बॉलीवुड की गुमनाम डांसर 5
भाग - 5
नोट - इस श्रृंखला के पिछले भाग में बॉलीवुड फिल्मों में कुछ पुरानी गुमनाम डांसर पर चर्चा की गयी थी , अब कुछ और पुरानी डांसर के बारे में पढ़ें …
रानी
रानी का जन्म 27 जुलाई 1942 को कलकत्ता ( अब कोलकाता ) में हुआ था . रानी उनका स्क्रीन नेम था जबकि उनका वास्तविक नाम मुनव्वर सुल्ताना था . कम उम्र में रानी ने शास्त्रीय नृत्य कत्थक की शिक्षा ली थी और 10 साल की आयु से ही सोलो प्रस्तुति करने लगी . 13 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार बंगाली फिल्म में काम किया था . 1960 में वे बॉम्बे ( अब मुंबई ) चली गयीं और उसी साल करीम नाडियाडवाला की फिल्म “ नयी माँ “ में अभिनय किया .
बॉलीवुड में रानी करीब 15 वर्षों तक सक्रिय रही थीं , इस दौरान उन्होंने अनेक फिल्मों में गानों पर डांस किया था . वे सोलो और अन्य नर्तकी के साथ भी परफॉर्म करती थीं . उन्होंने स्टेज शो भी किया था . उनके कुछ प्रमुख डांस सॉन्ग्स इस प्रकार हैं -
1961 की फिल्म ‘ माया ‘ का डांस सॉन्ग। … जादू डाले है मचल मचल किसी की नजर …
रानी के समकालीन प्रसिद्ध डांसर मधुमती के साथ 1963 की दो फिल्मों के सदाबहार डांस सॉन्ग हैं - ‘ शिकारी’ में - मांगी हैं दुआएं हमने सनम …. और फिल्म ‘ कोबरा गर्ल ‘ का गाना - निगाहों से दिल का सलाम ….
1966 की फिल्म ‘ दिल दिया दर्द लिया ‘ का मशहूर डांस सॉन्ग - दिल हारने वाले और भी हैं … और उसी साल की फिल्म ‘ फूल और पत्थर ‘ का गाना - लाई है हजार रंग होली …
1966 की ही फिल्म ‘ ठाकुर जरनैल सिंह ‘ का डांस सॉन्ग - काहे छेड़े मोहे … और उसी साल की फिल्म ‘ जिम्बो का बेटा ‘ का सॉन्ग - मेरी जान यूँ ही रहो …
1965 की मूवी ‘ एक सपेरा एक लुटेरा ‘ का डांस गाना …. ये दिल फरेब सूरत ….
1964 की फिल्म ‘ आया तूफान ‘ का गाना - तोहार नाम लेई के छोड़ा है जमाना
1964 की फिल्म ‘ गंगा की लहरें ‘ का गाना - बैरी बिछुआ बड़ा दुःख …
1964 की फिल्म ‘ बादशाह ‘ का – आँखों में तुम हो समाये
1964 की फिल्म ‘ फिर वही दिल लाया हूँ ‘ में आशा पारेख के साथ - देखो बिजली डोले बिन बादल की ….
1965 की फिल्म जानवर का गाना - आँखों आँखों में किसी से बात हुई …
1974 की फिल्म ‘ पत्थर और पायल ‘ में रानी ने अंतिम बार सोलो डांस किया था , गाना था - तोहे लेने मैं आई सांवरिया ….
रानी स्वभाव से मधुर और नेक दिल इंसान थीं . उनकी निम्न घटना इस बात का प्रमाण है -
घटना की तिथि ज्ञात नहीं है पर 1965 का मध्य रहा होगा . बिहार की राजधानी पटना के समाचार पत्र में पटना के ‘ रविंद्र सदन ‘ हॉल में बॉलीवुड डांसर रानी का शो है और उसके लिए टिकट फलां जगह से बुक कर सकते हैं . भारी संख्या में लोगों ने एडवांस टिकट ख़रीदा था . शो का समय संध्या थी पर लोग समय से पहले ही पहुँचने लगे थे . हॉल तो बंद था , वहां सिर्फ दरवान मौजूद था . उसने कहा कि रानी या किसी भी डांसर का कोई प्रोग्राम यहाँ नहीं है . लोग मानने को तैयार नहीं थे और तोड़ फोड़ की नौबत आ रही थी . कुछ देर में हॉल का मैनेजर पुलिस के साथ आया और उसने भी लोगों को समझाया और कहा “ यहाँ किसी के डांस का कोई प्रोग्राम नहीं है . आपके साथ किसी अपराधी गैंग ने धोखाधड़ी की है . प्लीज आपलोग शांति से हॉल परिसर से बाहर चले जाएँ . “ पर भीड़ मानने वाली कहाँ थी , भीड़ ने आगजनी की धमकी तक दी . उधर पुलिस ने अपने सूत्रों से पता लगाया कि रानी पटना के प्रिंस होटल में ठहरी हैं . उनसे संपर्क करने पर रानी ने कहा “ मेरे साथ पटना में कहीं भी किसी शो का कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं है और न ही मैंने इसके लिए एक पैसा लिया है . मैं नेपाल जा रही हूँ , रास्ते में कुछ घंटों के लिए पटना में रुकना पड़ा है . “
पुलिस ने पुनः लोगों को रानी की बात बताते हुए समझाया और कहा “ अब यहाँ रुकने से कोई लाभ नहीं है , आपलोग कृपया परिसर खाली करें . “
भीड़ ने कहा “ जब रानी शहर में मौजूद हैं तब उन्हें यहाँ बुलाया जाय . हम उन्हें देखना और उनके मुंह से सुनना चाहते हैं . “
पुलिस से बहुत मिन्नत कर रानी को पुलिस सुरक्षा दे कर हॉल में बुलाया . रानी ने दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा “ पटना वासियों को रानी का नमन है . मेरे नृत्य के प्रति आपकी रूचि देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई है , इसके लिए बहुत शुक्रिया . पर यकीन करें पटना में मेरे किसी शो का कोई प्रोग्राम नहीं है . किसने यह शरारत की है मुझे नहीं पता है पर मैंने किसी शो के लिए एक पैसा भी नहीं लिया है . आपके साथ छल हुआ है जिसके लिए मुझे खेद है . हालांकि मैं निर्दोष हूँ फिर भी आपको जो असुविधा हुई उसके लिए मुझे माफ़ करें और मुझे अब इजाजत दें . बाद में आप जब मुझे बुलाएंगे मैं दौड़ कर आऊंगी . “
पर लोग जाने के लिए तैयार नहीं थे और उनका कहना था ‘ जब यहाँ तक आप आ ही गयीं हैं तो बिना आपका डांस देखे हम नहीं जाने वाले हैं . ‘
रानी अपने साधारण लिबास , आम साड़ी में थीं . उन्होंने कहा “ मैं कैसे आपको समझाऊं ? न मैं इसके लिए तैयार हूँ ना ही हाल में ऐसी कोई तैयारी है . न स्टेज तैयार है न ही कोई लाइट , साउंड या म्यूजिशियन हैं . भला यह कैसे सम्भव है . “
लोग हल्ला कर रहे थे “ जैसे भी हो बिना तैयारी के भी आपका शो देखे बिना यहाँ से कोई नहीं जाएगा और हम आपको भी नहीं जाने देंगे . “
रानी , जनता , पुलिस और हॉल के अधिकारियों से बातचीत कर पुलिस ने फैसला सुनाई “ रानी इस बात पर सहमत हुई हैं कि रानी स्टेज पर अपने दो गानों पर डांस प्रस्तुत करेंगी . एक रिकॉर्ड प्लेयर पर उनका गाना होगा और बिना किसी तैयारी के वह अपना नृत्य प्रस्तुत करेंगी . हम रानी के आभारी हैं . आप शांतिपूर्वक हॉल में स्थान ग्रहण करें और समाप्ति पर शांतिपूर्वक प्रस्थान करें . “
इस तरह रानी के बड़प्पन से इस समस्या का शांतिपूर्वक समाधान हुआ .
लगभग 15 वर्षों तक बॉलीवुड में काम करने के बाद रानी के पैर सुन्न ( numb ) होने लगे थे और वे नृत्य करने में सक्षम नहीं रहीं थीं . ऐसे में उनके मित्र और मशहूर नर्तक गोपीकृष्ण ने उन्हें अपने सहायक के तौर पर काम करने के लिए कहा .
बाद में रानी मुंबई के मीरा रोड स्थित ‘ कायनात ‘ ओल्ड ऐज होम में रहने लगीं . जून 2024 तक वे कायनात में जिन्दा थीं . उसके बाद का निश्चित पता नहीं है .
पद्मिनी प्रियदर्शिनी - पद्मिनी प्रियदर्शिनी ( जो बाद में पद्मिनी रामचंद्रन नाम से जानी गयीं ) ने मूलतः तमिल और कन्नड़ फिल्मों में काम किया था . वे एक कुशल नर्तकी थीं और उन्होंने कुछ हिंदी फिल्मों में भी अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन बेहतरीन किया था . 1963 की राज कपूर की फिल्म ‘ दिल ही तो है ‘ का डांस सांग - लगा चुनरी में दाग … अविस्मरणीय है . गाना और उस गाने पर पद्मिनी का डांस भला कोई कैसे भूल सकता है .
पद्मिनी प्रियदर्शिनी ने इसके पहले 1958 की फिल्म ‘ लाजवंती ‘ का गाना - आजा नैन कजरारे …. और 1959 की फिल्म ‘ दो बहनें ‘ में भी नृत्य किया था और उनका लावणी नृत्य बहुत सराहनीय था .
क्रमशः