हुक्म और हसरत - 24 Diksha mis kahani द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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हुक्म और हसरत - 24



💗💗💗 हुक्म और हसरत 💗💗💗

#Arsia

"अब आगे…”


"मैंने वो निशान... तुम्हारे बहुत करीब वाले इंसान के हाथ पर देखा था।" 😨

सिया की बात सुनकर अर्जुन कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत रह गया।

कमरे में मौजूद हर शख्स की नज़र अब सिया और अर्जुन पर थी।

अर्जुन धीरे से उसके पास बैठा।

उसने सिया का हाथ थामते हुए पूछा—

"किसके हाथ पर देखा था आपने, राजकुमारी?"

सिया ने उसकी तरफ़ देखा।

उसकी आँखों में डर साफ़ था।

वो कुछ कहने की कोशिश करने लगी—

"वो... मैं..."

लेकिन अचानक उसकी भौंहें सिकुड़ गईं।

सिर में जैसे तेज़ दर्द की लहर दौड़ गई।

"आह..." 🥺

अर्जुन तुरंत चिंतित हो उठा।

"बस... बस, आपको कुछ याद करने की ज़रूरत नहीं है।"

उसने धीरे से उसका हाथ दबाया।

"आराम से साँस लीजिए।"

सिया ने आँखें बंद कर लीं।

कुछ पल बाद उसकी साँसें सामान्य हुईं।

डॉक्टर ने कहा—

"उसे अभी ज़्यादा सोचने के लिए मजबूर मत कीजिए। उसकी हालत अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है।"

अर्जुन ने सिर हिलाया।

लेकिन सिया ने अचानक उसकी कलाई पकड़ ली।

"नहीं..."

अर्जुन उसकी तरफ़ झुका।

"क्या हुआ?"

सिया ने धीमे स्वर में कहा—

"मुझे याद है... उसका हाथ।"

अर्जुन ने उसकी आँखों में देखा।

"क्या देखा था आपने?"

सिया कुछ पल सोचती रही।

"उसकी कलाई पर... एक निशान था।"

"कैसा निशान?"

सिया ने आँखें बंद कर लीं।

"कुछ गोल-सा... जैसे कोई पुराना निशान या चिन्ह हो।"

फिर अचानक उसने कहा—

"और उसकी कलाई पर काली घड़ी भी थी।"

अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।

विवेक ने तुरंत यह बात नोट कर ली।

सिया ने आगे कहा—

"उसके कपड़ों से... एक अजीब-सी खुशबू आ रही थी।"

"परफ्यूम?"

सिया ने सिर हिलाया।

"हाँ..."

अर्जुन ने धीमे स्वर में पूछा—

"आवाज़ याद है?"

सिया कुछ पल चुप रही।

फिर उसकी आँखें अचानक फैल गईं।

"उसने..."

वो रुक गई।

"क्या कहा था?"

सिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

"शायद... 'राजकुमारी'।" 😨

अर्जुन का चेहरा एक पल के लिए कठोर हो गया।

क्योंकि महल में सिया को राजकुमारी कहने वाले लोग बहुत कम थे।

और उनमें से कुछ...

उसके बेहद करीब थे।

---

सिया ने धीरे से आँखें खोलीं।

उसकी नज़र अर्जुन के चेहरे पर टिक गई।

कुछ पल दोनों चुप रहे।

फिर सिया ने धीमी आवाज़ में कहा—

"आप बहुत गुस्से में हैं?"

अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।

"नहीं।"

सिया ने हल्की-सी मुस्कान दी।

"झूठ..."

अर्जुन की भौंह हल्की-सी उठी।

"आपको कैसे पता?"

सिया ने उसकी उँगलियों को हल्के से दबाया।

"आपकी आँखें बता देती हैं।" 🥺

अर्जुन कुछ पल उसे देखता रहा।

फिर बहुत धीमे स्वर में बोला—

"मैं गुस्से में हूँ... लेकिन आपसे नहीं।"

सिया की मुस्कान थोड़ी गहरी हुई।

"मुझे पता है।"

अर्जुन ने उसके हाथ को थोड़ा और संभालकर थाम लिया।

"आप बस आराम कीजिए। बाकी सब मैं संभाल लूँगा।"

सिया ने उसकी तरफ़ देखते हुए धीरे से कहा—

"लेकिन तुम... खुद का भी ख्याल रखना।"

अर्जुन के चेहरे पर पहली बार हल्की-सी नरमी आई।

"आप मेरी चिंता मत कीजिए, राजकुमारी।"

सिया ने आँखें बंद करते हुए फुसफुसाया—

"फिर भी करूँगी..." ❤️

---



कुछ देर बाद सिया सो गई।

अर्जुन धीरे से कमरे से बाहर आया।

गलियारे में विवेक पहले से उसका इंतज़ार कर रहा था।

अर्जुन ने धीमे स्वर में पूछा—

"उस निशान के बारे में कुछ पता चला?"

विवेक ने सिर हिलाया।

"अभी नहीं। लेकिन वीर ने कुछ खोजा है।"

दोनों कंट्रोल रूम की तरफ़ बढ़े।

वीर कई स्क्रीन के सामने बैठा था।

उसने अर्जुन को देखते ही एक फुटेज रोक दी।

"बॉस, ये देखिए।"

स्क्रीन पर वही धुँधली परछाईं थी।

उसके हाथ का हिस्सा थोड़ा साफ़ दिखाई दे रहा था।

कलाई पर एक छोटा-सा चिन्ह था।

अर्जुन तुरंत स्क्रीन के करीब गया।

"इसे और ज़ूम करो।"

वीर ने फुटेज एन्हांस की।

अब निशान थोड़ा स्पष्ट था।

गोल आकार...

उसके बीच एक छोटी-सी धार जैसी आकृति।

अर्जुन ने कुछ पल उसे देखा।

उसे लगा जैसे उसने यह चिन्ह पहले कहीं देखा है।

"मैंने इसे पहले देखा है..."

विवेक ने पूछा—

"कहाँ?"

अर्जुन ने जवाब नहीं दिया।

वीर ने कहा—

"बॉस, ये कोई रैंडम टैटू नहीं लगता। मैंने इसे पुराने सिक्योरिटी रिकॉर्ड्स में सर्च किया।"

स्क्रीन पर कुछ पुराने डॉक्यूमेंट्स खुलने लगे।

"ये एक पुराना सिक्योरिटी इंसिग्निया है।"

अर्जुन की आँखें स्क्रीन पर टिक गईं।

"किसका?"

वीर ने कुछ सेकंड सर्च किया।

फिर बोला—

"राठौड़ परिवार के पुराने प्राइवेट सिक्योरिटी नेटवर्क का।" 😳

कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।

विवेक ने अर्जुन की तरफ़ देखा।

"मतलब ये आदमी हमारे परिवार से जुड़ा हुआ था?"

अर्जुन ने धीमे स्वर में कहा—

"या अभी भी जुड़ा हुआ है।"

---

वीर ने एक पुरानी फाइल खोली।

उसमें पुराने सिक्योरिटी पर्सोनल की तस्वीरें थीं।

अर्जुन और विवेक एक-एक तस्वीर देखने लगे।

अचानक अर्जुन की उँगली एक फोटो पर रुक गई।

एक आदमी...

उसकी कलाई पर वही निशान था।

अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।

"इसका नाम?"

वीर ने रिकॉर्ड पढ़ा।

"राघव सिंह। पुराने सिक्योरिटी चीफ के अंडर काम करता था।"

विवेक ने पूछा—

"अब कहाँ है?"

वीर कुछ देर चुप रहा।

फिर बोला—

"रिकॉर्ड्स के मुताबिक... मर चुका है।"

अर्जुन ने फोटो को ध्यान से देखा।

उसकी आँखों में शक गहराता गया।

"डेथ कब हुई?"

वीर ने स्क्रीन पर डेट खोली।

"बारह साल पहले।"

अर्जुन कुछ पल तक उस फोटो को देखता रहा।

फिर उसने कहा—

"उसकी डेथ की पूरी फाइल निकालो।"

वीर ने सिर हिलाया।

---


रात और गहरी हो चुकी थी।

महल के दूसरे हिस्से में यश अब भी आकाश पर नज़र रखे हुए था।

उधर अर्जुन, विवेक और वीर पुराने रिकॉर्ड्स खंगाल रहे थे।

कुछ देर बाद वीर अचानक बोला—

"बॉस..."

अर्जुन उसकी तरफ़ मुड़ा।

"क्या मिला?"

वीर ने एक डॉक्यूमेंट खोला।

"राघव सिंह की डेथ रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ है।"

अर्जुन तुरंत उसके पास गया।

"क्या?"

वीर ने डॉक्यूमेंट पर कुछ लाइन्स दिखाईं।

"बॉडी की पहचान पूरी तरह कन्फर्म नहीं हुई थी। सिर्फ़ बिलॉन्गिंग्स के आधार पर डेथ डिक्लेयर की गई थी।"

विवेक की आँखें फैल गईं।

"मतलब बॉडी उसकी थी ही नहीं?"

वीर ने सिर हिलाया।

"हम पक्का नहीं कह सकते।"

अर्जुन ने धीरे से उस पुरानी तस्वीर को फिर देखा।

उसकी आँखों के सामने सिया का चेहरा घूम गया।

उसका डर...

उसकी काँपती आवाज़...

"वो हमारे बहुत करीब है..."

अर्जुन ने तस्वीर को मुट्ठी में दबा लिया।

"अगर राघव ज़िंदा है..."

विवेक ने उसकी बात पूरी की—

"तो वो पिछले बारह साल से कहाँ था?"

अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया।

उसने सिर्फ़ एक आदेश दिया—

"उसकी पूरी लाइफ के रिकॉर्ड्स निकालो। जहाँ रहा, किससे मिला, किसके संपर्क में रहा... सब।"

वीर ने सिर हिलाया।

लेकिन तभी...

सिया के कमरे से अचानक काव्या की आवाज़ आई—

"अर्जुन!" 😨

अर्जुन तुरंत पलटा।

वो दौड़कर कमरे की तरफ़ गया।

सिया की आँखें खुली थीं।

उसके चेहरे पर डर था।

अर्जुन उसके पास पहुँचा।

"क्या हुआ?"

सिया ने काँपते हुए उसका हाथ पकड़ लिया।

"मुझे... कुछ और याद आया है।"

अर्जुन झुककर उसके पास आया।

"क्या?"

सिया की आँखों में आँसू आ गए।

उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—

"उस आदमी ने... जाते समय किसी से फोन पर बात की थी।"

अर्जुन ने ध्यान से सुना।

"क्या कहा था?"

सिया ने आँखें बंद कीं।

फिर जैसे किसी पुराने शब्द को पकड़ने की कोशिश करते हुए बोली—

"उसने कहा था..."

कुछ पल की खामोशी।

फिर—

"काम पूरा हो गया... हुज़ूर।" 😨

अर्जुन का चेहरा अचानक बदल गया।

"हुज़ूर?"

सिया ने सिर हिलाया।

"हाँ..."

अर्जुन ने विवेक की तरफ़ देखा।

विवेक भी समझ चुका था।

राघव अकेला नहीं था।

उसके ऊपर कोई और था।

कोई ऐसा...

जिसे वो हुज़ूर कहता था।

और तभी वीर की आवाज़ पीछे से आई—

"बॉस..."

अर्जुन ने पलटकर देखा।

वीर के हाथ में एक पुरानी फाइल थी।

उसके चेहरे पर ऐसा भाव था जैसे उसने कुछ ऐसा देख लिया हो...

जिसे देखना नहीं चाहिए था।

"हमें राघव के लास्ट नोन कॉन्टैक्ट का नाम मिल गया है।"

अर्जुन की आँखें सिकुड़ गईं।

"कौन?"

वीर ने धीरे-धीरे फाइल अर्जुन की तरफ़ बढ़ाई।

अर्जुन ने उसे खोला...

और पहले पन्ने पर लिखा नाम देखकर उसकी साँसें थम गईं।

"ये... नहीं हो सकता।" 😨

जारी रहेगा... 💗🔥

© Diksha 

प्रिय पाठकों,

यह भाग लिखने में मुझे बहुत समय, मेहनत और प्यार लगा है। यदि आपको यह अध्याय पसंद आया हो, तो कृपया इसे रेटिंग दें और अपने रिव्यू ज़रूर साझा करें।

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✨ मेरी रचनाएँ ✨

 1. अनुबंध (Anubandh) — ✅ Completed

 2. वो जो चुपके से देखा करता था — ✅ Completed

3. अनचाही मोहब्बत (Anchahi Mohabbat) — ✅ Completed

4. हुक्म और हसरत (Hukm Aur Hasarat) — ✍️ 
Running... 🌸