कमरा नंबर 17 Bittu Jain द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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कमरा नंबर 17

रात के ठीक बारह बजे अनन्या के फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।

कमरा नंबर 17 मत खोलना।

अनन्या ने मैसेज पढ़ा और फोन एक तरफ रख दिया।

उसे लगा किसी ने मजाक किया है।

वह जिस पुराने हॉस्टल में रहने आई थी, वहां कुल सोलह कमरे थे।

कमरा नंबर 17 था ही नहीं।

अगली सुबह उसने वार्डन से इस बारे में पूछा।

मैडम, यहां कमरा नंबर 17 है क्या?

वार्डन का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।

किसने बताया तुम्हें?

किसी ने नहीं। रात को एक मैसेज आया था।

वार्डन कुछ पल उसे देखती रही।

फिर बोली,

अगर दोबारा ऐसा मैसेज आए तो मुझे बताना। खुद से कुछ मत करना।

लेकिन कमरा नंबर 17 है कहां?

वार्डन ने कोई जवाब नहीं दिया।

उस दिन से अनन्या के मन में वही सवाल घूमता रहा।

शाम को जब वह अपनी सहेली रिया के साथ हॉस्टल की पुरानी बिल्डिंग देखने गई, तो उसे सीढ़ियों के पीछे एक लोहे का दरवाजा दिखाई दिया।

दरवाजे पर धूल जमी थी।

ऊपर एक छोटी-सी प्लेट लगी थी—

"17"

अनन्या का दिल तेजी से धड़कने लगा।

रिया…

रिया ने दरवाजा देखा और तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।

चल यहां से।

लेकिन यही तो कमरा नंबर 17 है।

रिया उसे वहां से लेजाते हुए बोली मुझे नहीं पता। बस चल।

दोनों वापस लौट आईं।

उस रात ठीक बारह बजे फिर फोन पर मैसेज आया।

तुमने मुझे देखा।

अनन्या के हाथ कांपने लगे।

उसने जवाब लिखा—

तुम कौन हो?

कुछ सेकंड बाद उत्तर आया।

जिसे तुम कल खोलोगी।

अनन्या ने फोन बंद कर दिया।

लेकिन नींद उसकी आंखों से कोसों दूर थी।

रात करीब दो बजे उसे गलियारे से किसी के चलने की आवाज सुनाई दी।

धीरे-धीरे…

ठक… ठक… ठक…

आवाज उसके कमरे के सामने आकर रुक गई।

अनन्या ने सांस रोक ली।

दरवाजे के नीचे से किसी की परछाईं दिखाई दे रही थी।

वह परछाईं कुछ सेकंड वहीं खड़ी रही।

फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ गई।

अनन्या ने राहत की सांस ली।

सुबह होते ही वह वार्डन के पास पहुंची।

मैडम, रात को कोई मेरे कमरे के बाहर आया था।

वार्डन ने घबराकर पूछा,

उसने दरवाजा खटखटाया?

अनन्या ने बोला, नहीं।

वार्डन ने फिर पूछा...तो तुमने उसे देखा?

अनन्या ने जवाब दिया, सिर्फ परछाईं।

वार्डन ने आंखें बंद कर लीं।

फिर बहुत धीमी आवाज में बोली,

वो फिर लौट आई है।

अनन्या ने पूछा,

कौन?

वार्डन ने जवाब दिया,

सत्रह साल पहले इस हॉस्टल में एक लड़की रहती थी। उसका कमरा नंबर 17 था।

एक रात वह अचानक गायब हो गई।

अनन्या ने पूछा...

मिली नहीं?

वार्डन ने सिर हिलाया।

नहीं।

तो कमरा बंद क्यों कर दिया?

वार्डन ने अनन्या की आंखों में देखा।

क्योंकि उसके गायब होने के बाद कमरे में रहने वाली हर लड़की ने एक ही बात कही थी।

क्या?

रात को कोई दरवाजा खोलने के लिए कहता था।

अनन्या के चेहरे का रंग उड़ गया।

उसी रात वह अपना सामान पैक करके जाने वाली थी।

लेकिन जैसे ही उसने बैग उठाया, उसके फोन पर फिर मैसेज आया।

तुम्हें सच जानना है?

अनन्या ने कुछ नहीं लिखा।

फिर दूसरा मैसेज आया।

कमरा खोलो।

उसने फोन फेंक दिया।

तभी कमरे की लाइट बंद हो गई।

पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

और उसी अंधेरे में उसे किसी लड़की की आवाज सुनाई दी—

अनन्या…

वह जम गई।

आवाज फिर आई।

दरवाजा खोलो…

अनन्या ने कांपते हुए कमरे का दरवाजा खोला।

गलियारा खाली था।

लेकिन सामने वाली दीवार पर लाल रंग से लिखा था—

"17"

वह पीछे हटने लगी।

तभी उसके पीछे से किसी ने फुसफुसाकर कहा,

बहुत देर कर दी।

अनन्या ने पलटकर देखा।

सामने एक लड़की खड़ी थी।

सफेद कपड़े…

भीगे हुए बाल…

और चेहरा बिल्कुल पीला।

अनन्या चीखने ही वाली थी कि लड़की ने अपनी उंगली होंठों पर रख दी।

शोर मत करना।

अनन्या ने घबराकर पूछा, तुम… कौन हो?

लड़की ने धीरे से कहा,

मैं वही हूं… जिसे सत्रह साल पहले सबने गायब समझ लिया था।

अनन्या डरते हुए बोली,

तुम्हारे साथ क्या हुआ था?

लड़की ने पीछे बने पुराने दरवाजे की तरफ देखा।

मुझे यहां बंद किया गया था।

किसने?

लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया।

बस कहा,

कमरा खोलो।

अनन्या ने कांपते हाथों से ताला खोला।

दरवाजा खुलते ही कमरे से सड़ी हुई गंध बाहर आई।

अंदर एक पुरानी अलमारी थी।

अनन्या ने उसे खोला।

अंदर एक डायरी पड़ी थी।

उसने डायरी उठाई।

पहले पन्ने पर लिखा था—

अगर कोई यह डायरी पढ़ रहा है, तो समझ लेना कि मेरी मौत हादसा नहीं थी।

अनन्या के हाथ कांपने लगे।

अगले पन्नों में उस लड़की ने लिखा था कि हॉस्टल का पुराना चौकीदार रात में लड़कियों के कमरे में घुसता था।

उस लड़की ने उसे देख लिया था।

इसलिए चौकीदार ने उसे कमरा नंबर 17 में बंद कर दिया था।

और अगले दिन सबको बता दिया कि लड़की भाग गई।

अनन्या ने डायरी बंद कर दी।

तुम्हें इंसाफ चाहिए?

लड़की ने सिर हिलाया।

बस मेरी डायरी वार्डन को दे देना।

अनन्या ने पीछे देखा।

लेकिन वहां कोई नहीं था।

सिर्फ खाली कमरा था।

सुबह उसने डायरी वार्डन को दे दी।

वार्डन ने डायरी देखते ही पहचान लिया।

उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े।

मैं जानती थी… एक दिन सच सामने आएगा।

पुलिस को बुलाया गया।

कमरे की पुरानी दीवार तोड़ी गई।

और उसके पीछे से इंसानी हड्डियां बरामद हुईं।

हॉस्टल हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।

कुछ महीनों बाद अनन्या वहां से बहुत दूर चली गई।

लेकिन जाते समय उसने आखिरी बार पीछे मुड़कर उस पुरानी बिल्डिंग को देखा।

ऊपर की मंजिल की खिड़की में वही लड़की खड़ी थी।

उसने मुस्कुराकर हाथ हिलाया।

अनन्या ने भी हाथ हिलाया।

तभी उसके फोन पर एक आखिरी मैसेज आया—

अब कमरा नंबर 17 हमेशा के लिए बंद है।

अनन्या ने राहत की सांस ली।

फिर उसके फोन पर दूसरा मैसेज आया।

लेकिन कमरा नंबर 18 खुल चुका है।

अनन्या के चेहरे से मुस्कान गायब हो गई।

उसने धीरे से पीछे देखा।

जिस होटल में वह उस रात ठहरी थी…

उसके कमरे के बाहर लिखा था—

"18"



अगर आप इस कहानी का अगला हिस्सा पढ़ना चाहते हैं, तो कमेंट करके जरूर बताइए… क्या अनन्या के कमरे नंबर 18 में भी कोई राज छिपा है?