तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 5 Khwaab द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 5

Aashi कुछ देर तक उस तारीख को देखती रही।
22 August.
सिर्फ दो शब्द और कुछ अंक थे, लेकिन उसके लिए वो तारीख किसी बंद दरवाज़े की तरह थी।
ऐसा दरवाज़ा, जिसे उसने बहुत पहले बंद कर दिया था।
उसने डायरी को धीरे से पलटा।
कुछ पन्ने खाली थे। कुछ पर अधूरी कविताएँ थीं। कहीं-कहीं छोटी-छोटी बातें लिखी थीं, जिन्हें पढ़कर उसे अपना पुराना रूप याद आ रहा था।
एक पन्ने पर लिखा था—
“कभी-कभी हम किसी चीज़ को इसलिए नहीं छोड़ते क्योंकि हमें उससे प्यार नहीं रहा… बल्कि इसलिए छोड़ते हैं क्योंकि उससे जुड़ी याद बहुत भारी हो जाती है।”
Aashi की आँखें उस लाइन पर टिक गईं।
उसे याद नहीं था कि उसने यह कब लिखा था।
लेकिन उसे इतना जरूर याद था कि उस दिन के बाद उसने अपनी डायरी को छूना भी बंद कर दिया था।
तभी फोन पर notification आया।
Aashi ने चौंककर फोन उठाया।
Vihaan का message था।
“तुम्हें वो तारीख याद है?”
Aashi के हाथ ठंडे पड़ गए।
उसने तुरंत reply किया—
“तुम्हें 22 August के बारे में कैसे पता?”
इस बार जवाब आने में ज्यादा समय नहीं लगा।
“क्योंकि उस दिन मैं भी वहाँ था।”
Aashi कुछ सेकंड तक स्क्रीन को देखती रही।
“वहाँ…”
उसके दिमाग में पुराने दृश्य एक-दूसरे से जुड़ने लगे।
बारिश।
एक छोटी-सी जगह।
किताबों से भरी मेज़।
और एक लड़का…
जिसका चेहरा उसे याद नहीं आ रहा था।
Aashi ने आँखें बंद कर लीं।
“कौन था वो?”
उसने खुद से पूछा।
तभी कमरे के बाहर Aarav की आवाज़ आई—
“दीदी!”
Aashi ने जल्दी से डायरी बंद कर दी।
“हाँ?”
Aarav कमरे में आया और उसे देखकर रुक गया।
“आप फिर से ये पुरानी डायरी पढ़ रही हो?”
Aashi ने डायरी अपने पीछे कर ली।
“बस ऐसे ही।”
Aarav ने मुस्कुराकर कहा, “आपने तो कहा था कि अब कभी नहीं पढ़ोगी।”
Aashi ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें याद है?”
“मुझे सब याद रहता है,” Aarav ने गर्व से कहा। “उस दिन आप बहुत रोई थीं।”
Aashi के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।
“मैं… रोई थी?”
Aarav ने सिर हिलाया।
“हाँ। और आपने मुझसे कहा था कि किसी को ये बात मत बताना।”
Aashi कुछ बोल नहीं पाई।
Aarav को शायद उसकी परेशानी समझ नहीं आई। वह casually बोला—
“वैसे उस दिन एक लड़का भी आया था।”
Aashi की नजर अचानक उसकी तरफ उठी।
“कौन लड़का?”
Aarav ने सोचने की कोशिश की।
“पता नहीं… शायद आपके कॉलेज का कोई दोस्त था।”
Aashi का दिल तेज़ धड़कने लगा।
“उसका नाम?”
Aarav ने कुछ पल सोचा।
“शायद…”
वह रुक गया।
“मुझे ठीक से याद नहीं।”
Aashi ने बेचैनी से पूछा—
“कुछ भी याद है?”
Aarav ने सिर हिलाया।
“बस इतना कि वो आपके लिए एक डायरी लेकर आया था।”
Aashi ने तुरंत अपनी पुरानी डायरी की तरफ देखा।
उसकी उंगलियाँ डायरी के कवर पर जम गईं।
“मेरे लिए?”
Aarav कमरे से बाहर जाते हुए बोला—
“हाँ। शायद यही वाली।”
दरवाज़ा बंद हो गया।
Aashi अकेली रह गई।
उसने धीरे से डायरी खोली।
पहले पन्ने के कोने पर उसे कुछ दिखाई दिया।
एक छोटा-सा अक्षर।
V.
उसकी साँस जैसे वहीं अटक गई।
उसी समय Vihaan का एक और message आया—
“अब शायद तुम्हें याद आने लगेगा कि मैंने तुम्हें लिखना बंद करने के लिए कभी नहीं कहा था…”
Aashi ने message पढ़ा।
उसकी आँखों के सामने अचानक वही पुराना दृश्य फिर से आया।
एक लड़का उसके सामने खड़ा था।
हाथ में यही नीली डायरी थी।
और उसकी आवाज़—
“जब भी तुम्हें लगे कि कोई तुम्हें समझ नहीं रहा… इसमें लिख देना।”
Aashi ने घबराकर डायरी बंद कर दी।
उसके सामने अब सिर्फ एक सवाल था—
अगर Vihaan उस दिन वहाँ था… तो फिर उसने इतने सालों तक उससे बात क्यों नहीं की?