तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 4 Khwaab द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 4

“विहान।”
बस एक नाम था।
लेकिन उस एक नाम को पढ़ते ही Aashi की उंगलियाँ फोन की स्क्रीन पर रुक गईं।
कुछ सेकंड तक वह सिर्फ उस message को देखती रही।
विहान।
नाम जाना-पहचाना था।
इतना जाना-पहचाना कि उसे लगा जैसे उसने इसे कहीं पहले पढ़ा हो… या शायद किसी पुराने पन्ने पर लिखा हो।
लेकिन कहाँ?
Aashi ने धीरे से फोन नीचे रख दिया।
“क्या हुआ?”
Meera की आवाज़ सुनकर Aashi चौंक गई।
“कुछ नहीं।”
“कुछ नहीं?” Meera ने उसकी तरफ देखते हुए कहा, “पिछले दस मिनट से तुम एक ही जगह देख रही हो।”
Aashi ने हल्की-सी मुस्कान दी।
“उसने अपना नाम बता दिया।”
“कौन?”
Aashi ने फोन उसकी तरफ बढ़ा दिया।
Meera ने message पढ़ा।
“विहान?”
उसने नाम दोहराया और फिर Aashi की तरफ देखा।
“तुम इसे जानती हो?”
“नहीं।”
“फिर ये तुम्हारा नाम कैसे जानता है?”
Aashi के पास इसका जवाब नहीं था।
उसने chat खोली और पुराने messages फिर से पढ़ने लगी।
तुमने लिखना क्यों छोड़ दिया?
फिर—
शायद मुझे भी नहीं पता कि तुम्हें क्या जवाब देना चाहिए… लेकिन एक बात पूछ सकता हूँ?
और अब—
विहान।
Aashi के मन में अचानक एक सवाल आया।
उसने तुरंत message type किया।
“आप मुझे जानते कैसे हैं?”
Message भेजने के बाद उसकी नजर स्क्रीन पर टिक गई।
एक मिनट।
दो मिनट।
कोई जवाब नहीं।
Meera ने धीरे से कहा, “शायद busy होगा।”
Aashi ने फोन lock कर दिया।
“या शायद…”
“शायद क्या?”
Aashi कुछ बोलते-बोलते रुक गई।
“शायद उसे खुद नहीं पता कि मुझे क्या बताना है।”
उधर शहर के दूसरे हिस्से में Vihaan अपनी खिड़की के पास खड़ा था।
उसके हाथ में वही फोन था।
Aashi का message स्क्रीन पर खुला था।
“आप मुझे जानते कैसे हैं?”
Vihaan ने message पढ़ा और एक लंबी साँस ली।
Kabir कमरे में आया।
“अब क्या हुआ?”
Vihaan ने फोन उसकी तरफ बढ़ा दिया।
Kabir ने message पढ़ा।
“तो बता दे उसे।”
“इतना आसान नहीं है।”
“क्यों?”
Vihaan कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने कहा—
“क्योंकि अगर मैंने उसे सब बता दिया… तो शायद वो मुझसे अगला सवाल पूछेगी।”
Kabir हँस पड़ा।
“भाई, सवाल पूछना तो उसका हक है।”
Vihaan ने उसकी तरफ देखा।
“मुझे डर इसी बात का है।”
Kabir की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।
“तू उसे पहले से जानता है?”
Vihaan ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने बस फोन उठाया और Aashi की chat खोली।
कुछ देर तक typing box खाली रहा।
फिर उसने लिखा—
“तुम्हें सच में याद नहीं?”
Vihaan ने message भेज दिया।
कुछ ही सेकंड बाद Aashi के फोन पर notification आया।
उसने message पढ़ा।
उसका दिल एक पल के लिए जैसे रुक गया।
“तुम्हें सच में याद नहीं?”
Aashi ने Meera की तरफ देखा।
“ये क्या मतलब है?”
Meera ने फोन लिया और message पढ़ा।
“मतलब…” उसने धीरे से कहा, “या तो ये तुम्हें बहुत पहले से जानता है…”
वह कुछ पल रुकी।
“…या फिर तुम्हारी जिंदगी में कोई ऐसा हिस्सा है, जिसे तुम खुद भूल चुकी हो।”
Aashi ने कुछ नहीं कहा।
उसकी नजर खिड़की के बाहर चली गई।
बारिश शुरू हो चुकी थी।
बूंदें काँच पर गिर रही थीं।
और अचानक उसके दिमाग में एक बहुत पुरानी तस्वीर चमकी—
एक पुरानी डायरी…
एक अधूरा पन्ना…
और उस पन्ने के नीचे लिखा हुआ एक नाम।
Vihaan.
Aashi ने घबराकर आँखें बंद कर लीं।
“नहीं…”
Meera ने पूछा, “क्या हुआ?”
Aashi ने धीरे से आँखें खोलीं।
उसके चेहरे पर पहली बार डर साफ दिखाई दे रहा था।
“Meera…”
“हाँ?”
“मुझे लगता है…”
वह रुक गई।
“…मैंने ये नाम पहले कहीं लिखा है।”
Aashi ने तुरंत अपने कमरे की तरफ जाने का फैसला किया। उसे याद था कि उसकी पुरानी डायरी कई महीनों से अलमारी के सबसे नीचे वाले हिस्से में रखी थी। शायद उसमें उस नाम का कोई निशान मिल जाए, जिसे उसका दिमाग याद करने की कोशिश कर रहा था। उसने अलमारी खोली और पुराने सामान के बीच वह नीली डायरी ढूँढने लगी। डायरी हाथ में आते ही उसके दिल की धड़कन थोड़ी तेज हो गई। उसने पहला पन्ना खोला, लेकिन वहाँ कुछ नहीं था—सिर्फ आखिरी पन्ने पर एक तारीख लिखी थी, जिसे देखते ही उसके चेहरे का रंग बदल गया। वही तारीख थी, जिस दिन उसने लिखना हमेशा के लिए छोड़ दिया था।
🌙 क्रमशः…