जिंदगी की दूसरा किनारा 32
और वहीं दूसरी तरफ में मेघना की दुनिया में
मेघना कमरे मे अब भी चादर तान के
और बॉडी को सिकोड़ते हुए लेटी हुई
अपने सामने दीवार पर लगी हुई आईने की तरफ देखते हुए
और शिसक शिसक कर हल्की गहरी सांस लेते हुए
और सोच में पढ़ते हुए
और तभी अचानक चलते हुए
रिया आकर
मेघना के दरवाजे के पास खड़ी होती है
और हाथ उठाकर हाथों को मोड़ते हुए
उल्टी उंगलियों से मेघना के दरवाजा नो करते हुए
हल्के ऊंची आवाज में कहती है
मेघना दी उठुए
और आकर खाना खा लीजिए
और
वही मेघना उसकी बातें सुनती है
और कोई प्रति क्रिया नहीं देती
उसके ध्यान आप तलाक
सामने दीवार पर लगी हुई आईने पर है
और वही रिया
यह कहते हुए
और दरवाजा खटखटाते हुए
अचानक से दरवाजे पर से अपने हाथ को हटाकर
नीचे करते हुए
मुर कर तुरंत ही लोभी की तरफ लौट जाती है
और लौटते हुए ऊंची आवाज में कहती है
नहा कर जल्दी बाहर आई
और वहीं दूसरी तरफ
वीर की दुनिया में सुबह-सुबह तने समय तक भी
वीर
अब तलक
अपने कमरे में चेयर पर बैठते हुए
चुपचाप सीधे अपने पांव नीचे रखते हुए
थोड़ी तिरछी होकर सर पर अपने दाएं हाथ रखकर
अपनी गहरी गहरी नजरें
अपने सामने टेबल पर रखें हुए
अपने प्रोजेक्ट के 3D मैप को डालते हुए
और उसके आंखें देख कर ऐसा लग रहा है कि
वह रात भर सोया भी नहीं है
वह रात से लेकर अब तक वैसे ही बैठा हुआ है
और वह अपने पिता को रात को अपने 3G मेप दिखाई नहीं पाया
उसकी हिम्मत ही नहीं हुई कि
दोबारा वो जाए
और उन्हें दिखाएं अपनी प्रोजेक्ट को
वह गहरी सोच में डूबा हुआ है
अपने माता और पिता कि रिश्तो को लेकर
और वही नीचे आंगन में
दामिनी देववर्मा डाइनिंग टेबल के पास खड़ी है
और वहीं कुछ नौकर इस डाइनिंग टेबल पर झुकते हुए
पर नाश्ते की प्लेट सजा रहे हैं
और वही डाइनिंग टेबल के पास सोफे की दूसरी साइड
हमेशा दामिनी देव वर्मा के साथ रहने वाला वह सिक्योरिटी गार्ड जिसकी उम्र 30 से 35 के बीच में है
वो वहा खड़ा है दोनों हाथ नीचे करते हुए
सीधे आगे की तरफ नजर करते हुए
और वही दामिनी देववर्मा के कान के पास हाथो में फोन है वह किसी से बात करते हुए शांत आवाज में कहती है
मैं बस कुछ देर में ही आ जाऊंगी
और वही कहते हुए दामिनी देववर्मा
फोन को मोड़कर फोल्ड करते हुए
अपने हाथ कान के पास से हटाते हुए नीचे लेते हुए
नजर घुमा कर सीडीओ की तरफ देखती है
वह अपने बेटे के नीचे आने के इंतजार कर रही है
उससे मिलने के लिए उसके कमरे में जाने की वजह
और
तभी अचानक सीरियल की दूसरी साइड से
तृषा चलते हुए उत्साह से भरी हुई चमकते हुए
आंखों के साथ
मुस्कुरा कर गुनगुनाते हुए
हल्की इधर-उधर एक स्टेटमेंट में मारते हुए
रिएक्ट करते हुए
अपनी मां की तरफ आ रही है
ना ना ना। ना। ना ना। ना
ना ना ना। ।ना
ना ना करके गुनगुनाते हुए
और वही दामिनी देववर्मा अपनी बेटी की तरफ देखते हुए
उसके गुनगुनाहट सुनकर
अपनी अकनी
हल्की नजर झुका कर उसकी बेहकती हुई कदमों की तरफ देखती है
और दामिनी देववर्मा तृषा की मुस्कुराहट
और उसके गुनगुनाहट को और उसकी बेहकती हुई
कदमों को देखकर समझ चुकी है
उसके मन में क्या चल रहा है
और तभी अचानक से दामिनी देववर्मा
तृषा की बेहकती हुई कदम देखते हुए
नजर उठाकर उसके चेहरे पर टिका देती है
और वही तृषा
मन में यह सोचकर
गुनगुनाते हुए आ रही है
कि वह अपने पिता को काहे की
भाई और उसे कहीं अपने साथ ले जाए
घूमने के लिए
वो
गुनगुनाते हुए
और खुश होकर इधर-उधर पांव मारते हुए
चली आ रही है
पर उसे नहीं पता कि
उसके रात को ही जा चुके हैं
और वही दामिनी देववर्मा अपनी बेटी को देखते हुए
उसके तरफ से अचानक से नजरे घूम कर
फिर से सीडीओ की तरफ देखने लगती है
और वही तृषा
गुनगुनाते हुए और मुस्कुराते हुए
जल्दबाजी में अपनी कदम बढ़ाते हुए
अपनी मां की तरफ आते हुए
अचानक से अपनी बेहकती हुई कदमों को
हल्के धीमा करते हुए
और नजरे उठाकर अपनी मां की तरफ देखते हुए
ऊंची आवाज में कहती है
मोम डैड कहाँ है
और वहीं दामिनी देववर्मा सीरियल की तरफ देखते हुए अचानक से अपनी बेटी की बात सुनकर
हल्के नजरे घूम कर शांत चेहरे के साथ
अपनी बेटी की तरफ देखती है
और अचानक अपनी बेटी की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए
हल्की शांत आवाज में कहती है
वह चलेगए हैं
और तभी यह सुनते ही
तृषा की चेहरा उतर जाती है
उसके आंखों से चमक गायब हो जाती है
और उसके होठों से हंसी भी
और उसके चलते हुए कदम
अचानक धीमा हो जाती है
और वो उदास होते हुए
अपनी नज़रें हॉकी झुका देती है
मन में सोते हुए की
डैड फिर क्यो चले गए बिना मिले
और वही दामिनी देववर्मा अपने बेटी को देखते हुए
कुछ सेकंड ठहर जाती है
और फिर कुछ सेकंडबाद
शांत और हल्की आवाज में कहती है
ठीक है तुम दोनों नासता कर लेना
और फिर अचानक से दामिनी हल्के नजरे घूम कर
सीडीओ की तरह देखते हुए
अपनी बेटी से आगे कहती है
अपने भाई को भी बुला लेना
उसकी आवाज इतनी ठंडी थी कि
तृषा को लगा ही नहीं की उसके मां
दोनों बच्चे को साथ खाने के लिए
और रहने के लिए कहे रहे हैं
ऐसा लगा कि हमेशा के तरह
वो बस ऑर्डर सुन रही है
और तभी तृषा अपनी मां की बातें सुनते हुए अचानक
उतरी हुई चेहरा और उदासी भरी नजर उठा कर
अपनी मां की तरफ देखी है
और उन्हें देखते हुए हल्की आवाज में कहती है
पर आप
और उसकी आवाज से ऐसा लगा कि
उसके अंदर की जोशी और गर्माहट
एक पल में खत्म हो गई हो
और तभी अचानक दामिनी देववर्मा
अपनी बेटी की बात सुनते हुए
हल्के नजर घुमा कर
अपने बेटी की तरह देखती है
और उन्हें देखते हुए
हल्की शांत भरी आवाज में कहती है
मुझे काम है
और
वही तृषा उदासी भरी नजर से
अपनी मां की तरफ देखती रहती
दोबारा कुछ नहीं कहती
बस वह अपने भाई को कह देंगे
इसलिए
अपनी मां की कहीं गई बातों में
हामी में सर हिला देती है
मन में कहते हुए
ठीक है
और वही दामिनी देववर्मा अपनी बेटी के चेहरा देखते हुए अचानक से मुरते हुए घूम कर
दूसरी साइट
और सोफे के पीछे कुछ कदम दूर खड़
सिक्योरिटी गार्ड को देखते हुए
हल्की और शांत आवाज में कहती है
सुनील तुम यही रहना बच्चों का ध्यान रखना
और वही वह सिक्योरिटी गार्ड दामिनी देव वर्मा की बात सुनते ही
अचानक से पलके उठा कर
हल्की नजरे घूमते हुए
दामिनी देववर्मा को देखते हुए
सहमति जताते हुए हल्की सर हिलाकर
हल्की ऊंची आवाज में कहता है
ठीक है मेंम
और वही दामिनी देववर्मा
सिक्योरिटी गार्ड को देखते हुए
और उसकी जवाब सुनकर
अचानक हल्की मुड़कर नजर उठाते हुए
अपनी बेटी की तरफ देखती है
और उसे देखते हुए
शांत और हल्की आवाज में कहती है
मैं जल्दी वापस आने की कोशिश करूंगी
और वही तृषा उदास चेहरे के साथ
हल्के नजर झुकते हुए
अपनी मां की तरह दिखती है
और उसकी बातें सुनती है
पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देती
और वही दामिनी देववर्मा कुछ सेकेंड तक
अपनी बेटी को देखते हुए
अचानक से
नजर घुमा कर सीडीओ की तरह देखती है
और फिर कुछ सेकंड तब सीरियल की तरफ देखते ही अचानक कुछ सेकेंड बाद
मुरते हुए अपनी कदम आगे बढ़ा लेता है
और फिर हल्के घूम कर सोफे की साइड
और सिक्योरिटी गार्ड के आगे से गुजरते हुए
चलते हुए आगे बढ़ जाती है
और
वहीं दूसरी तरफ वीर की पिता रुद्रनाथ देवराय
एक बांगो में
सेकंड फ्लोर पर कांच की दरवाजे और वाले कमरे में
आराम से बैठे हुए है
नजर झुकाए हुए
उसकी दोनों हाथ एक दूसरे हाथों की फिंगर से क्रॉस करते हुए बंधे हुए हैं
उसके सीने के सामने
और उसके उसके सामने छोटे से टेबल रखें हुए हैं
जिस पर उसके सामने है चेस की बोर्ड रखी हुई है
गोटिया के साथ
और लेफ साइड ग्रीन टी से भरी हुई गिलास
और वही उसकी नजर चेस के गोटियो में से
तिरछे भाग रही रानी पे है
और
वही उसके आगे टेबल की दूसरी साइड
उसके आसान खास आदमी खड़े हैं
जो उसके साथ ही ज्यादा रहते है
अरविंद जिसकी लगभग उम्र 35
अल्लाह के देखा जाए तो वह अभी तक यंग है
और वही बंगलो के बाहर खिड़की से दिख रही शानदार नजारा
शांत हरी-भरी धरती
सुबह की हल्की धूप
और बेंगलुरु से दूर दूर
सड़क पर हरी हरी धरती पर
जाते हुए घूमते हुए लोग दिख रहे हैं
और वही रुद्रनाथ अकेले ही चेस खेल रहा है
वह रानी पर नजर टिकाऐ हुए
अचानक से अपने बंदे हुए हाथों को
एक दूसरे से खोलते हुए
दाएं हाथ साइड करते हुए
बिना देखे अपने हाथ
बराकर टेबल पर रखी हुई ग्रीन टी की कब हल्के उठाता है
और अचानक दाएं हाथ नीचे करते हुए
गोटिया उठाने के लिए
चेस बॉर्ड पर रखी हुई
वो हाथ बड़ा
दाएं तरफ बीच के तिरछे रेखाओं से
ऊंट उठाते हुए
आगे तिरछे भागते हुए रानी को हिट करते हुए
निचे गिरा कर
अचानक से उठ को वहां रखता है
और बाई हाथों से ग्रीन टी की कब उठते हुए
अपने आगे लाता है
और फिर अचानक दाएं हाथ ऊठ को वहा रखते हुए
अपने हाथ उठाते हुए पिछे लेता है
और वही रूद्रनाथ अपने हाथों से
ग्रीन टी के कप उठा कर होठों पर रखता है
और वही उसकी खासि आदमी अरबिंद
नजर झुका कर उसके तरह देख रहा है
चुप चाप साथ होते हुए
वही रूद्रनाथ देवराय रानी को मार कर
चुपचाप सगुन से ग्रीन टी एक चुसकी लेटे हुए
होठों से कप को हटाते हुए हल्के साईड करता है
और फिर अचानक नीचे गिरी हुई रानी की तरफ देखता है
और रानी को देखते हुए
अचानक हल्की सी मुस्कुराता है
और वहीं दूसरी तरफ कुछ देर बाद मेघना की दुनिया में
मेघना
को समझ में आ चुका है कि वह घर में है
पर उसे घर आने की कुछ याद ही नहीं
वह अपने गीले बालों को अपना हाथों में लिए टावल से हल्के सर पर रखते हुए
और तिरछी सर करते हुए
बोलो की पानी टावलसे धिरे धिरे पोछते हुए
अपने कदम बड़ा कर अपने कमरे में निकल रही है
सोच में डूबते हुए
आखिर में कब घर आई
हां मुझे पता है कि
कल हम घर आने वाले थे
पर मुझे याद क्यों नहीं है
और तो और
आखिर सच क्या है
कल रात तो रिया ने पापा के बारे में बताया
और कुछ देर पहले ही मैंने कहा कि वह मर चुके हैं
पर वो केसे हैं
सपनो के जेसे या
और मेघना सोचते हुए
अपने धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हैं
अपने कमरे से बाहर आ रही है
और
लिविंग रूम में रिया और उसकी मां वैदेही
दोनों झुकते हुए अलग-अलग साइज से
अपने-अपने हाथ बढ़ाकर नाश्ते की प्लेट लिए
टेवल पर एक एक कर के
सही से टेवल पे रकते हुए सज रहे हैं
और एक दूसरे से हंस-हंसकर के बात कर रही
और वही रिया प्लीज दोनो हाथो से साइड रखते हुए
मुस्कुराते है अपनी मां से कहती है
जान सब कितने दिन के बाद हम
एक साथ खाएंगे
और वही वैदेही रिया की बात सुनते हुए
मुस्कुराते हुए हल्की हामी भारती है
हा
और वही मेघना अपने कमरे से बाहर निकलते हुए
अपनी मां की तरफ देखते हुए
अपने टावल वाले हाथ को नीचे करती है
टावल के साथ और सर को सीधे करते हुए
उतरी हुई चेहरा के साथ
अपनी मां से हल्की आवाज में कहती है
मॉम डैड कहां है
और तभी
यह सुनते ही अचानक वैदेही और रिया के हाथ खाने के प्लेट पर रुक जाती है
और वह दोनों वैसे ही ठहेर जाते हैं
और वही मेघना वही खड़ी हो कर
अपनी मां और बहन के तरफ न देखने लगती है
अपने जवाब इंतजार करते हुए
और वही वैदेही और रिया
ठहरते हुए कुछ सेकेंड बाद
हल्के नजर घुमा एक दुसरे को देखते हुए
अचानक दोनों प्लेट से अपनी हाथ आटाते हुए
सीधी होकर खड़ी होती है
और हैरानी के साथ नज़रें उठाकर मेघना की तरफ देखने लगती है
और तभी अचानक मेघना को अजीब लगती है
उन दोनों की हैरान और अजीब नजरें को देखते हुए
और वही पीछे लिविंग रूम में दक्षिण की तरह
आईने बगल में दीवार पर 5 फुट दूर अभीराज
की तस्वीर लगी हुई है
और उसके तस्वीर पर मौगरे की माला लगाई हुई है
और तभी अचानक मेघना अपनी मां बहन की तरफ देखते हुए उतरी हुई उदास चेहरे के साथ फिर से आगे ठेहराऊ भरी हल्की आवाज में कहती है
हां
मैं कब आया
यह याद नहीं है मुझे
पर मुझे डैड के बारे में भी कुछ ज्यादा याद नहीं है
मुझे लगता है
पर ऐसा क्यों
और
वही वह वैदेही और रिया दोनों खड़ी
हैरानी से मेघना की चेहरा देख रही है
और दोनों मन में सोच रही है
ऐ डैड के बारे में क्यों पूछ रही है
और
इसने ऐसा क्यों कहा
और
तभी मेघना अपने मां और बहन की तरफ देखते हुए
उनके हैरान परेशान चेहरा देखते हुए
अचानक से हल्की कदम आगे बढ़ती है
और गंभीर चेहरा लिए हल्की ऊंची आवाज में कहती है
अब मुझे घूरना बंद करेंगे
और बताएंगे की डैड कहां है
और वही वैदेही और रिया मेघना की बातें सुनकर
हैरानी के साथ मेघना को बस देखी जा रही है
बिना उनके सवालों की जवाब दिए
और वही मेघना को उन दोनों की बताओ समझ में नहीं आती
और वो उन दोनों की गहरी हुई चेहरे को देखकर
अचानक से मन में सोचते हुए
और चेहरे को सिकोड़ते हुए
और साथ में होठों को भी सीकोड़ते हुए
हल्की हॉट खोलकर खुद से कहती है
छोड़ो
और फिर अचानक अपनी कदम मोड़ते हुए
दूसरे उत्तर की साइट की कमरों की तरफ
नहाते हुए हल्की ऊंची आवाज में रिएक्ट करते हुए
कहती है
डैड
और तभी अचानक रिया मेघना को अपने पिता को पुकारते देख
हैरान होना छोड़
अचानक से चेहरे को सीकोड़ कर
झुनझुलाते हुए
हल्की आंखें बंद करती है
और आह भरते हुए
हां आ
अचानक पलके उठाती
और मेघना की तरफ देखते हुए
उसकी आंखें थोड़ी अजीब हो जाती है
हल्की गुस्से और फ्रस्ट्रेशन से भरी हुई
और वही मेघना उस कमरे की तरफ अपनी कदम बढ़ाते हुए और उदास चेहरे के साथ
अपने पिता को ऊंची आवाज में पुकारते हुए कहती है
डैड डैड
आप कहा हैं
डैड
और
तभी अचानक रिया मेघना को देखते हुए
गुस्से में
अचानक नजरे झुका कर खाने की मैच पर रखी हुई
गिलास की तरफ देखते है
और अचानक झुक जाती है
झुकते हुए अचानक अपने हाथ बढ़ाते हुए
मैच पर रखी हुई गिलास को उठाकर
सामने से दूसरी तरफ रखते हुए
शांत हल्की ऊंची आवाज में कहती है
कौन से डैड
तुम कौन से डैड के बारे में बात कर रही हो
डैड तो कब के मर चुके हैं
और तभी मेघना
यह सुनते ही अचानक से
कहते हुए
। डैड
अचानक उसकी आवाज धीमी होते हुए
ठेहर जाती है
उस कमरे की तरफ हल्के कदम बढ़ाते हुए
और वही अचानक वैदिक भी रिया की तरफ मुड़कर
हैरानी के साथ देखने लगती है
मन में सोचते हुए
की रिया ने ऐ क्यों कहा
अगर यह कहानी आप सबको अच्छी लगे तो
आगे पढ़ने रहिए
मिलते हैं नेक्स्ट एपिसोड में
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯