खबर है कि मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल के द्वारा निर्मित 45 करोड़ के शीशमहल को दिल्ली सरकार के द्वारा गेस्ट हाउस बनाने का फैसला लिया गया है। जबकि पहले इस शीशमहल को म्यूजियम बनाने की खबरें उड़ रही थी और आम आदमियों केे लिए खोलने की बातें हो रही थी।
जो भी हो, नवपदस्थ दिल्ली सरकार को चाहिए कि वह पहले आम आदमी के नेताओं के कारनामों को सिरे से उजागर करे। उसको कोर्ट के कटघरे में खड़ा करवाए और उनका साथ देनेवाले उन सब लोगों पर शिकंजा कसे, जो शीशमहल की लूट में शामिल दिखाई देते हैं।
अर्थात शीश महल बनाने का परमिशन देनेवाले ऑफिशियल्स और उसको निर्मित करनेवाले पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों व इंजीनियरों को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।
तभी दिल्ली की जनता को न्याय मिलेगा। वहीं, देश की जनता जानना चाहती है कि शीशमहल की जांच रिपोर्ट का हुआ क्या और मिलीभगत करनेवाले भ्रष्टों को कैसी सजा मिली?
दिल्ली की जनता के द्वारा आप को नकार कर बीजेपी को सत्ता में बिठाने का मकसद यही था कि धूर्तो को सत्ता से बाहर किया जाए और उनसे पाई-पाई की वसूली की जाए।
अफसोस कि रेखा गुप्ता की सरकार बने डेढ़ साल से अधिक हो चुके हैं और अभी तक कुछ खास प्रगति जांच के मामले में नहीं हुई है। जबकि दिल्ली में सत्ता परिवर्तन बेईमानों को सजा दिलाने के लिए दिल्ली की जनता ने किया है।
आम आदमी के नाम से पार्टी बनानेवाले; सत्ता में आने पर कोई सुख-सुविधा न लेने के लिए अपने बच्चों तक की कसमें खानेवाले और अपनेआप को कट्टर ईमानदार कहनेवाले का कच्चा चिट्ठा खुल चुका है।
उसके द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद (जबकि नैतिकता का तकाजा था कि उसको यही काम जेल जाने के तुरंत पश्चात करना चाहिए था) उसकी भोग व विलासिता की परतें उघड़ चुकी हैं।
दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग ने जब शीशमहल में विधिसम्मत तरीके से जांच-पड़ताल की, तब वहां 8 बैडरूम, 2 रसोईघर, 12 टॉयलेट, 3 मीटिंग हॉल, 24 सोफासेट, 76 टेबल, 45 कुर्सियां, लाखों रुपये के एक-एक परदे, आटोमैटिक दरवाजे, मार्बल के बेशकीमती पत्थर मिले।
इतना ही नहीं, 45 करोड़ के शीशमहल में 50 इनडोर एयर कंडीशनर, 250 टन क्षमतावाला सेंट्रल एसी प्लांट समेत 29 लाख रुपये का 88 इंची टीवी मिला।
10 साल पहले जब शीला दीक्षित से दिल्ली की गद्दी इसको हथियानी थी, तब इनने स्वर्गीय शीला दीक्षित पर जमकर आरोप लगाया था और प्रोपेगैंडा फैलाया था, ‘‘10-10 एसी लगाकर शीला दीक्षित जनता की कमाई की लूट कर रही हैं.’’
बावजूद इसके कांग्रेस इसके साथ गलबहियां करती रही और इसकी शानोशौकत पर चुप्पी साधी रही।
आखिर कांग्रेस ऐसे फर्जीवालों से दोस्ती करके अपने पैरों पर आप कुल्हाड़ी क्यों मारती रहती है? कांग्रेस के लिए यह सुनहरा मौका था कि आम आदमी के नाम से बनी पार्टी के साथ गठबंधन तोड़ देते और उसके खिलाफ जबरदस्त आंदोलन खड़ा करते, ताकि अपना खोया हुआ जनाधार हासिल कर सके. जिसको हड़प कर महाशय दिल्ली को लूट का अड्डा बना लिए थे।
विचारणीय पहलू यह भी कि भारत में क्या किसी आमजन के पास ऐसी शाही चकाचौंध हो सकती है, जिसके नाम पर पार्टी बनाकर इन घोटालेबाजों ने जनता को उल्लू बनाया?
इससे क्या दिल्ली की जनता को चेतना नहीं चाहिए और रेखा गुप्ता की सरकार से मांग नहीं करनी चाहिए कि पहले शीशमहल का हिसाब-किताब सार्वजनिक किया जाए, फिर उसको गेस्टहाउस बनवाया जाए।
आखिर ऐसी राजशाही जनता के साथ धोखा, मक्कारी व गद्दारी नहीं, तो और क्या है?
करीबी मंत्री के द्वारा झटका--
यही वजह है कि ऐन विधानसभा चुनाव के पूर्व दिल्ली सरकार में मंत्री रहे कैलाश गहलोत ने न केवल मंत्रीपद से त्यागपत्र दे दिया था, वरन् उसने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दिया था।
कैलाश गहलोत उन करीबी मंत्रियों में-से एक थे, जो ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन के समय से आप से जुड़े थे.
उन्होंने पार्टी संयोजक केजरीवाल को लिखे पत्र में कहा है-
1. राज्य सरकार केंद्र के साथ झगड़े में समय बरबाद कर रही है.
विशेष टीप-आरोप एकदम दुरुस्त है। केजरीवाल जब आंदोलनजीवी था, तब केंद्र व दिल्ली राज्य में कांग्रेस की सरकारें थीं। वह कांग्रेसियों के पीछे पड़ा हुआ था और सोनिया गांधी सहित उनके टॉप लीडर्स की जमकर पोल खोल रहा था। जब सत्तासीन हो गया, तब वह सुबह-शाम भाजपानीत एनडीए से झगड़ा करने में वक्त जाया करता रहता था।
2. दिल्लीवासियों से की गई प्रतिबद्धता पर व्यक्तिगत स्वार्थ भारी पड़ रहा है.
विशेष टीप-तब दिल्ली में एक बोतल के बदले एक बोतल फ्री कर दिया गया था और दिल्ली को नशे के समुंदर में ढकेलकर केजरीवाल शराब घोटाले के आरोप में खुद जेल चला गया था। उसके ऊपर मोहल्ला क्लिनिक व शिक्षानीति में फर्जीवाड़े के आरोप भी लगे हैं।
3. आप सरकार यमुना को साफ नहीं कर सकी। स्थिति यह कि वह पहले से अधिक गंदी हो गई है।
विशेष टीप-केजरीवाल ने यमुना को साफ करने का वादा पहले सरकार के दौरान करते हुए कहा था,‘‘मेरे अगले कार्यकाल में यमुना इतनी साफ हो जाएगी कि लोग उसमें नहाएंगे ही नहीं, उसका पानी सीधे पी सकेंगे.’’ यमुना का जल उसके पदच्युत होते तक नहाना तो दूर आचमन लेने के काबिल नहीं रह गया था। वह पूर्णतया जहरीला बन चुका है। जबकि इसकी साफ-सफाई पर 7500 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
4. केजरीवाल को मुख्यमंत्री रहते अपने सरकारी आवास की साज-सज्जा पर 45 करोड़ रुपया खर्च करने की क्या जरूरत थी? (इस मुद्दे पर टीप ऊपर दी जा चुकी है.)
5. आप सरकार अपनी रीति-नीति से भटक गई है.
विशेष टीप-केजरीवाल पहले बंगला, गाड़ी, नौकर-चाकर न लेने, साफ-सुथरी सरकार देने व कांग्रेस से कोई समझौता न करने का वादा कर सत्ता में आया था, फिर जब सत्ता की लत लग गई, तब वह अपनी रीति-नीति को कुड़ेदान में फेंक दिया.
शुक्र है कि गहलोत के ज्ञानचक्षु बाद में खुले; वरना बीजेपी, कांग्रेस जैसी पार्टियां व आम जनता ऐसे ही सवाल केजरीवाल एंड कंपनी से दिनों, महीनों नहीं, बरसों से कर रही है.
यही वजह है कि उसके बहुतेरे साथी, जिसमें प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, आशुतोष राणा, कुमार विश्वास, शाजिया इल्मी, कपिल मिश्रा और अब राघव चड्डा सरीखे लोग उसकी पार्टी छोड़कर उसको बाय-बाय कर चुके हैं।
कैलाश गहलोत के मामले में आप पार्टी के बड़बोले प्रवक्ता सामने आए थे और सोची-समझी रणनीति के तहत गहलोत पर उल्टे आरोप मढ रहे थे कि वह ईडी, सीबीआई व इनकम टैक्स के छापों से डरकर ऐसा कदम उठाया है।
लेकिन, इन चाटूकारों ने अपने गिरेबान में कभी नहीं झांका, न केजरीवाल को सलाह दिया कि हम अपने अंतस में झांके तो सही कि हम क्या से क्या हो गए?
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