Conversations With Myself - 4 Aarushi Singh Rajput द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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Conversations With Myself - 4

आज सावन का सोमवार है, तो थोड़ी बकवास हो जाए 😂

बहुत दिनों से मैंने अपनी My Creativity पर कुछ भी नहीं लिखा। सोचा आज सावन का सोमवार है, तो चलो कुछ लिख ही देते हैं। वैसे जो मैं लिखने वाली हूँ, उसमें ज़्यादातर बातें मज़ाक-मज़ाक वाली हैं, तो कोई भाई साहब या बहन जी दिल पर मत ले लेना। 😂

और वैसे भी, मैं एक writer हूँ, इसलिए लिखती रहती हूँ। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि मैं 24 घंटे गंभीर बैठी रहती हूँ, हाथ में किताब लेकर ज्ञान बाँटती रहती हूँ। भाई, मैं भी एक normal लड़की हूँ, और normal लड़की के दिमाग में normal से लेकर अनाप-शनाप विचार आना स्वाभाविक बात है। 😭😂

मैं कोई अच्छाई की मूरत नहीं हूँ कि हर समय लोगों की तारीफ करती फिरूँ। मैं भी इंसान हूँ भाई! कभी तारीफ, कभी बेइज्जती, कभी गुस्सा, कभी गाली-गलौज—सब चलता है। तो please मेरी बातें दिल से मत लगाइएगा।

चलो, अब छोटा-सा अपना introduction देते हैं।

काफी दिनों से, बल्कि कुछ महीनों से मैंने कुछ नया लिखा नहीं है। पहले से जो chapters लिखकर रखे हैं, वही अपने आप publish होते जा रहे हैं। लेकिन आज थोड़ा समय मिला, तो सोचा चलो भाई, writer वाली आत्मा को भी थोड़ा बाहर निकाला जाए। 😂

तो आज सावन का सोमवार है। और जहाँ हम अभी रहते हैं, वो गाँव वाला area है। मतलब हमारा अपना गाँव ही है। अब हमारी family में किसी की मृत्यु हुई थी, इसलिए हमारे घर में अभी कोई festival या पूजा-पाठ नहीं हो रहा।

लेकिन बाहर का माहौल देखो तो अलग ही level पर है!

सुबह-सुबह लोग उठकर पूजा-पाठ कर रहे हैं, मंदिर जा रहे हैं, सज-धज रहे हैं। और मैं इधर खिड़की से सबको देखकर सोच रही हूँ—

हे भगवान, इतना सब करने की ताकत कहाँ से आती है लोगों में? मेरी हालत देखकर तो मैं क्या ही कहूँ! 😭😂

सच बताऊँ तो इस समय मैं किसी भिखारी से कम नहीं लग रही हूँ। बाल पूरे ऐसे लग रहे हैं जैसे कितने दिनों से झाड़े ही नहीं हैं। और कपड़ों का तो पूछो ही मत! ऐसे लग रहा है कि मैं जैसे कुछ भी पहनकर बस कहीं बैठी हुई हूँ और वहीं बैठकर आराम से भकोस रही हूँ। 😭😂

अब भकोसने का मतलब गलत मत समझ लेना भाई, मेरा मतलब खाना खाना ही है। 😂

अब मैं क्या करूँ और क्या कहूँ अपनी life के बारे में? मेरी हालत और उन लड़कियों की हालत देखकर मुझे खुद पर ही हँसी आ जाती है। उधर लड़कियाँ सावन के सोमवार पर इतनी सज-धजकर निकली हैं जैसे किसी फिल्म की heroine हों, और इधर मेरी शक्ल ऐसी बनी हुई है जैसे मुझे किसी ने जबरदस्ती नींद से उठाकर बाहर भेज दिया हो। 😭😂

कभी-कभी तो सच में अपनी हालत देखकर खुद ही सोचती हूँ—हे भगवान! इन लड़कियों को देखो और एक बार मुझे भी देखो। आखिर मेरे साथ ही इतना अन्याय क्यों? 😂

और हाँ, मैंने यहाँ गाँव की लड़कियों के बारे में बोला है, तो इसका मतलब ये बिल्कुल मत समझ लेना कि मैं उनकी बेइज्जती कर रही हूँ या गाँव की लड़कियों के dressing sense को लेकर कुछ गलत कह रही हूँ। ऐसा कुछ भी नहीं है भाई। 😂

बस बात इतनी-सी है कि हमारा गाँव में रहना नहीं होता। हम गाँव में हमेशा नहीं रहते हैं, तो जब अचानक गाँव में आकर रहते हैं और यहाँ के लोगों को देखते हैं, उनका रहन-सहन, dressing और त्योहारों पर तैयार होने का तरीका देखते हैं, तो हमें थोड़ा अलग लगता है। क्योंकि भाई, अलग-अलग जगहों का माहौल और dressing sense भी थोड़ा बहुत अलग होता ही है ना।

हमारी आदत उस तरह के माहौल की नहीं है, इसलिए अचानक से गाँव में आकर सब कुछ देखती हूँ तो मुझे थोड़ा अजीब और अलग लगता है। बस उसी वजह से मज़ाक निकल जाता है। इसका मतलब किसी को नीचा दिखाना या बेइज्जती करना बिल्कुल नहीं है। 😂

मुझे तो बस अपनी हालत और उन लड़कियों की इतनी अच्छी तरह सज-धजकर तैयार हालत देखकर खुद पर हँसी आ जाती है। मतलब उधर सब लोग पूरे तैयार होकर पूजा-पाठ के लिए जा रहे हैं और इधर मैं ऐसे घूम रही हूँ जैसे मुझे खुद नहीं पता कि आज कौन-सा दिन है। 😂😭

और ये छोटी-छोटी लड़कियाँ! भाई साहब, इतना fashion करके आई हैं कि पूछो मत।

लेकिन आज तो लड़कियाँ ऐसे सज-धजकर निकली हैं कि लग रहा है भगवान से अच्छा-खासा पति माँगकर ही लौटेंगी। 😂

वैसे मज़ाक कर रही हूँ, किसी को seriously मत लेना। नहीं तो बाद में मुझे ही सफाई देनी पड़ेगी कि—"मैंने तो मज़ाक किया था भाई!" 😭😂

और मैं क्या माँगती हूँ भगवान से?

पैसे की मशीन।

बस।

हे भगवान! मुझे कोई प्यार-व्यार, सुंदर-वुंदर, ये-वो कुछ नहीं चाहिए। बस एक ऐसी machine दे दो जिसमें एक तरफ हाथ डालो और दूसरी तरफ से पैसे निकलें। लेकिन भगवान हैं कि मेरी बात सुनते ही नहीं। देख रहे हो? मेरी इतनी छोटी-सी इच्छा भी पूरी नहीं करते। कितना अन्याय है मेरे साथ! 😭😂

और ये आजकल के छोटे-छोटे, नन्हे-मुन्ने बच्चों की generation का तो मुझे कुछ समझ ही नहीं आता। पता नहीं generation कहाँ जा रही है, क्या कर रही है, क्या सोच रही है।

मुझे तो लगता है मैं ऐसे ही देखते-देखते बूढ़ी हो जाऊँगी और बोलूँगी—"हमारे ज़माने में ऐसा नहीं होता था!" 😂

ऊपर से दिनभर घर का काम करके अलग नौकरानी वाला feel आ रहा है। सुबह-सुबह उठो, काम करो, इधर जाओ, उधर जाओ।

और ये बिजली वाले तो मेरे personal दुश्मन बन चुके हैं। 😭

सोने का time होता है तो light काट देते हैं। सुबह थोड़ा आराम से सोने का time होता है तो Mummy उठा देती हैं। दोपहर में Dadi और Dada Ji—खाना खा लो, ये कर लो, वो कर लो।

मुझे तो कभी-कभी लगता है कि मैं इस घर की दूसरी नंबर की बेटी कम और permanent कर्मचारी ज़्यादा हूँ। 😂

वैसे मैं लोगों के बारे में बहुत अच्छा-अच्छा नहीं सोचती। मेरे अंदर ऐसी महान सोचने वाली खूबी शायद भगवान ने डालना भूल गए थे। 😭

मैं घर की दूसरी नंबर की बेटी हूँ। हम तीन भाई-बहन हैं—एक बड़ी बहन, मैं बीच वाली और सबसे छोटा मेरा भाई।

अब भाई छोटा है, तो उसका तो कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन मैं और मेरी बहन... हमारी कहानी अलग ही है। 😂

मैं लड़ाई-झगड़े बहुत करती हूँ, ये बात मैं मानती हूँ। लेकिन काम भी बहुत करती हूँ। अब अपनी तारीफ नहीं कर रही, बस सच्चाई बता रही हूँ। 😌😂

लोग कहते हैं कि बड़ी बेटी घर की ज़िम्मेदारियाँ संभालती है, Mummy जैसी होती है।

लेकिन मेरी बड़ी बहन?

राक्षस के समान है। 😭😂

इतनी ज़्यादा drama queen है कि पूछो मत! थोड़ा-सा काम कर देगी, और उसके बाद ऐसा लगेगा कि पूरे गाँव का निर्माण करके आई है। एक काम जल्दी से करने को बोल दो तो उसकी तबीयत खराब होने लगती है।

और उसके चक्कर में घर के ज़्यादातर काम मुझे ही करने पड़ते हैं।

छोड़ो, उसके बारे में क्या ही बोलूँ। वरना बाद में मेरी ही कुटाई हो जाएगी। 😂

आजकल तो वैसे भी हर जगह अलग ही level का protest-protest चल रहा है। हर तरफ कोई न कोई scene बना हुआ है। दुनिया अपनी जगह परेशान है और मैं अपनी जगह अपनी बकवास में व्यस्त हूँ। 😭

अब मेरी बातें सुनकर लोग सोच रहे होंगे—

"हे भगवान, ये कैसी पगली लड़की है?"

तो भाई, अब क्या कर सकते हैं?

मैं ऐसी ही हूँ। 😂

मेरे अंदर कोई बहुत महान खूबी नहीं है। हाँ, एक खूबी जरूर है—बकवास करने के लिए कहो, तो unlimited कर सकती हूँ। 😭😂

अब लोग सोचते होंगे कि writer हूँ तो बहुत शांत, संस्कारी, गंभीर और अच्छे स्वभाव वाली होऊँगी। लेकिन भाई, ऐसा कुछ नहीं है।

Writer होने का मतलब ये नहीं कि इंसान हर समय खिड़की के पास बैठकर चाँद को देखकर शायरी ही लिखे। कभी-कभी writer भी बैठकर लोगों की बेइज्जती करने का विचार रखता है। 😂

मुझे बकवास करना बहुत पसंद है। वैसे मैं हर किसी से ज़्यादा बातें नहीं करती, लेकिन अपने आप से या अपने लोगों के साथ थोड़ा-बहुत बकवास कर लेना चाहिए।

वरना stress आकर बोलेगा—"चलो बेटा, अब मैं तुम्हारे साथ ही रहता हूँ।" 😭😂

वैसे मेरी जिंदगी कोई बहुत normal नहीं है। Family में बहुत सारी problems चल रही हैं, लेकिन फिर भी जहाँ तक हो सके खुश रहना चाहिए।

क्योंकि भाई, दुख तो बिना invitation के भी आ जाता है। तो खुशी को कम से कम बुलाकर रखना पड़ता है।

और खुश रहोगे तो कुछ लोग अपने आप जलेंगे। 😂

तो बस, खुश रहो और उन लोगों को जलते रहने दो। 🔥😂

फिलहाल के लिए इतना ही।

बाद में फिर कभी कुछ याद आया, कोई नई बकवास दिमाग में आई, तो लेकर हाज़िर हो जाऊँगी।

तब तक के लिए—

Bye bye, guys! 😂❤️