My Shayari Book - 4 Roshan baiplawat द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

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My Shayari Book - 4

हर कोई क्यों बोलता है उसे भूलने को,मेरा दिल नहीं मानता है उसे भूलने को,कुछ रिश्ते अधूरे होकर भी पूरे लगते हैं,शायद इसलिए वक्त भी हार जाता है उसे मिटाने को.!मेरा मयार नहीं मिलता मैं आवारा नहीं फिरता मुझे सोच कर खोना   मैं दोबारा नहीं मिलता...!पास होकर भी बात ना हो, ये दर्द हमसे पूछो...!हर रोज़ सामने होकर भी ख़ामोश रहना, ये दर्द हमसे पूछो...!जिसे दिल से चाहा, उसी से नज़रें चुरानी पड़ें, ये दर्द हमसे पूछो...!वो दिख भी जाए तो आँखों में आँसू भर आते हैं,और छुपकर ख़ुद को संभालना पड़े, ये दर्द हमसे पूछो...!रातों को रोते-रोते कब नींद आ जाती है, पता ही नहीं चलता,कमरे की तन्हाई में ख़ुद को चुप कराना पड़े, ये दर्द हमसे पूछो...!बस एक बार वो पूछ ले, “तू इतना उदास क्यों है?”मगर उसकी ख़ामोशी भी मेरी किस्मत बन गई... ये दर्द हमसे पूछो।एक इंसान सब कुछ सह लेता है,लेकिन अपनी पसंदीदा लड़की चली जाए तो रो ही देता है।जिसे कभी अपने माँ-बाप के लिए रोना नहीं आया,वही एक लड़की के लिए रात-रात भर रो देता है।सोचने वाली बात ये नहीं कि वो रोया,सोचने वाली बात ये है किजिसने अपनों की क़द्र न की,वो किसी गैर के जाने पर टूटकर रो देता है।"**कोई शख्स किताबो जैसा थाएक शख्स किताबो जैसा थावो प्रेम कहानी जैसा थावोहस्ती तो मैं हंसता थावो रोती तो में रोता था.वो कहती वो करता जाऊंइशारो पर उसके नाचता जाऊवो जो कहती मैं करता थाइस हद तक उस पर मरता थाफिर वही कहानी लोट आती है जिसका डर मुझे सताता थाएक कोने में कोई रोता हैनींद के लिए कोई चीखे तड़पेकोई रात में चैन से सोता हैअब वो बोर गई वो किताब गईमेरी दुनिया में अब वो शख्स नहींकोई शख्स किताबो जैसा था..!तू देखेगी एक दिन मेरी मौत का तमाशा...!रोयेगी, पुकारेगी बोले गी मुझसे गलती हो गई, अब करूंगी तुझसे बात लेकिन उस दिन मैं नहीं रहूंगा.कोई मुझे ले जा रहा होगा, तेरी आंखों से आंसू नहीं रुकेंगे लेकिन फिर भी में यही दुआ करुगा..तुम रोना मत, मुझे दुःख होता है..अब मुझे अकेले रहने में जो सुकून मिलता है,वो किसी महफ़िल, किसी भीड़ में नहीं मिलता है।लोग चेहरे तो बदल लेते हैं मौसम की तरह,दिल को सच्चा कोई हर मोड़ पर नहीं मिलता है।मैंने चाहा था जिसे जान से बढ़कर कभी,अब वो ख़्वाबों में भी पहले-सा नहीं मिलता है।अपने दुख-दर्द छुपाकर जो मुस्कुराते हैं,उनके हिस्से का सहारा भी नहीं मिलता है।वक़्त ने इतना सिखाया है मुझे रिश्तों में,हर किसी को दिल का रास्ता नहीं मिलता है।अब मुझे अकेले रहने में जो सुकून मिलता है,वो किसी महफ़िल, किसी भीड़ में नहीं मिलता है।🖤मैंने प्यार में खुद को बहुत बदल दिया था,हर बार उसकी खुशी के लिए खुद को पीछे कर दिया था।उसके एक मैसेज का इंतज़ार घंटों करता था,और अपनी नाराज़गी भी खुद ही खत्म करता था।मुझे लगता था यही सच्चा प्यार होता है,पर धीरे-धीरे समझ आया कि,जहां खुद की इज़्ज़त खो जाए,वो रिश्ता प्यार नहीं होता है।जिसे मेरी कदर नहीं थी,मैं उसी को अपना साबित करने में लगा रहा।आज समझ आया कि किसी को चाहना गलत नहीं,लेकिन किसी के लिए खुद को खो देना गलत है।अब भी प्यार करूंगा,लेकिन अपनी self-respect की कीमत पर कभी नहीं... जब तक मैं सबके काम आता रहा,तब तक सबको मैं अपना लगता रहा।आज जब मुझे किसी अपने की जरूरत है,तो हर कोई मुझसे दूर खड़ा है।अजीब दुनिया है साहब...लोग साथ तब देते हैं,जब उन्हें आपकी जरूरत होती है।वरना आपकी अच्छाइयां भी उन्हें याद नहीं रहतीं...पुराने दोस्त गाव के बैठा हूं रंजो गम छुपा के बैठा हूं वो जश्न मनाता फिर रहा है जिसका मैं मातम मना कर बैठा हूं अब वो खुद को सजाता है किसी और के लिए जिसके में ख्वाब सजा के बैठा हूं मैं दिल से तेरा बंटवारा नहीं कर सकता मैं दिल में तेरे घर बना कर बैठा हूं..!हर कोई क्यों बोलता है उसे भूलने को,मेरा दिल नहीं मानता है उसे भूलने को।वो मेरी हर खुशी की वजह था कभी,कैसे कह दूं अपने दिल को उसे छोड़ने को।लोग कहते हैं वक्त के साथ सब बदल जाता है,पर मेरा दिल आज भी तैयार नहीं है उसे खोने को।जिसे चाहा है मैंने अपनी जान से भी ज्यादा,कैसे मजबूर करूं खुद को उसे भूलने को।हर कोई क्यों बोलता है उसे भूलने को,मेरा दिल नहीं मानता है उसे भूलने को।याद रखना... एक दिन ऐसा आएगा जब तुम्हें मेरी कमी महसूस होगी,मेरी खामोशी भी तुम्हें बहुत कुछ कहेगी।जिस इंसान ने तुम्हारी हर बात को अपनी खुशी समझा,वही एक दिन तुम्हारी यादों में रह जाएगा।तुम्हें याद आएगा वो जो तुम्हारी नाराज़गी भी हंसकर सह लेता था,जो खुद टूट जाता था लेकिन तुम्हें कभी उदास नहीं देख सकता था।फिर तुम्हें समझ आएगा कि हर कोई दिल से प्यार नहीं करता,कुछ लोग सिर्फ वक्त के लिए साथ होते हैं।उस दिन तुम मुझे ढूंढोगे,पर मैं वहां नहीं मिलूंगा...क्योंकि जो इंसान सच्चे दिल से प्यार करता है,वो एक बार दूर चला जाए तो वापस नहीं आता। बड़ा इश्क़ इश्क़ करते हो,कभी रातों में जागकर रोए हो?जिसके लिए खुद को भुला बैठे,कभी उसके लिए खुद से खोए हो?मोहब्बत की बातें तो सब करते हैं,कभी दर्द को चुपचाप ढोए हो?जिसका नाम दुआओं में रखा,कभी उसके बिना भी सोए हो?इश्क़ सिर्फ़ हंसने का नाम नहीं,कभी टूटकर भी मुस्कुराए हो?दिल की वीरानियों में तेरी याद उतर आई,सूखी शाखों पे जैसे कोई बरसात उतर आई।हमने चाहा था जिसे अपनी दुआओं की तरह,उसकी आँखों में मगर कोई और बात उतर आई।रात भर चाँद से करते रहे तेरी चर्चा,सुबह होते ही निगाहों में तेरी ज़ात उतर आई।हमने ख़ामोशियों को भी मोहब्बत समझा,लब खुले तो फ़क़त रिश्तों की सौगात उतर आई।अब तो तन्हाई भी हमसे गले मिलती है,जब से इस दिल में तेरी पहली मुलाक़ात उतर आई।जिसे चाहा, वो कभी मिला नहीं,जो मिला, उसे दिल ने चाहा नहीं।उम्र भर जिसको पाने की दुआ की,वो मेरी किस्मत में लिखा नहीं।लोग कहते हैं, जो मिला उसे अपना लो,पर जो अपना लगे, वही मिला नहीं।गुरुजी, अब बताइए क्या करूँ उसका,जिसे मैंने कभी माँगा ही नहीं।दिल आज भी उसी का इंतज़ार करता है,जिसके बिना कोई और भाया नहीं।न जाने किस की बद्दुआ लगी हुई है लेकिन फिर भी जिंदगी गुजार रहा हूं ओर जिन लोगों ने भी रास्ते पर छोड़ा है ना मुझे उनसे चाहकर भी जुडूंगा नहीं..!अब आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों आसमान में उड़ूगा जरूर..!अब ये रातें कोई खास पसंद नहीं मुझे,ये मजबूर करती हैं मुझे उसे याद करने को, रोने को...और फिर वही होता है—रोते-रोते ही सो जाता हूँ मैं...!हर ख़्वाब में वही चेहरा नज़र आता है,जिसे भूलने की हर रोज़ कोशिश करता हूँ मैं।दिन तो किसी तरह गुज़र ही जाता है,मगर हर रात खुद से ही हार जाता हूँ मैं।किस्मत ने भी ऐसा इम्तिहान लिया है,जिसे चाहा, उसी को खो बैठा हूँ मैं।अब ये रातें कोई खास पसंद नहीं मुझे,क्योंकि हर रात उसकी यादों मेंरोते-रोते ही सो जाता हूँ मैं...!यार, मैं अब अकेला रहता हूँ...शायद इसलिए कि लोगों को मेरी नहीं, सिर्फ़ मेरे काम की ज़रूरत होती है।जब उनका कोई काम अटकता है,तो बड़े प्यार से बात करते हैं, अपना बना लेते हैं।और जैसे ही काम पूरा हो जाता है,फिर उन्हें मेरा नाम तक याद नहीं रहता।जब मुझे किसी की ज़रूरत पड़ती है,तो हर कोई किसी न किसी बहाने से दूर हो जाता है।कभी किसी ने आकर यह नहीं पूछा—"क्या हुआ यार, इतना चुप क्यों है?अकेला क्यों बैठा है? सब ठीक तो है?"सच कहूँ,अब शिकायत भी नहीं करता किसी से...क्योंकि समझ आ गया है किइस दुनिया में ज़्यादातर लोग इंसान को नहीं,उसके काम को याद रखते हैं।इसलिए अब मैं भी ख़ामोशी से जीना सीख गया हूँ...अकेला रहता हूँ, मगर किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता।Dear papa मैंने बिताई है उम्र घर के झगड़ों में,मुझे न बताओ छल, कपट, मानसिक पीड़ा क्या होती है।बचपन से ही अपनों के बदलते चेहरे देखे हैं,मुझे न बताओ दुनिया की साज़िशें क्या होती हैं।हर रोज़ मुस्कुराकर अपने आँसू छिपाए हैं,मुझे न बताओ तन्हाई की रातें क्या होती हैं।जिसे अपना समझा, उसी ने दिल तोड़ा है,मुझे न बताओ वफ़ा और बेवफ़ाई क्या होती है।रिश्तों का बोझ भी उम्र भर अपने कंधों पर ढोया है,मुझे न बताओ ज़िम्मेदारियाँ क्या होती हैं।हर मोड़ पर ख़ामोशी को ही अपना हमसफ़र बनाया है,मुझे न बताओ सब्र और इंतज़ार क्या होते हैं।अब किसी से कोई शिकायत भी नहीं रही,क्योंकि समझ गया हूँ कि उम्मीदें ही सबसे बड़ी सज़ा होती हैं।मैंने बिताई है उम्र घर के झगड़ों में,मुझे न बताओ छल, कपट, मानसिक पीड़ा क्या होती है।जिस दिन समझोगे,उस दिन मुझे ढूँढ़ते हुए आओगे।जब हर अपने चेहरे पर नक़ाब नज़र आएगा,तब मेरे सच्चे लफ़्ज़ याद कर जाओगे।जिसे आज यूँ ही नज़रअंदाज़ कर रहे हो,कल उसी एहसास को तरस जाओगे।वक़्त जब अपने रंग बदलकर गुज़र जाएगा,तब हर सवाल का जवाब खुद ही पाओगे।मैं तो ख़ामोशी में भी दुआएँ देता रहूँगा,तुम देर से सही, मगर लौटकर आओगे।जिस दिन समझोगे,उस दिन मुझे ढूँढ़ते हुए आओगे।वक़्त ने जो सबक़ दिया है, वो किताबों में कहाँ मिलता है,जिसे अपना समझा था, वही सबसे पहले बदलता है।तुम्हारे बादसमझ आया किकुछ लोगज़िंदगी से चले तो जाते हैं,मगर दिल सेकभी नहीं जाते।वक़्त बीत जाता है,मौसम बदल जाते हैं,लोग भी बदल जाते हैं,पर कुछ यादेंहर रोज़नई होकर लौट आती हैं।अब न कोई शिकायत है,न किसी से गिला है,बस एक ख़ामोश दर्द है,जो हर मुस्कुराहट के पीछेछिपा हुआ है।क्योंकिसबसे मुश्किल बातकिसी को भूलना नहीं,बल्कि उसके बिनाजीना सीखना होता है।और सच यही है—कुछ मोहब्बतेंमुकम्मल नहीं होतीं,फिर भीउम्र भर साथ चलती हैं।यार, कोई तो बचा लो मुझे,ये घुटन मुझे मार डालेगी।जो हँसी होंठों पे रखी है मैंने,एक दिन वही हार डालेगी।हर तरफ़ ख़ामोशियों का पहरा है,रूह मेरी पुकार डालेगी।दिल में दबे हुए ज़ख़्मों की चुभन,हर खुशी बेकार डालेगी।जिसे अपना समझ बैठे थे हम,वो नज़र ही दरकिनार डालेगी।उम्मीद की आख़िरी लौ भी अगर बुझी,ये तन्हाई मुझे मार डालेगी।फिर भी रब से यही दुआ है मेरी,कोई सुबह तो बहार लाएगी।आज चाहे रात बहुत गहरी हो,कल नई किरण सँवार लाएगी।सच कहूँ तो...अब थक गया हूँ हर किसी को समझाते-समझाते।कुछ लोग मेरी ख़ामोशी को घमंड समझ बैठे,और कुछ मेरे अपने होकर भी मुझे समझ न सके।अब शिकायत भी नहीं करता किसी से,क्योंकि हर जवाब के पीछे एक नया सवाल मिल जाता है।मुस्कुरा देता हूँ हर दर्द पर,ताकि कोई मेरी टूटी हुई आवाज़ न सुन सके।रातें आज भी लंबी होती हैं,नींद आज भी मुझसे रूठी रहती है।आँखें बंद करता हूँ सुकून के लिए,मगर यादें फिर से दस्तक दे जाती हैं।अब बस इतना चाहता हूँ...कोई ऐसा मिले जो मेरी ख़ामोशी भी पढ़ सके,क्योंकि हर इंसान की सबसे बड़ी लड़ाईउसके अपने ही मन के साथ होती है।तेरी खुशी की खातिरतेरी खुशी की खातिर, तुझसे बात करना छोड़ दिया,अपने ही दिल को हमने हर रोज़ तोड़ दिया।कहीं ये मत समझ लेना कि चाहत ही नहीं रही,तेरी मुस्कान की खातिर खुद को ही मोड़ दिया।तू खुश रहे, बस यही दुआ हर पल की है,अपने हर अरमान को चुपचाप छोड़ दिया।इश्क़ आज भी वही है, ज़रा भी कम नहीं,बस तेरी ख़ातिर हमने उसे खामोश कर दिया।मुझे गाँव पसंद है... पर ऐसा,जहाँ लोग चेहरे नहीं,दिल पहचानते हों।जहाँ कोई ये न पूछे—"कब शादी करोगे?""इतने उदास क्यों रहते हो?""लोग क्या कहेंगे?"बस कोई इतना पूछ ले—"खाना खाया?""सब ठीक है ना?"अगर जवाब में मुस्कुराहट झूठी लगे,तो बिना कुछ कहेकंधे पर हाथ रख दे।मुझे गाँव पसंद है... पर ऐसा,जहाँ हर घर अपना लगे,हर रिश्ता सच्चा लगे,और हर इंसानसिर्फ़ इंसानियत से मिले। 




ग़ज़ल

मैं कहीं भी जाता था घूमने,
सबका साथ छोड़कर बस तेरे साथ रहता था।

तू बोलती थी, "वो लोग उतर गए हैं",
पर मुझे उनकी नहीं, बस तेरी चिंता रहती थी।

मैंने तुझसे कहा भी था,
"मुझे उनका नहीं, तुम्हारा डर लगता है,
इसलिए मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहता हूँ।"

तूने हँसकर पूछा था,
"मेरा क्यों डर लगता है?"
काश... उस दिन मेरे पास कोई जवाब होता।

शायद इसलिए नहीं बता पाया,
क्योंकि वो डर, डर नहीं...
तुझे खो देने का एहसास था।

मैं तो हमेशा बस तेरे साथ रहना चाहता था,
पर तू कभी मेरे साथ रहना ही नहीं चाहती थी।

शायद... तेरी पसंद कोई और था,
और मैं बस तेरी फिक्र करने वाला एक इंसान।

आज भी याद आता है,
कि मैं सबको छोड़ सकता था...
पर तुझे अकेला छोड़ने की हिम्मत कभी नहीं हुई।




लड़के किसी के सामने रोते नहीं हैं...
रोते उसी के सामने हैं, जिन्हें वो जान से भी बढ़कर चाहते हैं।
उन्हें रोता हुआ देखना हर किसी के नसीब में नहीं होता...
या तो उनकी माँ ने देखा होता है,
या फिर उनकी मनपसंद स्त्री ने।

क्योंकि लड़के अपने आँसू हर किसी के सामने नहीं बहाते,
वो अपने सारे दर्द को ख़ामोशी में छुपा लेते हैं।
लेकिन जब किसी के सामने उनकी आँखें भर आएँ,
तो समझ लेना कि उस इंसान पर उन्हें खुद से भी ज़्यादा भरोसा है।





तेरे बारे में मैं हर शायरी रोते हुए लिखता हूं,
तू हटा देती होगी बिना पढ़े...
लेकिन मैं अपने जज्बात लिखता हूं..!

तुझे नहीं है कदर मेरी..
क्योंकि तू किसी और को चाहने लगी है।

मैं हर रात तेरी यादों में बिखर जाता हूं,
फिर उन्हीं टूटे हुए एहसासों को शब्दों में लिखता हूं।

तू शायद कभी समझ ही नहीं पाएगी,
कि हर शायरी में सिर्फ तेरा ही नाम छुपा होता है।

तू तो बेफिक्र होकर मुस्कुरा रही होगी,
और मैं आज भी तेरी यादों में तन्हा बैठा हूं।

एक दिन जब मेरी शायरियां पढ़ेगी,
तब एहसास होगा कि कोई था...
जो हर दर्द में भी सिर्फ तुझे ही लिखता था..!






क्या मजबूरी है जो मैं चाहकर भी बता नहीं सकता...
दिल ये बेख़बर, तू तड़पता रह,
अब मैं उसे वापस ला नहीं सकता।

हज़ार दफ़ा चाहा उसे फिर से अपना बना लूँ,
मगर तक़दीर का लिखा मिटा नहीं सकता।

वो मेरी दुआओँ में आज भी शामिल है,
पर अब उसे अपना कह नहीं सकता।

मोहब्बत आज भी उतनी ही है उससे,
बस अब अपने दिल का हाल सुना नहीं सकता।

कुछ रिश्ते अधूरे ही अच्छे लगते हैं,
हर कहानी को मुकम्मल बना नहीं सकता।







हर किसी के दर्द को अपना समझ बैठा था मैं,
इसलिए हर मोड़ पर तन्हा ही रह गया मैं।
जिनके आँसू पोंछता था रात भर चुपचाप मैं,
आज अपने ज़ख्म लेकर किसके घर जाता मैं।
मतलबों की भीड़ में रिश्ते सभी खो से गए,
ढूँढता फिरता रहा, अपना कहाँ पाता मैं।
वक्त ने इतना बदल डाला मेरे हालात को,
हँस रहा हूँ सामने, अंदर से मर जाता मैं।







अपने 

क्यों हमेशा पुरुष अपनों से पीछे रह जाता है...

अपने पापा से गले लगाने में,
अपनी माँ की गोद में सिर रखकर सोने में,
और अपनी मनपसंद स्त्री को पाने में।

क्योंकि उसे बचपन से ही मज़बूत बनना सिखाया जाता है,
अपनी भावनाओं को छुपाना सिखाया जाता है।

वह सबके लिए जीता है,
लेकिन अपने हिस्से की मोहब्बत अक्सर अधूरी रह जाती है।

उसके आँसू उसकी आँखों तक आकर भी लौट जाते हैं,
और उसकी ख़ामोशी ही उसकी सबसे बड़ी ग़ज़ल बन जाती है।









"कभी-कभी इंसान इसलिए भी चुप हो जाता है,
क्योंकि जिसे अपनी दुनिया समझा था,
उसे उसकी खामोशी में भी अपनी जगह नहीं मिलती।
फिर वह मुस्कुराना तो सीख जाता है,
लेकिन दिल से खुश होना भूल जाता है..." 💔








20 जुलाई – एक काला दिन"

आज की सरकार और उनकी गुंडागर्दी अंग्रेजों से भी कहीं गुना आगे हैं
हाथों में पत्थर नहीं, बस अपनी बात थी,
लेकिन जवाब में लाठियाँ थीं, और आँखों में जलती रात थी।

जो आवाज़ें दबा दी जाती हैं,
वो एक दिन इतिहास बन जाती हैं।
जो दर्द आज सड़कों पर बिखरा है,
वो आने वाली पीढ़ियाँ याद रखती हैं।

हम नफ़रत नहीं, इंसाफ़ माँगने निकले थे,
हम लड़ाई नहीं, अपनी बात कहने निकले थे।
लेकिन जो देखा, जो सहा,
उसे वक़्त कभी नहीं भूलेगा।

20 जुलाई इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा,
हमारे लिए यह किसी ब्लैक डे से कम नहीं रहेगा..!







मैं नहीं जानता कि प्रेम क्या होता है,
क्यों होता है, और क्यों लिखा जाता है।

मैं बस इतना जानता हूँ कि प्रेम एक ऐसी बीमारी है,
जो दवा से नहीं, यादों से बढ़ती है।

यह इंसान को मौसम की तरह बदल देता है,
हँसते चेहरे को खामोश कर देता है।

धीरे-धीरे भीतर तक तोड़ देता है,
और फिर भी लोग इसे सबसे खूबसूरत एहसास कहते हैं।








अगर कोई जा रहा है ना तो उसे जाने देना
प्यार का मतलब जिद नहीं होता
प्यार का मतलब तो होता है उसे जाने देना
उसे आजाद छोड़ देना
अगर उसकी खुशी किसी और के साथ है ना
तो उसे खुश रहने देना..!
और उसकी खुशी में तुम भी खुश हो जाना
अगर किसी मोड़ पर किसी के साथ देखा उसे तो दुखी मत होना उसके चेहरे को देख लेना उसकी खुशी को देख लेना..!







अब यह उम्र है जो बितानी है उसके बगैर,
और यह एक लम्हा है जो जिया नहीं जा रहा।

वो चला गया तो साँसें तो चल रही हैं मगर,
दिल से उसका निशाँ मिटाया नहीं जा रहा।

दिन गुज़रते हैं लोगों की भीड़ में हँसते हुए,
रात का एक भी पहर काटा नहीं जा रहा।

हर दुआ में उसी का नाम निकल आता है,
लबों से उसका ज़िक्र छुपाया नहीं जा रहा।

कहते हैं वक़्त हर ज़ख्म भर देता है मगर,
ये दर्द है कि अब तक भुलाया नहीं जा रहा।

अब यह उम्र है जो बितानी है उसके बगैर,
और यह एक लम्हा है जो जिया नहीं जा रहा।








मैंने सोचा था...

मैंने सोचा था कि अगर मैं तुमसे दूर चला जाऊँगा,
तुमसे बात नहीं करूँगा,
अपने कामों में खुद को इतना व्यस्त कर लूँगा,
दोस्तों के बीच बैठकर हँस लूँगा,
तो शायद तुम्हें भूल जाऊँगा...

लेकिन ये मेरा सिर्फ़ वहम था।

क्योंकि जितना खुद को तुमसे दूर करने की कोशिश की,
उतना ही तुम मेरी यादों में और करीब आती गई।
अब समझ आया कि कुछ लोग सिर्फ़ ज़िंदगी में नहीं,
साँसों में बस जाते हैं...
और साँसों को भुलाया नहीं जा सकता।









वो मेरी ज़िंदगी में आई,
और मेरी सारी आदतें बदल गईं...!

जो कभी लड़कियों से दूर रहा करता था,
एक लड़की ने मुझे बदल दिया...!

फिर एक दिन वो भी बदल गई,
और बदलकर चली भी गई...!

अब आदतें तो वही हैं,
बस साथ देने वाला कोई नहीं।
जिसने जीना सिखाया था,
वही तन्हा जीना सिखाकर चली गई।

लेकिन जीने का वह मजा नहीं है यार..
जो उसके साथ आता था...!





ग़ज़ल

मेरी एक बहुत बुरी आदत है, उसे याद करता हूँ,
रोता हूँ हर रात मगर, फिर भी उसे याद करता हूँ।

दिल को लाख समझाया, भूल जा अब उसको,
हर कोशिश के बाद भी, उसी से फ़रियाद करता हूँ।

वो शायद मेरी ख़बर भी नहीं रखती अब,
मैं फिर भी हर दुआ में उसी को आबाद करता हूँ।

वक़्त कहता है आगे बढ़, नई राह चुन ले,
मैं बीते हुए लम्हों को ही फिर याद करता हूँ।

कभी तो ये आदत भी एक दिन बदल जाएगी,
बस इसी उम्मीद पर ख़ुद को आज़ाद करता हूँ।






हमें खोने से कोई डरता क्यों नहीं.. यार हमारा भी मन करता है,.. कोई हो जो हमारे भी साथ रहे,.. हमसे बाते करे,.

पता नहीं क्यों यार हम किसी को पसंद नहीं आते जबकि मैंने तो सबकी मदद ही की है..!

जो साथ थे वो भी छोड़ कर चले गये..
लोग बोलते हैं कि कर्म लौटकर आता है
नहीं पता मुझे यार...??
मुझे इतना पता है कि मैं लाइफ में बहुत रोया हूं उस इंसान के लिए..!
जो शायद मुझे अब देखना भी नहीं चाहता..?






ठीक ही कहती है माँ...

इतना गुस्सा मत किया कर,
मेरे अलावा कोई नहीं मिलेगा,
जो तेरे हर गुस्से के पीछे छिपे प्यार को भी समझे...
और तेरे गुस्से को भी हँसकर झेल ले। 







एक दिन तो आएगा ऐसा ख़याल तुम्हें भी..
चाहता तो बहुत था मुझे लेकिन मैंने ही कदर नहीं कि उसकी।

वक़्त की धूल जब हर चेहरा साफ़ कर जाएगी,
मेरी मोहब्बत की सच्चाई नज़र आएगी।

जो आज बेपरवाह होकर गुज़र गए हो,
कल मेरी कमी हर मोड़ पर सताएगी।

दिल की हर दुआ में तुम्हारा ही नाम था,
ये बात भी एक दिन समझ में आएगी।

एक दिन तो आएगा ऐसा ख़याल तुम्हें भी..
चाहता तो बहुत था मुझे लेकिन मैंने ही कदर नहीं कि उसकी।





अभी न जाने कितने हादसों से अनजान हूँ मैं,
वक़्त के थपेड़ों से आज भी परेशान हूँ मैं।
हर धड़कन यही कहती है ख़ामोशी की ज़ुबान से,
लगता है कुछ दिनों का ही मेहमान हूँ मैं।


दो पल की खुशी थी फिर गमों का सागर हो गया..
वो लड़की क्या बिछड़ी हमसे, मैं बेहाल हो गया..!

उसे चाहा और इतना चाहा कि शब्दों में कभी बयां न हो सका..
अब ऐसा मंजर आया कि वो खुश है तो मैं दुखी बहुत हो गया..!

वक़्त ने सिखा दिया कि हर मोहब्बत मुकम्मल नहीं होती,
मुस्कुराना तो सीख लिया, मगर दिल आज भी उसी का हो गया..!





"वो मिला भी तो ऐसे, जैसे कभी था ही नहीं,
और बिछड़ा भी ऐसे, जैसे सब कुछ ले गया हो।
अब मुस्कुराते तो हैं हम,
मगर दिल पहले जैसा रहा ही नहीं।" 🖤





उसकी याद लौटकर क्यों आती है

मतला

उसकी याद लौटकर क्यों आती है,
हर ख़ामोशी मुझको क्यों रुलाती है।

वो तो अपनी राह बदलकर चल निकला,
फिर उसकी आहट दिल तक क्यों आती है।

रात की तन्हाई जब गहरी होती है,
उसकी हँसी आँखों में उतर जाती है।

मैंने चाहा दिल को उससे दूर रखूँ,
हर कोशिश फिर उसी तक ले जाती है।

वक़्त ने कितने मरहम रखे ज़ख़्मों पर,
एक याद मगर सब दर्द जगा जाती है।

शायद इश्क़ का यही दस्तूर रहा है,
जिसे भुलाओ, वही याद आ जाती है।

मक़्ता

अब तो बस ख़ुद से यही पूछूँ हर पल,
उसकी याद लौटकर क्यों आती है।




शब्द कम हों, लेकिन जज़्बात पूरे होते हैं,
कुछ रिश्ते ख़ामोश रहकर भी मशहूर होते हैं।
हर बात ज़ुबाँ से कहना ज़रूरी तो नहीं,
कई एहसास आँखों से ही कबूल होते हैं। 🖤




सबने कहा, "वक़्त बदलेगा",
मगर वक़्त ने ही सब बदल दिया।

लोग एक-एक करके साथ छोड़ गए,
जिसे चाहा, वो भी किसी और का हो गया।

किताबें धूल में दबती चली गईं,
पढ़ाई अधूरी रह गई।

नौकरी हर बार बस एक सपना बनकर रह गई,
मेहनत का कोई ठिकाना न मिला।

अब भीड़ में खड़ा हूँ,
पर अपना कहने वाला कोई नहीं।

ज़िंदगी ने इतना तो सिखा दिया—
इंसान जब टूटता है,
तो सबसे पहले लोग, फिर सपने,
और आखिर में उसकी मुस्कान साथ छोड़ देती है।






किसी ने पूछा था, झूठ मत बोलना...
जिसे चाहा, वो मिला क्या..?

वो नहीं मिला यार,
और ना ही उसके आने की कोई उम्मीद बची है।

अब उसकी यादों से ही रिश्ता निभा रहे हैं,
जिसे अपना समझा था,
उसी को दूर से मुस्कुरा कर देखना सीख गए हैं।

शिकायत अब किससे करें,
किस्मत से या उससे...
जिसने कभी अपना कहा ही नहीं,
और हमने उसे पूरी दुनिया मान लिया।

अब बस दुआ यही है,
जहाँ भी रहे, खुश रहे...
क्योंकि कुछ मोहब्बतें
मिलने के लिए नहीं,
सिर्फ़ उम्रभर याद रहने के लिए होती हैं।
🖤






मुझे तुमसे प्यार तुम्हारी खूबसूरती से नहीं हुआ,
मुझे प्यार हुआ तुम्हारे उस दिल से,
जो हर किसी की खामोशी भी समझ लेता था।
तुम्हारी उन छोटी-छोटी बातों से हुआ,
जिन्हें शायद तुमने कभी खास नहीं समझा,
मगर मेरे लिए वही बातें
पूरे दिन की खुशी बन जाती थीं।
मैंने तुम्हारा हाथ कुछ पल के लिए थामा था,
लेकिन उन पलों में ऐसा सुकून मिला,
जैसे बरसों से भटकते हुए दिल को
आखिर अपना घर मिल गया हो।
फिर एक दिन समझ आया—
हर हाथ उम्रभर साथ रहने के लिए नहीं मिलता,
कुछ हाथ बस इसलिए मिलते हैं
ताकि हमें सिखा सकें कि अपनापन क्या होता है।







ये सच है कि एक दिन वो लौटकर जरूर आएगा 
लेकिन तब तक सब खत्म हो चुका होगा 
अब बताओ सब कुछ छीनकर क्या लेने आये हो..
जो जला दिया तुमने खुद, उसे पाने आए हो 
वो शख्स मर चुका है जो तुम पर फिदा था,
अब यहां राख बची है तुम क्या जलाने आए हो.!


क्या शायरी लिखते हो..
शायरी मोहब्बत का खून मांगती है दोस्त 
यहां मनपसंद इंसान गंवाना पड़ता है


ग़ज़ल

रेत में रहकर भी दरिया को तरसती रही,
ज़िंदगी अपनी ही चाहत में तरसती रही।

जिसको अपना कहा, वही दूर निकलता गया,
दिल की हर बात मगर दिल में ही बसती रही।

रिश्तों की भीड़ में तन्हा खड़ी थी ज़िंदगी,
हर खुशी सामने थी, फिर भी उदास रहती रही।

अपने हिस्से की हवा माँगना भी गुनाह हुआ,
एक मछली थी जो साहिल से उलझती रही।

लोग कहते रहे—“सब ठीक है, वक्त बदल जाएगा,”
वो मगर रोज़ नई चोट से संभलती रही।

आख़िर उसने भी ये जाना कि सुकून क्या है,
जब वो दुनिया से नहीं, खुद से ही मिलती रही।



को कभी अपनी तकलीफ़ बताना मत,
वो तुम्हारी आँखों से भी दर्द पढ़ लेती है।
खुद भूखी रहकर भी पूछती है—
“बेटा, खाना खा लिया?”
तुम्हारे चेहरे की एक मुस्कान के लिए,
वो अपनी सौ खुशियाँ कुर्बान कर देती है।
तुम चाहे कितने भी बड़े हो जाओ,
माँ की नज़र में हमेशा वही बच्चे रहते हो,
जिन्हें वो गिरने से पहले संभाल लेना चाहती है।
और जब उसकी उम्र ढलने लगती है,
तब भी उसे अपनी नहीं,
अपने बच्चों की चिंता सताती है…
सच कहते हैं—
माँ वो रिश्ता है,
जो खुद टूटकर भी
अपने बच्चों को बिखरने नहीं देता। 






मुझे रात को नींद नहीं आती यार,
उसके पास होकर भी उससे बात नहीं होती।

कैसा लगता होगा ना यार,
हर रोज़ मेरे सामने से गुजरती है,
लेकिन उससे बात नहीं होती।

कभी-कभी दिल इतना बेचैन हो जाता है,
कि लगता है बस सब कुछ छोड़ दूँ…
क्योंकि उसके पास होकर भी,
उससे दूर रहने की सज़ा कम नहीं होती।

वो हर रोज़ सामने होती है,
मगर मुलाकात नहीं होती,
रातें गुजर जाती हैं उसकी यादों में,
आँखों में नींद होती है…
मगर नींद की बात नहीं होती। 




मुझे उससे कहना था कि यार तू अब लौटना मत 
तू याद तो बहुत आती है मुझे लेकिन तू लौटना मत 
हां मैं तुझे थोड़ा काम सोचता हूं कभी-कभी रात को तेरा ख्याल आता है तो कभी दिन में आ जाता है..
हो मेरी सबसे अच्छी और खुशी के पल थे जो तुम्हारे साथ गुजरे थे लेकिन अब तू लौटना मत 
तुम्हें पाने का ख्याल बहुत आता है लेकिन अब तुम्हें पाने की इच्छा नहीं रही 
अब मन यह सोचकर चुप हो जाता है कि जो अपना था ही नहीं वो अपना कैसा अगर अपना होता तो जाता ही नहीं..
और अगर तुमने देखा हो,अब तू जब भी दिखती है ना मुझे,.. में अपनी नजर झुका लेता हूं 








अधूरी कहानी

कुछ रिश्ते पास होकर भी, उम्र भर दूर रहते हैं,
कुछ लोग बिछड़कर भी, दिल के बहुत करीब रहते हैं।

मैंने तो चाहा था उसे, अपनी हर खुशी की तरह,
मगर वो मेरी किस्मत में कहाँ, मेरी कमी की तरह।

अब रातों से मेरी अक्सर, बातें हुआ करती हैं,
तेरी यादें चुपके-चुपके, आँखों में उतरा करती हैं।

जिसे अपना समझकर मैंने, खुद से भी ज्यादा चाहा,
उसी ने जाते-जाते, मुझे खुद से ही दूर कर डाला।

अब लौट भी आए तो शायद, मैं पहले जैसा न रहूँ,
दिल में दर्द तो होगा, मगर तेरा इंतज़ार न करूँ।

कुछ सपने थे जो तेरे साथ, सजाए थे मैंने कभी,
अब वही सपने मेरी आँखों में, खामोश पड़े हैं सभी।

कहानी खत्म हुई तो नहीं, बस किरदार बदल गए,
हम वही रहे मगर, हमारे हालात बदल गए।






अधूरी मोहब्बत

मोहब्बत में हारे हुए लोग…
सबसे पहले खामोश होते हैं,
फिर खुद से बातें करना छोड़ देते हैं।

फिर छोड़ देते हैं उन रास्तों पर जाना,
जहाँ कभी किसी का इंतज़ार किया था…
फिर छोड़ देते हैं उन गीतों को सुनना,
जिनमें कभी अपना प्यार सुना था।

और धीरे-धीरे छोड़ देते हैं
हर वो चीज़, जो उनकी याद दिलाए…

मगर एक चीज़ नहीं छोड़ पाते—
उसे भूलने की कोशिश…!

क्योंकि कुछ लोग जिंदगी से चले जाते हैं,
लेकिन दिल से कभी नहीं जाते…!! 🖤









अधूरी याद

पहले उसे खोने का डर था..
और अब..
डर है कहीं कोई और मेरी जिंदगी में ना आ जाए,
और उसकी याद आनी बंद ना हो जाए..!

मैं चाहता तो हूँ, उसे भूलना..
लेकिन फिर भी न जाने क्यों,
मैं उसे भूलना नहीं चाहता..

शायद इसलिए नहीं कि वो वापस आएगी,
बल्कि इसलिए कि उसके साथ बिताया हुआ वक्त
मेरी जिंदगी का वो हिस्सा है,
जिसे मैं चाहकर भी मिटाना नहीं चाहता..

मैं जानता हूँ, अब वो मेरी नहीं है,
फिर भी दिल के किसी कोने में
उसके लिए एक जगह आज भी बाकी है..

कभी-कभी सोचता हूँ,
अगर उसे भूल गया तो
हमारे बीच बचा क्या रहेगा..?

इसलिए उसकी यादों को भी संभालकर रखता हूँ,
दर्द देती हैं तो देने दो..
कम से कम ये एहसास तो रहता है
कि कभी कोई था,
जिसे मैंने दिल से चाहा था.. 🖤






खुद से जीत

मुझे किसी से आगे नहीं निकलना,
ना ही किसी को हराना है…
मुझे बस कल से बेहतर
आज का इंसान बनना है।

मेरी असली जीत तब होगी,
जब मैं अपने कल से आगे निकलूँगा,
क्योंकि मेरी मंज़िल कोई और नहीं—
मेरा बेहतर रूप है। 






किसी ने सूखे पत्तों की तरह समेटा,
और आग लगा दी...
हमने भी मुस्कुराकर सब सह लिया,
क्योंकि उसे अपना समझा था...
वो छोड़ गया हमें उस मोड़ पर,
जहाँ से लौटना भी मुमकिन नहीं था,
हम ढूँढते रहे उसे हर चेहरे में,
और उसे हमारी तलाश ही नहीं थी...







यार मैंने उसकी धड़कनों में घर बसाया था 
जहां उसका दिल था मैंने भी वही लगा लिया 
पहली बार उसका हाथ थाम के चला था उस रास्ते 
फिर भी उसने अकेला छोड़ दिया
उस श्याम उसने मुझे हमेशा के लिए छोड़ दिया 
उसकी छोटी-छोटी आदतों में बसाई थी मैंने अपनी दुनिया 
फिर भी न जाने तुमने वह रिश्ता क्यों तोड़ दिया 
न जाने किस राह पर वो रिश्ता मोड़ दिया 
उस श्याम उसने हमेशा के लिए छोड़ दिया






विनती बस इतनी है तुमसे, मुझे यूँ खामोश मत करना,
अगर दूर जाना है तो जाना, मगर बेवजह मजबूर मत करना।
हमने तो तुम्हें अपनी दुआओं में भी संभालकर रखा है,
मेरी मोहब्बत को गुनाह समझकर, मुझे गुनहगार मत करना।






तुमसे अब उस इंसान को नहीं मांगूंगा माधव,
ये कर्ज हमेशा तुम पर रहेगा..,
तुम्हारे द्वार पर मांगने पर खाली हाथ जाना पड़ता है..!

अब जो छीन लिया है तुमने, उसे वापस पाने की ज़िद भी नहीं करूंगा,
बस इतना करना माधव—
जिसे मेरी किस्मत में नहीं लिखा,
उसकी यादों से भी मुझे आज़ाद कर देना..।

मैंने उसे अपना समझकर मांगा था तुमसे,
शायद मेरी ही दुआ में कोई कमी रही होगी,
अब तुम्हारे फैसले से कोई शिकायत नहीं..
बस दिल को तुम्हारा फैसला मानने की ताकत दे देना..।




1. अधूरी शिकायत

दर्द मुझे भी होता है...!! 🥀
बस फर्क इतना है कि
मैं हर किसी से अपना हाल नहीं कहता...

कई बार मन करता है
किसी के सामने बैठकर
सब कुछ कह दूँ,
जो दिल में दबा रखा है...

फिर सोचता हूँ,
जिसे मेरी खामोशी समझ नहीं आई,
वो मेरी तकलीफ़ क्या समझेगा...?

इसलिए अब मुस्कुराना सीख लिया है,
क्योंकि हर दर्द का इलाज
किसी इंसान के पास नहीं होता...!! 🖤








अंत में कुछ ठीक नहीं होता,
अंत में सिर्फ अंत होता है।

किसी की भावनाओं को समझने में,
कभी-कभी उम्र भर का वक्त लगता है।
और जिसे हम अपना समझते हैं,
वही अक्सर सबसे पहले बदलता है।

कोई दिल से किसी को चाहता है,
तो कोई चाहकर भी कह नहीं पाता,
कोई अपने मनपसंद इंसान को पाने के लिए,
खुद से भी लड़ जाता है।

मगर मोहब्बत में कहाँ हर किसी को,
उसका मनपसंद इंसान मिलता है,
किसी को उम्र भर का साथ मिलता है,
तो किसी को सिर्फ इंतज़ार मिलता है।

कुछ लोग भावनाएँ देकर भी खाली रह जाते हैं,
कुछ प्यार करके भी अकेले रह जाते हैं,
जिसे अपनी पूरी दुनिया समझ बैठे थे,
उसी की दुनिया में हम बेगाने रह जाते हैं।

हमने तो चाहा था उसे उम्र भर अपना बनाना,
उसके हर दर्द को अपना दर्द बनाना,
मगर किस्मत ने ऐसा मोड़ दिखाया—
जिसे सबसे ज्यादा चाहा,
उसी को आखिर किसी और का होते देखना पड़ा।

इसलिए अब कोई शिकायत नहीं,
न कोई सवाल, न कोई गिला है…
मोहब्बत अपनी जगह सच्ची थी,
बस उसका मुकद्दर किसी और के नाम लिखा था।

और शायद यही जिंदगी का सबसे कड़वा सच है—
अंत में कुछ ठीक नहीं होता,
अंत में सिर्फ अंत होता है।





हमें वो नहीं मिली, जिसे हमने मोहब्बत की..!
अब बस इतनी-सी दुआ है हमारी…
कि हमें वो मिले, जिसे हमसे मोहब्बत हो..! ❤️






अब वो चाहिए नहीं

उसे खोने के बाद कुछ अलग-सा मलाल होता है,
दिल में उसका आज भी एक सवाल होता है।

उसे चाहता हूँ, बहुत चाहता हूँ आज भी,
हरदम उसकी खबर रखता हूँ आज भी।
मगर अजीब-सी दूरी है अब इन रिश्तों में,
वो पास हो तो भी दिल बेहाल होता है।

उसकी तस्वीर से अब भी बातें करता हूँ,
उसके हर दर्द का अंदाज़ा रखता हूँ।
वो खुश है या नहीं, ये जानना चाहता हूँ,
मगर उसे पाने का अब ख्याल नहीं होता है।

कभी जिसके लौट आने की दुआ करते थे,
आज उसके लौटने से भी डरते हैं।
मोहब्बत अब भी उतनी ही है उससे,
बस उसे अपना कहने का अधिकार नहीं होता है।

वो याद आती है तो आँखें नम हो जाती हैं,
पुरानी सारी बातें फिर से सामने आती हैं।
दिल आज भी उसी का इंतज़ार करता है,
मगर अब उसे वापस पाने की चाह नहीं होती है।

उसे चाहता हूँ… बहुत चाहता हूँ…
हरदम उसकी खबर रखता हूँ…
मगर सच तो यही है इस टूटे हुए दिल का—
वो चाहिए नहीं… बस उसकी खुशी चाहिए।





यार, अब मैं किसी से ज्यादा बात नहीं करता,
जिससे भी बात करता हूँ, वो दूर हो जाता है...

कैसा लगता होगा ना जब वो मुझे जलाने के लिए,
किसी और के साथ बैठे, उसका हाथ पकड़े, उसके साथ रहे...

और मैं दूर खड़ा होकर बस ये सोचता रहूँ,
कि कभी ये हाथ मेरे हाथ में हुआ करता था...

वो किसी और के साथ हँसती रहे,
और मैं उसकी वही पुरानी हँसी याद करके चुप हो जाऊँ...

शायद उसे लगता होगा कि मुझे फर्क नहीं पड़ता,
पर उसे क्या पता...
कुछ लोग सामने से नहीं,
अकेले में टूटते हैं।

मैंने भी अब शिकायत करना छोड़ दिया है,
क्योंकि जिसे जाना होता है,
उसे रोकने से वो अपना नहीं बनता...

बस इतना सा फर्क है अब मुझमें और पहले वाले मुझमें—
पहले किसी के दूर जाने का डर था,
अब किसी के करीब आने से डर लगता है।





मतलब के रिश्ते हैं, मतलब की बातें हैं,
जब तक काम हो, तब तक ही मुलाकातें हैं।
जिसे अपना समझकर दिल से लगाया था,
वही आज कहता है—हमसे क्या नाता है।
जब तक ज़रूरत थी, सब साथ खड़े थे,
ज़रूरत खत्म हुई तो सब दूर पड़े थे।
हमने तो हर रिश्ता दिल से निभाया,
लोगों ने बस अपना मतलब निभाया।
अजीब बात है इस दुनिया के रिश्तों की,
पास रहकर भी कोई अपना नहीं होता।
जिसे लगता है कि उसके पास बहुत लोग हैं,
उसे भी एक दिन अकेला होना होता है।
इसलिए अब किसी से कोई शिकायत नहीं,
जो जितना साथ रहा, उतना ही सही।
हम भी मुस्कुराकर सबको अपना कहते हैं,
पर सच तो ये है… हम भी अकेले रहते हैं।





किसी दिन मेरा सबर का गड़ा बर जाएगा..
किसी दिन तो प्यार कम हो ही जाएगा..!
कोई वक्त हुआ करता था जब उसके नाम से मेरा दिल चहक उठता था, लेकिन क्या मालूम था अब उसका नाम लेने से भी दिल डर जाएगा.
डर लगता है, कि उसकी मांग में किसी और का सिंदूर भर जाएगा एक दिन....
मैं करता हूं फिकर उसकी अपनी जान से भी ज्यादा..
और वो साइड से गुजर जाएगा एक दिन..,






तेरी यादों का शहर आज भी आबाद है,
दिल मेरा आज भी तेरे लिए बर्बाद है।

तू नहीं है तो कोई शिकवा नहीं तुझसे,
बस तेरे बिना जीना थोड़ा सा नाशाद है।

हमने चाहा था तुझे उम्रभर अपना बनाकर,
क्या पता था ये मोहब्बत ही मेरी फरियाद है।

तू मिले या न मिले, तेरा ज़िक्र रहेगा,
मेरी हर साँस में अब भी तेरा ही संवाद है।







नहीं आएगी..
 उसे मेरी याद नहीं आएगी 
उसकी यादों से वो मेरा वजूद मिटा चुकी है 
 और मैं बस उसकी यादों में तड़पता रहता हूं 
मैं उसके लिए कितना खास था मैं, यह बात शायद, अब मुझे ही याद है..
वो भूल जाएगी मुझे, इस कदर जैसे उसकी याददाश्त चली गई है. और उतनी जितनी मैं, मैं शामिल था 
वो भूल जाएगी मुझे और किसी और के साथ अपना नया जीवन शुरू करेगी 
और मैं बस उसकी यादों में तड़पता रह जाऊंगा 






सबसे कह देता हूँ, मुझे कोई दर्द नहीं,
कोई तो हो जो मुझे समझे और कहे—
“यार, ये सच नहीं…”

यार, मुझे आदत है हर बात पर मुस्कुराने की,
कोई तो हो जो मेरी आँखें पढ़े और खये 
“यार, तू खुश नहीं…”


जो चाहिए था किसी भी कीमत पर,
अब उसे देखना भी नहीं चाहते...
कभी मेरी एक आवाज़ पर दौड़ी चली आती थी,
आज मेरे सामने किसी और का हाथ थामे चली जाती है।
उसे पता है मेरी आँखें नम हैं,
फिर भी मेरी तरफ़ देखना तक नहीं चाहती है।
जब भी वो हमारे घर आता है,
वो उसे देखने के लिए बाहर चली आती है,
मेरे सामने उससे ऐसे बातें करती है,
जैसे मेरा होना अब उसके लिए कोई मायने ही नहीं रखता।

इसे एक ब्लैक बैकग्राउंड पर लिखकर दे दो सादा सिंपल टैक्स सफेद रंग में होनी चाहिए और शायरी को बीच मेंलिखकर देना







किसी को दिखावा पसंद है, हमारी बातें सबको कड़वी लगती हैं,
हम सच बोलते हैं इसलिए शायद हमारी बातें थोड़ी सख्त लगती हैं।
जो सामने मीठा और पीछे से वार करते हैं,
उनसे तो हमारी खामोशी ही बेहतर लगती है।
हमें किसी के आगे खुद को साबित करने का शौक नहीं,
जो समझते हैं, वो बिना कहे समझ जाते हैं।
हम जैसे हैं वैसे ही रहेंगे, बदलेंगे नहीं किसी के लिए,
क्योंकि हमें दिखावे की नहीं, अपने उसूलों की आदत है।
आज जो हमें गलत समझते हैं, उन्हें समझाने का भी वक्त नहीं,
हमारी पहचान हमारी बातों से नहीं, हमारे कर्मों से होगी।






तू कब मेरे बुलाने से आया है,
तू अपने काम के बहाने से आया है..!

मुझे तो लगा था तुझे मेरी फिक्र है,
पर तू तो बस अपना मतलब निभाने आया है..!

जब भी जरूरत पड़ी, तूने मुझे अपना कहा,
और जब मेरी जरूरत थी, तू अनजाना बनकर आया है..!

अब क्या गिला करूँ तेरे बदल जाने का,
तू तो हमेशा से ही बहाने बनाकर आया है..!





यार, मैं उसे भूलना चाहता हूँ… लेकिन भूल ही नहीं पाता।
हर रात उसकी याद बहुत सताती है।
कई बार रोते-रोते सो जाता हूँ, बस इसलिए कि शायद नींद आ जाए और मैं उसे याद न करूँ।
तू ही बता यार, मैं क्या करूँ?
कोई ऐसा टोटका कर दे कि या तो वो मेरी ज़िंदगी में वापस आ जाए,
या फिर मेरे दिमाग से उसकी सारी यादें ही मिट जाएँ।





तुम देखो ना, मैं यहाँ बैठकर रो रहा हूँ,
तुम्हें दिख रहा है ना, मैं कितना तड़प रहा हूँ।
आँखों में ठहरी हैं अब भी तुम्हारी ही तस्वीरें,
मैं हर रात उन्हीं तस्वीरों से बातें कर रहा हूँ।
कहते हैं लोग, वक्त हर दर्द मिटा देता है,
मगर मैं तो हर रोज़ उसी दर्द में जी रहा हूँ।
तुम्हें आवाज़ देता हूँ खामोशियों के सहारे,
तुम सुन रही हो ना… फिर क्यों नहीं आ रही हो?






अब मुझे किसी से कोई मतलब नहीं है माधव,
किसी ने मेरा इतना दिल दुखाया है ना,
कि पता ही नहीं चलता कि कौन आ रहा है,
कौन जा रहा है।

मैं चाहता हूँ वो मेरी ज़िंदगी में दोबारा कभी न आए,
मैं उसकी शक्ल भी देखना नहीं चाहता,
जिसने मुझे अंदर तक तोड़ दिया हो,
मैं उसे फिर से अपना कहना नहीं चाहता।

उसके बाद से ना किसी के आने की खुशी है,
ना किसी के जाने का ग़म है,
अब तो बस अपने ही ख़यालों में रहता हूँ,
और ख़ामोशी ही मेरी हमदम है।

बहुत भरोसा किया था मैंने उस इंसान पर,
शायद इसी बात की सज़ा मिली है मुझे,
अब कोई कितना भी अपना बन जाए,
दिल कहता है—दूर ही रहना उससे।

माधव, अब बस इतना कर देना,
जिसने मुझे दर्द दिया उसे मुझसे दूर रखना,
वो अपनी दुनिया में खुश रहे,
बस मेरी दुनिया में उसका कोई ज़िक्र मत रखना।

क्योंकि अब मैं उसे भूलना चाहता हूँ,
उसकी यादों से भी रिश्ता तोड़ना चाहता हूँ,
जिस दिन वो मेरी ज़िंदगी से पूरी तरह निकल जाएगा,
शायद उस दिन मैं फिर से खुद को जीता हुआ पाऊँगा।