तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 16 Khwaab द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 16

सुबह Aashi की आँख खुली तो सबसे पहले उसकी नजर मेज पर रखी डायरी पर गई। पिछली रात उसने उसमें Vihaan के बारे में जो लिखा था, उसे याद करके वह मुस्कुरा दी।

“ये क्या हो रहा है मुझे?” उसने खुद से पूछा। “पहले हर बात डायरी को बताती थी, अब डायरी में भी उसी की बातें लिख रही हूँ!”

वह अपनी ही बात पर हँस पड़ी और तैयार होने लगी।

नाश्ते की मेज पर Aarav पहले से बैठा था। Aashi को देखते ही उसने कहा, “दीदी, आज फिर चेहरे पर चमक है। कोई नई कहानी लिखी है या कहानी का हीरो कुछ ज्यादा अच्छा निकला?”

Aashi ने उसकी प्लेट से एक पराठे का टुकड़ा उठाते हुए कहा, “तुम्हें अपनी पढ़ाई की चिंता नहीं होती?”

“होती है। लेकिन आपकी जिंदगी में चल रही कहानी मेरी पढ़ाई से ज्यादा interesting है।”

“आरव!”

“अच्छा, अच्छा! चुप हो गया।”

वह हँसता हुआ अपनी किताब उठाकर चला गया। Aashi ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी मुस्कान कम नहीं हुई।

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कॉलेज में Meera पहले से उसका इंतजार कर रही थी।

“मैडम, आज एक जरूरी सवाल है।”

Aashi ने बैग रखते हुए कहा, “तुम्हारे सवाल कभी खत्म नहीं होंगे क्या?”

“नहीं। बताओ, Vihaan से बात हुई?”

“हाँ, हुई।”

“और?”

“और क्या?”

Meera ने नाटकीय अंदाज में माथे पर हाथ रख लिया। “भगवान, मुझे धैर्य देना!”

Aashi हँसते हुए बोली, “हमने बस बात की। कोई फिल्म नहीं चल रही हमारी जिंदगी में।”

Meera ने मुस्कुराकर कहा, “अभी नहीं चल रही, लेकिन कहानी का नाम तो बता—दोस्ती या कुछ और?”

Aashi कुछ पल चुप रही।

“मुझे नहीं पता, Meera। उसके साथ बात करना अच्छा लगता है। वो मेरी बातें सुनता है, मेरी writing को समझने की कोशिश करता है। लेकिन मैं किसी रिश्ते को नाम देने की जल्दी में नहीं हूँ।”

Meera का मजाकिया चेहरा थोड़ा गंभीर हो गया।

“और जल्दी करनी भी नहीं चाहिए। बस खुद को इतना मत रोकना कि जो अच्छा लग रहा है, उसे महसूस ही न कर पाओ।”

Aashi ने उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा दिया।

“तुम आज बहुत समझदार बातें कर रही हो।”

“आज? मैं हमेशा समझदार हूँ। तुम ही मेरी प्रतिभा पहचानने में देर करती हो।”

दोनों हँस पड़ीं।

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उसी समय Vihaan अपने ऑफिस में बैठा था। Aryan Khanna की company ने उसी campaign के लिए एक नई presentation भेजी थी। उसमें कुछ ऐसे ideas थे, जिनसे project के आयोजकों का ध्यान उसकी तरफ जा सकता था।

Kabir ने फाइल देखते हुए कहा, “Aryan तेज खेल रहा है। अगर उसने कम budget में ज्यादा deliver करने का वादा कर दिया, तो आयोजक उसकी तरफ जा सकते हैं।”

Vihaan ने दस्तावेज़ ध्यान से पढ़े।

“हमें अपना concept बदलने की जरूरत नहीं है। लेकिन हमें अपने plan को और स्पष्ट करना होगा।”

Kabir ने पूछा, “और अगर project उसके पास चला गया?”

Vihaan ने शांत स्वर में जवाब दिया, “तो हम अगला project ढूँढ़ेंगे। मैं सिर्फ उसे हराने के लिए अपने काम की दिशा नहीं बदलूँगा।”

Kabir ने सिर हिलाया।

“यही वजह है कि मैं तेरा दोस्त हूँ। तू गुस्से में भी अपनी समझ नहीं खोता।”

Vihaan ने मुस्कुराकर कहा, “और तू मेरी जिंदगी में इसलिए है कि मुझे चैन से काम नहीं करने देता।”

“दोस्ती का असली मतलब ही यही है!”

दोनों हँस पड़े, लेकिन Vihaan जानता था कि इस competition में उसे अपनी पूरी मेहनत लगानी होगी।

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दोपहर बाद Aashi कॉलेज से बाहर निकली ही थी कि उसे सामने एक जानी-पहचानी आवाज सुनाई दी।

“Aashi, right?”

उसने पलटकर देखा। सामने Myra खड़ी थी।

Aashi ने विनम्रता से कहा, “जी। आप Myra हैं ना?”

Myra मुस्कुराई। “अच्छा, Vihaan ने मेरे बारे में बताया होगा।”

“हाँ, हम exhibition में मिले थे।”

Myra ने आसपास देखते हुए कहा, “मैं इसी तरफ एक काम से आई थी। सोचा तुमसे मिल लूँ। वैसे, Vihaan तुम्हारी काफी तारीफ करता है।”

Aashi थोड़ी हैरान हुई।

“मेरी? लेकिन हम तो बस उसकी photography exhibition में मिले थे।”

Myra ने उसके चेहरे को ध्यान से देखा।

“वह तुम्हारी writing के बारे में बात करता है। कहता है कि तुम्हें कहानियाँ लिखना पसंद है।”

Aashi ने मुस्कुराकर कहा, “हाँ, लिखती हूँ। अभी सीख रही हूँ।”

Myra ने अपने बैग का पट्टा ठीक किया।

“अच्छा है। लेकिन तुम्हें पता है ना, Vihaan का काम काफी demanding है? उसके पास हमेशा लोगों के लिए समय नहीं होता।”

Aashi समझ गई कि बातचीत किस दिशा में जा रही है।

उसने शांत स्वर में कहा, “हर किसी की जिंदगी में काम जरूरी होता है। मैं भी उसकी व्यस्तता समझती हूँ।”

Myra ने थोड़ा झुककर पूछा, “और अगर कभी उसके पास तुम्हारे लिए समय न हो, तो?”

Aashi ने उसकी आँखों में देखते हुए जवाब दिया, “तो मैं अपने काम में व्यस्त रहूँगी। किसी की जिंदगी में जगह बनाने के लिए मुझे अपनी जिंदगी रोकने की जरूरत नहीं है।”

Myra कुछ पल चुप रह गई।

Aashi ने आगे कहा, “और Vihaan अपने फैसले खुद ले सकता है। मुझे नहीं लगता कि हमें उसके बारे में अंदाजा लगाकर कोई फैसला करना चाहिए।”

उसकी आवाज में न गुस्सा था, न घमंड। बस अपने सम्मान को लेकर स्पष्टता थी।

Myra ने मुस्कान वापस लाने की कोशिश की।

“तुम काफी confident हो।”

Aashi ने सहजता से कहा, “मैं बस अपनी जिंदगी और अपने सपनों को लेकर गंभीर हूँ।”

कुछ औपचारिक बातें करके दोनों अलग हो गईं।

Aashi आगे बढ़ गई, लेकिन उसके मन में एक सवाल रह गया—Myra उससे मिलने आई ही क्यों थी?

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शाम को Vihaan का फोन आया।

“Aashi, आज कैसी रही तुम्हारी कॉलेज की जिंदगी?”

Aashi ने हँसकर कहा, “आज तो आपकी एक पुरानी जान-पहचान वाली से भी मुलाकात हो गई।”

दूसरी तरफ कुछ पल खामोशी रही।

“Myra से?”

“जी।”

Vihaan का स्वर थोड़ा गंभीर हो गया। “उसने कुछ कहा क्या?”

Aashi ने बात को हल्का रखने की कोशिश की।

“बस सामान्य बातें। शायद वह आपको अच्छी तरह जानती है।”

Vihaan ने कहा, “वह हमारे परिवारों की पुरानी जान-पहचान है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसे मेरी जिंदगी के हर फैसले का अधिकार है।”

Aashi चुप रही।

Vihaan ने धीरे से पूछा, “उसकी किसी बात से तुम्हें बुरा लगा?”

Aashi ने ईमानदारी से जवाब दिया, “थोड़ा अजीब लगा। लेकिन मैं संभाल सकती हूँ। मैं बस इतना चाहती हूँ कि किसी के बारे में फैसला करने से पहले उसे समझा जाए।”

Vihaan ने कहा, “मैं भी यही चाहता हूँ। और अगर कभी कोई बात तुम्हें परेशान करे, तो मुझसे पूछ लेना। अंदाजा लगाकर खुद को परेशान मत करना।”

Aashi मुस्कुराई।

“ठीक है। लेकिन आप भी हर बात छिपाया मत कीजिए।”

“कोशिश करूँगा।”

“सिर्फ कोशिश?”

Vihaan हँस पड़ा। “अच्छा, वादा रहा—जहाँ जरूरी होगा, वहाँ बात छिपाऊँगा नहीं।”

Aashi ने तुरंत कहा, “और जहाँ जरूरी नहीं होगा?”

“वहाँ भी कोशिश करूँगा कि तुम्हें बेवजह उलझाऊँ नहीं।”

Aashi हँसते हुए बोली, “आपसे बात करना बहुत मुश्किल है।”

Vihaan ने जवाब दिया, “लेकिन बात करना बंद तो नहीं करोगी?”

Aashi कुछ पल चुप रही, फिर धीरे से बोली, “नहीं।”

फोन के दूसरी तरफ Vihaan मुस्कुरा उठा।

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उधर Aryan अपने ऑफिस में बैठा project organisers का ईमेल पढ़ रहा था। अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ था, लेकिन Vihaan की presentation को अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी।

उसने अपने सहायक से पूछा, “Malhotra Photography की अगली meeting कब है?”

“अगले हफ्ते, सर।”

Aryan ने फाइल बंद की।

“ठीक है। इस बार हमें सिर्फ presentation नहीं, अपने काम की क्षमता भी साबित करनी होगी।”

वह अपनी कुर्सी से उठा और खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया।

उसे Vihaan को हराना था, लेकिन वह जानता था कि इसके लिए उसे बेहतर काम करना होगा। इस competition में कोई आसान रास्ता नहीं था।

उसने अपने सहायक से कहा, “टीम को बोलो कि हम अपना concept और मजबूत करें। मुझे ऐसा काम चाहिए, जिसे देखकर कोई हमें नजरअंदाज न कर सके।”

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रात को Aashi अपनी डायरी लेकर बैठी। उसने कुछ देर सोचा, फिर लिखा—

“किसी रिश्ते की खूबसूरती इस बात में नहीं कि दो लोग हर समय साथ रहें। खूबसूरती इस बात में है कि दोनों अपनी-अपनी दुनिया में रहते हुए भी एक-दूसरे की दुनिया का सम्मान करें।”

उसने पन्ना पलटा और नीचे एक और पंक्ति लिखी—

“शायद मुझे अभी अपने दिल को कोई नाम देने की जरूरत नहीं। मुझे बस यह देखना है कि इस रास्ते पर चलते हुए मैं खुद से दूर तो नहीं हो रही।”

डायरी बंद करने से पहले उसने Vihaan का आखिरी मैसेज पढ़ा—

Vihaan: Good night, Aashi. अपनी कहानियाँ लिखना मत छोड़ना।

Aashi ने जवाब दिया—

Aashi: Good night, Vihaan. आप भी अपनी तस्वीरों में कहानियाँ ढूँढ़ना मत छोड़िएगा।

उसने फोन रख दिया और खिड़की से बाहर देखने लगी।

कहानी अभी आगे बढ़ रही थी। कुछ सवाल बाकी थे, कुछ चुनौतियाँ सामने थीं और कुछ एहसास ऐसे थे, जिन्हें दोनों धीरे-धीरे समझना सीख रहे थे।

लेकिन Aashi को अब एक बात पहले से ज्यादा साफ दिखाई दे रही थी—किसी को पसंद करने का मतलब खुद को भूल जाना नहीं होता।

और वह अपनी कहानी में इस बार खुद को खोना नहीं चाहती थी।

क्रमशः…