जिंदगी की दूसरे किनारा पार्ट 35
और वही कुछ देर के बाद डॉक्टर देव अस्पताल पहुंचे है
वह सभी को इग्नोर करते हुए
निकले फ्लोर के हॉलवे से भागते हुए लिपि में जाता है
और वही आते जाते कुछ नर्स उन्हें नजरे घूम कर देखते हैं
और कुछ डॉक्टर सी
और तभी डॉक्टर देव अचानक मुड कर खड़े होते हैं
और अचानक लिपि बंद होता है
और कुछ देर बाद लिप रूकती है
ऊपरी फ्लोर पर
और वह लिफ्ट से निकाल कर मूरते हुए
और गहरी गहरी सांस लेते हुए हफ्ते हुए
और धीरे-धीरे पसीनो से भरते हुए
वो फिर से दौड़ते हुए
सीधे अपने पेशेंट की रूम की तरह भागता है
और वही रास्ते में भागते हुए
डॉक्टर देव को देखते हुए
आगे आते जाते हुए
नर्स और पेशेंट एक-एक करके पहले ही साइड हो जाते हैं
और वही कुछ देर में डॉक्टर देव
अपने पेशेंट के रूम के करीब जाते हुए
अपने हाथ बढ़ाकर झट से दरवाजे की हैंडल पकढ़ते हुए खींचकर आगे धकेलते हुए
दरवाजा खोलकर अंदर जाते हुए
दरवाजे की हैंडल अपने हाथों से छोड़ कर
अपनी कदम आगे बढ़ता है
और अचानक आगे देखते हुए ठहर जाता है
चिंता से भारी चेहरे के साथ गहरी गहरी सांस लेते हैं
हाप्ते और थोरे और पसीने से भीगे हुए
और वही आगे पेशेंट के सामने वैदेही
अब भी बैठी हुई है
अपने दोनों हाथ अपनी बेटी के बिस्तर की तरफ बढ़ते हुए हल्के उनके हाथों को छूते हुए
और उसके आंखें बह रही है
पर उसकी होंठ खामोश है
वह बस अपनी बेटी को देखी जा रही है
और वही अचानक डॉक्टर देव आगे की तरफ देखते हुए
गहरी सांस ले रहा है
और तभी वो नर्स लाइव मॉनिटर के पास खड़ी है
खाली हाथ के साथ
और अचानक उसे कदमों की आहट सुनाई देती है
और वह अचानक नजरे घूमर पीछे देखी है
और देखती है दरवाजे के पास खड़े देव को
और देव को देखते हुए
हल्की सी मुस्कुराती है
और वही डॉक्टर देव की खामोश चेहरा
और घबराहट से भारी नजर अपने फैशन टिकी हुई है
गहरी गहरी सांस लेते हुए
और वही वह नर्स देव को देखकर मुस्कुराते हुए
और अचानक हल्की आवाज में कहती है
वह ठीक है
देखो चिंता मत करो
और यह सुनते ही अचानक देव नजरे पेशेंट की तरफ से
हटते कर घुमाते हुए
उस नर्स की तरह जाता है
और उस नर्स को देखते हुए
वो अपने गहरी सांस को हल्का करते हुए
खुद को रिलायंस करने की कोशिश करते हुए
और वही वह नर्स देव को देखते हुए
मुस्कुरा कर आगे कहती है
पहले रिलैक्स हो जाओ
देखो
तुम भागते हुए पसीने से पूरी तरह भिग चुके हो
और तभी देव अचानक उस नर्स को देखते हुए
और उसके बातें सुनते हुए
खुद को और रिलैक्स करते हुए
और फिर से आह भरते हुए
हा
नर्स से अपने नजरे हटाकर
धीरे से नजरे झुका कर
हल्की अपने कपड़ों की तरफ देखता है
और देखता है
पसीने से भीगे हुए
और अचानक वो खुद को देखते हुए
और पेशेंट की हालत नॉर्मल है यह सोचते हुए
वो रिलैक्स होते हुए
और गहरी सांस छोड़ कर
फिर से आहे भरते हुए
हल्की आंखें बंद करता है
हां
और वही वह नर्स डॉक्टर देव की तरफ देखते हुए
मुस्कुराती है
और अचानक नजरे घूमा कर
पेशेंट की तरह दिखती है
और वही डॉक्टर देव
पूरी तरह से खुद को रिलैक्स करते हुए
अपने पलके उठना है
और वहीं दूसरी तरफ वैदेही अपनी बेटी के पास
चुपचाप बैठी हुई है
उसकी आंखें बह रही है
पीछे देव और नर्स की बातों पर उसका ध्यान ही नहीं है
और वही देव अपनी पलके खोलकर
अचानक अपने पेशेंट की तरफ देखते हुए
और फिर से गहरी सांस लेकर
आहे भढ़ते हुए
अचानक अपने पेशेंट को देखते हुए
उसके तरफ अपना कदम आगे बढ़ता है
और वही मालिका अपने कमरे से कपड़े से भरी हुई
बड़े से सुटकेस को होंडल खींचते हुए
कैमरे से बाहर आ रही है
और वही दुसरी तरफ पिछे
अभिराज कुछ सोचते हुए
बेड पर बैठे हुए हैं
और अभी अचानक वो मालिका के कदमों की आहट सुनते ही पलके उठा कर मालिका की तरफ देखत है
अपने गमभीर चेहरे के साथ
बिना किसी भाव के उसे देखता रहता है
और वही मालिका मुड़कर गुस्से में अभिराज
तीखे नजरों से देखते हुए
अचानक मुड़कर
अपन कदम उन दोनों सूटकेस को
अपने हाथों से खींचते हुए
आगे बड़ती है
और चलते हुए कुछ सेकंड में
वह दरवाजा के पास जाता है
और एक हाथों से सूटकेस के हैंडल छोड़ते हुए
अपने हाथ उठाकर बढ़ाते हुए
दरवाजे के हैंडल पकढ़ते हुए
दरवाजा खोलती है
अचानक हैंडल को छोड़ते
हुए अपने हाथ नीचे करती है
और फिर अचानक गुस्से से
हल्के पीछे नजरे घूमर पलके उठाते हुए
अभिराज की तरफ देखती है
और वही अभिराज की आंखें आगे
मालिका को देखते हुए शांत है
वह बस खामोशी के साथ बैठा हुआ है
और वही मालिका उन्हें गुस्से से देखते हुए
अचानक हल्के झुकते हुए
अपने हाथ नीचे करके
दूसरे सूटकेस के हैंडल हाथों से पकढ़ते हुए मूरती है
और दरवाजे के बाहर जाने के लिए
अपनी कदम आगे बाराती है
गुस्से और ईर्षा करते हुए वह उस अपार्टमेंट से बाहर चली जाती है
और उसे जाते ही दरवाजा अपने आपआगे आते हुए
लॉक हो जाती है
और
वही अभिराज उसे देखता रहा
शांत नजरों से
पर उसे रोकना नहीं
और वहीं दूसरी तरफ वीर की दुनिया में
वीर सीडीओ से उतरते हुए
आंगन की तरफ आ रहा है
नीचे की तरफ देखते हूए
और वही नीचे तृषा
डाइनिंग टेबल के सामने सोफे पर बैठते हुए
अपने हाथ बड़ा कर
हाथों से अंगूर को उठाते हुए
एक हाथ में अंगूर की गुच्छा पकढ़ते हुए
और दूसरी हाथ से एक-एक करके अंगूर तोड़कर मुंह में डालते हुए खा रही है
और वही उसके पीछे सिक्योरिटी सुनिल खड़े हैं
चुपचाप दोनों हाथ सामने बांधें हुए
और वही डाइनिंग टेबल के साइड दो-चार नौकरानी खड़ी है
और वही वीर
हल्की मुड़ते हुए
और सीरियों से उतरते हुए
आंगन में तृषा के पीछे खड़े हुए सिक्योरिटी की तरह देखा है
और उसे देखते ही वो आजानक ठहेर जाता है
और सिक्योरिटी के देखते हुए
वीर का चेहरा गुस्से तन जाता है
और गुस्से मे उसे देखते हुए
कुछ संकेड बाद नजरे घुमा कर
सिड़ियो की तरफ अपने कदम बढ़ाता है
आंगन की तड़प आने के लिए
धीरे धीरे से चल कर सिड़ियो से उतर रहे हैं
और वही अचानक तृषा
अपने भाई की कदमों की आहट सुनते ही
तृषा उंगलियों में रखी हुई अंगूर को
मुंह में डालते हुए
नजर घूमकर अपने भाई की तरफ देखती है
और वह आचानक से अपनी होठों के पास से
अपना हाथ हटाते हुए
ऊपर हाथ उठाकर
अपने भाई को हाय करते हुए
और साथ में अंगूर को चबाते हुए
मुस्कुराते हुए उस्सा से भरी हुई
भारी और ऊची आवाज मे कहती है
ओ
है भैई
और तभी अचानक वीर अपनी बहन की बातें सुनते ही
हल्की नजर घुमा कर उसकी तरफ देखत है
और अपना हल्की हाथ उठाते हुए
तृषा को हाय करते हुए
और उसे देखते हुए
हल्की मुस्कुराते हुए हल्की आवाज में कहता है
ओ हे तृषु
और यह कहते हुए विर
अचानक अपना हाथ निचे करता है
और अपनी बहन की तरह देखते हुए
मुस्कुराना छोड़ उदास चेहरे के साथ
अपने बहन से आगे कहता है
मोम कहां गई है
या कहते हैं वीर सीड़ियो से उतर कर अंगन से
सिधे चलते हुए
डाइनिंग टेबल की तरफ आ रहा
और तभी तृषा अपनी भाई की बात सुनते हुए
अचानक अपने हाथ नीचे करती है
और मुह मे लिए आंगुर को चबाते हुए
अपने भाई को देखते हुए
हल्की ऊची आवाज में कहती है
वो उने ने कहां उन्हें कम है
इसलिए हम दोनों अकेले लंच कर लेते हैं
और वीर डाइनिंग टेबल के करीब आते हुए
अपने सर के उठाकर
सिक्योरिटी सुनिल की तरह देखते हुए
गुस्से में हल्की आवाज में कहता है
वह तो उसे देखकर पता ही चल गया
और वही तृषा
अपने भाई की तरफ मुस्कुराते हुए देखते हुए
फिर से अंगूर के गुच्छे से अंगूर तोड़ते हुए
अपने मुंह में लेते हुए
और अपनी भाई उतरा हुआ
और गुस्से से भरी चेहरा देखकर
मुस्कुराते हुए अंगुर चवाने लगती है
और वही वीर सिक्योरिटी सुनिल से नजरे हटा कर
अचानक नजर झुकाते हुए तृषा कि तरफ देखते हुए
हल्की जोलाईन फिकी मुसकान देते हुए
तृषा से हल्की जल्दबाजी भरी लेहजे में कहता है
ऐ कोई नई बात थोड़ी ना है
और यह कहते हुए मूर कर
डाइनिंग टेबल के पास से गुजरते हुए
कुछ सेकंड में चलते हुए
दूसरी तरफ से आकर
डाइनिंग टेबल के पास खड़े होते हुए
हल्के नजर उठा कर अपनी बहन को देखते हुए
कुछ सेकेंड बाद
हल्की आवाज में कहता है
कि आज हम अकेले लंच कर रहे हैं
और वही वीर के सोफे के पास आते ही
वह दोनों चारों नौकरानी हल्के सर झुकने
और अपनी कदम दो-तीन कदम पीछे लेते हुए
साइड हो जाती है
और वही यह कहते हुए वीर
अचानक मुड़कर सीधे होकर
हल्के नजर झुका कर झुकते हुए
अपनी बहन के पास बैठ जाता है
और वही तृषा अपने भाई को देखते हुए
और अंगूर खाते हुए
अपने भाई के बातों पर बस मुस्कुराई जा रही है
और वही वीर सोफे पर भर डालते हुए
बैठकर हल्की होंठ खोलते हुए आहे भरता है
हा
और फिर नजर घुमा कर
हल्के अपनी बहन की तरफ देखा है
और उन्हें देखते हुए
हल्के सर घूमर
अपने सिक्योरिटी सुनील को देखा है
और उन्हें देखते हुए
गुस्सा और एंजायटी महसूस करते हुए
हल्के चेहरे को सीकोड़ कर
अजीब से मुंह बनाकर होठ खोलते हुए
फिर से आहें भरता है
और अजीब रिएक्ट करते हुए धीरे से कहता है
आह
मुझे गुस्सा आ रहा है
और वही तृषा अपने भाई की बातें सुनते हुए
अचानक मुस्कुराना छोड़
उन्हें देखते हुए
फिर से अपना दूसरा हाथ बढ़कर
अंगूर को गुच्छे से एक अंगूर तोड़ते हुए
अंगूर को उठाते हुए
मुंह में लते हुए
हॉकी नजर घुमा कर
सिक्योरिटी की तरफ देखती है
और हल्की लहजे में अपने भाई से कहती है
हा
मुझे भी आ ता है
यह कहते हैं अचानक से वह नजर घुमा कर
सीधे देखते हुए
अपने पीठ पीछे लेते हुए
सीधे सोफे पे अपना भर डालते हुए
अपने भाई की तरह ही बैठ जाती है
और
फिर से अपने हाथ नीचे करते हुए
और
अंगूर के गुच्छा वाले हाथो को उठाते हुए
अपने भाई की तरफ बढ़ती है
उदास और नाराजगी भरी चेहरे के साथ
हल्की आवाज में आगे कहती है
हर जगह हम पे सीसी कैमरे की तरह
हम पर नजर गराऐ होते हैं
और यह कहते हुए अचानक उतरे हुए चेहरे के साथ
हल्के नजरे घूम कर अपने भाई की तरफ देखती है
और वही अचानक से वीर नजर घुमा कर
अपनी बहन को देखते हुए
थोड़ी नज़रे नीचे करता है
और देखा है अपनी बहन के
अपनी तरफ अंगूर की गुच्छा पकड़े हुए
हाथो आगे बढ़ते हुए
और उसके देखकर
अचानक से अपने दाई पैर को मोरते हुए उठाकर
सोफे पर रखता है
और अचानक
अपना दाई हाथ उठाकर बढ़ाते हुए
तृषा के हाथो में
रखे हुई अंगूर के गुच्छे में से कुछ अंगूर
अपने हाथों से तोड़ता है
और अचानक नजर उठा कर आगे देखते हुए
हल्के हाथ पीछे कर के उठाते हुए
अंगूर मुंह में डालते हुए
और उन्हें चबाते हुए
अपने होठों के पास से हाथ हटाता है
और हल्के चेहरे सिकोड़ रिएक्ट करते हुए
अपने सिक्योरिटी सुनील को गाली देते हुए
धिरे से भिन भिनाते हुए आवाज में कहता है
कमीना कहींका
पता नहीं कब पीछा छोड़ेगा
और तभी तृषा यह सुनते हुए
अचानक अपने भाई के दीई हाथों में ही
अंगूर देने के लिए अपने हाथ और थोड़ी आगे बाराती है
और तभी अचानक वीर यह समझते हुए बिना देखे
आगे देखते हुए ही
अपनी दीइ एक दो अंगूर वाले हथेली को फैला कर
अपनी बहन के हाथों से अंगूर लेने के लिए तैयार होता है
और वही तृषा अपने भाई को हथेली में अंगूर की गुच्छा देते ही
अपना हल्का हाथ उठाकर उंगलियां लगाते हुए
उनसे एक एक अंगूर तोड़ते हुए
हाथ उठाकर अंगूर को अपने मुंह में डालते हुए
हल्के नजरे घुमाकर
सिक्योरिटी सुनील की तरह देखते हुए
हल्की आवाज में कहती है
यह बेचार भी क्या करेगा
इसका तो काम यही है
और वही विर अपने अंगूर की गुच्छा वाले हाथों को धीरे से नीचे करते हुए
अपने पैरों के पास रखता है
और दूसरा हाथ उठाते हुए
अंगूर की गुच्छा से लगाते हुए
अंगूर को तोड़कर हाथ में लेते हुए
और अपने हाथ को धीरे-धीरे उठाते हुए
चेहरे को सीकोड़ कर हल्के दांत भिजते हुए गुस्से में
हामी भरते हुए कहता है
हा यह और बेचारा
और यह कहते हुए वह अंगूर को मुंह में लेते हुए
चबाने लगता है
और वही तृषा अचानक अपने भाई कि मुझे यह सुनते हुए
पलके घूमर अपने भाई की तरफ देखती है
और हल्की आवाज में कहती है
धीरे बोलिए ना ऐ सुन ले गा
और तभी अचानक वीर अपने हाथो को नीचे करते हुए
दूसरे अंगूर को तोड़ते हुए
हाथों में अंगूर लेकर फिर से हाथ उठाकर
अंगूर को अपने मुंह में डालते हुए
सर घूम कर सेक्रेटरी सुनील की तरफ देखते हुए
अजीत से मुंह बनाकर
उन्हें घूमता है
और
वही सिक्योरिटी गार्ड सब कुछ सुनते हुए भी
उसके पीछे चुपचाप वैसे ही हाथ बंधते हुए खड़ा है
बिना रिएक्ट के
और वही वह नौकरानी भी उनकी फुस फूसाहट भारी
सारी बातें सुन रही है
पर कोई कुछ नहीं बोलनी
और तभी वीर सिक्योरिटी सुनील को घुड़ते हुए
अचानक
नजर घुमा कर
अपनी बहन की तरफ देखता है
और हल्की आवाज में कहता है
सुंने दे
क्या फर्क पड़ता है
और यह कहते हुए
दोनों भाई बहन एक दूसरे को देखते हुए
चेहरों के साथ होठों को सिकोड़ते हैं
और फिर अचानक मुड़कर सीधे देखते हुए
और अंगूर चलते हुए
दोबारा हाथ बड़ा कर
अंगूर को तोड़ते हुए
उठाते हुए मुंह में डालकर चबाने लगती है
और वहीं दूसरी तरफ असल दुनिया में डॉक्टर हेड
अपने घर के आंगन में चलते हुए
दरवाजे की तरफ जा रहे हैं
और उसके एक दो कदम पीछे-पीछे उसकी वाइफ ज्योति
और वही ज्योति के दाई हाथों में खाने की टिफिन है
और
आंगन की आखिरी छोर पर दरवाजे के पास
डॉक्टर हेड अचानक हल्के मूरता है
और अपने वाइफ की मुस्कुराते हुए तरफ देखा है
और वही ज्योति के चेहरे हल्की उदासी से भरी है
वह मासूमियत से भारी चेहरे के साथ
अपने पति की तरफ देखती है
और अपने हाथ उठाते हुए
उस टिपीन को अपने पति की तरफ बढ़ती है
और लहजे के साथ कहती है
उसे कहना खाना खा ले
और टाइम निकाल कर
मुझे फोन करो
और वही डॉक्टर हैड अपनी वाइफ की बातें सुनते हुए
और उसे देखते हुए मुस्कुराता है
और मुस्कुराते हुए
अपना हाथ उठा कर टिप्पन की तरह बनता है
अपने वाइफ के हाथों से टिफिन लेता है
और वही ज्योति अपने पति को टिफिन देते हुए
अपने हाथ नीचे करती है
और उनके तरफ देखती रहती
और वही डॉक्टर उस टिफीन को लेते हुए
टिफिन वाले हाथ को हल्के नीचे करती है
और दूसरे हाथ उठाकर
हल्के अपनी वाइफ की कंधे की तरह बड़ाता है
और मुस्कुराते हुए
हल्की ऊंची ठहराऊ भारी लहजे में कहता है
ठीक है
मैं कह दूंगा की
फुर्सत मिले तो
वह तुम्हें फोन करें
और वही ज्योति चुपचाप उदास और मासूम चेहरा लिए
अपने हस्बैंड की तरफ देख रही है
और वही डॉक्टर हेड अपनी वाइफ के कंधे को
हल्के सैलाते हुए
और उन्हें दिलासा देते हुए आगे कहता है
अब तो खुश हो जा भगवान
अगर टिप्पण तुम नहीं भी देती तो
तुम्हारा बेटा भूख नहीं रहता
बस अस्पताल की कैंटीन में जाकर खा सकता है
और यह सुनते ही अचानक से
ज्योति की आंखें गंभीर हो जाती है
वह सीरियस होकर
कड़ी आंखों से अपने पति की तरफ देखने लगती है
और तभी अचानक से डॉक्टर हेड
पलके उठा कर अपनी वाइफ की आंखों की तरफ देखा है
और उसके हाथ अचानक से
अपने आप अपनी वाइफ की कंधे को सहलाते हुए
ठहेर जाता है
और वह समझ जाता है
उसकी वाइफ को बुरा लगा
और
और वह डर के कारण घबराते हुए
अचानक से अपने बातों को काटते हुए
अपने वाइफ के कंधे पर
अपने ठहरे हुए हाथों को धीरे-धीरे उठाते हुए
अपने वाइफ के कंधे पर थोड़ी थपथपाते हुए
हल्के मुस्कुराने की कोशिश करते हुए
अपने घबराहट को दबाकर
हल्के रिएक्ट कर के
ठेहराऊ भारी लहजे में आगे अपनी बात को बदलते हुए
कहता है
ठीक है कोई बात नहीं
मैंने ही तो कहा था कि तुम खाना दे देना
आखिर तुम्हारा बेटा है
उन्हें तुम्हारे हाथों का खाना खाना चाहिए
घर के खाना तो कितने लोगों को से खुशकिस्मत से
नसीब होता है
और
तभी अचानक ज्योति अपने पति को देखते हुए
हल्के पलके बंद करती है
और अपनी आंखों को नॉर्मल करते हुए
आंखें खोलकर
बरी मासूमियत से अपनी मुंह बनाते हुए
और अपने पति को देखते हुए
अचानक से अपनी दाएं हाथ उठाकर
अपने पति के बाई बाजू पर हल्के मारते हुए
और हल्के रिएक्ट करते हुए
हल्की आवाज में कहती है
हुं
बात को बदल मत
और
तभी अचानक डॉक्टर हेड
चोट खाते ही जोरू की सिसकियां भरते हुए
उसके हाथ उसके वाइफ पर के कंधे पर रखते हुए
हल्के से अपने आप मुठिया बन जाता है
और वह घबराते हुए
हल्की अपने पांव मोरते हुए पीछे लेता है
और अचानक आपने बात के चेहरे पर से
नजर हटाते हुए झुका कर
अपनी वाइफ को मारते हुए अपने हाथों पर देखा है
और वही ज्योति बड़ी मासूमियत से मुंह बनाते हुए
अपने पति को मारते हुए
अचानक अपने हाथ को नीचे करता है
मुठिया बांध लेती है
और तभी अचानक डॉक्टर हेड
अपने नजर उठाते हुए
अपनी वाइफ की तरफ देखा है
और हल्की होठो को सिकोड़ते हुए मुस्कुराता है
और फिर अचानक पलके थोड़ी नीचे करता है
और देखता है
अपनी वाइफ की मुठिया बंधी हुई हाथों को
और देखते हुए
अपने वाइफ के कंधे पर रखी हुई
अपने हाथ के मुट्ठियों खुलता है
धीरे से हटाकर नीचे करते हुए
पलके उठा कर फिर अपने वाइफ की तरह देखा है
और उसके सीरियल सारदा चेहरे देखकर
हॉकी फिर से मुस्कुराने की कोशिश करते हुए
हल्की घबराहट में थोड़ी हल्की लहजे में कहता है
नहीं जान
मैं ऐसा कुछ भी नहीं कर रहा
फिर मरने की क्या बात है
बस वो
और वही ज्योति बिना बोले
हल्के गुस्से में मुठिया बंदते हुए
मुंह बनाते हुए अपने हस्बैंड की तरफ देख रही है
और वही फिर अचानक डॉक्टर हेड
ठहरते हुए
अपने बाइक पर से अपने नजरे झुकते हुए
अचानक से अपनी टिफिन वाले हाथ को हल्के उठाते हुए
हाथों में बांधे घड़ी की तरफ देखते हुए
समय देखा है
और
अचानक कुछ सेकेंड बाद
पलके उठा कर अपनी वाइफ की तरफ देखते हुए
और अपने हाथ को नीचे करते हुए
और अपने वाइफ को देखते हुए
उसका उतरा और गंभीर चेहरा देखकर
और सिचुएशन से बचने के लिए
अचानक से हल्की सी मुस्कुराते हुए
ठेहराऊ भरी हल्की ऊंची आवाज में कहता है
ठीक है फिर से मारना है तो मार लो
नहीं तो
मैं चलता हूं
लेट हो रहा है
और वही ज्योति बस उतरी हुई चेहरे के साथ
मुंह बनाते हुए अपने हस्बैंड को देखी जा रही है
और वही डॉक्टर हेड
अचानक अपना हाथ उठाकर
फिर से अपनी वाइफ की कंधे पर रखते हुए
थपथपा आने लगता है
और होठों को सिकोड़ते हुए
उन्हें कुछ सेकेंड तक देखता रहता है
और वही अचानक ज्योति अपने पति को देखते हुए
हल्के नजरे घूम कर अपने पति के हाथ को
अपने कंधों पर रखकर कंधे को थपथपाते हुए देखते हैं
और वही डॉक्टर हेड दो चार बार अपने आप के कंधे थपथपाते हुए और उन्हें देखते हुए
उनके कंधे पर से अपने हाथ नीचे करता है
और वही ज्योति नजर घुमा कर फिर से
अपने पति के चेहरे की तरफ पलकें झपकते हुए
देखती है मासूमियत नजरों के साथ
और वही डॉक्टर है
मुस्कुरा कर प्यार से हल्के पलके झपकाते करते हुए
अपनी वाइफ को दिलासा देते हुए
अचानक
पेलता है
और पलटते ही उसका चेहरा थोड़े घबराहट से भर जाता है
और अचानक अपने हल्की तेज कदम दरवाजे की तरफ बढ़ता है
और
वही ज्योति अपने हस्बैंड को जाते देखते हुए
और उसका चेहरा उतर जाता है
और वह उतरे हुए चेहरे के साथ मासूमियत भरी
और ठेहराउ भरी हल्के आवाज में कहती है
आप तो हमेशा यही करते हैं
जाने से पहले
गले को लगाते
यह कहते हुए उसके मासूम चेहरा
और रोते हुए मुंह बनाते हुए
और उदासी से भर जाता है
और वही
उसका चेहरा इसलिए उतरा है
क्योंकि अब उसे पूरा दिन घर में अकेले रहना होगा
रोज अपने पति और बेटे को काम पर जाते हुए देखना
और दिनभर उसके आने के इंतजार करना
उसका यही जिंदगी है और
और अकेले रहना दिन भर उवाऊ है
वह बस निराशा भरी नजरों से अपने हस्बैंड को जाते हुए देखती रहती है
और वही अपनी तेज कदम बढ़ाते हुए
डॉक्टर हेड बाहर जा रहा है
अपने घबराहट को शांत करत हुए
हल्के गहरी सांस लेकर जोर से मुंह से बाहर भुक मारते हुए
और वह जानते हैं कि उनकी वाइफ को
अकेला महसूस होती है दिन भर घर में रहते हुए
और साथ में उसे उसके बाद की नाराजगी से
बहुत ज्यादा डर लगता है
और वह जानते हैं कि उसके बेटे और वह
एक ऐसे प्रोफेशन में है
जो टाइम से कभी घर नहीं आता
और यह बात उसकी वाइफ को पसंद नहीं
अगर आप सबको यह कहानी अच्छी लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपकी प्रिय लेखक अभिनिशा🦋❤️💯