे हाथों से गिलास को उठाकर जोर से कसीनो पे पटकते हुए
मुरता है
और वही वह आदमी अपने बाएं हाथ नीचे करता है
और दूसरा हाथ दूसरे आदमी की तरफ बड़ कर
दूसरे आदमी के हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए
कहता है
आज चल
और वही वह दूसरा आदमी भी
अचानक से हल्की घबराते हुए
अपने कदम हल्के आगे बढ़ता है
और तभी अचानक अभिराज
उठते हुए सीधे खड़ा होता है
और मुरकर दो कदम आगे बढ़ता है
और वही पहला आदमी दूसरे आदमी के हाथ पकड़ते हुए खींचते हुए आगे बढ़ता है
और उसके साथ
वह दूसरा आदमी
गंभीर चेहरा लिए आगे बढ़ता है
और तभी अचानक बार होल्डर अभिराज को उठकर आगे बढ़ते देख
गिलास में पैक लगाते हुए
अचानक ठहर जाता है
और नजर घूमर अभिराज की तरफ देखने लगता है
और तभी अभिराज आगे चलकर जाते हुए
अचानक अपने बाएं हाथ बढ़ाते हुए
हल्के मुड़कर
उस पहले आदमी की शर्ट पड़कर खींच लेता है
और तभी अचानक अभिराज का ऐसा करते ही
उस आदमी के हाथ दूसरे आदमी के हाथों से
अचानक छूट जाता है
और उसकी नजर अचानक उठाते हुए
अभिराज पर जाता है
और वही दूसरे आदमी का भी हाथ वो
पहले आदमी के हाथों से छुटे हुए नीचे हो जाता है
और वह आदमी और दूसरा आदमी
वह दोनों कुछ समझ पाता की
तभी अचानक अभिराज
अपने दूसरे हाथों की मुठिया बनते हुए
गुस्से मे अपने चेहरे को सिकोड़ते हुए
जोर से बंधे हुए मोतियों को उठाकर
उस पहले आदमी के चेहरे पे जोर से एक फाइट मारता है
और राज के हाथों से मुक्का
उसे आदमी के गलों से गुजरते हुए नाक पर लगता है
और तभी
वह आदमी कुछ समझ पाता कि
अचानक जोर के मुक्का उसके गालों से गुजरते हुए
नाक से होते हुए साइड होता है
और मुंह पर जोरदार चोट लगते ही
उसकी सर चोट खाते हुए
और अचानक झनझना कर झटका खाते हुए
साइड मूरते हुए नीचे हो जाता है
और अचानक उसके नाक से लहु वहने लगता है
और वही सामने खड़ा दूसरा आदमी कुछ नहीं समझ पाता
वह बस हल्के रिएक्ट करते हुए
होठ खोलकर हक्के-बक्के रहते हुए
2 सेकंड में अचानक
अचानक घबराते हुए वो एक कदम पीछे हट जाता है
और वही बार होल्डर कुछ भी नहीं समझ पाता
वह बस अभिराज और उस आदमी की तरफ शराब की गिलास और बोतल पकढ़ते हुए ही
अचानक चोकते हुए
मुंह खोलकर देखा है
और वही उस बार में आए हुए
वहां खड़े
हर एक-एक करके आदमी नजरे घूम कर
अभीराजा और उस आदमी की तरफ देखने लगता है
शोक में पढ़ते हुए
और वह आदमी समझ पाता कि
उसे क्यों मारा है
और वह सर घूम कर आगे देख पता कि
तभी अचानक अभीराज फिर से
अपनी हाथों की जोर से मुट्ठी बांधते हुए
और एक हाथों से उसके कॉलर को पकढ़ते हुए ही
अचानक हाथ उठाकर उसके चेहरे पर
एक और घूंसा जड़ देता
और वही अभिराज को उस आदमी को मारते देखा
अचानक सभी लोग अपने-अपने इंजॉय करते छोड़
नजरे घूम सर उठा कर
अभिराज की तरफ देखने लगते हैं
और आपस में फुस फुसा कर बातें करने लगते हैं
अरे क्यों मारा रहा है
हो क्या रहा है
कुछ भी समझ में नहीं ओ रहा
अलग-अलग तरह की बाते
और वही अभिराज की जोरदार मुक्का मारते ही
उस आदमी का चेहरा अचानक और झुक जाता है
उसके के गाल लाल पड़ते हुए
उसके नाक और होठों से
जोरदार खून बहने लगते हैं
और वही दूसरा आदमी अचानक
घबराते हुए और घबराहट भरी नजरों से
अभिराज की तरफ देखते हुए
दो कदम और पीछे हट जाता है
और वही बार होल्डर भी शौक में पढ़ते हुए
उन दोनों की तरफ बस देखता रहता है
और उसके साथ-साथ सभी लोग भी
और वही वह आदमी कुछ भी नहीं समझ पाता
वह बस चोट के कारण गहरी सांस लेते हुए
अचानक दोनों हाथ उठाने की कोशिश करता है
और नजरे घूमर अभिराज की तरह देखने की कोशिश करता है
और तभी अचानक फिर से अभिराज
मुठियों को बांधते हुए
जोर से उसके चेहरे पर मरते हुए
अपने सिकोड़ते हुए चेहरे के साथ गुस्से में कहता है
तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई
उसे चोट पहुंचाने की सोचने की भी
और वही अचानक फिर से झटका खाते हुए
उस आदमी के चेहरे साइड हो जाता है
और उसका हाथ अचानक नीचे होते हुए
उसकी पूरी बॉडी झनझना उठती है
और वह कुछ समझ भी नहीं पता
और तभी अचानक अभिराज दोबारा मुट्ठी बांधकर
उसके चेहरे पर मरते हुए
आगे गुस्से में कहता है
किसने कहा उसे चोट पहुंचाने के लिए
और
वही वह समझने की कोशिश करते हुए
खुद को संभालने की कोशिश करता है
और अचानक वो संभाल पाता की
तभी
यह कहते हुए अभिराज अपने फाइट वाले हाथ को हल्के पीछे लेते हुए
उस आदमी के कॉलर को
अपने हाथ छोड़ देता है
और तभी वह आदमी अभिराज के हाथों से
अचानक छोड़ते ही लड़खड़ा कर
जमीन पर गिर पड़ता है
हल्के पश्चिम की साइड तिरछे
और अचानक होठों को खोलते हुए
रिएक्ट करते हुए गहरी सांस लेने लगता है
और तभी अचानक अभीराज
बिना भाव की अपने गुस्से वाले चेहरे लिए
मुर कर
और झुकते हुए उस आदमी की तरफ देखता है
और वही भीड़ में किसी को समझ में नहीं आ रहा
क्या हुआ
क्यों तब से वह आदमी उसे मारे जा रहा है
और वही अभिराज को कुछ लोग अच्छे से जानते हैं इसलिए उसके करीब या उसके बीच नहीं आना चाहता
और वही पैक बनाते हुए बार होल्डर
दोनों हाथ धीरे-धीरे टेबल पर शराब के बोतल और गिलास पर ही
टिकाऐ हुए
हैरानी के साथ अभिराज और उस आदमी के तरफ देख रहे हैं
वह समझ चुका है
कोई बात तो है
पर उसे ठीक से समझ नहीं आ रहा क्या
और वही बहुत सारे लोग आपस में
फुस फुसा कर एक अभी बातें कर रहे हैं
और वही उस आदमी का दोस्त दूसरा आदमी
उसके पीछे कुछ दूर डर के मारे पसीने में लटपट खड़े हैं
अपने घबराए चेहरे के साथ
और वही अभिराज उस आदमी को ठहरते हुए
देखते हुए अचानक
दो-तीन कदम आगे बढ़कर
अचानक से झुकते हुए उस आदमी के चेहरे के पास बैठ जाता है
और वही वह आदमी पलके पलके खोल कर
गहरी सांस लेते हुए
और चोट की वजह से दर्द से कड़ा रहें हैं
और तभी अभिराज उस आदमी को देखते हुए
अपनी लहू लहान हाथों को नीचे साइड में रखते हुए
अचानक चेहरे को सीकोड़ कर दांत भिजते हुए
भारी आवाज में कहता है
तुम्हें किसने कहा उसे मरने के लिए बताओ
और वही अभिराज के हाथों से
उस आदमी की लगे हुए खून नीचे टपकती हुए गिर रहे हैं
और वही वह आदमी पलके उठा कर अभिराज की तरफ देखने की कोशिश करते हुए
और गहरी सांस लेते हुए
अपने जमीन में पड़े हुए सर को उठाने की कोशिश करता है
और वही अभिराज अचानक अपना दाएं हाथ उठाकर
उस आदमी के तरफ बढ़ते हुए
उसके जबरो के रखते हुए
जोर से जबरा दबाकर खींचकर आगे करते हुए
फिर से सूकोड़े हुए चेहरे के साथ दांत भेजते हुए
अपनी बात को दोहराते हुए
कड़ी आवाज में कहता है
तुम्हें सुनाई नहीं दिया
किसने उसे मारने के लिए कहा
और तभी अचानक वह आदमी अभिराज की जबर पकढ़के खींचते ही
उसके तरफ खींचते हुए
और जबरे और चेहरे की दर्द से
गहरी सांस लेते हुए
और दर्द आहें भरते हुए
हा
अभिराज की तरफ हल्के पलके झपका कर देखा है
और दर्द से कड़ाते हुए
लड़खरते हुए दर्द भारी हल्की आवाज में कुछ कहता है
हा वो ।।।।।
और वह सुनते ही अभिराज के आंखें उस आदमी को देखते हुए चोड़ी हो जाता है
और उस आदमी के जबरे से उसके हाथ
अपने आप धीरे-धीरे ढीला होने लगता है
और तभी अचानक सोफे पर बैठे हुई है
अभिराज की आंखें धीरे-धीरे कड़ा है जाता
और अचानक वह कल की रात की सोच से
अभी में लोटता होता है
और वह सीधे बिना भाव की काडी आंखों से
अपने अपार्टमेंट के दरवाजे कि तरफ देखते हुए
है और सेकंड वैसे ही बैठा रहता है
और कुछ सेकेंड के बाद
अपने चेहरे होठों को सिकोड़ते हुए
ठेहरे हुए भारी आवाज में कहता है
कमीना कहीं का
और यह कहते हुए
वह अपनी सीकोड़ी हुई चेहरे के साथ भोऔ को चड़ाते हुए
और दांत को पीसते हुए
आगे ठेहरे हुए भारी आवाज में कहता है
तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई
मेरी बेटी को हाथ भी लगाने की
और वही दूसरी तरफ कुछ देर बाद
मलिका बिल्डिंग के नीचे
अपने कार में बैठी हुई
अपने हाथों से कार की स्टीरिंग पकड़े रखते हुए
और हल्के सर कार के स्टेरिंग रिएक्ट करके बजाते हुए
और चिल्लाते हुए
अचानक कुछ सेकंड ठहर जाती है
चिल्लाना छोड़कर
फिर अचानक रिएक्ट करते हुए
अपने हाथो को स्टेरिंग से छोड़ते हुए
और सर को स्टेरिंग से पीछे लाते हुए
सिट के वल बैठते हुए
अपने हाथो को धीरे-धीरे नीचे कर लेती है
और सीट के ऊपर अपना सर टिका कर रखते हुए
अचानक आहे भर्ती है
आ हा
और कुछ सेकंड फिर ठहरी रहती है
और फिर अचानक फिर से रिएक्ट करते हुए
और अपने हाथ को कर में ही इधर-उधर बाजारते हुए
और चिल्लाते हुए
अचानक सीधी उठ कर बैठी है
और अचानक जल्दबाजी में
रिएक्ट करते हुए
और बराबरते हुए चिल्लाहट भरी आवाज में कहती है
इतना कुछ होने के बाद मैं जाऊं क्यों
और अचानक से रिएक्ट करते ठहरकर
और हल्की सी मूरती है
और सर सीधे करते हुए नजरे घूम कर
कार के विंडो के तरफ देखते हुए उसके बाहर देखी है
और अचानक कुछ सेकंड ठहरते हुए
और विंडो से बाहर देखते हुए
अचानक कुछ सेकेंड बाद
शांत हो कर अपना हाथ उठाते हुए आगे बढ़कर
कार के दरवाजा खोलते हुए बढ़ती है
अगर यह कहानी अच्छी लगे तो आगे पढ़ते रहिए
मिलते हैं नेक्स्ट एपिसोड मे
मैं आपके प्रिय लेखक अभी निशा 🦋❤️💯