अधूरी ख्वाहिश Bittu Jain द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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अधूरी ख्वाहिश

कभी-कभी जिंदगी में कुछ लोग बहुत कम समय के लिए आते हैं, लेकिन अपने पीछे ऐसी यादें छोड़ जाते हैं जिन्हें भुलाना आसान नहीं होता।
मीरा रोज़ उसी पुराने रास्ते से कॉलेज जाती थी। रास्ते में एक छोटी-सी चाय की दुकान थी, जहाँ आरव अक्सर बैठा किताब पढ़ता रहता था। दोनों की पहली मुलाकात सिर्फ एक मुस्कान से हुई थी।
धीरे-धीरे वह मुस्कान बातचीत में बदल गई और बातचीत एक खूबसूरत रिश्ते में।
आरव हमेशा कहता था,
“मीरा, कुछ रिश्तों को नाम देना जरूरी नहीं होता, बस उन्हें दिल से निभाना जरूरी होता है।”
मीरा उसकी बात सुनकर मुस्कुरा देती।
लेकिन जिंदगी हमेशा हमारी ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं चलती।
एक दिन आरव को शहर छोड़कर जाना पड़ा। जाने से पहले उसने मीरा से कहा,
“मैं वापस जरूर आऊँगा।”
मीरा ने उसका इंतज़ार किया... एक दिन, एक महीना और फिर पूरा साल।
आरव नहीं आया।
कई साल बाद उसी चाय की दुकान के पास से गुजरते हुए मीरा को एक पुरानी डायरी मिली। उसके पहले पन्ने पर लिखा था—
“कुछ लोग जिंदगी से दूर चले जाते हैं, लेकिन दिल से कभी नहीं जाते।”
मीरा की आँखों में आँसू आ गए।
उसने डायरी बंद की और आसमान की ओर देखते हुए मुस्कुरा दी।
कुछ ख्वाहिशें पूरी नहीं होतीं...
लेकिन जिंदगी को खूबसूरत बनाने के लिए उनका अधूरा रहना भी जरूरी होता है। 
आरव के सामने खड़े होते ही मीरा के मन में पुराने सारे सवाल वापस आने लगे। वह कुछ कहना चाहती थी, लेकिन शब्द जैसे कहीं खो गए थे।
आरव ने धीरे से कहा,
“मुझे पता है मैंने तुम्हें बहुत इंतजार करवाया। शायद तुमने मुझे कभी माफ भी नहीं किया होगा।”
मीरा कुछ पल चुप रही। फिर बोली,
“मैंने तुम्हारा इंतजार जरूर किया था, लेकिन जिंदगी को रोककर नहीं रखा।”
आरव उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया।
“शायद इसी बात ने मुझे वापस आने की हिम्मत दी,” उसने कहा।
मीरा ने हैरानी से उसकी ओर देखा।
आरव ने बताया कि शहर जाने के बाद उसकी जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई थी। नौकरी चली गई, परिवार की जिम्मेदारियाँ बढ़ गईं और वह खुद को संभालने में लग गया। कई बार उसने मीरा से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन हर बार उसे लगा कि शायद मीरा अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी होगी।
“मैं तुम्हें अपनी परेशानियों में वापस नहीं खींचना चाहता था,” आरव ने कहा।
मीरा की आँखों में आँसू आ गए।
“तुम्हें पता है, सबसे ज्यादा दुख तुम्हारे जाने का नहीं था। दुख इस बात का था कि तुमने मुझे अपनी परेशानी का हिस्सा बनने लायक भी नहीं समझा।”
आरव के पास कोई जवाब नहीं था।
कुछ देर दोनों खामोश रहे।
फिर आरव ने कहा,
“क्या हम फिर से शुरुआत कर सकते हैं?”
मीरा ने उसकी ओर देखा। इस बार उसकी आँखों में इंतजार नहीं, बल्कि एक सुकून था।
वह मुस्कुराई और बोली,
“शुरुआत वहीं से करेंगे जहाँ कहानी अधूरी छूटी थी... लेकिन इस बार एक-दूसरे से कुछ छुपाएँगे नहीं।”
उस रात दोनों ने महसूस किया कि प्यार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं है। प्यार वह भरोसा है, जिसमें दो लोग अपनी खुशियों के साथ अपनी परेशानियाँ भी एक-दूसरे से बाँट सकें।
कभी-कभी जिंदगी हमें हमारी पसंद की चीज देर से देती है, लेकिन शायद इसलिए देती है ताकि हम उसकी कीमत पहले से ज्यादा समझ सकें।
मीरा की अधूरी ख्वाहिश आखिर पूरी हो गई थी। ❤️