कहानी
1
धीरे-धीरे दूर होती है......
सब कुछ ठीक चल रहा था…
कम से कम मुझे तो यही लगता था।
हम दोनों के बीच बातें होती थीं, हँसी होती थी, और एक अजीब सा सुकून था… जैसे सब कुछ सही दिशा में जा रहा हो।
लेकिन शायद ये सिर्फ मेरी तरफ से था।
वो मुझसे दूर रहती थी… और शायद उसी दूरी ने उसे मुझसे दूर कर दिया।
शुरुआत में फर्क नहीं लगा, पर धीरे-धीरे उसकी बातें कम होने लगीं।
मैं जब भी उससे मिलने जाता…
हर बार उसकी बातें थोड़ी और कम हो जातीं।
जैसे वो पास होकर भी कहीं और होती थी।
एक दिन मैंने हिम्मत करके पूछ ही लिया—
"क्या तुम अभी भी मेरे साथ रहना चाहती हो?"
लेकिन…
उसका कोई जवाब नहीं आया।
उस खामोशी ने सब कुछ कह दिया।
मैंने उसे समझाने की कोशिश की—
"तुम्हारे साथ रहना अच्छा लगता है… सच में।"
पर शायद तब तक वो मुझे अपने दिल से दूर कर चुकी थी।
पता नहीं क्यों…
वो धीरे-धीरे मुझसे दूर होती जा रही थी।
मैंने बहुत बार कोशिश की…
कभी समझाने की, कभी रोकने की,
यहाँ तक कि मैंने खुद को छोटा भी कर लिया…
लेकिन अब कुछ होने वाला नहीं था।
शायद…
अब उसे मेरे बिना रहना अच्छा लगने लगा था।
आज भी जब वो मेरे सामने आती है…
तो मैं खुद को संभालने की कोशिश करता हूँ,
पर ये आँखें…
ये मानती ही नहीं।
आँसू अपने आप निकल आते हैं।
मैं खुद को समझाता हूँ—
कि उसे भूल जाऊँ… आगे बढ़ जाऊँ…
लेकिन सच कहूँ तो…
मैं आज भी उसे भूल नहीं पाया।
( वो धीरे-धीरे मुझसे यूँ दूर होती चली गई,
मेरी हर बात उसकी खामोशी में खोती चली गई।
मैं रोका भी, मनाया भी, मगर कुछ असर ना हुआ,
और मेरी मोहब्बत बस मेरी आँखों में रोती रह गई… 💔)
2
उसकी खुशी
उसकी खुशी के लिए
मैं उससे बात नहीं करता,
वह पहले मुझसे बात नहीं करती थी,
मुझ पर चिल्लाती थी।
मैं अगर उससे बात करने जाता था,
तो बस यही कहता था—
"यार, केवल मेरे साथ रह लो,
मुझे तुम्हारे साथ रहना अच्छा लगता है।"
लेकिन शायद उसे यह पसंद नहीं आया,
सच कहूँ तुमसे—
उसे कोई और अच्छा लड़का चाहिए था,
जो दिखने में भी अच्छा हो,
जिसका शरीर भी ठीक हो…
और अब उसे वही अच्छा लगता है।
मैं उसके लिए रोया भी,
टूट कर गिर गया था अंदर से,
पर मुझे नहीं पता—
उसे यह पता है या नहीं
कि मैं उसके लिए रोया।
मुझे यह भी नहीं मालूम,
क्या वह मुझे अब चाहती है या नहीं,
लेकिन पहले…
वह बहुत चाहती थी।
अब मैं उसे भूलना चाहता हूँ,
काफी रो लिया यार उसकी यादों में,
हाँ, शायद उसे पूरी तरह भूल न पाऊँ,
पर उससे बहुत दूर जाना चाहता हूँ।
मुझे नहीं मालूम,
वह अब मुझे चाहती है या नहीं,
लेकिन मैं…
मैं तो हमेशा चाहता रहूँगा।
फिर भी,
मैं उससे दूर जाना चाहता हूँ,
बस…
और यही कोशिश कर रहा हूँ।
3
उसको बाहों में भरकर सोना था,
पर अब अकेले सोने की आदत डाल ली।
तेरी यादों का सिलसिला ऐसा,
हर रात हमने आँखों से बात कर ली।
कभी तेरे साथ थी हर खुशी मेरी,
अब तन्हाई से ही हमने मुलाकात कर ली।
दिल ने चाहा बहुत तुझे फिर से,
पर किस्मत ने हर कोशिश खामोश कर दी।
अब कोई ख्वाब भी नहीं सजता,
जिंदगी ने ये कैसी सज़ा लिख दी।
4
🥺 मेरे जाने के बाद 😔
एक बार ज़रूर पढ़ना...
जान…
जब मैं एक दिन यूँ ही खामोश हो जाऊँगा,
ना कोई मैसेज, ना कोई कॉल कर पाऊँगा…
तब शायद लोग मेरे बारे में बातें करेंगे,
कुछ हँसकर, कुछ आँसू छुपाकर चले जाएंगे…
कुछ कहेंगे — “अच्छा इंसान था…”
कुछ बस रस्म निभाकर लौट जाएंगे…
पर उस भीड़ में…
क्या तुम आओगी…?
बस एक पल के लिए ही सही,
मेरे पास खड़ी हो जाना…
जैसे कभी मेरे साथ बैठकर
घंटों बातें किया करती थी…
मैं उस दिन भी कुछ नहीं कह पाऊँगा,
पर मेरी खामोशी तुमसे पूछेगी—
क्या सच में इतना आसान था मुझे भूल जाना…?
अगर आ सको तो…
एक बार मेरा नाम लेकर पुकार देना,
शायद मेरी रूह को सुकून मिल जाए…
और जाते-जाते धीरे से कहना—
“अब ठीक है… मैं आ गई हूँ…”
शायद उसी पल…
मेरी अधूरी कहानी को
थोड़ा सा अंत मिल जाए… 😔
5
मैं रो रहा था कहीं बैठकर,
वो मुझे देखकर भी नकार रही थी..
जिसे अपना समझा था..
वही मेरे सामने दूसरे का हाथ पकड़ रही थी..!
मुझे याद आती है उसकी हर दिन..?
हर दिन आंसुओं से बातें करनी पड़ती है..!
उसे खबर भी नहीं होगी,
उसके लिए मैं हर दिन मरता हूं..!
6
सड़कों पे निकलती है तो नज़रें तीर बन जाती हैं,
हर मोड़ पे खड़ी खामोशियाँ जागीर बन जाती हैं।
घर में भी उसकी बात कोई सुनता ही नहीं,
उसकी हर एक कोशिश अधूरी तक़दीर बन जाती है।
बाहर गंदी नज़रों से लोग उसे देखते रहते हैं,
उसकी हर एक चाल भी जैसे तकलीफ़ बन जाती है।
दिल की बातें वो किसी से कह नहीं पाती,
हर बात उसके अंदर ही एक लकीर बन जाती है।
अपमान छुपा कर भी वो हँस देती है हर बार,
उसकी ये मुस्कान भी अब तस्वीर बन जाती है।
कब समझेंगे लोग, कब बदलेगी ये सोच,
हर लड़की की चुप्पी क्यों उसकी तक़दीर बन जाती है।
7
मैं सोना चाहता था उसकी गोद में, पर उसे कोई और पसंद है,
मैं हाथ लगाऊँ तो ऐसे दूर भागती है मुझसे, जैसे मैं कोई पराया हूँ।
किसी और के साथ वो हाथ में हाथ डालकर घूमती है,
और मैं भीड़ में खड़ा बस अपनी किस्मत को देखता रह जाता हूँ।
जिसे चाहा था दिल से, वही अब किसी और की मुस्कान है,
मेरे हिस्से बस यादें हैं, उसके हिस्से नई पहचान है।
मैं आज भी वहीं ठहरा हूँ जहाँ उसे चाहा था,
और वो बहुत आगे निकल गई, जैसे मैं कभी था ही नहीं।
भाई, ये सिर्फ शायरी नहीं… किसी की अधूरी कहानी है…
8
उससे दूर होकर भी
उससे दूर जाता तो हूँ,
पर उसकी याद बहुत सताती है...
मना करके भी हर बार जाता हूँ,
और हर बार रोकर आता हूँ...
मैं क्यों नहीं हूँ यार उसे पसंद,
क्या सच में मुझसे अच्छा कोई और है उसके लिए...
लेकिन क्या वो मुझ जैसा चाह पाएगा उसे,
जैसे मैंने हर दर्द में भी चाहा है उसे...
मैं चाहता हूँ वो मेरे साथ रहे,
लेकिन ये भी चाहता हूँ वो खुश रहे...
इसलिए छोड़ दिया उससे बात करना,
क्योंकि कभी-कभी प्यार में खुद से हारना पड़ता है...!
9
मैंने तुमसे मांगा भी तो क्या सिर्फ साथ रहना
और वह भी तुम्हें शायद बहुत ज्यादा लग रहा था
तुम्हारे जितना मैं किसी के साथ नहीं रहा ओर ना ही रह पाऊंगा
तुमसे मिलने से पहले नफरत सी थी लड़कियों से
तुम्हारे आने के बाद पता नहीं क्या हुआ
हर काम तुम्हारे साथ ही करता रहा
लोगों में गुल मिलने लगा
और अब तुम बात भी नहीं करती सोचो किस दर्द से गुजर रहा होगा मैं 😥
9....
तुम्हारे लिए मुझ जैसे बहुत होंगे
लेकिन मुझे कहना था कि
मेरे लिए सिर्फ तुम हो...!
उस दिन तुम तो बड़ी आसानी से उठकर
चली गई थी वहां से,
लेकिन मुझे कहना था कि
मेरा दिल नहीं लगेगा...
साथ रहना ही तो मांगा था..
अब किसी से हंस कर बात नहीं कर पाऊंगा..!
मुझे कहना था कि..
तुम्हें याद नहीं करूंगा,
लेकिन फिर भी तुम्हारी याद आएगी..
खुद से नफरत सी हो जाएगी,
मैं खुद से सवाल कर बैठूंगा..
तुम रुकी क्यों नहीं, तुमने मुड़ कर देखा क्यों नहीं..
मुझे कहना था कि
अब मेरा दिल नहीं लगेगा...??
10
एक लड़का था…
जो अपनी ही दुनिया में खुश रहता था।
उसकी किताबें, उसका कमरा और वो खुद…
लड़कियों से तो जैसे उसे कोई मतलब ही नहीं था।
फिर एक दिन एक लड़की आई…
धीरे-धीरे आदत बन गई उसकी।
उसका चेहरा, उसकी बातें, उसका साथ…
सब कुछ अच्छा लगने लगा।
लेकिन एक दिन वो छोड़कर चली गई।
अब फिर वही कमरा है, वही किताबें हैं,
और मैं फिर अकेला हूँ…
जैसे पहले था।
लेकिन पहले और अब में बहुत फर्क है।
पहले अकेलापन सुकून देता था,
अब वही अकेलापन अंदर से तोड़ देता है।
यार…
हर दर्द सहा जा सकता है,
हर मुसीबत से लड़ा जा सकता है।
लेकिन जिस इंसान को दिल सबसे ज्यादा चाहता हो,
अगर वही दूर चला जाए ना…
तो वो दर्द इंसान को अंदर से खत्म कर देता है।
मैं खुद जानता हूँ
मैंने खुद को कैसे संभाला है।
छत पर बैठकर रोया हूँ,
कमरे में अकेले रोया हूँ।
उसके सामने भी रोया था…
लेकिन उसे कभी फर्क नहीं पड़ा।
उसे पता था मैं अकेला हूँ, टूट चुका हूँ,
फिर भी उसने कभी आकर ये नहीं पूछा —
“तू ठीक है ना?”
कभी-कभी लगता है…
इससे अच्छा तो मैं पहले जैसा ही रहता।
कम से कम इतना दर्द,
इतनी मानसिक तकलीफ तो नहीं सहनी पड़ती…।
11
अगर मौका मिला कभी,
तो अपनी खामोशी का हिसाब लिखूँगा,
जो हर किसी को हँसता दिखा,
उसके अंदर का टूटा ख़्वाब लिखूँगा।
लिखूँगा वो दर्द,
जो किसी से कहा नहीं गया,
और वो इंसान भी,
जो सबका था… मगर किसी का नहीं रहा।
मैं अपनी मुस्कानों के पीछे,
छुपे आँसू बयान करूँगा,
जो हर रात चुपके से रोया,
उस दिल का अरमान लिखूँगा।
लिखूँगा वो सफर भी,
जहाँ अपने ही अजनबी निकले,
और वो रिश्ते भी,
जो पास रहकर भी कभी दिल से ना मिले। 💔
12
आज पहली बार ये एहसास हुआ है…
कि हर बार खुद को सही साबित करते-करते
मैं कहीं अंदर से टूटता चला गया…
मैंने हर रिश्ते को दिल से निभाया,
हर अपने को अपना माना,
जिसने जैसे चाहा
वैसे खुद को बदल लिया…
कभी किसी की खुशी के लिए
अपनी नींदें छोड़ी,
कभी किसी के एक मैसेज के इंतज़ार में
पूरी रात जागता रहा…
मैंने हमेशा यही सोचा
कि अगर मैं सच्चा रहूँगा
तो लोग भी मेरे साथ सच्चे रहेंगे…
लेकिन शायद
ये सोच ही मेरी सबसे बड़ी गलती थी…
जिन लोगों के लिए
मैं हर वक्त खड़ा रहा,
आज वही लोग
मुझे अकेला छोड़ गए…
अब किसी से शिकायत भी नहीं होती,
क्योंकि समझ आ गया है—
लोग सिर्फ बातें करते हैं,
साथ नहीं निभाते…
और सच बताऊँ…
अब थक गया हूँ
हर किसी को मनाते-मनाते,
हर रिश्ते को बचाते-बचाते…
आज आईने में खुद को देखा
तो बस एक ही सवाल आया—
अगर मैं इतना ही बुरा था,
तो फिर लोगों को
मेरी ज़रूरत सिर्फ अपने मतलब तक ही क्यों थी… 💔
13
एक लड़की थी जिससे मैं बेइंतहा प्यार करता था,
एक वक़्त था जब वो भी मुझे चाहती थी…
मगर अब पहले जैसा कुछ बाकी नहीं रहा,
उसे कोई और पसंद आ गया…
और मैं बस तन्हाइयों में खुद को ढूँढ रहा हूँ।
कभी सोचता हूँ,
क्या दिल फिर से किसी का हो पाएगा…
क्या दोबारा वैसा प्यार होगा किसी से,
या ये अधूरा रिश्ता ही उम्र भर याद रहेगा…॥
14
हे मैं जा रहा हूँ हमेशा के लिए…
और अब कभी तुम्हारे पास नहीं आऊँगा…
तुम बुलाओगी तब भी नहीं,
लेकिन इसका मतलब ऐसा नहीं है कि मुझे तुमसे प्यार नहीं है…
मैं तो हमेशा तुम्हारे साथ खुश रहता था,
लेकिन शायद तुम्हें ही वो खुशी नहीं मिलती थी…
अब नहीं आऊँगा मैं,
तुम जितना चाहे खुश रहो, जिसके साथ चाहे रहो…
और जब कभी इन लाइनों को पढ़ोगी ना तुम,
तब तक शायद बहुत देर हो चुकी होगी…
मैं तुम्हारी जिंदगी से इतना दूर चला जाऊँगा,
जहाँ से ना मेरी आवाज़ तुम तक पहुँचेगी,
ना तुम कभी मेरे पास आ सकोगी…॥
15
अगर खुश है मेरे बिना,
तो शिकायत मुझे भी नहीं होगी...
बस एक बात याद रखना,
मोहब्बत फिर हर किसी से नहीं होगी...
हमने चाहा था तुझे दिल से,
कोई वक्त गुज़ारी नहीं थी,
जो टूटा है आज अंदर से,
वो कोई छोटी सी कहानी नहीं थी...
अब तेरी राह अलग सही,
मेरा सफर भी कट जाएगा,
मगर जो नाम था तेरा लबों पर,
वो आसानी से नहीं जाएगा...
तू मिले ना मिले अब कभी,
ये मुकद्दर की बात होगी,
पर तेरी यादों के साथ ही शायद,
मेरी हर एक रात होगी... 🖤
16
शायर हूं इसलिए तेरे बारे में हर बात लिखता हूं..
मैं लिखता हूं तेरी आंखों को, मैं लिखता हूं तेरे चेहरे को, मैं लिखता हूं तेरी अदाओं को..
मैं लिखता हूं अपने आप को तेरा, तेरे हाथों में अपने हाथ को,
मैं लिखता हूं एक दूसरे को एक साथ में..
हकीकत का पता नहीं लेकिन मैं लिखता हूं अपनी शायरी में अपना,
और हर बार तुझे ही अपना लिखता हूं
17
तुमने जवाब नहीं दिया,
मैंने सवाल करना छोड़ दिया,
तुम व्यस्त थे शायद,
मैंने तुम्हें परेशान करना छोड़ दिया,
तुम्हारी दुनिया बहुत बड़ी है,
मैंने खुद को छोटा मान लिया,
तुम खुश रहो बस,
मैंने अपना हिस्सा माँगना छोड़ दि..?
Shayari
इन फूल और गुलदस्तो का कस्तूरी यही है
मन चाहि जिंदगी बर्बाद करता
वो यादें है ना याद है मुझको
तुम मेरे हो नहीं सकते और
मैं तुम्हें भूल नहीं सकता
नन्हे से फ़रिश्ते ने घरभर की खुशियाँ लुटा दी,
पापा-चाचा की मुस्कान भी आज कुछ ज़्यादा ही खिला दी,
रिश्तों में बढ़ गई गर्मी जैसे आया कोई नया जमाना,
मैं भी बना मामा आज—दिल ने कहा, “मुबारक हो भाई
कैसे मांगू मैं उसके लिए बद्दुआ
वो आज भी मुझे इतनी ही प्यारी लगती है
जिसकी यादों में तुम दिन रात खोए रहते हो
क्या वह भी तुम्हें याद करती होगी
जिसका हर लम्हा तुम इंतजार करते हो
क्या उसकी धड़कन भी तुम्हारे लिए धड़कती होगी
कल उसकी लगी स्टोरी में फोटो देख ली,
यादें ऐसी जागीं कि रात ही सोने न दी।
आँखें भीगती रहीं, तकिये ने सब सुन लिया,
रोते-रोते कब नींद आ गई, खुद को भी पता न चला।
पर एक सवाल आज भी दिल में रह गया—
क्या उसे भी मेरी इतनी याद आई होगी,
या मेरी तरह वो भी
कभी चुपचाप टूट कर सोई होगी…?
क्यों उसके ख्यालों में खोया रहता हूं
जानता हूं कि वह मेरी नहीं होने वाली
अंदर से एक आवाज आई
नहीं होने वाली, तभी तो उसकी यादों में खोया रहता हूं
दिल से दिल की दूरी नहीं होती,
पर किस्मत को ये बात मंज़ूर नहीं होती।
हम चाहकर भी पास न आ सके उनके,
कुछ मोहब्बतें पूरी होकर भी पूरी नहीं होती। 😔
चल जा छोड़ दिया तुझे भी
उमरी तो बितानी है
उसके बाद भूल जाएंगे तुझे
मैं जहां भी जाऊं उसकी याद सतातीहै
भूल भी नहीं सकता उसको
क्योंकि उसकी याद बहुत आती है
फिर उसकी कहानी से निकल आया में
उसको उसका सुकून देखकर आयामैं
उसे शख्स को मेरे साथ घुटन होने लगी थी
फिर उसे आजाद करा आया में
जला दी वो किताब जिसमे लिखा था
अच्छे के साथ अच्छा होता है
“तू पलट कर आ तो सही,
हम फिर से कहानी लिख देंगे,
जो अधूरी रह गई थी मोहब्बत,
उसे इस बार पूरी ज़िंदगानी लिख देंगे।”
मैने तुमसे कुछ कहा नहीं ना
बात करने को कुछ रहा नहीं ना
राते काट दी हमने रोते रोते
तुम्हे फर्ख पड़ा नहीं ना
मेरे भाई
"होली के रंगों में इज्जत भी घोलना,
रंगो के नाम पर किसी को मत छू ना,
छूना है तो पहले दिल से इजाज़त लेना,
माँ के संस्कार हैं… ये
बात कभी मत भूलना।"
वो मेरे सामने किसी और का हाथ पकड़ती है,
मैं देखता हूँ, गुस्सा होता हूँ पर कुछ करता नहीं…
दिल तो चाहता है पूछ लूँ उससे हर बात का हिसाब,
पर उसकी खुशी के आगे मैं आज भी कुछ कहता नहीं…
ना देख मैं कैसा हूं
ये देख मैं तेरे लिए वफादार कितना हूं
तेरे इश्क ने किया है यह हाल मेरा
तू देखना यार
मैं लाचार कितना हूं
मेरी उदासी पर अब कोई मुझे मनाने नहीं आता
मैं रोव भी तो कोई प्यार से गले लगाना नहीं आता
वक्त के साथ न जाने क्या हो गया है मुझे
चेहरे पर मुस्कान तो होती है पर मुस्कुराने का मजा नहीं आता
वो आती है तो उसे आने देता हूं
वो जाती है तो उसे जाने देता हूं
क्या करूं मोहब्बत में हूं
उसकी हर गलती को में अपनी गलती बता देता हूं
बड़े प्यार से चाहते थे किसी को सर पर चढ़ाना
मगर कोई सवार नहीं होगा
सब चेहरा देखने वाले मिले
किसी को मेरे दिल पर ऐतबार नहीं हुआ
और यार मेरे मुझेसे किसी ने प्यार नहीं किया
इसलिए मुझे भी किसी से प्यार नहीं हुआ
फिर उसकी यादआई है इस कदर की आंख से आंसू ना रुके
रोया गिड़गिड़ायालेकिन वो नहीं आया..!?
अगर इशारो में ना होती महोब्बत
तो इसे खूबसूरत कौन कहता
पत्थर बनकर रह जाता वो ताजमहल
अगर इश्क़ इसे अपना नाम ना देता तू हीर मेरी
किसी की याद, याद आकर रुलाती है…
दिल की हर धड़कन बस उसी को बुलाती है…
हम तो भूलना चाहते हैं उसे हर पल,
लेकिन हर कोशिश के बाद भी वो याद बनकर लौट आती है
वो जा रही थी
और मैं आंखों में आंसू भरकर देख रहा था
मुझे लगा वो मूड कर देखेगी
लेकिन वो खुश होकर जा रही थी
.
कहते हैं फिर मिलेंगे किसी और जन्म में…
पर मैं इस झूठ से खुद को बहला नहीं पाता।
तू गई तो ऐसा लगा, प्रिया…
जैसे मेरा कल भी मेरे साथ नहीं जाता।
ना बुद्ध बनने की चाह है, ना कृष्ण सा बन पाऊँगा,
ना तुझसे राधा बनने को कहूँ, ना सीता सा निभा पाऊँगा।
बस इतना कर, तू मेरी बन जा, मैं तेरा हो जाऊँगा,
जब भी ख्याल आता है उसका, रो पड़ता हूं
न जाने क्यों, खोने के बाद भी उसको खोने से डरता हूं...!
इतनी सिद्ध से चाहा किसी को
फिर किसी को चाहा नहीं
मन बहुत है बात करने ka
पर अब वो बात नहीं।
चाहता हूँ जिसको, वो मिलता क्यों नहीं,
मेरे हिस्से में कोई ठहरता क्यों नहीं।
क्या कमी है मुझमें, ये समझ आता नहीं,
हर कोई पास आकर भी रहता क्यों नहीं।
तबीयत भी अब तन्हाई में बिगड़ गई,
ये दिल किसी के बिना संभलता क्यों नहीं।
ए खुदा, बता दे मेरी खता क्या है,
तू मेरा ये नसीब बदलता क्यों नहीं…
मैं कपड़े पहन कर जाऊं कहां..
किसके लिए बनाऊं बाल..!
वो शख्स मुझसे रूठा हुआ है..
जिसके लिए मैं आता था बाहर..!!
तेरी खैर मौजूदगी ने, जीना सीखा दिया..
अब तू सामने भी आ जाए, तो दिखाई नहीं देगा..!
मुझे घर बनाना है, पैसे कमाने हैं,
एक काम करते हैं, मोहब्बत को रहने देते हैं।
ख़्वाबों की ईंटों से अब दुनिया सजानी है,
दिल के किस्सों को थोड़ा थमने देते हैं।
जज़्बात बहुत हैं, पर वक़्त कम है अभी,
चलो कुछ अरमानों को सोने देते हैं।
कल जब मुकम्मल हो जाए ये सफ़र मेरा,
फिर मोहब्बत को खुलकर होने देते हैं।
ये चाँद-सितारे लाकर देने की बातें झूठी लगती हैं, प्रिये!
मैं वो लड़का हूँ जो मेहनत से अपना घर चलाता है…
साथ हर वक्त नहीं रह पाऊँगा, ये सच है,
पर तुम्हारी इज़्ज़त को कभी कम नहीं होने दूँगा…
बस तुम मेरी माँ को अपनी माँ समझकर अपनाना,
मैं तुम्हें अपनी हर खुशी से बढ़कर चाहूँगा…!!
उदासी में चेहरे की शान चली जाती है
टूटे हुए दिलों की शान चली जाती है
हम तुम्हारी जिंदगी से ऐसे जाएंगे
जैसे किसी हदसे मैं जान चली जाती है
तुम जो अब हो… वो तुम नहीं हो।
मुझे वो पहले वाली ही चाहिए,
जो मेरे साथ रहने की ज़िद किया करती थी,
जो छोटी-छोटी बातों पर रूठकर भी
आख़िर में मेरे पास ही आ जाया करती थी।
अब तुम पास होकर भी दूर लगती हो,
जैसे वक़्त ने तुम्हें बदल दिया हो।
मगर मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ,
जहाँ तुमने कभी साथ निभाने का वादा किया था।
एक लड़की थी
जो हर पल मेरे साथ रहती थी…
मेरी हर छोटी बात पर
हँस दिया करती थी…
पर पता नहीं अब क्या हो गया,
यार वो मुझसे बात ही नहीं करती…
जिसे मेरी ख़ामोशी भी समझ आती थी,
आज रो कर मर भी जाऊं तो...?????
वो स्कूल मेंहै दिमाग की थोड़ी कमजोर है
मैं कॉलेज में हूं मुझे दिमाग का उपयोग करना आता है
फिर भी सच्चा प्रेम हो गया...
दिखा मुझसे अच्छा कोई और ओर फिर उसको उससे प्यार हो गया...??
तेरी याद ना आए ऐसी कोई रात नहीं होती
तुझसे मोहब्बत आज भी है मेरी जान
यह बात अलग है अब तुझसे बात नहीं होती..!
दिल से निभाने वाले लोग
अक्सर अकेले रह जाते हैं...
क्योंकि वो रिश्तों में
दिखावा नहीं करते।
हर किसी को अपना मान लेते हैं,
और बदले में
सिर्फ दर्द पाते हैं।
सच कहूँ...
जो इंसान सबसे ज्यादा
खामोश रहता है,
अक्सर वही अंदर से
सबसे ज्यादा टूटा होता है।
मन में हजारों दर्द छुपाए बैठे हैं,
लोग समझते हैं हम मुस्कुराए बैठे हैं।
कौन समझेगा इस खामोशी की वजह,
हम अपने ही जख्मों को दिल से लगाए बैठे हैं।
कभी किसी से उम्मीद मत रखना,
यहाँ लोग वक्त के साथ बदल जाते हैं।
जो कहते थे “हम हमेशा साथ हैं”,
वही एक दिन याद बन जाते हैं।
अब आदत सी हो गई है अकेले रहने की,
क्योंकि भीड़ में भी लोग अपना नहीं होते।
दिल साफ़ रखो चाहे दुनिया जैसी हो,
सच्चे लोग हर किसी के नसीब में नहीं होते…
भरी जवानी में घर के कोने में बैठकर रोता हुआ जब कोई लड़का यह डिसीजन लेता है की जो कुछ करना है मुझे अकेले ही करना है
तो तू बस इस बात का अंदाजा लगा ले मिर्जा
इतनी बड़ी दुनिया में ना तो कोई तेरा है और ना ही कोई तेरे जैसा
इस एहसास पर एक शायरी:
यार, हर कोई मुझे अपनी ज़रूरत के हिसाब से क्यों याद करता है...
जब दिल उदास हो तो कोई हाल तक नहीं पूछता,
और काम पड़ जाए तो हर शख्स अपना बताता है।
रिश्तों की किताब में मेरा नाम तो सबने लिखा है,
मगर पढ़ता वही है जिसे मुझसे कोई फायदा नज़र आता है।
थक सा गया हूँ..!
पढ़ाई करते-करते, मेहनत करते-करते बस इसी उम्मीद में कि एक दिन तो किस्मत जरूर बदलेगी।
कई बार हार मान लेने का मन करता है, लेकिन फिर अपने पापा की याद आ जाती है।
उन्होंने कभी मुझसे ये नहीं कहा कि —
"मैं थक गया हूँ बेटे, अब मुझसे और नहीं होता।"
उन्हें हर दिन मेहनत करते देखता हूँ तो खुद पर शर्म आती है।
सोचता हूँ कि अभी तक मैं वो बेटा नहीं बन पाया, जैसा वो चाहते थे…
जैसी उम्मीद उन्होंने मुझसे लगाई थी।
लेकिन हार नहीं मानूंगा, क्योंकि मेरे पापा की मेहनत ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। ❤️
हर कोई क्यों बोलता है उसे भूलने को,
मेरा दिल नहीं मानता है उसे भूलने को,
कुछ रिश्ते अधूरे होकर भी पूरे लगते हैं,
शायद इसलिए वक्त भी हार जाता है उसे मिटाने को।
मेरा मयार नहीं मिलता
मैं आवारा नहीं फिरता
मुझे सोच कर खोना मैं दोबारा नहीं मिलता...!