बॉलीवुड की गुमनाम डांसर 7
भाग - 7
नोट - इस श्रृंखला के पिछले भाग में बॉलीवुड फिल्मों में कुछ पुरानी गुमनाम डांसर पर चर्चा की गयी थी , अब अंतिम भाग में कुछ युगल नृत्य के बारे में पढ़ें , कुछ पुराने ब्लैक एंड वाइट फिल्मों से …
पुरानी बॉलीवुड फिल्मों में नृत्य ज्यादातर शास्त्रीय , मुज़रे ,कव्वाली और लोकनृत्यों पर आधरित रहते थे . उस समय भी अच्छी नृत्यांगनाएं बॉलीवुड में होती थीं जो आज लगभग गुमनामी में खो गयी हैं . उस समय ख़ास कर 1950 - 60 के शुरू की कुछ नर्तकियों की चर्चा करते हैं -
मधुबाला और चंचल - 1955 की फिल्म थी ‘ नाता ‘ . इस फिल्म के गाने “ मोरे सलोने कान्हा गाना मुरली पे … “ पर मधुबाला और उनकी बहन चंचल ने अच्छा नृत्य पेश किया था हालांकि दोनों में कोई भी ट्रेंड डांसर नहीं थीं . इस गाने को लता और सुधा मल्होत्रा ने गाया था .
साईं और सुब्बुलक्ष्मी -1955 की फिल्म आज़ाद - फिल्म ‘ आज़ाद ‘ का प्रसिद्ध गाना ‘ अपलम चपलम …. ‘ लता मंगेशकर और उनकी बहन उषा मंगेशकर ने सी रामचंद्र के संगीत निर्देशन में गाया था . इस गाने पर दो बहनों साईं और सुब्बुलक्ष्मी ने कमाल का डांस किया था . इसी फिल्म के दूसरे गाने ‘ ओ बलिये चल चलिए … ‘ पर भी दोनों बहनों का अच्छा नृत्य था .
इसके अतिरिक्त 1956 की फिल्म चोरी चोरी के गाने ‘ मनभावन के घर जाए गोरी … ‘ पर भी दोनों बहनों ने अपनी कुशल नृत्य कला को प्रस्तुत किया है .
मीनू मुमताज़ और कुमकुम - 1957 की फिल्म ‘ नया दौर ‘ एक सुपर डुपर हिट फिल्म थी और उतना ही लोकप्रिय उसका एक नृत्य गीत “ रेशमी शलवार कुरता जाली का … “ था जिसे संगीतकार ओ पी नैयर के निर्देशन में शमशाद बेग़म और आशा भोंसले ने गाया था . इस गाने को और इतना खूबसूरत बना दिया था मीनू मुमताज़ और कुमकुम के डांस ने कि यह आजतक सदाबहार रहा है .
पद्मिनी और वैजयंती माला- 1958 की फिल्म ‘ राजतिलक ‘ - आशा भोसले और सुधा मल्होत्रा के गाये ‘ आजा तू राजा आजा .. ‘ गाने पर और सी रामचंद्र की धुन पर पद्मिनी और वैजयंती माला द्वारा शास्त्रीय नृत्य का बेहतरीन प्रदर्शन है .
कक्कू मोरे और हेलेन - 1958 की फिल्म ‘ यहूदी ‘ का गाना ‘ बेचैन दिल खोयी सी नजर … ‘ का गाना जिसे शंकर जयकिशन के निर्देशन में लता और गीता दत्त ने गाया था . इस गाने पर उस समय की दो मशहूर डांसर कक्कू मोरे और हेलेन ने अच्छे नृत्य का प्रदर्शन किया था . फिर इसी साल की फिल्म ‘ चलती का नाम गाड़ी ‘ के गाने “ हम तुम्हारे हैं जरा घर से निकल कर देखो … “ पर भी उन दोनों का अच्छा डांस था .
शीला वाज़ और मीणा फर्नांडीस - 1958 की फिल्म ‘ परवरिश ‘ के सुधा मल्होत्रा और आशा भोंसले के गाये गाने ‘ जाने कैसा जादू किया रे … ‘ पर शीला वाज़ और मीणा फर्नांडीस ने अच्छा नृत्य किया था . इस गाने की धुन एन दत्ता ने बनायी थी .
जयश्री गडकर और कंचन - 1959 की फिल्म ‘ मदारी ‘ में “ अकेली मोहे छोड़ न जइयो … “ गाने
पर जयश्री गडकर और कंचन का एक अच्छा नृत्य था . जयश्री गडकर अपने समय की विख्यात नृत्यांगना थी . इस गाने को लता मंगेशकर और कमल बारोट ने कल्याणजी आनंदजी के संगीत निर्देशन में गाया था .
त्रावणकोर बहनें पद्मिनी और रागिनी - 1960 की फिल्म कल्पना - रफ़ी और मन्ना डे के सुर में गाये ‘ तू है मेरा प्रेम देवता ‘ में त्रावणकोर बहनें पद्मिनी और रागिनी का शास्त्रीय नृत्य का अनोखा प्रदर्शन है . इस फिल्म में संगीत ओ पी नैयर ने दिया था हालांकि उनके संगीत में शास्त्रीय नृत्य विरले ही मिलेंगे.
इसी फिल्म का अन्य युगल नृत्य ‘ अस्सलाम वालेकुम .. ‘ गाने पर भी दोनों बहनों का अच्छा नृत्य है पर वह भांगड़ा स्टाइल में है . इसके अतिरिक्त ‘ बेकसी हद से जब गुजर जाए … ‘ ; ‘ हमें मारो न नैनो के बाण … ‘ और ‘ मैं खिड़की पे आऊंगी … ‘ गानों पर पद्मिनीं का मुजरा एवं स्टेज सांग डांस भी है .
पद्मिनी और चंचल - 1960 की मशहूर फिल्म ‘ जिस देश में गंगा बहती है ‘ के गाने “ क्या हुआ ये मुझे क्या हुआ … “ पर पद्मिनी ने एक सुंदर और सुगम शास्त्रीय नृत्य पेश किया था . इस नृत्य में पद्मिनी का साथ सह अभिनेत्री चंचल ने दिया था . इस गाने को लता और आशा ने गया था और शंकर जयकिशन ने स्वरबद्ध किया था .
हेलेन और मीनू मुमताज़ - 1956 की फिल्म हलाकू में लता और आशा द्वारा गाये गाने - अजी चले आओ … पर हेलेन और मीनू मुमताज़ दोनों ने मिलकर अनोखा समकालीन नृत्य किया था . संगीत दिया था शंकर जयकिशन की जोड़ी ने .
हेलेन और मधुमती - “ हुज़ूरेवाला जो हो इजाजत तो … “ 1964 की फिल्म ‘ ये रात फिर न आएगी ‘ का मशहूर गाना था जिसका संगीत ओ पी नैयर ने दिया था और आशा और मीनू पुरुषोत्तम ने गाया था . इस गाने पर तत्कालीन दो मशहूर बॉलीवुड डांसर हेलेन और मधुमती ने यादगार डांस का प्रदर्शन किया था .
मधुमती और बेला बोस - 1963 की फिल्म ‘ आवारा अब्दुल्ला ‘ में मधुमती और बेला बोस ने गाना “ दिल है ज़ालिम निगाहों का मारा … “ पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया था . गायिका थीं आशा और उषा मंगेशकर और संगीत एन दत्ता ने दिया था .
जीवनकला और विजया चौधरी - 1963 की फिल्म ‘ जंतर मंतर ‘ के गाने “ एक दीवाना आएगा एक मस्ताना आएगा … “ पर जीवनकला और विजय चौधरी ने सराहनीय नृत्य का प्रदर्शन किया था . जीवनकला अपने समय की जानी मानी डांसर थीं . गायिका थीं आशा भोसले और कमल बारोट और संगीतकार सरदार मलिक
वैजयंती माला और माधवी - 1966 की फिल्म ‘ आम्रपाली ‘ में जब राज नर्तकी का चुनाव होना था आम्रपाली ( वैजयंती माला ) ने चुनौती स्वीकार कर दूसरी नर्तकी ( माधवी ) के साथ नृत्य प्रतियोगिता में भाग लिया . दोनों ने उत्तम नृत्य कला का प्रदर्शन किया है . इसके अतिरिक्त वैजयंती माला का एकल नृत्य ‘ नील गगन की छाँव में … ‘ आदि गानों ( संगीत - शंकर जयकिशन ) में भी उत्कृष्ट रहा है .
समाप्त
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