अब आगे ,
सिया और सुहानी ने सांझ को ले जाकर मंडप में बैठा दिया । पंडित जी ने शादी के मंत्र पढ़ने शुरू कर दिए। सांझ चेहरे पे बिना किसी भाव के आंखों में आसूं लिए भीगी पलकों से हवन कुंड की अग्नि की तरफ़ एक टक देखे जा रही थी , और सोच रही थी की इस अनचाही शादी को करने से अच्छा वो अपनी जान दे दे । लेकिन वो चाह कर भी कुछ नहीं सकती थी ।
कुछ देर बाद ,
" विवाह संपन्न हुआ आज से आप दोनों पति पत्नी हैं अब आप लोग सभी बड़ों का आशीर्वाद ले लीजिए । " पंडित जी ने कहा ।
ये सुनने के बाद सांझ को कुछ होश आया क्योंकि शादी की जो भी रस्में वो कर रही थी उसमें उसे कुछ होश ही नहीं था । वो तो बस एक कठपुतली बनकर रह गई थी और जो उससे कहा जा रहा था वो कर रही थी । इसीलिए जब पंडित जी की आवाज उसके कानों में पड़ी तब उसे होश आया । कुछ देर बाद सांझ की बिदाई की तैयारी होने लगी । अब वो समय भी आ गया जब वो इलाहाबाद छोड़कर अपने ससुराल बनारस जाने वाली थी ।
बैकग्राउंड म्यूजिक ,
लगी थी दुल्हन सजी थी
मेहँदी लगेगी दुल्हन सजेगी
आंसू छुपा के तेरा भाई हसेगा
डोली को कांधा देगा और ये कहेगा
तेरे साथ हूँ मैं ×3
जैसे जैसे बिदाई का वक्त करीब आ रहा था , वैसे वैसे एक एक कर के सांझ को उस के भाई के साथ बचपन में खेले गए खेल रक्षा बंधन लड़ना झगड़ना सब याद आ रहा था । बिदाई का समय आ गया सांझ और विक्रांत दोनों गले लग गए दोनों की आंखों में आसूं थे ।
वो भोले-भाले से खिलौने बुलाये
आ गुड़िया की फिर शादी रचाये
बचपन की बातें यादों में आये
बेफिक्रियों के मौसम बताये
मेहँदी लगी थी दुल्हन सजी थी
मेहँदी लगेगी दुल्हन सजेगी
आंसू छुपा के तेरा भाई हसेगा
डोली को कांधा देगा और ये कहेगा
तेरे साथ हूँ मैं …×3
सबकी आंखें नम हो गईं थीं , विक्रांत और सांझ दोनों आपस में गले लगे हुए थे । फिर दोनों अलग हुए और विक्रांत ने सांझ को जा कर शौर्य की गाड़ी में बैठा दिया ।
शौर्य के साथ बस उसके पापा गौरव सिंह राठौड़ ही आए थे । बाकी सब घर पर ही नई बहू के आने की तैयारी कर रहे थे । शौर्य के घर में उसकी मां नैना जी और छोटी बहन मीरा और उसकी दादी मां सरस्वती जी है ।
शौर्य सांझ कार की पैसेंजर सीट पे जाके बैठ गए और और गौरव जी ड्राईवर के साथ आगे वाली सीट पे जाके बैठ गए। दो से तीन घंटे के सफर के बाद वे लोग बनारस पहुंचे । सुबह के करीब साढ़े पांच बजे गाड़ी एक बड़ी सी हवेली के गेट के सामने आकर रूकी । पुरी राठौड़ हवेली फेरी लाइट्स और सुंदर रंग बिरंगे फूलों से सजी हुई थी । गौरव जी गाड़ी से उतर कर अंदर की ओर बढ़ गए ।
शौर्य और सांझ भी पीछे से गाड़ी से निकले सांझ ने लंबा सा घूंघट ले रखा था ऊपर से लहंगा भी काफ़ी भारी था । जिस से उसे चलने में काफी तकलीफ हो रही थी । जरी वाले घूंघट की वजह से उसे सामने का कुछ सही से दिखाई नहीं दे रहा था । तभी शौर्य को लगता है की सांझ को उसकी मदद की जरूरत है तो वो सांझ को ओर अपना हाथ बढ़ा देता है । सांझ कुछ देर सोचती है फिर अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसके हाथों में दे देती है , और एक हाथ से अपना लहंगा संभाल कर धीमे कदमों से आगे बढने लगी शौर्य की छुअन से उसे एक अलग सा एहसास हुआ । दोनों साथ में अंदर की ओर बढ़ गए ।
दोनों अंदर के दरवाजे की दहलीज पर खड़े हो गए । नैना जी अंदर से पूजा की थाली लेकर आई और सांझ और शौर्य की आरती उतारने लगी आरती के बाद उन्होनें दोनों को तिलक लगाया ।
" बेटा अब तुम दाएं पैर से से इस कलश को गिराओ , और फिर इस कुमकुम के थाल में पैर रख कर अपने कदम घर में रखो । " नैना जी ने सांझ को समझाते हुए प्यार से कहा ।
सांझ ने अपना सिर हां में हिला दिया और अपने दाएं पैर से कलश को गिरकर कुमकुम के थाल में पैर रखा थाल में रखा ही था , कि उसका बैलेंस बिगड़ गया वो गिरने ही वाली थी तभी शौर्य ने कसकर उसका हाथ पकड़ लिया सांझ धीरे धीरे उसका हाथ पकड़ कर आगे बढ़ गई । उसके बाद सांझ और शौर्य ने सबका आशीर्वाद लिया ।
नैना जी बोली , " बेटा तुम दोनों जा कर आराम से फ्रेश होकर तैयार हो जाओ , और हा सांझ बेटा तुम्हारी मुंह दिखाई आज ही है , और शाम को इस शादी की खुशी में एक शानदार पार्टी भी रखी गई है । ठीक है ! ! "
" मीरा बेटा तुम जा कर अपनी भाभी को उनका कमरा दिखा दो और शौर्य तुम हमारे साथ चलो । " गौरव जी बोले ।
मीरा सांझ को लेकर सीढ़ियों से ऊपर लेके जाती है फिर कुछ कदम चलने के बाद वो उसे एक बड़े से कमरे में लेके आती है । कमरे का फर्नीचर काफी महंगा था । दरवाज़ा खोलते ही सामने एक बड़ा सा बेड पड़ा हुआ था , उसके दाएं तरफ बड़ी सी बालकनी थी , जिसमें ग्लास का स्लाइडिंग डोर लगा हुआ था , और बालकनी में बैठने के लिए झूला और उसके साथ में टेबल भी था और काफी ज्यादा जगह होने की वजह से पेड़ पौधे भी लगे हुए थे । और बाएं तरफ बड़ा सा सोफ़ा और टेबल पड़ा हुआ था ।
सांझ पूरा कमरा देख रही थी , तभी उसकी नज़र बेड के सामने वाली दीवार पे पड़ी । जिस पे शौर्य की दो या तीन साल पुरानी बड़ी सी फोटो लगी हुई थी , जिसमे वो काफी हैंडसम लग रहा था , उसकी एक नजर ही काफी थी किसी लड़की का दिल जोरों से धड़काने के लिए , ऊपर से उसकी नशीली आंखें जिसमें बहुत गहराई थी जिसमे कोई भी डूब जाना चाहेगी । कमरे की दीवारों पे व्हाइट और पर्पल कलर कॉम्बिनेशन का पेंट हुआ था ।
सांझ को ध्यान ही नहीं रहा की मीरा भी कमरे में उसके साथ है , वो एक टक शौर्य की उस फोटो को देखे जा रही थी । तभी मीरा उसे छेड़ते हुए बोली , " अरे भाभी ! ! अब क्या करें हमारे भाई है ही इतने सुंदर की कोई भी लड़की देखे तो देखती ही रह जाती है . . . . . . . लेकिन आपको भाई की फोटो देखने की क्या जरूरत , अब भाई तो आपके ही है ! ! जितना मर्जी उतना देख लेना । "
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